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    1. *‼आहारचर्या*‼

                  *इंदौर*
        _दिनाँक :१६/०२/२०२०_
      *आगम की पर्याय,महाश्रमण युगशिरोमणि १०८ आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज* के आहारचर्या कराने का सौभाग्य *प्रथम निर्यापाक श्रवण परम पूज्य जेष्ठ श्रेष्ठ मुनि श्री 108 समय सागर जी महामुनिराज के संघ में सुशोभित मुनि श्री 108 निराकार सागर जी महाराज के गृहस्थ जीवन के परिवार जन*
      _*● श्रीमान पवन कुमार जी,श्रीमती हेमलता जी जैन श्री रूपेश कुमार जी,नीलेश जी जैन हाटपिपलिया वाले सुखदेव नगर इंदौर ●*_
       वालो को एवं उनके परिवार को प्राप्त हुआ है।

      इनके पूण्य की अनुमोदना करते है।
                  💐🌸💐🌸
      *भक्त के घर भगवान आ गये*
                🌹🌹🌹🌹
      *_सूचना प्रदाता-:श्री अक्षय जी जैन_*
             🌷🌷🌷
      *अंकुश जैन बहेरिया *
      *प्रशांत जैन सानोधा 

    2. ■ हिंदी विषय पर आचार्य श्री के सानिध्य में हुई अहम बैठक, देश भर के विद्वान शामिल हुए, आचार्य भग्वन के हुए विशेष प्रवचन

      ■ हिंदी विषय पर आज विशेष बैठक आचार्य श्री के सानिध्य में हुई।
       

       आचार्य श्री का हिंदी अभियान बीते अनेक साल से चल रहा है। अब इस अभियान को धरातल पर लाने के लिए जैन कालोनी में अहम बैठक हुई। 
      यह जानकारी देते हुए बाल ब्रह्मचारी सुनिल भैया और मिडिया प्रभारी राहुल सेठी ने बताया की हिंदी को प्रचारित करने के लिए देश भर से आए जैन समाजजन की बैठक आज जैन कालोनी में आचार्य श्री १०८ विद्या सागर जी महाराज के सानिध्य में हुई। इस बैठक को ब्रह्मचारी सुनिल भैया जी द्वारा संजोया गया था। 
      प्रफुल्ल भाई पारिख पूना, अशोक पाटनी, राजेंद्र गोधा जयपुर, एस के जैन दिल्ली, निर्मल कासलीवाल, कैलाश वेद उपस्थित थे। संचालन निर्मल कासलीवाल ने किया और आभार कैलाश वेद ने माना।

       

       

       

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      आचार्य श्री ने बैठक में कहा की रामटेक में हमारा चातुर्मास चल रहा था, या गर्मी का काल चल रहा था, इंदौर से एक समूह आया था, उस समूह में इंजीनियर के सिवा कोई नहीं था, उनकी बड़ी भावना था, हम तो सामाजिक कार्य में तो भाग लेते ही है, हमारे पास जो समूह बना है उसको धार्मिक क्षेत्र में भी उपयोग किया जाए और जैन धर्म के पास इतनी क्षमता विद्यमान है, हम आशा नहीं विश्वास के साथ हम आए है आप इसके लिए अवश्य ही प्रेरणा एवं उत्साह प्रदान करे। विज्ञान की बात कर रहे है एक साधू से और ठीक विपरीत जैसा लगता है लेकिन सोचने की बात ये है इन दोनों का एक ही आत्मा है, स्पष्ट है किन्तु हम इसको जन जन तक क्यों नहीं ले जा पा रहे, इस कमियों को भी अपनी और देखना चाहिए। वो कमी हमने महसूस किया है, वो आपके सामने रखता हूं कि हमे बता दो विज्ञानं के द्वारा आखिर क्या होता है, विज्ञान कुछ उत्पन्न करता है या जो उत्पादित है उसको वितरित करता है या कुछ है उसको अभ्यक्त करता है।_ उनमें हमे सोचना है कि हमारे पास क्या क्षमता है और किस प्रकार की क्षमता है, इस और देखना चाहिए।WhatsApp Image 2020-02-09 at 5.53.44 PM (1).jpeg

      जैसे समझने के लिए फूल की एक कली है , इस कली को मैं अपने विज्ञानं के माध्यम से खोल दू, खिला दू महक को चारों और बिखरा दू , क्या यह संभव है? समय से पूर्व ये काम करना असंभव है। विज्ञान इस क्षेत्र के लिए काम कर रहा है तो वो गलत माना जाएगा, हां उसका एक कार्य क्षेत्र अवश्य  हो सकता है कि वो क्या है, उसके बारे में अपने को सोचना है कि हर एक व्यक्ति का अपना दृष्टिकोण रहता है और उसको फैलाने का वह अवश्य ही पुरुषार्थ भी करता है और एक समूह भी एकत्रित कर लेता है। तो हमे आज उपयोगी क्या है, आवश्यक क्या है ये सोचना है। दर्शन विचारों में बहुत जल्दी प्रमोद वगैरह  को खो देता है, खोना भी चाहिए लेकिन हम  युग की बात करते है , युग तक आपके पास जो धरोहर के रूप में आपके पास विद्यमान है, उसको आप कहाँ तक पहुँचा सकते है, इसकी उपयोगिता, उसके लिए कितनी है और उस उपयोग के माध्यम से कितने व्यक्ति उसकी गहराइयों तक पहुच सकते है, ये हम अपने दर्शन के माध्यम से ले जाना चाहे तो बहुत जल्दी ले जा सकते है। विज्ञान कहते है अतीत हमारा सब बंद हो जाता है केवल वर्त्तमान और भविष्य उसके साथ जुड़ जाता है। ये हमारा एक भ्रम है, किन्तु अतीत के साथ जुड़ कर के ये विज्ञान काम क्यों नहीं कर रहा, लगभग कर रहा है, फिर बीबी उसको यथावत रखने का साहस वो क्यू नहीं कर रहा है। आज इतिहास को छपाने से क्या हानि होती है आपके सामन है, देश को सुरक्षा प्रदान करने के लिए चुनाव होते है, आपका ही देश है ये।। एक देश चीन है, और उसने वास्तु चीज़े छुपाने का प्रयास कर दिया और उसको वह जो नियंत्रण में रखने का प्रयास कर रहा था, ताकि लोगो को दहशत न हो। आवश्यक था कि शासन का क्या कर्त्तव्य है, बड़ा पेचीदा है ये, इस शासन, प्रसाशन आदि आदि हमेशा हमेशा जागरूक रहना चाहिए, उनको अनुमति लेनी पड़ी, कोर्ट से अनुमति लेनी पढ़ी, क्या अनुमति ली आप सोचेंगे तो दंग रह जाएंगे, लेकिन स्थिति ऐसी गंभीर हो गई, यदि इसके बारे में हम कदम नहीं उठाते है  तो ये लाख की संख्या करोड़ के ओर जाने में देर नहीं लगेगी, ऐसी स्थिति में हम केवल हाथ में माला ले करके बैठ जाए तो कुछ नहीं हो सकता है। इसीलिए उनको चाहिए की युग को संचालित करने के लिए आपको इतिहास का आधार लेना चाहिए। जहा भारत के पास विज्ञान था, ऐसा मैं पूछुंगा तो असंभव है, लेकिन इतिहास को तो देखना संभव नहीं कर सकेंगे, इतिहास हमारे सामने है, प्रशासकीय परीक्षाओं के कुछ इतिहास निर्धारित किया है उसी को इतिहास में करके हम चल रहे, इतिहास सबका होता रहता है, विश्व में बहुत सारे देश है , भारत को आखिर अपना इतिहास कुछ खोजना तो पढ़ेगा।

       

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      क्या भारत के पास कोई इतिहास ही नहीं था, केवल 18 वीं शताब्दी को अपने हाथ में लेते है, आप दंग रह जाएंगे, इसीलिए मैं कहता हूं ,विज्ञानं को चाहिए भारतीय इतिहास क्या था, काम से कम भारत वाले तो इसको जानने का प्रयास करे, जिसने इस तथ्य को अपना लिया, पकड़ लिया, ऐसे iit के छात्रों के 15-16 साल अथक परिश्रम करके टेक्सटाइल विश्वविद्यालय में उन्होंने अपने अनुभव लिए दिए है। उन्होंने कुछ ऐसे वैज्ञानिक तथ्य भी सामने ला करके रखे है, इनको अमेरिका स्वीकार करता है। ऐसी दिशा में उन्होंने अपने इस अनुभव को विश्व के सामने लाने का प्रयास किया, वह भारतीय है। अब आपको सोचना चाहिए की iit कहते ही, आप ये नहीं कह सकते की ये कोण धर्मोनिष्ठ व्यक्ति आ गया, आपको तो मानना ही पढ़ेगा की iit का विद्यार्थी तो ज़माने में माना जाता है, वह कह रहा है, अंग्रेजी माध्यम का भ्रमजाल। इतना ही मैंने 2-3 महीने के पीछे इसको पहुचाने का मात्र कार्य किया है।

       

      🔅 चीन देश ने अंग्रेज़ी को क्यू नहीं स्वीकारा- आचार्य श्री जी
      आचार्य श्री ने आगे कहा की अब ये बता दो चीन ने अंग्रेजी को क्यों नहीं स्वीकारा उन्नति के लिए? आर्थिक, ज्ञान, अनेक प्रकार की उन्नतियां है जो अपने राष्ट्र के लिए अपेक्षित है, चीन ने क्यों नहीं अपनाया, चीन की कोनसी भाषा है। उन्होंने चीन की भाषा में ही सब प्रबंध किया है। रूस के पास क्या कमी है ये बताओ, अमेरिका के साथ वो हिम्मत रखता था, आज वो कमजोर हो गया है। इसके उपरांत जर्मन और जापान कई बार मिट जाते है ये देश, और कई बार खड़े हो जाते है ये देश उन्हें किसी की आवश्यकता नहीं है, उनकी भाषा कोनसी है आप पूछो तो। आप पूछते भी नहीं और चिंता करते भी नहीं

       

       

       

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    3. पूज्यगुरूदेव आचार्य श्री १०८ विद्यासागर जी
                             एवं

      संघस्थ मुनिश्री
       

       मुनिश्री दुर्लभसागर जी 

       मुनिश्री निश्चलसागर जी 

      मुनिश्री निर्लोभ सागर जी

      मुनिश्री निर्मोह सागर जी

      मुनिश्री निर्दोष सागर जी

       मुनिश्री श्रमणसागर जी

       मुनिश्री संधानसागर जी

       

       

      के   नेमिनगर इंदौर  में हुए  केश लोच |

  • आचार्य विद्यासागर जी द्वारा रचित हायकू

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  • संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज

    ये ऐसे संत है जिनका जीवन एक सम्पूर्ण दर्शन है जिनके आचरण में जीवों के लिए करुणा पलती है जिनके विचारों में प्राणी मात्र का कल्याण आकर लेता है,जिनकी देशना में जगत अपने सदविकास का मार्ग प्रशस्त करता है |आप निरीह, निस्पृह वीतरागी है फिर भी आपके विचार भारतीयता के प्रति अगाध निष्ठा, राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यपरायणता से ओतप्रोत है आपका चिंतन प्राचीन भारतीय हितचिंतको दार्शनिको एवं संतो का अनुकरण करते हुए भी मौलिक है |आचार्य महाराज तो ज्ञानवारिधी है और उनके विचारों को संकलित करना छोटी सी अंजुली में सागर को भरने का असंभव प्रयास करना है|

    रास्ता उनका, सहारा उनका, मैं चल रहा हूँ दीपक उनका, रौशनी उनकी मैं जल रहा हूँ प्राण उनके हर श्वास उनकी मैं जी रहा हूँ

     

    From Wikipedia Acharya Shri Vidyasagarji Maharaj (born 10 October 1946) is one of the best known modern Digambara Jain Acharya(philosopher monk). He is known both for his scholarship and tapasya (austerity). He is known for his long hours in meditation. While he was born in Karnataka and took diksha in Rajasthan, he generally spends much of his time in the Bundelkhand region where he is credited with having caused a revival in educational and religious activities. Know more about him

     

     

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