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    1. *‼आहारचर्या‼*
           *शाहपुरा जबलपुर* 
        _दिनाँक :१९/०३/२०१९_
      *आगम की पर्याय महाश्रमण युगशिरोमणि १०८ आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज* को आहार दान का सौभाग्य *श्रीमान कमलेश जी,प्रशांत जी,प्रभात जी (सोनू) बीटा वाले  शाहपुरा जैन पंचायत सभा के कोषाध्यक्ष एवं उनके परिवार वालो* को प्राप्त हुआ है।_
      इनके पूण्य की अनुमोदना करते है।
                  💐🌸💐🌸
      *भक्त के घर भगवान आ गये*
                🌹🌹🌹🌹
      *_सूचना प्रदाता-:श्री विपुल जी महराजपुर,कल्लू जी देवरी,मुकुल (सेतु )जैन जबलपुर_*
             🌷🌷🌷
      *अंकुश जैन बहेरिया 
      *प्रशांत जैन सानोधा 

    2. 🆎 
      मुहली में कल वेदी प्रतिष्ठा का आयोजन

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      _*पूज्य आचार्य भगवन श्री विद्यासागर जी महाराज ससंघ* के पावन सानिध्य में कल 15 मार्च को प्रातःकालीन बेला में, *मुहली (मुँहाली)* में श्रीजी की वेदी प्रतिष्ठा का मंगल आयोजन किया जा रहा है। इससे समाज मे अत्यंत हर्ष व्याप्त है। *प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्र.श्री सुनील भैया जी* के कुशल निर्देशन में यह मांगलिक कार्यक्रम सम्पन्न होगा।_
      *कल की आहार चर्या- मोहाली में ही होगी।*

      *अनिल जैन बड़कुल, ए बी जैन न्यूज़ समूह*

    3. 11 मार्च 2019.jpeg

       

      आचार्यश्री के ससंघ 51 मुनिराज, 2 ऐलक श्री, 63 आर्यिकाओं के सानिध्य में 100 प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा, अब बीना बारहा का नया नाम होगा शांतिधाम

      अतिशय क्षेत्र बीना बारहा में 30 साल बाद दूसरी बार हुए पंचकल्याणक महाेत्सव के अंतिम दिन रविवार काे आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में गजरथ महोत्सव में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। गजरथ की सात फेरियों के साथ महोत्सव का समापन हाे गया और प्रभु का मोक्ष की ओर गमन हुआ। इस पूरे आयोजन में 100 प्रतिमाओं को प्रतिष्ठित किया गया, जिन्हें जबलपुर, हर्रई, केवलारी, महराजपुर, केसली, बंगलोर, देवरी के विभिन्न जैन मंदिरों में स्थापित किया जाएगा। पंचकल्याणक में आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के ससंघ 51 मुनिराज, दाे एेलक जी, 63 आर्यिकाओं का सानिध्य मिला। अंतिम दिन कैबिनेट मंत्री हर्ष यादव गजरथ फेरी में शामिल हुए। आचार्यश्री ने बीनाबारहा का नया नाम शांतिधाम रखा। कमेटी के अध्यक्ष अलकेश जैन कोयला वालाें ने बताया कि सात दिवसीय इस कार्यक्रम में पाषाण से भगवान बनने की प्रक्रिया हुई। जो गर्भ कल्याणक से शुरू होकर और मोक्ष कल्याणक के रूप तक हुई। सुबह 8.10 बजे कैलाश पर्वत से भगवान का मोक्ष गमन हुआ। मोक्ष कल्याणक के बाद भगवान की शांतिधारा करने का सौभाग्य सभी इंद्र इंद्राणियाें को मिला। 

      पाषाण से परमात्मा बनाने की पद्धति का नाम पंचकल्याण है: आचार्यश्री 
      आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने कहा कि भगवान को आज आजादी की प्राप्ति हुई और उन्हें मोक्ष हुआ। स्वतंत्रता का अर्थ है स्व,तंत्र स्व की जहां मुख्यता हैं। अभी हम परतंत्र हैं, हम सभी भावना भाएं की हमें भी निर्वाण की प्राप्ति हो। पाषाण से परमात्मा बनाने की पद्धति का नाम पंचकल्याण है।

    4. कुछ "बड़ा " होने की सुगबुगाहट या फिर अटकलें....... 
      विगत दिनों हमारे यहां पुलवामा में  हुई अमानवीय आतंकी घटना की प्रतिक्रिया की आशंकाओं को देखते हुए विश्व की नज़र भारत की ओर लगी है शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका के मुखिया ट्रम्प भी कह चुके कि कुछ बड़ा होने जा रहा है।


      इन दिनों  सुख चैन सरिता तट पर अवस्थित अतिशयक्षेत्र बीना बारह में श्रमणोत्तम आचार्यश्री ससंघ विराजित है कुछ दिनों से इसी दिशा में पूज्यवर मुनिराजों सहित वन्दनीया आर्यिका संघो के सतत अनवरत सरितावत प्रवाहमान विहार आगामी दिनों में इस अतिशय क्षेत्र में महाकुम्भ का संकेत दे रहे है।
      देश विदेशों के जैन समाज के बुजुर्गों से लेकर किशोरों तक और पढ़ी लिखी उच्चशिक्षित बिटिया लोगो से लेकर अनपढ़ या कम पढ़ी लिखी लेकिन अनुभवी माँ लोगो मे सुबह सन्ध्या एक ही चर्चा है कि आगामी इस महाकुम्भ में कुछ बड़ा होने जा रहा है।
      एक ओर बहुसंख्यक वर्ग का मानना है कि बरसों से प्रतीक्षित दीक्षा के प्रत्याशियों को शुभ सूचना मिल सकती है और इस  गुरुकुल और विशाल आकार ले सकता है।


      वही दूसरी ओर कुछ लोग दबी जुबान से कहते पाए जा रहे है कि इन दिनों  आचार्य प्रवर क्षमा, संयम, तपस्या के अस्त्र शस्त्र के संग बचे हुए कर्म सैन्यबल को नेस्तनाबूद करने की ठान चुके है सो सम्भव है कि कुछ उपसंघो को निर्यापक जिम्मेदारी मिल जाये।
      अब ये तो बाते है और बाते तो बातों ही बातों में बनती रहती है  इन बातों का क्या ठिकाना 
       इन ज्ञानविद्या के विशाल प्रशांत महासिंधु की थाह कोई जान पाया है
      सुनते है कि इन दिनों अमरकंटक की मुडेरों में कौओं की टोलियों की  कांव कांव बढ़ने लगी है सो छतीसगढ़ भी इसी आशा में हर्षित है कि हमारे यहां भी अच्छे दिन...... आ सकते है।

      ◆ राजेश जैन भिलाई ◆
      🌈🌈🌈🏳‍🌈🏳‍🌈🌈🌈🌈

  • गागर में सागर - हायकू (300).jpg

    संयम स्वर्ण महोत्सव
    संयम स्वर्ण महोत्सव
    आचार्य श्री द्वारा रचित हाइकू (हायकू)

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    संयम स्वर्ण महोत्सव
    संयम स्वर्ण महोत्सव
    आचार्य श्री द्वारा रचित हाइकू (हायकू)

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    संयम स्वर्ण महोत्सव
    संयम स्वर्ण महोत्सव
    आचार्य श्री द्वारा रचित हाइकू (हायकू)
  • संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज

    ये ऐसे संत है जिनका जीवन एक सम्पूर्ण दर्शन है जिनके आचरण में जीवों के लिए करुणा पलती है जिनके विचारों में प्राणी मात्र का कल्याण आकर लेता है,जिनकी देशना में जगत अपने सदविकास का मार्ग प्रशस्त करता है |आप निरीह, निस्पृह वीतरागी है फिर भी आपके विचार भारतीयता के प्रति अगाध निष्ठा, राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यपरायणता से ओतप्रोत है आपका चिंतन प्राचीन भारतीय हितचिंतको दार्शनिको एवं संतो का अनुकरण करते हुए भी मौलिक है |आचार्य महाराज तो ज्ञानवारिधी है और उनके विचारों को संकलित करना छोटी सी अंजुली में सागर को भरने का असंभव प्रयास करना है|

    रास्ता उनका, सहारा उनका, मैं चल रहा हूँ दीपक उनका, रौशनी उनकी मैं जल रहा हूँ प्राण उनके हर श्वास उनकी मैं जी रहा हूँ

     

    From Wikipedia Acharya Shri Vidyasagarji Maharaj (born 10 October 1946) is one of the best known modern Digambara Jain Acharya(philosopher monk). He is known both for his scholarship and tapasya (austerity). He is known for his long hours in meditation. While he was born in Karnataka and took diksha in Rajasthan, he generally spends much of his time in the Bundelkhand region where he is credited with having caused a revival in educational and religious activities. Know more about him

     

     

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