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    1. *‼आहारचर्या*‼
       *श्री सिद्धयोदय नेमावर*
        _दिनाँक :१६/१०/२०१९_
      *आगम की पर्याय महाश्रमण युगशिरोमणि १०८ आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज* _को आहार दान का सौभाग्य *ब्रह्मचारिणी बहन रेखा दीदी जी  प्रतिभास्थली  एवं श्री विमल चंद जी,जितेंद्र जी जैन काला,अरविंद कुमार जी अंशुल ,आयुष ,यश,जैन काला खातेगांव  मध्य प्रदेश* वालो को एवं उनके परिवार को प्राप्त हुआ है।_

      इनके पूण्य की अनुमोदना करते है।
                  💐🌸💐🌸
      *भक्त के घर भगवान आ गये*
                🌹🌹🌹🌹
      *_सूचना प्रदाता-:श्री अक्षय जी जैन खातेगांव_*
             🌷🌷🌷
      *अंकुश जैन बहेरिया
      *प्रशांत जैन सानोधा 

    2. जो पूर्णमासी को उदित हुआ , वह पूर्णकाम बन जाएगा / जो आज पूज्य है विद्या गुरुवर , त्रिलोक तिलक बन जाएगा//


       WhatsApp Image 2019-10-12 at 9.10.46 PM.jpegधर्म मित्रों इतिहास कहता है आज शरद पूर्णिमा के पावन दिन धर्म श्राविका माँ श्रीमंती की पावन कोख से  श्रावक शिरोमणि पिता मल्लप्पा जी के संस्कार बान घर आंगन में ,दिव्य बालक विद्याधर का जन्म हुआ था / कौन जानता था ,जो आज बालक है ,कल धर्म का पालक बनेगा/ कौन जानता था, जो आज मिथ्यात्व के अंधेरें में जन्मा है, कल सम्यक्त्व का सवेरा और धर्म का उजेरा करेगा / कौन जानता था ,जो आज बूंद की तरह जन्मा है /कल संयम की धारा बन ज्ञान का सागर विद्यासागर रूप महासागर बनेगा /कौन जानता था जो आज मां के गर्भ से निकला है उस दिव्य बालक पर सारा जहां गर्व करेगा /कौन जानता था जो आज कर्नाटक में जन्मा है ,कल संसार के नाटक का पटाक्षेप करने मुक्ति पथ पर चलेगा /कौन जानता था जो आज सदलगा में जन्मा है, वह कल सुमार्ग सनमार्ग मोक्ष मार्ग से दिल लगा बैठेगा /कौन जानता था जो आज बेलगांव जिले में जन्मा है ,वह कल वेलगाम पंच इंद्रियों के घोड़ों को नियंत्रित कर जीव, जीवन, जगत में संयम का शंखनाद करेगा /कौन जानता था जो आज बाल सुलभ मुस्कान से माता-पिता का मन मोह रहा है वह कल मोहजयि वीतराग त्रिलोकपूज्य निरगृन्थ महासंत बनेगा / कौन जानता था जिसके जन्म पर खुशियों के रत्न बरस रहे है,  वो कल रत्नात्रय धारी संत बनेगा /कौन जानता था जो आज तीन पहियों की गाड़ी से चल रहा है ,वह कल सम्यक दर्शन ज्ञान चरित्र के मार्ग पर चलेगा/ कौन जानता था जो आज अणुव्रति  माता-पिता के हाथों में उछल कूद कर  रहा है ,वह कल सिद्धालय की ओर गतिमान होगा /कौन जानता था जो आज अपनी बाल सुलभ चेस्टाओ  से सबका ध्यान खींच रहा है, वह कल ध्यान ध्याता ध्येय के  महावीरी पथ  पर चलेगा /कौन जानता था जो आज मां श्रीमंती की आंखों का तारा है ,वह कल धर्म जगत का ध्रुवतारा सितारा बनेगा /कौन जानता था जो आज पिता मल्लप्पा का दुलारा है, वह कल सबका  चाहेता  धर्म का प्रणेता बनेगा /कौन जानता था जो आज सदलगा की धरती पर खेल रहा है,वह भक्तों की आस्था का आकाश ,शिष्यों का विश्वास , धर्म का प्रकाश जन साधना का शास्त्र होगा /कौन जानता था जो आज मित्र मारुति के साथ खेल रहा है,वह विद्याधर कल का महावीर होगा /कौन जानता था जो आज मित्र मंडली का नेता वह कल  मोक्षमार्ग का नेता होगा / कौन जानता था जिसकी तोतली  जुबान पर आज कई प्रश्न है, कल वह कई प्रश्नों का समाधान होगा / ठीक ही है" त्रिलोक "कुछ प्रश्नों का उत्तर या तो भविष्य की कोख में छिपा रहता है या फिर भगवान  जानते हैं / धर्ममित्रों  आपको अपने आपको देता हूं संदेश, विद्याधर से विद्यासागर, है महावीर का भेष /नमन करो और दिल से ध्याओ ,पूजन करो विशेष / संत शिरोमणी विद्यासागर ,मम हृदय करो प्रवेश //
                             🔥 लेखक🔥 


         🌸विधानाचार्य ब्रःत्रिलोक जैन 
      बर्णी दिगंबर जैन गुरुकुल जबलपुर 9993400931,8770495096

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    3. Vidyasagar.Guru
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      By Vidyasagar.Guru,

      पूज्यगुरूदेव आचार्य श्री १०८ विद्यासागर जी महामुनिराज
                             एवं

      संघस्थ मुनिश्री
       

       

       

      के   सिद्धोदय सिद्धक्षेत्र नेमावर  में हो रहे हैं  केश लोच |

    4. खातेगांव! आचार्यश्री विद्यासागर जी और मूकमाटी पर पीएचडी करने वाले 12 शोधार्थियों की किताबों का रविवार को सिद्धोदय सिद्धक्षेत्र नेमावर में विमोचन हुआ। कार्यक्रम के संयोजक प्रवेश सेठी, प्रफुल्ल पाटनी ने बताया कि अब तक देश के विभिन्न प्रान्तों के 50 से ज्यादा शोधार्थियों ने आचार्यश्री और उनके द्वारा रचित मूकमाटी महाकाव्य पर पीएचडी की है। इन्ही में से 12 शोधार्थियों द्वारा जमा की गई थीसिस पर आधारित किताबों का विमोचन आचार्यश्री के ससंघ सानिध्य में किया गया। ट्रस्ट कमेटी के कार्याध्यक्ष संजय मेक्स, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरेश काला सहित अन्य पदाधिकारियों ने सभी शोधार्थियों को प्रशस्ति पत्र और साहित्य देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन ब्र संजय भैया ने किया

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      नेमावर! आचार्यश्री विद्यासागर जी और मूकमाटी पर पीएचडी करने वाले 12 शोधार्थियों की किताबों का रविवार को सिद्धोदय सिद्धक्षेत्र नेमावर में विमोचन हुआ। कार्यक्रम के संयोजक प्रवेश जैन, प्रफुल्ल पाटनी ने बताया कि अब तक देश के विभिन्न प्रान्तों के 50 से ज्यादा शोधार्थियों ने आचार्यश्री और उनके द्वारा रचित मूकमाटी महाकाव्य पर पीएचडी की है। इन्ही में से 12 शोधार्थियों द्वारा जमा की गई थीसिस पर आधारित किताबों का विमोचन आचार्यश्री के ससंघ सानिध्य में किया गया। ट्रस्ट कमेटी के कार्याध्यक्ष संजय मेक्स, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरेश काला सहित अन्य पदाधिकारियों ने सभी शोधार्थियों को प्रशस्ति पत्र और साहित्य देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन ब्र संजय भैया ने किया। मुनिश्री संभवसागरजी ने भी आशीर्वचन दिए। जैन समाज के प्रवक्ता नरेंद्र चौधरी, पुनीत जैन (पट्ठा) ने बताया कि 5 अक्टूबर को विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर भी एक विशेष कार्यक्रम होगा, जिसमें देशभर के करीब 500 शिक्षक यहां उपस्थित होंगे।

      शोधार्थी जिनकी किताबों का विमोचन हुआ-

      • • साधना सेठी कटारिया वस्त्रापुर अहमदाबाद: आचार्यश्री के विचारों का दार्शनिक अनुशीलन
      • • बारेलाल जैन टीकमगढ़: हिंदी साहित्य की संत काव्य परंपरा के परिप्रेक्ष्य में आचार्य विद्यासागर के कर्तव्य का अनुशीलन
      • • शालिनी गुप्ता कुसमी जिला बलरामपुर: भक्ति काव्य के मूल्य और आचार्य विद्यासागर का काव्य
      • • माया जैन उदयपुर: आचार्य विद्यासागर व्यक्तित्व एवं काव्य कला
      • • किरण जैन मनोरमा कॉलोनी सागर: जैन दर्शन के संदर्भ में मुनि श्री विद्यासागर जी के साहित्य का अनुशीलन
      • • सुधीर जैन अरेरा कॉलोनी भोपाल: आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के साहित्य एवं श्रीमद्भगवद्गीता का तुलनात्मक अध्ययन
      • • अनिल सिरवैया भोपाल: आचार्य विद्यासागर का साहित्य एक अनुशीलन
      • • प्रशांत कुमार जैन राघोगढ़ जिला गुना: आधुनिक हिंदी काव्य के विकास में आचार्य विद्यासागर जी का योगदान
      • • निधि गुप्ता गाजियाबाद: आचार्य विद्यासागर के साहित्य में जीवन मूल्य
      • • रमाशंकर दीक्षित कटनी: आचार्य विद्यासागर केंद्रीत प्रमुख शोध ग्रंथों का अनुशीलन
      • • सुनीता दुबे विदिशा: आचार्य विद्यासागर की लोक दृष्टि और उनके काव्य कलागत अनुशीलन
      • • सुदाणी जल्पावी मोटाबारमण जिला अमरेली: मूकमाटी महाकाव्य में व्यक्त लोकोपयोगी विचार

       

       

      दिगम्बर जैनाचार्य सन्त शिरोमणि 108 श्री विद्यासागर महाराज के विपुल वाङ्मय सम्बन्धी शोधकार्य

       

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    आचार्य श्री द्वारा रचित हाइकू (हायकू)

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    आचार्य श्री द्वारा रचित हाइकू (हायकू)

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  • Testimonials

  • संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज

    ये ऐसे संत है जिनका जीवन एक सम्पूर्ण दर्शन है जिनके आचरण में जीवों के लिए करुणा पलती है जिनके विचारों में प्राणी मात्र का कल्याण आकर लेता है,जिनकी देशना में जगत अपने सदविकास का मार्ग प्रशस्त करता है |आप निरीह, निस्पृह वीतरागी है फिर भी आपके विचार भारतीयता के प्रति अगाध निष्ठा, राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यपरायणता से ओतप्रोत है आपका चिंतन प्राचीन भारतीय हितचिंतको दार्शनिको एवं संतो का अनुकरण करते हुए भी मौलिक है |आचार्य महाराज तो ज्ञानवारिधी है और उनके विचारों को संकलित करना छोटी सी अंजुली में सागर को भरने का असंभव प्रयास करना है|

    रास्ता उनका, सहारा उनका, मैं चल रहा हूँ दीपक उनका, रौशनी उनकी मैं जल रहा हूँ प्राण उनके हर श्वास उनकी मैं जी रहा हूँ

     

    From Wikipedia Acharya Shri Vidyasagarji Maharaj (born 10 October 1946) is one of the best known modern Digambara Jain Acharya(philosopher monk). He is known both for his scholarship and tapasya (austerity). He is known for his long hours in meditation. While he was born in Karnataka and took diksha in Rajasthan, he generally spends much of his time in the Bundelkhand region where he is credited with having caused a revival in educational and religious activities. Know more about him

     

     

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