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    1. *‼आहारचर्या*‼
       *श्री सिद्धयोदय नेमावर*
        _दिनाँक :२२/११/२०१९_
      *आगम की पर्याय,महाश्रमण युगशिरोमणि १०८ आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज* के आहारचर्या कराने का सौभाग्य *श्रीमान रतनलाल जी,गेंदालाल जी जैन सेठी,खातेगांव* वालो को एवं उनके परिवार को प्राप्त हुआ है।_

      इनके पूण्य की अनुमोदना करते है।
                  💐🌸💐🌸
      *भक्त के घर भगवान आ गये*
                🌹🌹🌹🌹
      *_सूचना प्रदाता-:श्री अक्षय जी जैन खातेगांव_*
             🌷🌷🌷
      *अंकुश जैन बहेरिया
      *प्रशांत जैन सानोधा


    2. पूज्य मुनि श्री 108 संधानसागर जी महाराज के गृहस्थ जीवन के पिताश्री श्रीमान अशोक कुमार जी काला जयपुर ,राजस्थान निवासी की आज आचर्य श्री के द्वारा णमोकार मंत्र सुनते हुए 6:57 प्रातः काल में उत्कृष्ट समाधी हुई | वे पिछले 9 दिन में 7 दिन जल उपवास एवं 2 दिन उपवास पर थे | आरम्भ-परिग्रह एवं घर का त्याग कर वे पिछले 2 माह से यहीं ज्ञानसागर व्रती आश्रम में साधनारत थे | नवमी के दिन 9 दिन के उपवास त्याग पूर्वक 72 वर्ष की आयु में उन्होंने नश्वर देह का इस सिद्धोदय क्षेत्र पर सम्पूर्ण संघ की उपस्तिथि में त्याग दिया |      

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      आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री सन्धान सागर जी महाराज के ग्रहस्थ अवस्था के पिताजी की समाधि आचार्य श्री ससंघ के सानिध्य में आज सुबह 6 बजे नेमावर तीर्थ क्षेत्र में हो गयी है।🙏🙏🙏

       

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      19 Nov 2019

      🙏🙏🙏गुरु चरणों में चल रही है संलेखना🙏🙏🙏
      संत शिरोमणि आचार्य भगवन श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज के परम शिष्य मुनि श्री 108 संधान सागर जी मगराज जी के ग्रस्थ अवस्था के पिताजी श्री अशोक जी काला सप्तम प्रतिमाधारी जयपुर (राजस्थान) निवासी नेमावर आश्रम प्रवासी श्री अशोक जी काला की संलेखना श्री सिद्धोदय सिद्ध क्षेत्र नेमावर मैं गुरु चरणों मे चल रही है। पिछले 8 दिनसे बे मात्र जल ले रहे है आज अष्टमी का उपवास है👏👏👏👏

       

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    3. समय, धन और बुद्धी तीनों को प्रदूषित कर रहा है मोबाइल: आचार्यश्री विद्यासागरजी

      🏻 पुनीत जैन (पट्ठा) खातेगांव

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      मैंने यह कार्य किया, ऐसा मत कहो। काम तो सब हो रहे हैं, बस अपने-अपने दायित्व निभाते जाओ। संकल्प और विकल्पों की आवश्यकता ही नहीं होनी चाहिए। संयोजना सही होती है तो कार्य भी उसी के अनुरूप होता जाता है।

      कर्म सिद्धांत को समझ कर अपने कर्तव्य को करते रहना चाहिए। शास्त्रों में कर्तव्य के बारे में बहुत कुछ बताया गया है। कर्तव्य हो कृतित्व ना हो, कषायों का उन्मूलन हो। हम अच्छे और धार्मिक कार्यों द्वारा ही कषायों को खत्म कर सकते हैं।

      उक्त उद्गार नेमावर में विराजमान आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज ने चातुर्मास अवधि में सेवारत कार्यकर्ताओं के सम्मान समारोह के अवसर पर कहे। शनिवार को प्रातः काल की बेला में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की पूजा के अवसर पर चातुर्मास अवधि में सेवारत खातेगांव, हरदा, अजनास, संदलपुर, नेमावर बानापुरा, इंदौर के कार्यकर्ता और समाज जनों द्वारा आचार्य श्री जी को श्रीफल समर्पित किया गया। 
      वहीं ट्रस्ट कमेटी द्वारा कार्यकर्ताओं के सम्मान स्वरूप उनसे आचार्य श्री की पूजन में अष्टद्रव्य समर्पित करवाया गया। इस अवसर पर आचार्यश्री ने कहा कि आप कर्तव्य करेंगे तो सफलता निश्चित ही प्राप्त होगी। जिसका जैसा पुण्य होगा, कार्य भी वैसा ही होगा यह निश्चित है। अरिहंत देव द्वारा बताई गई विधि से कर्तव्य करेंगे तो हम भी कर्म को जड़ मूल से उखाड़ फेंकने में समर्थ होंगे। आप लोगों को नाम उल्लेख ज्यादा नहीं करना चाहिए। हमारा आशीर्वाद भी हमेशा कार्य के लिए होता है, कर्ता के लिए नहीं। आचार्यश्री ने मोबाइल के दुरुपयोग और भविष्य में उससे होने वाली हानियों के बारे में बताते हुए कहा कि आज विद्यालयों में शिक्षक और शिक्षार्थी दोनों ही मोबाइल के कारण अपने मार्ग से भटक रहे हैं। मोबाइल का सीमित उपयोग होना चाहिए। बच्चों को इस अपव्यय से बचाना चाहिए। किंतु इसके लिए आवश्यक है कि पहले माता-पिता स्वयं इस मोबाइल रूपी बीमारी से बचे। बड़ी-बड़ी कंपनियों के सीईओ भी अपने बच्चों को मोबाइल के लगातार प्रयोग से रोकते हैं। आज लोग गर्भ में बच्चा आते ही उनके लिए मोबाइल खरीद लेते है, मोबाइल के कारण खान-पान रहन-सहन सब कुछ बिगड़ रहा है। मोबाइल समय, धन और बुद्धी तीनों को प्रदूषित कर रहा है। अतः इन सब से बचने के लिए मोबाइल का प्रयोग सीमित करना होगा। 
      आचार्यश्री के वचनों से प्रेरित होकर विद्यासागर कॉलेज के संचालक आलोक जैन और हरदा नगर पालिका अध्यक्ष सुरेंद्र जैन सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सप्ताह में एक दिन मोबाइल का उपयोग नहीं करने का संकल्प लिया। इसके साथ ही सुरेंद्र जैन द्वारा आजीवन चाय एवं काफी का त्याग भी किया गया।

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  • आचार्य विद्यासागर जी द्वारा रचित हायकू

  • Testimonials

  • संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज

    ये ऐसे संत है जिनका जीवन एक सम्पूर्ण दर्शन है जिनके आचरण में जीवों के लिए करुणा पलती है जिनके विचारों में प्राणी मात्र का कल्याण आकर लेता है,जिनकी देशना में जगत अपने सदविकास का मार्ग प्रशस्त करता है |आप निरीह, निस्पृह वीतरागी है फिर भी आपके विचार भारतीयता के प्रति अगाध निष्ठा, राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यपरायणता से ओतप्रोत है आपका चिंतन प्राचीन भारतीय हितचिंतको दार्शनिको एवं संतो का अनुकरण करते हुए भी मौलिक है |आचार्य महाराज तो ज्ञानवारिधी है और उनके विचारों को संकलित करना छोटी सी अंजुली में सागर को भरने का असंभव प्रयास करना है|

    रास्ता उनका, सहारा उनका, मैं चल रहा हूँ दीपक उनका, रौशनी उनकी मैं जल रहा हूँ प्राण उनके हर श्वास उनकी मैं जी रहा हूँ

     

    From Wikipedia Acharya Shri Vidyasagarji Maharaj (born 10 October 1946) is one of the best known modern Digambara Jain Acharya(philosopher monk). He is known both for his scholarship and tapasya (austerity). He is known for his long hours in meditation. While he was born in Karnataka and took diksha in Rajasthan, he generally spends much of his time in the Bundelkhand region where he is credited with having caused a revival in educational and religious activities. Know more about him

     

     

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