Jump to content
मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

03 अनासक्त महायोगी [Anasakt Mahayogi hindi.pdf] 1.0.0

   (0 reviews)

2 Screenshots

About This File

03 अनासक्त महायोगी [Anasakt Mahayogi hindi.pdf]

द्र्श्तियों में भी परिवर्तन आता हैं | कई युगद्रष्टा जन्म लेते हैं | अनेको की सिर्फ स्मर्तियाँ शेष रहेती हैं, लेकिन कुछ व्यक्तित्व अपनी अमर गाथाओं को चिरस्थाई बना देते हैं | उन्ही महापुरुषों का जीवन स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाता हैं | आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं गुरु आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के सम्पूर्ण जिवंव्र्त पर आधारित चम्पू महाकाव्य का हिंदी अनुवाद |

  • Like 2

User Feedback

Join the conversation

You can post now and register later. If you have an account, sign in now to post with your account.

Guest
×
×
  • Create New...