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Testimonials

  1. 🙏🙏🙏
    Sourabh Jain jabalpur
    Submitted 28-09-2019 by Sourabh Jain jabalpur in आपके सुझाव
  2. Me yah janana chata hu ki marte hue tote ko namokar mantra kisne sunaya
    Pankaj Kumar
    Submitted 10-09-2019 by Pankaj Kumar in आपकी समीक्षा
  3. *Acharya Guruvar Vidhyasagar Jee Maharaj Ko Paschimi Uttar Pradesh Laane Ki Ek Vishesh Aur Adbhut Pehal Shantinath Yuva Sangh Asoda House Meerut Dwaara*

    Kaun Kehta Hai Ke Acharye Shri Vidhyasagar Jee Maharaj Paschimi Uttar Pradesh Nahi Aana Chahte? Agar Aap Bhi Yahi Sochte Hain Toh Yeh Video Dekhiye, Unki Muskuraahat Dekhkar Aapko Khud Samajh Ajaayega Ki Woh Kya Chahte Hain.

    Shantinath Yuva Sangh Ka Utsaah Evam Akalpniye Tareeka Dekhiye Apne Guruwar Ko Manane Ka. Poori tarah se jut gaye hain Acharye Shree Ko Meerut Laane K Liye. Aaiye Hum Sabb Bhi Prayaas Karein Acharya Shri Ko Meerut Belt Evam Hastinapur Jaisi Paawan Dhara Ke Darshan Karwaane Ka.

    Jabb Bhi Koi Acharye Shri K Darshan Ko Jaaye Toh Yeh Naara Jarur Lagaye:-

    "Guruwar Ko Manana Hai, MEERUT Lekar Jaana Hai"
    Shantinat Yuva SanghMeerut
    Submitted 26-08-2019 by Shantinat Yuva SanghMeerut in आपके सुझाव
  4. एकलव्यों के लिए,
    जो आपने किया है प्रयास
    अतुलनीय एवं प्रशंसनीय है
    बना रहे गुरु कृपा इसी प्रकार
    आप पर - हम सभी पर
    निर्बाध ...
    प्रणाम !!
    नमोस्तु आचार्यश्री ! मम गुरुवर ,
    एवं प्रसादसागर जी महाराज के चरणों में
    वंदन बारंबार ...
    Saurabh ji ko hardik shubhkamnayen !
    गुरुवर मेरे !
    हुआ पूर्ण एक साल
    आज ही के दिन
    बकरीद के मौके पर
    भाव बने थे जब संयम
    मार्ग में बढ़ने के
    मिला था आपसे आशीर्वाद
    करा था संकल्प पहली प्रतिमा का ...
    गुरुवर ! जरुरी इस इस मौके पर
    करूँ पेश आपके समक्ष
    लेखा - जोखा
    अपने इस एक साल का ....
    गुरुवर मेरे !
    एकलव्य हूँ मैं तो आपका
    इसीलिए कर रहा प्रेषित
    उसी प्रकार परोक्ष में ...
    रात्रि में चारो प्रकार के आहार का त्याग
    सुबह मंदिर जी के दर्शन / पूजन के बाद ही
    कर रहा जलादि ग्रहण
    सभी प्रकार के जिमीकंद का त्याग
    बाहर की / बाजार की बनी
    सभी खाद्य पदार्थों का त्याग
    म्याद का बना भोजन
    आटे आदि की मर्यादा का
    रखकर ख्याल
    पानी को पीना छानकर
    अष्टमी / चतुर्दशी को
    सचित्त का त्याग
    निवृत हूँ व्यापार आदि से
    फिर भी जाकर वहां
    बैठता हूँ तीन/चार घंटे
    रहने को एक्टिव सोशल मीडिया पे
    करने को पोस्ट
    अपने भाव
    जो बनते आपकी कृपा से ...
    गत वर्ष में दोष लगा है इतना
    एक बार दही ले ली बाजार की
    एवं एक दिन कुल्फी चख ली
    अनजाने में ...
    भूजल की व्यवस्था
    बिलछानि वाली
    नहीं बैठी उसकी व्यवस्था अभी
    मोटर से खींचा हुआ जल ले रहा अभी
    शुद्ध भोजन की व्यवस्था
    चल रही घर पे
    बाहर में किसी क्षेत्र पर
    यदि जरुरत पड़ेगी
    तो शायद लेना पड़ सकता
    भोजनशाला का वहां का
    फिर भी
    प्रार्थना यही करता नित्यप्रति
    मंदिर जी से निकलते हुए
    बनी रहे चर्या निर्दोष
    आपकी कृपा से
    बढूं आगे और
    जैसे ही हल हो जाएँ
    परेशानियां घर की
    जो उम्मीद है
    सुलझ जाएँगी जल्दी ...
    गुरुवर ! सबसे बड़ी कृपा हुई
    सुबह उठते ही
    पीता था तीन गिलास पानी
    उसके बाद ही जाता था
    शौच आदि
    बहुत बोझ था जिसका
    कैसे पार करूँगा इस हर्डल को
    जो पार हो गई
    बिना किसी परेशानी के ...
    दो टाइम बंधा खाना
    एक जगह बैठकर
    दोनों टाइम सामायिक का अभ्यास
    जो करता हूँ नित्यप्रति
    डेढ़ से दो घंटे तक
    एकासन में बैठकर
    जिससे आगे बढ़ने में न आये
    कोई कठिनाई मुझे ....
    भूजल की व्यवस्था होते ही,
    बाकी सब का तो
    चल ही रहा अभ्यास निर्बाध;
    बढ़ जाऊंगा अगली अगली श्रेणी के लिए ...
    गुरुचरणों में कोटि कोटि वंदन !
    मुनिवर श्री प्रसादसागर जी
    महराज के चरणों में नमन .....
    अनिल जैन "राजधानी"
    श्रुत संवर्धक
    १२.८.२०१९

    anil jain "rajdhani"
    Submitted 12-08-2019 by anil jain "rajdhani" in आपकी समीक्षा
  5. कृपया करके 26 July 2019 का प्रवचन भी upload कर दीजिए।
  6. जय जिनेन्द्र! घर बैठे ही तत्त्वार्थसूत्र ग्रंथ जिसे जैन गीता भी कहते हैं का स्वाध्याय करने का अवसर मिल रहा है। इसमें चारों
    अनुयोगो का ज्ञान है। पिछले चातुर्मास में माता जी से कक्षा ली थी अब पुनरावृति हो जाएगी। इस सराहनीय कार्य के लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद। जय जय गुरुदेव!
    Sari Jain
    Submitted 15-07-2019 by Sari Jain in आपके सुझाव
  7. This app is very helpful in getting information regarding vihar's and also for swadhyaya. Your quiz's are commendable because they help us to learn new things and gives us knowledge of our Dharam.
  8. जय जिनेन्द्र ।बहुत सराहनीय कार्य है।
  9. बहुत अच्छा स्वध्याय कराया गया है
    mkajmera82
    Submitted 31-05-2019 by mkajmera82 in आपकी समीक्षा
  10. ऐसी सुंदर वेब साईट के लिए साधुवाद.
    ARUNKUMARJAIN
    Submitted 30-04-2019 by ARUNKUMARJAIN in आपकी समीक्षा
  11. This is very gud
    M.jain
    Submitted 15-04-2019 by M.jain in आपकी समीक्षा
  12. जय जिनेंद्र 🙏
    नमोस्तु शासन जयवंत हो 🤗
    इस एप से हमारे जैन धर्म की बहुत प्रभावना हो रही है
  13. Very very nice app
  14. आपका यह सराहनीय कार्य जैन धर्म के लिए अतुलनीय योगदान है
    🙏नीरज जैन 🙏
    नीरज जैन
    Submitted 15-02-2019 by नीरज जैन in आपकी समीक्षा
  15. सौरभ भाई आपके प्रयास से बहुत अच्छी वेब बनकर तैयार हुई है। आचार्य भगवन के बारे में संपूर्ण जानकारी के साथ ही वेब पर त्वरित अपडेट मिलने से यह बहुत ही प्रासंगिक वेब बन गई है। आपको और आपकी पूरी टीम को बहुत बधाई।
    Vidyasagar ji ke Bhakt
    Submitted 30-11-2018 by Vidyasagar ji ke Bhakt in आपकी समीक्षा
  16. I am very happy to join this website and thank you for sending me the information through this website.




    Thank u so much
    Jai jinedra 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
    Sanskritijain
    Submitted 30-11-2018 by Sanskritijain in आपकी समीक्षा
  17. बहुत अच्छा है भगवान को जाने के लिए
    कुंडलपुर के बड़े बाबा की जय ।।।।।
    Nirmal Kumar Jain
    Submitted 29-11-2018 by Nirmal Kumar Jain in आपकी समीक्षा
  18. The daily updates are really fast and informative. Please keep updating. Thanks a lot for creating and maintaining this website.
    Hitesh Jain
    Submitted 29-11-2018 by Hitesh Jain in आपकी समीक्षा
  19. बहुत ही बढ़िया साइट बनायी है इस साइट के माध्यम से मुझे बहुत ही ज्ञान की प्राप्ति हुयी मैनें दूसरों को भी ज्ञान के बारे में बताया सौरव भाई का बहुत बहुत धन्यवाद साइट बनाने के लिये गुरूदेव की पूरी जानकारी मिलती है
    Chintu
    Submitted 29-11-2018 by Chintu in आपकी समीक्षा
  20. विगत 5 दिनों से पूज्य श्री की स्नेहिल छाँव में था. अपने गृह नगर में, उनकी मृदुल मुस्कान, पावन कर से तृप्ति दायी आशीष, उनसे वार्ता का सौभाग्य व उनके पाद पंकज के प्रक्षालन का परम सुख साथ ही उनको पड्गहन का सौभाग्य इनता सब हुआ विगत दिनों में. अहार चर्या के समय उनका मृदु मुस्कान से निहारना ऎसा लगता है कि बस उनके पाद पंकज, अपने चौके के सामने बनी रंगोली को पावन कर देंगे, पर पलक झपकते ही वे आगे दिखाई देते हैं. हम अनुमान लगाते रह जाते हैं, शायद आज संकल्प कुछ और ही होगा. विशाल जानमेडनी उनकी भक्ति सरिता मे आलोढन हेतु तत्पर हर पल, पर सौभाग्य शाली होते हैं वे, जो कृपा कोर से अपलावित हो अनंत सुख सागर में शीतलता पाते हैं. सब कुछ मिलाकर सुखद रहे ये दिन.
    ARUN k jain
    Submitted 29-11-2018 by ARUN k jain in आपकी समीक्षा
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