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  1. until
    परम पूज्य मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज जी ससंघ के सान्निध्य में आंवा जिला-टोंक राजस्थान में दिनांक - 13 फरवरी से 18 फरवरी 2019 तक अधिक जानकारी के लिए लिंक पर क्लिक करें
  2. मुनिश्री अभय सागर जी महाराज ससंघ का मंगल विहार दमोह से सिद्ध क्षेत्र श्री कुण्डलपुर जी की ओर हुआ।
  3. ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● *🙏आंवा अपडेट🙏* *संयम साधिका पिच्छीका परिवर्तन समारोह* ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● *हर गीत के पीछे एक साँज होता है हर बात के पीछे एक राज होता है चांद पर देखो तो उस पर भी दाग होता है* *बिगड़ी हुई तस्वीर संवर जाती है उसकी जिनके सिर पर संत सुधा सागर का हाथ होता है*..!! *आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावी शिष्य मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में चल रहे पिच्छीका परिवर्तन समारोह में* ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● *परम पूज्य मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज की पिच्छी प्राप्त करने का विनोद कुमार जी जैन मोदी अशोकनगर वालो को सौभाग्य प्राप्त हुआ* ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● *मुनि श्री 108 महा सागर जी महाराज की पिच्छी प्राप्त करने का सौभाग्य मध्य प्रदेश के निवासी श्रीमान राजकुमार जी जैन अमरपाटन मध्यप्रदेश वालो को सौभाग्य प्राप्त हुआ* ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● *मुनि श्री 108 निष्कंप सागर जी महाराज की पिच्छी प्राप्त करने का सौभाग्य श्रीमान ओमप्रकाश जी ठग परिवार आंवा वालो को सौभाग्य प्राप्त हुआ* ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● *क्षुल्लक श्री 105 गंभीर सागर जी महाराज की पिच्छीका प्राप्त करने का सौभाग्य हमारे प्रिय मित्र आशीष जैन के पिता श्री रतनचंद जी जैन आंवा वालो को सौभाग्य प्राप्त हुआ* ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● *क्षुल्लक श्री 105 धैर्य सागर जी महाराज की पिच्छीका प्राप्त करने का सौभाग्य श्री राजेंद्र कुमार जी जैन आंवा मैनेजर जी को सौभाग्य प्राप्त हुआ* ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● *आपके पुण्य की बहुत बहुत अनुमोदना*
  4. *⛳आंवा पञ्च कल्याणक पात्र चयन UPDATE⛳* *20/01/2019, रविवार* *✨परम पूज्य मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज जी ससंघ✨* के सानिध्य में *🚩आंवा जिला-टोंक राजस्थान🚩* में दिनांक *🗓13 फरवरी से 18 फरवरी 2019 तक🗓* *🚩विश्व के इतिहास में प्रथम बार🚩* *🔥नंदीश्वर सस्त्रकूट समवसरण जिनालय🔥* *🐘अंतर्राष्ट्रीय🐘* *🤗श्री 1008 मज्जिजिनेंद्र पंचकल्याणक🤗* *🐘प्रतिष्ठा महोत्सव🐘* ⛳ इसी उपलक्ष में आंवा में पात्र चयन हुआ। प्रतिष्ठा महोत्सव में पात्र बनने वाले सौभाग्यशाली श्रावकों के नाम इस प्रकार हैं 🌠 *भगवान के माता पिता* श्री छीतरमल जी, छान्या बाई जी,हरसौरा परिवार आंवा 🌠 *सौधर्म इन्द्र* श्रेष्ठि श्री ज्ञानेंद्र जी,मधु जी गदिया सूरत 🌠 *धनपति कुबेर* श्रेष्ठि श्री नीरज जी - मोनिका जी गदिया,सूरत 🌠 *महायज्ञ नायक* श्रेष्ठि श्री संजय जी - सिंपल जी गदिया,श्रेयांस एवं सोम श्रेष्ठि श्री ताराचंद जी जयंती परिवार,अलवर 🌠 *ईशान इंद्र* श्रेष्ठि श्री उम्मेदमल जी - प्रेम बाई जी गोयल परिवार ,आंवा 🌠 *सनत कुमार* श्रेष्ठि श्री शांतिलाल जी-सुशीलादेवी जी गोयल परिवार, आंवा 🌠 *माहेंन्द्र* श्रेष्ठि श्री दिनेश जी-अनीता जी जैन धानोत्या परिवार, आंवा 🌠 *भरत* श्रेष्ठि श्री भागचंद जी-रेखा जी गोयल परिवार, आंवा 🌠 *बाहुबली* श्रेष्ठि श्री कमल जी-ममता जी गोयल परिवार, आंवा 🌠 *ब्रहोंन्द्र इन्द्र* श्रेष्ठि श्री पदम जी-संजू जी ठग परिवार आंवा 🌠 * लान्तव इन्द्र* श्रेष्ठि श्री ओमप्रकाश जी-इंद्रा जी ठग परिवार आंवा 🌠 *शुक्र इंद्र* श्रेष्ठि श्रीधर्म चंद जी - विमला देवी जी हरसौरा परिवार आंवा 🌠 *शतार इन्द्र* श्रेष्ठि श्री दुर्लभ कुमार-उषा जी जैन धानोत्या परिवार आंवा 🌠 *आनत इन्द्र* श्रेष्ठि श्री जय कुमार जी -चंद्रकांता जी हरसौरा 🌠 *प्राणत इन्द्र* श्रेष्ठि श्री धर्म चंद्र जी - अनीता जी धानोत्या परिवार आंवा 🌠 *आरण इन्द्र* श्रेष्ठि श्री पवन जी -मिनाक्षी जी धानोत्या परिवार आंवा 🌠 *अच्युत इन्द्र* श्रेष्ठि श्री दिनेश जी ममता जी ठग परिवार आंवा 🌠 *महामंडलेश्वर* श्रेष्ठि श्री अशोक जी- लॉड देवी जी धानोत्या, आंवा श्रेष्ठि श्री कैलाश चंद जी लॉड बाई जी ठग, आंवा श्रेष्ठि श्री महावीर जी - गुणमाला जी ठग, आंवा श्रेष्ठि श्री टीकम चन्द जी -लीलादेवी जी हरसौरा, आंवा 🌠 *मंडलेश्वर* श्रेष्ठि श्री कैलाश चंद्र जी छान्या बाई जी सामरियाँ आंवा श्रेष्ठि श्री रतनचंद जी -चंद्र कला जी बेरखंडिया, आंवा श्रेष्ठि श्री पदम चंद्र जी - चन्द्रमणि जी ठग आंवा श्रेष्ठि श्री लोकेश जी बीना जी ठग,आंवा 🌠 *प्रति इन्द्र* श्रेष्ठि श्री पदम चंद जी -तिलका जी हरसौरा, आंवा श्रेष्ठि श्री महेंद्र जी -आशा जी ठग,आंवा श्रेष्ठि श्री अशोक - जी लाड़देवी जी हरसौरा, आंवा श्रेष्ठि श्री शान्तिलाल जी मन्नी देवी जी जैन आंवा श्रेष्ठि श्री महावीर जी ग्यारसी देवी जी जैन बोरखंडिया 🌠 *अष्ट कुमारीयाँ* सुश्री पूजा जैन। सुश्री हर्षिताजैन सुश्री मेघना जैन सुश्री अंकिता जैन सुश्री श्रुति जैन। सुश्री रिया जैन सुश्री साक्षी जैन सुश्री प्रर्मिला जैन सुश्री अदिति जैन सुश्री अन्तिमा जैन सुश्री ऐश्वर्या जैन सुश्री कीर्ति जैन सुश्री विधि जैन सुश्री ट्विंकल जैन सुश्री आकांक्षा जैन सुश्री देशना जैन सुश्री विजया जैन सुश्री दीपिका जैन सुश्री धीरांशी सुश्री पूजा जैन *💎सौमिल जैन ललितपुर💎 की ओर से पात्र बनने वाले सभी सौभाग्यशाली परिवारों के पुण्य की बहुत बहुत अनुमोदना एवं सभी को बधाई* 👏🏽👏🏽👏🏽👏🏽👏🏽👏🏽👏🏽👏🏽👏🏽 💐💐💐💐💐💐💐💐💐 🤗 समूह के सभी सदस्यों से निवेदन है की आंवा में होने वाले महोत्सव में सम्मिलित होकर पुण्यार्जन करें *♦पोस्ट से छेड़खानी करके अपनी छोटी सोच प्रदर्शित न करें♦* 🎈🎈💧💧🎈🎈💧💧🎈🎈 📜सुचना साभार📜 *आशीष जैन आंवा* *चंद्रप्रकाश जी जैन आंवा* *रोहित जैन आंवा* *मुकेश जी जैन आंवा* *सौमिल जैन ललितपुर* *💎9793633522💎* 📍Recv as forward 📍
  5. 21 जनवरी 2019 समय दोपहर 3.30 बजे संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज जरुआखेड़ा (सागर-बीना रोड पर सागर से 36 किमी और खुरई से 18 किमी दूर ) में विराजमान है। आज विहार नही हुआ। 20 जनवरी 2019 समय दोपहर 2.15 बजे संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज का मंगल बिहार बनहट (खुरई) से जरुआखेड़ा (सागर) की ओर हुआ । दूरी 7 किमी आज आहार चर्या बंट में ही होगी दोपहर में विहार होने की सम्भावना 19 जनवरी 2019 रात्री विश्राम - बंट कल आहार चर्या जरुआखेड़ा में ही संभावित 4 PM पूज्य गुरुदेव ने बढ़ाये अपने कदम सिमरिया से भी आगे बंट की ओर। 1 45 PM परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज का खुरई से सागर की ओर हुआ विहार।
  6. दिनाँक - 19 जनवरी 2019, शनिवार परम पूज्य संत शिरोमणि आचार्य भगवन श्री १०८ विद्या सागर जी महाराज के परम पूजनीय शिष्य परम् पूज्य जेष्ठ श्रेष्ठ मुनि श्री १०८ योग सागर जी महाराज ससंघ का मंगल विहार अभी अभी दमोह से अभाना की ओर हुआ ।। दिशा - जबलपुर
  7. मुनिश्री समयसागर जी महाराज, ससंघ का मंगल विहार आज सुबह बीना से खुरई की ओर हुआ।
  8. बुंदेलखंड में कहते हैं कि ड्योढ़ लगी रहती है, तब गृहस्थी चलती है, ठीक ऐसे ही हमारा संसार चलता है: अाचार्यश्री हमारे अपने कर्म और हमारा अपना शरीर हमारे संसार के भ्रमण का और इस विविधता का कारण है। यहां तक, हमने इस बात को समझ लिया। कर्म कैसे हैं, वे हमारे साथ बंधते भी है, वे हमारे भोगने में भी आते हैं, वे हमारे करने में भी आते हैं। तीन तरह के हैं, कुछ कर्म हैं जो हम करते हैं, कुछ कर्म हैं जिनका हम फल भोगते हैं। कुछ कर्म हैं जो हमारे साथ फिर से आगे की यात्रा में शामिल हो जाते हैं और इस तरह से यह यात्रा विषयाें का चक्र है इसलिए संसार को चक्र माना है जिसमें निरंतरता बनी रहती है। यह बात नवीन जैन मंदिर के मंगलधाम परिसर में प्रवचन देते हुए अाचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि ठीक एक गृहस्थी की तरह जैसे किसी गृहस्थी चलाने वाली मां को हमेशा इस बात का ध्यान रखना पड़ता है कि शक्कर कितने दिन की बची और गेहूं कितने दिन का बचा और आटा कितने दिन का बचा। इसके पहले कि वो डिब्बे में हाथ डालकर पूरा साफ करे। ऐसा मौका आता ही नहीं है, दूसरी तैयारी हो जाती है। बुंदेलखंड में कहते हैं कि ड्योढ़ लगी रहती है, तब गृहस्थी चलती है। ड्योढ़ लगी रहती है, मतलब कोई भी चीज एकदम खत्म नहीं होती, खत्म होने के कुछ घंटे पहले ही सही वो शामिल हो जाती है तब चलती है गृहस्थी। ठीक ऐसे ही हमारा संसार चलता है। आचार्यश्री ने कहा कि हम जो भोगते हैं, उसके भोगते समय सावधानी और असावधानी हमारी होती है। दो ही चीजें हैं हमारी अपनी असावधानी जिसको हम अपनी अज्ञानता कह लें, हमारी अपनी आसक्ति। इनसे ही मैं अपने जीवन को विकारी बनाता हूं और इसके लिए मुझे करना क्या चाहिए। मेरे आचरण की निर्मलता और दूसरी मेरी अपनी साधना....समता की साधना। ये दो चीजें हैं। इस संसार की विविधता से बचने के लिए। कुल दो इतना ही मामला है और इतने में ही कुछ लोगों को समझ में आ सकता है, कुछ लोगों को इतने में समझ में नहीं आ सकता। तो आचार्य भगवन्त, तो श्री गुरू तो सभी जीवों का उपकार चाहते हैं। तो फिर इसका विस्तार करते हैं और वह विस्तार अपन करेंगे। जो विस्तार रुचि वाले शिष्य हैं, उनको विस्तार से समझ में आता है जो संक्षेप रुचि वाले हैं उनको बात इतनी ही है समझने की और मध्यम बुद्धि वाले हैं उनको तो विस्तार करके बताना होगी।
  9. जहां बाहर की भीड़ नहीं ज्ञान का नीड़ मिल जाए, वही सही प्रभावना है: विद्यासागर महाराज अशुभ कर्मों के आगे सभी घुटने टेक देते हैं। अशुभ कर्मों का उदय किसी को नहीं छोड़ता, परन्तु जो कर्मों पर विजय प्राप्त कर लेते हैं वह तीर्थंकर बन जाया करते हैं। उनकी प्रेरणा से ही हमारा मोक्ष मार्ग प्रशस्त हो सकता है। छल्लेदर तूफानी बातों से अपना ज्ञानीपना दिखाकर भीड़ इकट्ठी हो जाए, जन-सैलाब उमड़ आए क्या इसी का नाम प्रभावना है। चारों तरफ जन ही जन का दिखना निज का खो जाना यही प्रभावना है। स्वयं से अनजान पर की पहचान का नाम प्रभावना नहीं है। जहां भाषा थम जाए, भाव प्रकट हो जाए शब्द मौन हो और ‘मैं कौन हूँ’ इस प्रश्न का समाधान मिल जाए, जहां बाहर की भीड़ नहीं ज्ञान का नीड़ मिल जाए वही सही प्रभावना है। यह बात नवीन जैन मंदिर के मंगलधाम परिसर में प्रवचन देते हुए अाचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने कही। उन्हाेंने कहा कि क्षयोपशम से प्राप्त शब्दों से जनता को प्रभावित करना बहुत आसान कार्य है, लेकिन निज स्वभाव से प्रभावित होकर नितान्त एकाकी अनुभव करना बहुत कठिन है वही शाश्वत प्रभावना है, जो स्वभाव से अलग न हो। भीड़ का क्या भरोसा? उनकी आज कषाय मंद है धर्म-श्रवण की भावना है अतः वह सब अपने अपने पुण्य से अाए हैं और वक्ता का भी पुण्य है इसलिए श्रोता श्रवण करने आए हैं किंतु पुण्य कब पलटा खा जाए कोई भरोसा नहीं। जो पलट जाए वह कैसी प्रभावना। उन्होंने कहा कि जहां प्रकृष्ट रूप से स्वभाव की भावना हो, किसी को भी आकृष्ट करने का भाव न हो, किसी को समझाने का कार्य न हो, किसी अन्य को सिखाने की उत्सुकता न हो, प्रकट ज्ञान से स्वयं को समझा सके, स्वयं ही निज स्वभाव से आकर्षित हो जाए, अपने में तृप्त हो जाए वही सही प्रभावना है। अज्ञानता से बाह्य प्रभावना में मान की मुख्यता रह जाती है और यथार्थ तत्वज्ञान की हीनता रहती है। स्वयं को ठगना आध्यात्मिक दृष्टि से अनैतिक कार्य है इसमें बहुत शक्ति व्यय करके भी किंचित भी आनंद प्रतीत नहीं होता। जबकि अंतर्दृष्टि से अल्प पुरुषार्थ में ही आह्लाद होता है अतः अंतरंग में उद्यमी होकर अंतर प्रभावना ही श्रेष्ठ है। अपना आत्महित साधने में यदि किन्हीं सुपात्र जीवों का कल्याण हो जाए तो ठीक है किंतु मात्र दुनिया की चिंता करके आत्म कल्याण की उपेक्षा करना बहुत बड़े घाटे का सौदा है। आचार्यश्री ने कहा कि ध्यान रखना किसी का कल्याण किसी के बिना रूकने वाला नहीं है जिसका उपादान जागृत होगा उसे निमित्त मिल ही जाएगा। व्यर्थ में पर कर्तृत्व के विकल्प में आत्मा की अप्रभावना करना घोर अज्ञानता है। आपे में आओ, बहुत हो गयी स्वयं की बर्बादी, अब तो चेतो। इस दुनिया की भीड़ से तुम्हें कुछ नहीं हासिल होगा, यह तो रेत जैसी है जितनी जल्दी तपती है उतनी ही जल्दी ठंडी पड़ जाती है जो सदा एक-सी रहे, ऐसी निजात्मा की भावना करो, यही शाश्वत प्रभावना है।
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