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  • 1.     चारित्र चक्रवर्ती आचार्य प्रवर श्री शांतिसागर जी महाराज का जीवन परिचय 

     

    1-आचार्य shanti sagar ji संघ_Page_05.jpgपूर्व नाम : श्री सातगौड़ा पाटिल

    पिता का नाम : श्री भीमगौड़ा जी पाटिल

    माता का नाम : श्रीमती सत्यवती जी

    जन्म दिनांक : 25 जुलाई 1872, बुधवार, आषाढ़ कृष्ण-6, वि.सं. - 1929

    जन्म स्थान : येलगुल, बेलगांव (कर्नाटक) (नाना के घर), भोजग्राम के समीप

    ब्रह्मचर्यव्रत : 18 वर्ष की उम्र में

    क्षुल्लक दीक्षा : 16 जून 1913, सोमवार, ज्येष्ठ शुक्ल - 13, वि.सं. - 1970 उत्तूर ग्राम

    ऐलक दीक्षा ः 15 जनवरी 1916, शनिवार, पौष शुक्ल - 14, वि.सं. - 1973 श्री दिग. जैन सिद्धक्षेत्र गिरनार जी, जिला जूनागढ़ (गुजरात)

    मुनि दीक्षा : 2 मार्च 1920, मंगलवार फाल्गुन शुक्ल - त्रयोदशी, वि. सं. - 1976 यरनाल, बेलगांव (कर्नाटक)

    दीक्षा गुरू : मुनि श्री देवेन्द्रकीर्ति जी महाराज

    आचार्य पद : 8 अक्टूबर 1924, बुधवार आश्विन शुक्ल -11, वि.सं. - 1981 समडोली, जिला - सांगली (महाराष्ट्र)

    समाधि : 18 सितम्बर 1955, रविवार द्वितीय भाद्रपद शुक्ल - 2, वि. सं. - 2012 श्री दिग. जैन अतिशय क्षेत्र कुन्थलगिरि, उस्मानाबाद (महाराष्ट्र)

  • 2.     चारित्र चूडमणि आचार्य प्रवर श्री वीरसागर जी महाराज का जीवन परिचय

     

     

    1-आचार्य veer sagar jiसंघ_Page_06 - Copy.jpgपूर्व नाम : श्री हीरालालजी गंगवाल

    पिता का नाम : श्रीरामसुख जी गंगवाल

    माता का नाम : श्रीमती भागूबाई जी (भाग्यवती बाई)

    जन्म दिनांक : सन् - 1876 आषाढ़ शुक्ल - 15 (पूर्णिमा), वि. सं. - 1933

    जन्म स्थान : ईरगांव, औरंगाबाद (महाराष्ट्र)

    ब्रह्मचर्यव्रत : 

    क्षुल्लक दीक्षा : 8 मार्च 1924 शनिवार, फाल्गुन शुक्ल - 3 वि.सं. - 1980, कुम्भोज बाहुबली, कोल्हापुर (महाराष्ट्र)

    ऐलक दीक्षा ः 

    मुनि दीक्षा : 8 अक्टूबर 1924, बुधवार, आश्विन शुक्ल - 11 वि.सं. 1981, समडोली, सांगली (महाराष्ट्र)

    दीक्षा गुरू : आचार्य श्रीशांतिसागर जी महाराज

    आचार्य पद : 8 सितम्बर 1955, गुरुवार द्वितीय भाद्रपद कृष्ण - 7, वि.सं. - 2012 श्री दिग. जैन अतिशय क्षेत्र चूलगिरि (खानियाजी) जयपुर (राजस्थान)

    समाधि : 23 सितम्बर 1957, सोमवार, आश्विन कृष्ण - अमावस्या वि.सं. - 2014, श्री दिग. जैन अतिशय क्षेत्र चूलगिरि (खानिया जी), जयपुर (राजस्थान)

  • 3.     सिद्धांत वारिधि आचार्य प्रवर श्री शिवसागर जी महाराज का जीवन परिचय 

     

    1-आचार्य shiv sagar jiसंघ_Page_06.jpg

    पूर्व नाम : श्री हीरालाल जी रांवका

    पिता का नाम : श्री नेमीचन्द जी रांवका

    माता का नाम : श्रीमती दगड़ाबाई जी

    जन्म दिनांक : सन् 1901, वि.सं. - 1958

    जन्म स्थान : अड़गांव, औरांगाबाद (महाराष्ट्र)

    लौकिक शिक्षा : तीसरी कक्षा

    ब्रह्मचर्यव्रत : वि.सं. 1986 में आ.श्री शांतिसागर जी से दूसरी प्रतिमा के व्रत लिए, वि.सं. 1999 में सिद्धक्षेत्र मुतागिरी जी में सातवीं प्रतिमा ली

    क्षुल्लक दीक्षा : वि.सं. - 2000, श्री दिग. जैन सिद्धक्षेत्र सिद्धवरकूट जी जिला-खरगोन (म.प्र.)

    ऐलक दीक्षा ः नहीं हुई

    मुनि दीक्षा : 6 जुलाई 1949, आषाढ़ शुक्ल - 11, वि. सं. - 2006 नागौर (राजस्थान)

    दीक्षा गुरू : आचार्य श्री वीरसागरजी महाराज

    आचार्य पद : 3 नवम्बर 1957, रविवार, कार्तिक शुक्ल - 11 वि.सं. - 2014, श्री दिग. जैन अतिशय क्षेत्र चूलगिरि (खानिया जी), जयपुर (राजस्थान)

    समाधि : 16 फरवरी 1969, रविवार, फाल्गुन कृष्ण - अमावस्या वि. सं. - 2025, श्री दिग. जैन अतिशय क्षेत्र महावीर जी जिला - सवाईमाधोपुर (राजस्थान)

  • 4.     पूज्य साहित्य मनीषी आचार्य प्रवर श्री ज्ञानसागर जी महाराज का जीवन परिचय

     

    1-आचार्य gyan sagar jiसंघ_Page_07.jpg 

    पूर्व नाम : श्री भूरामल जी शास्त्री (शान्तिकुमार भी था)

    पिता का नाम : श्री चतुर्भुज जी छावड़ा

    माता का नाम : श्रीमती धृतवरी देवी जी छावड़ा

    जन्म दिनांक : 24 अगस्त 1897, सोमवार, भाद्रपद कृष्ण एकादशी, वि.सं. - 1954

    जन्म स्थान : राणोली, जिला - सीकर (राजस्थान)

    लौकिक शिक्षा : स्याद्वाद् विद्यालय बनारस में संस्कृत साहित्य एवं जैन दर्शन की उच्च शिक्षा प्राप्त की

    ब्रह्मचर्यव्रत : 26 जून 1947, गुरुवार (सातवीं प्रतिमा के रूप में), आषाढ़ शुक्ल - अष्टमी वि.सं. - 2004, अजमेर नगर में (आचार्य श्री वीरसागर जी महाराज से)

    क्षुल्लक दीक्षा : 25 अप्रैल 1955, सोमवार (अक्षय तृतीया), मन्सूरपुर (मुजफ्फरनगर–उ.प्र.) (दीक्षा उपरांत आपका नाम क्षुलक श्री ज्ञानभूषण जी हुआ ।)

    ऐलक दीक्षा ः सन्-1957, वि.सं. - 2014 (आचार्य श्री देशभूषणजी महाराज से)

    मुनि दीक्षा : 22 जून 1959, सोमवार, आषाढ़ कृष्ण - द्वितीया, वि. सं.-2016 खनिया जी की नसिया, जयपुर (राजस्थान)

    दीक्षा गुरू : आचार्य श्री शिवसागर जी महाराज

    आचार्य पद : 7 फरवरी 1969, शुक्रवार, फाल्गुन कृष्ण - 5, वि.सं. - 2025 नसीराबाद, अजमेर (राजस्थान)

    दीक्षित शिष्यगण :  आचार्य श्री विद्यासागर जी, आचार्य कल्प श्री विवेकसागर जी, मुनि श्री विजयसागर जी, ऐलक श्री सन्मतिसागरजी, क्षुल्लक श्री आदिसागरजी, क्षुल्लक श्री स्वरूपानंदजी, क्षुल्लक श्री सुखसागर जी, क्षुल्लक श्री संभवसागर जी

    चारित्र चक्रवर्ती पद : 20 अक्टूबर 1972 (नसीराबाद में क्षुलक श्री स्वरूपानंदजी की दीक्षा के समय)

    आचार्य पद त्याग : 22 नवम्बर 1972, बुधवार, मार्गशीर्ष कृष्ण - द्वितीया, वि.सं. - 2029 नसीराबाद (राजस्थान)

    समाधि : 1 जून 1973, शुक्रवार, ज्येष्ठ कृष्ण -15 (अमावस्या) वि.सं. - 2030, प्रातः 10 बजकर 50 मिनिट पर नसीराबाद, अजमेर (राजस्थान)

    साहित्य सृजन : संस्कृत ग्रंथ :- महाकाव्य - जयोदय (दो भाग), वीरोदय, सुदर्शनोदय, भद्रोदय, दयोदय (चम्पूकाव्य), मुनि मनोरंजनाशीति (मुक्तक काव्य), ऋषि कैसा होता है (मुक्तक काव्य) सम्यक्त्वसार शतक, प्रवचनसार प्रतिरूपक, शांतिनाथ पूजन विधान हिन्दी ग्रंथ :- ऋषभावतार, गुणसुन्दर वृतान्त, भाग्योदय, जैन विवाह विधि, तत्त्वार्थसूत्र टीका, कर्तव्यपथ प्रदर्शन, विवेकोदय, सचित्त विवेचन, सचित्त विचार, देवागम स्तोत्र पद्यानुवाद साहित्य :- नियमसार, अष्टपाहुड़, पवित्र मानव जीवन, स्वामी कुंद-कुंद और सनातन जैन धर्म, इतिहास के पन्ने, मानव धर्म, समयसार तात्पर्य वृत्ति टीका (दार्शनिक ग्रंथ हैं)

  • 5.     दिगम्बर सरोवर के राजहंस, संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का जीवन परिचय

     

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    पूर्व नाम : श्री विद्याधर जी जैन अष्टगे

    पिता का नाम : श्री मल्लप्पा जी जैन अष्टगे

    माता का नाम : श्रीमती श्रीमंती जी जैन अष्टगे

    जन्म दिनांक : 10 अक्टूबर, 1946, आश्विन शुक्ल- 15 वि.सं.- 2003 (शरद पूर्णिमा) सदलगा, चिक्कोड़ी, जिला-बेलगाँव (कर्नाटक)

    लौकिक शिक्षा : नवमीं

    ब्रह्मचर्यव्रत : 1966 में आचार्य श्री देशभूषण जी महाराज से

    मुनि दीक्षा : 30 जून, 1968, आषाढ़ शुक्ल-पंचमी वि.सं.- 2025, अजमेर (राजस्थान)

    दीक्षा गुरू : मुनि श्री ज्ञानसागर जी महाराज

    आचार्य पद : 22 नवम्बर 1972, बुधवार, मार्गशीर्ष कृष्ण- 2, वि.सं. 2029 नसीराबाद, जिला-अजमेर  (राज.)

    मातृभाषा : कन्नड़

    कृतित्व : 1. चेतन कृतित्व : 120 मुनि, 172 आर्यिकायें, 20 ऐलक, 14 क्षुल्लक, 3 क्षुल्लिकायें और 1 हजार से अधिक ब्रह्मचारी एवं ब्रह्मचारिणी बहिनें साधनारत हैं।

    संस्कृत रचनायें : 1.शारदा स्तुति, 2. श्रमण शतकम्, 3. निरंजन शतकम्, 4. भावना शतकम्, 5. परीषहजय शतकम्, 6. सुनीति शतकम्, 7. चेतन चन्द्रोदय, 8. धीवरोदय चंपू काव्य (अप्रकाशित)

    हिन्दी काव्य : 9. मूकमाटी महाकाव्य, 10. नर्मदा का नरम कंकर, 11. डूबो मत लगाओ डुबकी, 12. तोता क्यों रोता ? 13. चेतना के गहराव में, 14.अनेक हाईको कवितायें (अप्रकाशित हैं)

    स्तुति सरोज : 13. आचार्य शान्तिसागर स्तुति, 14. आचार्य वीरसागर स्तुति, 15. आचार्य शिवसागर स्तुति 16. आचार्य ज्ञानसागर स्तुति, 17. अध्यात्म भक्तिगीत (7 भक्तिगीत )

    हिन्दी शतक : 18. निजानुभव शतक, 19. मुक्तक शतक, 20. श्रमण शतक, 21. निरंजन शतक, 22. भावना शतक 23. परीषहजय शतक, 24. सुनीति शतक, 25. दोहादोहन शतक, 26. सूर्योदय शतक, 27. पूर्णादय शतक 28. सर्वोदय शतक, 29. जिनस्तुति शतक

    अनुवादित ग्रन्थ : 1. कुन्दकुन्द का कुन्दन (समयसार), 2. निजामृतपान (समयसार कलश), 3. अष्ट पाहुड़, 4. नियमसार 5. बारस अणुवेक्खा, 6. पंचास्तिकाय, 7. इष्टोपदेश (बसंततिलका), 8. प्रवचनसार 9. समाधिसुधा शतक (समाधि शतक), 10. नव भक्तियाँ (आचार्य पूज्यपाद कृत) 11. समन्तभद्र की भद्रता (स्वयंभू स्तोत्र), 12. रयणमंजूषा (रत्नकरण्डक श्रावकाचार) 13. आप्तमीमांसा (देवागम स्तोत्र), 14. द्रव्य संग्रह (बसंततिलका छंद), 15. गोमटेश अष्टक, 16. योगसार 17. आप्त परीक्षा, 18. जैन गीता (समणसुतं), 19. कल्याण मंदिर स्तोत्र, 20. जिन स्तुति (पात्रकेसरी स्तोत्र) 21. गुणोदय (आत्मानुशासन), 22. स्वरूप संबोधन, 23. इष्टोपदेश (ज्ञानोदय), 24. द्रव्यसंग्रह (बसंततिलका एवं ज्ञानोदय )

    प्रवचन साहित्य : 1. प्रवचन पर्व, 2. प्रवचन पीयूष, 3. प्रवचनामृत, 4. प्रवचन पारिजात, 5. प्रवचन पंचामृत, 6. प्रवचन प्रदीप 7. प्रवचनप्रमेय, 8. प्रवचनिका, 9. प्रवचनसुरभि, 10. तेरह सौ एक, 11. धीवर की धी, 12. सर्वोदय सार 13. सीप के मोती, 14. विद्या वाणी, 15. अकिंचित्कर, 16. चरण आचरण की ओर, 17. कर विवेक से काम 18. धर्म देशना, 19. कुण्डलपुर देशना, 20. तपोवन देशना, 21. आदशो के आदर्श, 22. सिद्धोदय सार 23. कौन कहाँ तक साथ देगा, 24. समागम, 25. गुरुवाणी, 26. व्यामोह की पराकाष्ठा, 27. भक्त का उत्सर्ग 28. आत्मानुभूति ही समयसार, 29. मूर्त से अमूर्त की ओर, 30. स्वराज और भारत, 31.अहिंसा सूत्र, 32. मेरे सपनों का भारत, 33. भारत की भाषा राष्ट्र भाषा हो, 34. जैन दर्शन का हृदय, 35. जयन्ती से परे, 36.सत्य की छाँव में, 37. ब्रह्मचर्य चेतन का भोग, 38. भोग से योग की ओर, 39. आदर्श कौन.?, 40. मर हम.... मरहम बनें,  41. मानसिक सफलता, 42. न धमों धार्मिकैर्विना, 43. डबडबाती आँखें । इस प्रकार 50 अधिक कृतियाँ हैं।

    ग्रन्थ प्रवचन : समयोपदेश भाग 1-2, गुरुवयणं, दिव्योपदेश, इष्टोपदेश, पंचास्तिकायोपदेश, श्रुताराधना भाग 1-2-3 (और भी बहुत सी कृतियाँ हैं जिनके नाम ज्ञात नहीं हो सके हैं।)

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