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राजेश जैन भिलाई

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राजेश जैन भिलाई last won the day on September 27 2018

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About राजेश जैन भिलाई

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    भिलाई छतीसगढ़

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  1. कठिन परीक्षा और मोक्षपथ के कठोर परीक्षक...….. कड़कड़ाती, कम्पकपाती, सुई सी चुभोने वाली तुषार सी बर्फीली हवाओ की सहेली महारानी "ठंड" महादेवी जो हिमालय से उतर कर कुछ गिने चुने दिनो के लिए अपने मायके उत्तर भारत में आई है आरम्भ के कुछ दिनों में तो बड़ी संस्कारी आज्ञाकारी नई बहु सी लगती है लेकिन कुछ ही दिनों में अपने तेवर दिखाते दुर्दान्त आतंकवादी सी लगने लगती है यहां तक इसके रौब ख़ौफ़ देख बेचारे सूरजदादा भी से डरे सहमे से एक कोने में दुबके रहते है। कल जब आधी रात में मेरी नींद खुली तो.…. दोहरे तिहरे कम्बलों की परतों से झांकते हुए.... डरते डरते मैंने ठंड से कहा हे माते! तू तो महीने भर से देश मे बढ़ती, महंगाई, आतंकवाद भ्रष्टाचार सी पसर कर बैठ ही गई। तूने कभी विचार किया कि इस समय यथाजात दिगम्बराचार्य,आचार्यश्री लकड़ी के निष्ठुर पाटे पर अपनी आत्मा में लीन साधनारत विराजित है और तू अनुशासनहीन गुरुभक्त की तरह बिना अनुमति लिए बिना कपाट खटखटाए, खिड़की दरवाजो के छिद्रों से चोरों की तरह कक्ष में घुस जाती हो ऐसा पाप क्यो करती हो तुम उनके पास जाती ही क्यो??????.......। मुझ पर तेज हवा के तीर फेकते हुये ठंड ने आंखे तरेरते हुए कहा हे! "कम बल " वाले "कंबल " के दास अरे बावले ! तुम क्या जानो....मैं तो सिर्फ उनके दुर्लभ दिव्य दर्शन करने आती हूँ..... मेरी परदादी परनानी बताया करती थी कि चौथे काल मे दिगम्बर मुनिराज कैसी तपस्या करते थे ऐसे चौथेकाल के ऋषिराज की तरह साक्षात आचर्यश्री के दिव्य दर्शन कर आंखे, मन, हृदय अतृप्त ही रहता है.... मैं तो ठगी ठगी सी वहीं ठहर जाती हूँ उनके दिव्य अतिशयकारी आभामंडल के समीप पहुच कर मेरा जीवन धन्य हो जाता है उनकी साधना तपस्या, कठोर परीक्षक की कठिन परीक्षा देख मैं खुद कांप जाती हूं। और सुन! जब आचार्यश्री आत्मगुफ़ा में तपस्या साधना करने वाले आचार्यश्रेष्ठ जब बाहर आते है तब मुझ पर मोहक मुस्कानों से युक्त आशीषों की ऐसी वर्षा कर देते है मानो मैं उनके चरणों की शिष्या होऊ.....। मैं तो उनके पावन पुनीत चरणों मे लज्जित सी सिर झुकाए बैठी रहती हूँ ऐसे दुर्लभ गुरुचरणों से वापस दूर जाने का मन ही नही करता भला कुछ दिनों के लिए पीहर आई बेटी अपने जगतपिता से इतनी जल्दी दूर कैसे जा सकती है। और सुन तुम जैसे डरपोक भक्तो को डरा कर मुझे बड़ा ही आनन्द आता है। भयानक सी ठंड भरी आधी रात में मुझे डराती कम्पाती वह देवी कब वापस लौट गई पता ही न चला सुबह सुबह बंद आंख नाक गले ने छीकते हुए शिकायत की और कहा ..... मालक इन ठंड देवी से पंगा आप लेते हो भुगतना हमे पड़ता है.... भावाभिव्यक्ति ◆ राजेश जैन भिलाई ◆ विनम्र अनुरोध : कभी मध्यरात्रि में नींद खुल जाए तो हम आप ऐसे चरणों को साक्षात मान नमोस्तु अवश्य करें🙏🏻 🌈🌈🌈🏳‍🌈🏳‍🌈🌈🌈🌈🌈
  2. राष्ट्रीय स्वाभिमान के गवाक्ष स्वतंत्रता के अम्र बलिदानी शहीदों के प्रति संभवत पहली बार अद्भुत आयोजन की अनुमोदना
  3. आज जब मै पूज्यवर गुरुदेव के स्वावलम्बन एवम आत्मनिर्भरता के चिंतन पर आधारित हथकरघा पर विचार करता हूँ तब लगता है कि हथकरघा के बारे में इतना सब कुछ तो वे बचपन से जानते समझते थे जितना हम आज भी नही जान पाते मेरा सभी से आग्रह अनुरोध निवेदन है कि एक बार इस ग्रन्थ का स्वाध्याय अवश्य करे
  4. खजुराहो में आयोजित सयम स्वर्णजयंती आयोजन में आचार्य विद्यासागर डॉट गुरु की पूरी टीम सहित टीम के सक्रिय सदस्य भाई सौरभ जैन को भी आचार्यश्री के समक्ष मंच पर आमंत्रित किया गया था लेकिन शायद वे संकोच वश मंच पर नही आये थे
  5. राजेश जैन भिलाई

    आचार्य श्री खजुराहो एयरपोर्ट का अवलोकन करते हुये

    आचार्यश्री एयरपोर्ट सिर्फ देखने नही गए थे उन्होंने इस विषय पर विशाल चिन्तन किया होगा सम्भव है आने वाले दिनों के प्रवचन में इसका उल्लेख हो उनके विशाल विस्तृत चिन्तन को कोटि कोटि नमन
    भाई सौरभ जी एवम उनकी समस्त टीम के इस परिश्रम युक्त कार्य की अनुमोदन एवम बधाईयाँ आपका यह प्रयास देश विदेश के गुरुभक्तो को अनमोल उपहार प्रदान कर रहा है
  6. आचार्यश्री का चिन्तन बहुत ही विराट, विशाल, विस्तृत है उनके चिन्तन को शब्दों में बाँध पाना किसी के बीएस की बात नही
  7. आत्मीय प्रमोदजी सोनी सा जी जय जिनेन्द्र कई दिनों से बहुप्रतीक्षित फिल्म को जब परसों देखने का अवसर मिला तब मन आनंद से भर गया फिल्म देखते समय मई आस पास बैठी माँ लोगो को भी देख लेता था उनके हाब भाव बता रहे थे की वे जीवंत पलों को आत्मसात कर रही है दर्शको में शायद ही कोई आँख रही होगी जिससे अश्रुधारा न बही हो लैंडमार्क फिल्म की टीम बहन विधि कासलीवाल ओर उनकी समस्त टीम तक हम सभी की सद्भावनाए बधाईयां अवश्य प्रेषित कीजियेगा गुरुदेव की जीवनी के सभी दस्तावेजों को जन जन में प्रेषित करके आपने अतिशय पुन्य अर्जित किया है इस फिल्म में आपके विशिष्ठ सहयोग के प्रति हम सभी आभार एवं कृतज्ञता ज्ञापित करते है शुभकामनाओं सहित राजेश जैन भिलाई
  8. ????‍??‍???? अन्य नगरों की तरह हमारे रुआबाँधा भिलाई को भी फ़िल्म विद्योदय देखने का पुण्यशाली अवसर मिला। विद्योदय देखने से पहले से मन मे एक छवि थी कि फ़िल्म में कई पात्र अभिनय करेंगे। लेकिन जब फ़िल्म आरम्भ हुई तो लगा इस फ़िल्म में अभिनय तो है ही नही जो है वह तो जीवन्त सा वास्तविकता के निकट है सूत्रधार बड़ी कुशलता से चित्रों, दृश्यों, भावों से उन अविस्मरणीय पलो को जीवंत कर देता बाल ब्रम्हचारिणी सुवर्णा दीदी, महावीर जी सदलगा एवम विद्याधर के बालसखा मित्र जब विद्याधर की कही अनकही उन बातों को बड़ी आत्मीयता से सुनाते तब लगता हम सदलगा में ही बैठे साक्षात दृश्य देख रहे हो। सदलगा के अष्टगे परिवार के निवास में रखा पालना देख लगता था वर्तमान के सभी जीवों के पालनहार शिशु बालक विद्याधर कुछ ही समय पहले पालने से उठे हो फ़िल्म में रेत कलाकार की सरपट उंगलियों का स्पर्श मनोभावों को दर्पण सा उकेर देता। अजमेर के भागचंद जी सोनी के परिवार की माँ जब मुनिश्री विद्यासागर के प्रथम आहार की घटना सुनाती है तब लगता 50 वर्ष पूर्व का वह पल सामने ही हो। जब जब आचार्यश्री चित्रपटल पर आते लगता हम सभी साक्षात जीवन्त उनके चरणों मे बैठे हो कई बार मुझे लगता मूकमाटी के कठिन शब्द अन्य दर्शक कैसे समझेंगे लेकिन मेरे पड़ोस में बैठी अनपढ़ माँ को जब देखता तब उनके चेहरे के हाव भाव बता रहे थे वह भी मूकमाटी समझती ओर जानती भी है। कई बार पलके और मन भी भीग गया जब पूरा का पूरा अष्टगे परिवार मोक्षपथ पर आरूढ़ हो गया। सभी दर्शक दम साधे उन जीवन्त पलो को तब तक आत्मसात करते रहे जब फ़िल्म समाप्त हुई फिर भी अनेको दर्शक अतृप्त, किसी मांत्रिक के मन्त्र प्रभाव में बंधे से बैठे रहे शायद इतनी जल्दी फ़िल्म का समापन उन्हें तृप्ति, संतुष्टि नही दे सका राजेश जैन भिलाई ????‍??‍????
  9. ????‍??‍???? अनियत विहारी, आचार्यश्री के बढ़ते चरण, और गुरुभक्त श्रावको की बढ़ती धड़कने... ???????? अनियत विहारी, आचार्यश्री, जब विहार करते है तब उनके चरण किस ग्राम, कस्बा, नगर, में पड़ जाए कोई नही जानता यहा तक संघस्थ पुज्यवर मुनिराजों को भी जानकारी नही होती कि गुरुदेव का विहार किस दिशा में होगा आज जबलपुर से लगे पड़रिया में आचार्यश्री ने प्रातः कालीन प्रवचन में संकेत किया, कि गर्मी के मौसम में ठंडी हवाएं लंबे विहार के अनुकूल हो सकती है। जबलपुर से भी बायपास से कई रास्ते निकलते है यह सुनकर भारत भर के गुरुभक्त श्रावको के मन मे धड़कने बढ़ने लगी है कि अनियत विहारी आचार्यश्री के चरण ग्रीष्मकाल की वाचना हेतु कहा थमेंगे। या तपते ग्रीष्म काल में गुरुचरण चलते रहेंगे। आइये हम भी देखे कि हमारे अनुमान कितने सटीक है और हम कितने बड़े भविष्यवक्ता है सम्भावित अनुमान ●जबलपुर ●कोनीजी ●कुंडलपुर ●बीना बारह ●टीकमगढ़ या फिर गुरुचरणों के चरणों की थाप सुनने आकुलित गुरु प्रतीक्षा में पलके बिछाए में प्रतीक्षित राजस्थान ●नारेली तीर्थ आग्रहकर्ता राजेश जैन भिलाई ????‍??‍????
  10. राजेश जैन भिलाई

    गुरुदेव को नमन

    आपको पाकर ऐसा लगा कि,अनंत दोषों के कोष का..अनगिनत गुणों के स्वामी से मिलन हो गया।धने तमस में रहने वाले का...दिव्य प्रकाश के स्रोत से मिलन हो गया।तेज धूप की लपटों में,सूखने वाली बूंद को...विशाल दरिया ही मिल गया।आज मुझ अल्पमति को भी लगा की...पूर्ण 'विद्या का सागर' ही मिल गया।शांतिसागराचार्यवर्य से,वीरसिंधु आचार्य हुए।तदनंतर शिवसागर सूरि, ज्ञानसिंधु आचार्य हुए।।ज्ञान गुरु ने निज प्रज्ञा से,हीरा एक तराश लिया।युगों-युगों तक जो चमकेगा,विद्यासागर नाम दिया। गुरुदेव नमन रजत जैन भिलाई
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