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  2. ‼आहारचर्या*‼ *श्री सिद्धयोदय नेमावर* _दिनाँक :०९/१२/२०१९_ *आगम की पर्याय,महाश्रमण युगशिरोमणि १०८ आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज* के आहारचर्या कराने का सौभाग्य *श्रीमान अशोक कुमार जी चिरोंजी लाल जी जैन बाकलीवाल खातेगांव* वालो को एवं उनके परिवार को प्राप्त हुआ है।_ इनके पूण्य की अनुमोदना करते है। 💐🌸💐🌸 *भक्त के घर भगवान आ गये* 🌹🌹🌹🌹 *_सूचना प्रदाता-:श्री अक्षय जी जैन खातेगांव_* 🌷🌷🌷 *अंकुश जैन बहेरिया *प्रशांत जैन सानोधा
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  4. *‼आहारचर्या*‼ *श्री सिद्धयोदय नेमावर* _दिनाँक :०८/१२/२०१९_ *आगम की पर्याय,महाश्रमण युगशिरोमणि १०८ आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज* के आहारचर्या कराने का सौभाग्य *श्रीमान भूपेन्द्र जी,भरत जी,गजेंद्र जी जैन सेठी खातेगांव* वालो को एवं उनके परिवार को प्राप्त हुआ है।_ इनके पूण्य की अनुमोदना करते है। 💐🌸💐🌸 *भक्त के घर भगवान आ गये* 🌹🌹🌹🌹 *_सूचना प्रदाता-:श्री अक्षय जी जैन खातेगांव_* 🌷🌷🌷 *अंकुश जैन बहेरिया *प्रशांत जैन सानोधा
  5. बंद होजाए सब दरवाज़े तब, नया दरवाजा़ दिखाते गुरु, सिर्फ रास्ता ही नहीं दिखाते, मंजिल तक पहुँचाते है गुरु।।
  6. एक वक्त ऐसा दो मुझको मेरे गुरु मेरा मन पूरा खाली हो, भर सकूँ तेरे ज्ञान से गुरु, जिसमे नाम तेरा समाहित हो।।
  7. हमारे जीवन का पथ, जहाँ से शुरू होता है, वो राह दिखाने वाला, हमेशा गुरु होता है।।।
  8. विश्वास और आस्था से ही अक्सर गुरु मिलते है, सुख में हर कोई साथ देता, दुख में साथ हमारे गुरु चलते है।।
  9. सुख दुख के साथी गुरु है, आप ही हो गुणों का आधार, आपने ही हम सबको, हमेशा दिया है अतुलित प्यार।।
  10. Last week
  11. *संकल्प से होता है जीवन का कायाकल्प - मुनि श्री विमल सागर महाराज* *स्कूली बच्चों ने लिया संकल्प* गोटेगांव / नरसिंहपुर जिले के खमरिया ग्राम में राष्ट्रीय सन्त पूज्य गुरुवर आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री विमल सागर जी महाराज गोटेगांव से विहार कर खमरिया पहुंचे जहां मुनि श्री विमल सागर जी ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला के बच्चो व ग्रामीणों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जैसा हम बोते हैं वैसा फल मिलता है । हमें क्या बोना है ? इसका हमें ध्यान रखना है । जो मनुष्य जीवन पाकर तप व दान न करें व ज्ञान प्राप्त न करें और धर्म न करें तो वो मनुष्य इस धरती पर भार समान है । धर्म के बगैर जीवन शून्य है । शिक्षा के साथ जीवन मे धर्म आ जाये तो बहुत बढ़िया है । अहिंसा परम् धर्म है और प्राणियों का वध करना अधर्म है । जो जो बातें हमें अपने लिए अच्छी नही लगतीं वो किसी जीवों के साथ नही करना चाहिए,यही धर्म है । किसी के प्राण लेना पाप व अधर्म है । इसलिए उन जीवों की रक्षा के भाव आप मे आ गए तो जीवन उन्नत बनेगा । भारत मे दूध है, दही है, लस्सी है और इंडिया में कोक, व्हीस्की और पेप्सी है । भारत मे गीत, संगीत, रिदम है व इंडिया में डांस है पाप है और आइटम है । सबसे अच्छी भाषा हिंदी है पर महत्व अंग्रेजी को दिया जा रहा है । भारत को देवोँ ने बसाया है और इंडिया को लालची अंग्रेजों ने बसाया है ।हमारा भारत आज भी सोने की चिड़िया है । अहिंसा ही परम धर्म है जिसके जीवन मे अहिंसा आती है उसी के जीवन की सार्थकता है । गांधी जी के तीन बंदरो के साथ साथ एक बंदर और जोड़ना चाहिए कि बुरा मत सोचो । मोबाइल पर कुछ खोटे गेम आते हैं । गेम पबजी नही बल्कि पाप जी है,उसे खेलने में खुद की प्रकृति हिंसात्मक होती जा रही है और ऐसे भावों से परिणाम खराब होते हैं जो हमें खोटी दिशा व गति में ले जाने वाली है । अपने जीवन को शांतिकारक बनाने के लिए शाकाहार करना चाहिए । शाकाहार हानि रहित है और अंडा,मांस,शराब जीवन को खराब कर देते हैं । महाराज श्री से स्कूली बच्चों ने संकल्प लिया कि अंडा,मांस,मदिरा व नशा का सेवन नही करेंगे व पबजी गेम का त्याग किया व खोटी वस्तुओं का उपयोग नही करेंगे । बड़े व गुरु जनों का सम्मान करेंगे । ॐ का स्मरण करना है जो बहुत पावरफुल है । संकल्पी हिंसा न करने का संकल्प भी बच्चों ने लिया । दोपहर में मुनि श्री का ससंघ विहार शहपुरा भिटौनी की हुआ । मुनि श्री ससंघ झांसी घाट के निजी स्कूल में विराजमान हैं ।
  12. 4 दिसम्बर 2019 आचार्य श्री विद्यासागर दोपहर प्रवचन सिद्धोदय सिद्धक्षेत्र नेमावर https://vidyasagar.guru/videos/view-1219-video/
  13. ‼आहारचर्या*‼ *श्री सिद्धयोदय नेमावर* _दिनाँक :०७/१२/२०१९_ *आगम की पर्याय,महाश्रमण युगशिरोमणि १०८ आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज* के आहारचर्या कराने का सौभाग्य *ब्र. विपिन भैया जी देवरी सागर* वालो को एवं उनके परिवार को प्राप्त हुआ है।_ इनके पूण्य की अनुमोदना करते है। 💐🌸💐🌸 *भक्त के घर भगवान आ गये* 🌹🌹🌹🌹 *_सूचना प्रदाता-:श्री अक्षय जी जैन खातेगांव_* 🌷🌷🌷 *अंकुश जैन बहेरिया *प्रशांत जैन सानोधा
  14. भारत सरकार की कैबिनेट मंत्री *श्रीमती स्मृति ईरानी* जी ने लिया आचार्य श्री विद्यासागर जी का आशिर्वाद *नेमावर पहुँची केंद्रीय मंत्री, किये आचार्यश्री के दर्शन, लिया आशीर्वाद।* _*सिद्धोदय सिद्धक्षेत्र में विराजमान पूज्य आचार्यश्री विद्यासागर जी महामुनिराज* के दर्शन-वंदन की भावना से आज *केंद्रीय मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी* नेमावर पहुँची एवम पूज्य गुरुदेव को नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रीमती ईरानी ने पूज्य आचार्यश्री से अहिंसा सहित अन्य विषयों पर चर्चाकर मार्गदर्शन भी प्राप्त किया।_ _प्रबंधकारिणी समिति नेमावर द्वारा, ब्रह्मचारिणी बहनों के माध्यम से *केन्द्रीय मंत्री का सम्मान* भी किया गया। दर्शन उपरान्त उन्होंने अपनी प्रशन्नता व्यक्त कर अपने को अत्यन्त सौभाग्यशाली माना।_ सर्वोदयी राष्ट्रीय महासन्त आचार्यश्री के श्रीचरणों में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी जी की भावाभिव्यक्ति हमें भारत को आगे बढ़ाने के साथ-साथ संस्कारित करने की दिशा में भी काम करना चाहिए.. भारत तो विश्व गुरु था, है और रहेगा: आचार्यश्री विद्यासागरजी ✍🏻 पुनीत जैन, खातेगांव शनिवार को केंद्रीय महिला एवं बालविकास और कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज के दर्शन करने और हथकरघा के विषय पर विस्तृत चर्चा करने नेमावर आयी। हेलीकॉप्टर से अपने तय समय से 10 मिनट पहले पहुंची ईरानी लगभग ढाई घंटे तक नेमावर जैन मंदिर परिसर में रही। ईरानी ने आचार्यश्री के आशीर्वाद से चलने वाले समाजसेवा के विभिन्न प्रकल्पों हथकरघा, हस्तशिल्प, प्रतिभास्थली, मातृभाषा हिन्दी जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्यश्री से लम्बी चर्चा की। इसके साथ ही बारीकी से हथकरघा से निर्मित वस्त्र, हस्तशिल्प से बनी विभिन्न वस्तुओं का अवलोकन किया। ईरानी ने आचार्यश्री से निवेदन किया कि वे ससंघ देश की राजधानी दिल्ली आएं। सक्रिय सम्यक सहकार संघ की ओर से आरके मार्बल ग्रुप की सुशीला पाटनी एवं ब्रम्हचारी सुनील भैयाजी ने हथकरघा से बनी साड़ी ईरानी को भेंट की। वहीं ट्रस्ट कमेटी की ओर से वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरेशचंद काला, दिलीप सेठी, राजीव कटनेरा, महेंद्र अजमेरा ने कलश एवं आचार्यश्री द्वारा रचित जैन साहित्य भेंटकर स्मृति ईरानी को सम्मानित किया। स्मृति ईरानी ने कहा- इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा आध्यात्म के मार्ग पर चलते हुए मानवता को परिभाषित करने वाले आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज और मुनिसंघ का आशीर्वाद आज प्राप्त हुआ। आचार्यश्री के प्रकल्प के माध्यम से हिंसा के अवगुणों को लेकर भी जेल में बंद कैदी आध्यात्म के मार्ग पर चलते हुए हथकरघा के माध्यम से संतों का सानिध्य प्राप्त कर रहे हैं। अहिंसा को अपनाकर जीवन का उत्थान कैसे किया जाए इसका प्रतिबिम्ब आज तिहाड़ जेल में हथकरघा के वस्त्र बनाते कैदियों को देखने पर मिल रहा है। अहिंसा के मार्ग पर चलना, स्वावलंबन के साथ जीना और प्रभु का स्मरण करते हुए समाज के संरक्षण में अपने आप को समर्पित करने का भाव आपके माध्यम से जो जनमानस में जागृत हुआ है उसके लिए मैं आपके श्रीचरणों में सादर वंदन करती हूँ। आपके शुभाशीष से ब्रम्ह्चारिणी बहिने शिक्षा का आशीर्वाद बेटियों को दे रही हैं, हथकरघा के माध्यम से सूत को काटकर संस्कार भरा वस्त्र निर्मित किया जा रहा है। आपके दिखाए मार्ग पर चलकर शिल्प की दुनिया के लोगों को जोड़कर भारत के भविष्य का वो अपने हाथों से निर्माण कर रहे हैं। राष्ट्र कीर्ति के पथ पर हम सभी सदैव चलें ऐसा आशीष आपसे मांगती हूँ। आचार्य श्री ने अपने आशीर्वचन में कहा- विशेष रुप से विशेष विषय को लेकर जिज्ञासू (मंत्री महोदय) दूरी को दूर करते हुए आज यहां आए हैं। अपने व्यस्ततम समय से समय निकालकर जनता के कल्याण की भावनाओं को लेकर संस्कारित जीवन निर्मित हो देश के कल्याण के साथ राष्ट्र भाव सदैव बना रहे। यही भाव देश की जनता में भी आए, इन सब भावों को लेकर महोदया आई हैं। आचार्यश्री ने राष्ट्र उत्थान पर केंद्रित करते हुए अपने उदगार में कहा कि भारत को स्वतंत्र हुए कई वर्ष होने के बावजूद पूर्व स्थिति में नहीं आए। हमें भारत को आगे बढ़ाने के साथ-साथ संस्कारित करने की दिशा में भी काम करना चाहिए। हमें अपनी संस्कृति में पुनः लौटना है। हमे अपनी संस्कृति के अनुसार ही विश्व पटल पर भारत को आदर्श बनाना चाहिए। भारत तो विश्व गुरु था और रहेगा। भारत की जीवंत संस्कृति यदि कोई है तो वह अहिंसा ही है। भारतीय अर्थशास्त्रियों के भरोसे ही अमेरिका अपनी मंदी से उबरने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में लगा है। हम राष्ट्र के प्रति आस्थावान और समर्पित होकर रहेंगे तो देश को कोई हिला नहीं पाएगा। भारत वासना, विलासिता को नहीं बल्कि उपासना और साधना को पूजने वाला देश है। हमारी दृष्टि अखंड भारत की ओर होना चाहिए। हथकरघा, अंबर चरखा और हस्तशिल्प के कारण तिहाड़ जेल में हुंकार भरने वाले कैदी प्रार्थना कर रहे हैं, हिंसा को भूल गए हैं। कैदियों के जीवन में परिवर्तन आ रहा है। व्यापार से धन नहीं बढ़ता, श्रम करने से बढ़ता है। जो व्यक्ति श्रम करेगा, वो कभी भूखा नहीं सोएगा। श्रमण शब्द की उत्पत्ति श्रमदान से ही हुई है। भारत हमेशा भगवान का भक्त रहा है। राम से नहीं राम नाम का सच्चा सुमिरन करने से ही सारे काम हो जाते हैं। श्रीराम के नाम के जाप के सहारे ही हनुमानजी ने कई बाधाओं को लांघकर अविस्मरणीय कार्य किए। उसी प्रकार देश के सैनिक भी सीमा पर अपनी जान की बाजी लगाए देशहित में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं। --------- सादगी पूर्ण व्यवहार: केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी पूरे कार्यक्रम में बहुत ही सादगी में दिखी। उनके लिए ट्रस्ट ने सोफे पर बैठने की व्यवस्था की थी, ट्रस्ट द्वारा आग्रह करने पर ईरानी ने कहा भारतीय संस्कृति में संतों के सामने ऊँचे स्थान पर बैठना शोभा नहीं देता, और वह आमजन के बीच ही बैठी रहीं। चेहरे पर धूप आने के बावजूद भी अपनी जगह नहीं बदली।
  15. 4 दिसंबर को नेमावर में शाम केेओ समता सागर महाराज जी के उदबोधन के बाद आचार्यश्री का उद्बो्बो्बोन पोस्ट
  16. मम गुरुवर आचार्यश्री विद्यासागर जो रखते है सबकी खबर बिना उठाये मन में कोई विकल्प अरे !मात्र जीव के कल्याण की ही नहीं वो सोचते वो तो करते बात मानव मात्र के उत्थान की उनके हित की उनके जीवन यापन की उनके ज्ञान-ध्यान की उनकी शिक्षा - दीक्षा की इस कलिकाल के है वो साक्षात् ऋषभ जिन्होंने सिखा दिया कर्तव्य निष्ठापन एक गृहस्थ को कैसे करे वो स्वाभिमानी रहकर स्वाधीन बनने का उद्यम इसीलिए बता दिए उन्हें हथकरघा जैसे उद्यम अथवा कृषि के या उनसे बने उत्पादकों के कार्यक्रम निसंकोच होकर करो अडॉप्ट नौकरी नहीं तुम खुद दोगे रोजगार नहीं बनोगे पराधीन कर सकोगे धर्मध्यान अपनी सुविधानुसार बना रहेगा जिससे तुम्हारा धर्म मार्ग प्रशस्त ... नमोस्तु गुरुवर ! अनिल जैन "राजधानी" श्रुत संवर्धक २.१२.२०१९
  17. व्यवस्था ही है ऐसी युगों युगों से इस संसार की जो बड़ो की कृपा से ही चलती है जीवन रूपी गाड़ी सबकी .... कौन मानता है उस कृपा को ये होती हर एक की अपनी अपनी समझदारी कृतज्ञता के भाव होते जिसके मन में उसके जीवन में बनी रहती प्रगति और जो करता उनकी अनदेखी नहीं मिलती उसे सफलता जल्दी .... समयबद्ध होकर जो चलता अपनी जीवन प्रणाली उसे ही मिलती अधिक राशि जैसे फिक्स्ड डिपाजिट पर मिलता ब्याज अधिक ही जितने लंबे समय के लिए करते फिक्स्ड डिपाजिट उतनी अधिक मिलती धनराशि इसी प्रकार जो समयबद्ध होकर रखता / बनाता अपना हिसाब उसको निरंतर मिलता रहता उसका लाभ चाहे नहीं भी होती वो धनराशि उसके हाथ में / संग में लाभ तो गुणित होकर मिल ही रहा होता उसे अबाधित ... जब आता आता इतना नहीं मिलती जगह उसे रखने की इसी प्रकार जानो संबंध को गुरु-शिष्य के चाहे होते दूर शिष्य अपने गुरु से व्यवस्था गुरु की बनी हुए होती ऐसी जो पहुँच रहा होता लाभ निरंतर उसके पास में अबाधित बस, समयबद्ध होकर करता रहे शिष्य क्रियाएं अपनी .... प्रणाम ! अनिल जैन "राजधनी" श्रुत संवर्धक २.१२.२०१९
  18. until
    सानिध्य पूज्य मुनिश्री विराट सागर जी महाराज पूज्य मुनिश्री दुर्लभ सागर जी महाराज पूज्य मुनिश्री संधान सागर जी महाराज Jai Jinendra आप सभी नगर सतवास में आयोजित पंचकल्याणक महामहोत्सव में सादर आमंत्रित हैं। पंचकल्याणक महामहोत्सव में इन्द्र इन्द्राणी बनने का सुनहरा मौका आपको यह जानकर खुशी होगी कि इंद्र इन्द्राणी बनने के लिये आप सादर आमंत्रित हैं और इन्द्र इन्द्राणी के लिए कोई शुल्क नही है "बिल्कुल निःशुल्क" साथ में आपको इन्द्र इन्द्राणी के लिए धोती दुपट्टा, साड़ी फ्री दी जायेगी। एवं भोजन आवास की व्यवस्था भी निःशुल्क रहेगी। इंद्र इन्द्राणी बनने के इच्छुक हमें दिनांक 06/12/2019 तक सुचित करने की कृपा करें। सम्पर्क :- जैन पवन कासलीवाल 8120311641 नितेश जैन 9981949506 दिपक टोंग्या 9993103103 सतीष जैन 9907741278 विजय काला 9893060585 योगेश जैन 9575035555 Welcome To Satwas
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