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जरा याद करो कुर्बानी कार्यक्रम में देश के अमर शहीदों के वंशजों का सम्मान

स्वराज सम्मान समारोह के तहत महान क्रांतिकारी नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में जैन समाज के शीर्षस्थ संत आचार्य विद्यासागर के सानिध्य में “जरा याद करो कुर्बानी इस कार्यक्रम में देश के अमर शहीदों के वंशजों का श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र समिति खजुराह्य द्वारा सम्मान किया गया। इस अवसर पर सभी अमर शहीदों के साथ ब्रिटिश हुकूमत द्वारा की गई बर्बरता, उनकी फांसी आदि को लेकर डाक्यमेटी फिल्म भी दिखाई गई। जैसे ही डाक्यूमेंट्री फिल्म में अंग्रेजों की बर्बरता और देश के वीर सपूतों को फांसी देते दिखाया गया तो उनके वंशजों की आंखों से आंसू बहने लगे। कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गई। अंतिम बादशाह बहादुर शाह जफर के वंशज शाह मुहम्मद खान ने कहा कि बादशाह बहादुर शाह की अस्थियां रंगून में रखी हैं। मेरा आचार्य श्री से आग्रह है कि वह देश की सरकार से कहें कि अस्थियां वापस भारत लाई जाएं।   राष्ट्र हित चिंतक परम पूज्य 108 आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महामुनि राज के अवचेतन में चलने वाले विचार चक्र को पकड़ने का प्रयास हमने इससे पहले सर्वोदय सम्मान 2018 के माध्यम से किया था, जिसमें देश के अलग अलग हिस्सों में नेपथ्य में काम करने वाले नायकों का सम्मान किया गया था, उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए खजुराहो में स्वराज सम्मान वर्ष 2018 का आयोजन किया गया |   सम्मान का मुख्य उद्देश है कि देश की बाल युवा पीढ़ी अपने इतिहास से वाकिफ हो, उस बलिदान के इतिहास से जिसके कारण वे आज खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं, यह बाल युवा पीढ़ी आजादी के रणबांकुरों के बलिदान से प्रत्यक्ष अवगत हो और जाने की आजादी हमें बहुत आसानी से नहीं मिली थी इसके लिए लाखों जाने अनजाने लोगों ने अपने प्राणों की आहुति लगाई थी| याद करो बलिदान कार्यक्रम में 18 शहीद परिवारों को स्वराज सम्मान से सम्मानित किया गया है| इतिहास क्रम के माध्यम से चुने गए उदाहरण के तौर पर महाराणा प्रताप से लेकर श्रीकृष्ण सरल तक शहीदों में दक्षिण भारत की जैन रानी महादेवी अबबका चोटा भी शामिल है, जिन्होंने 6 बार पुर्तगालियों और अंग्रेजों को पराजित किया और मूड बद्री में अपनी रियासत को आजाद रखा तो दूसरी तरफ नेताजी सुभाष चंद्र बोस के निजी अंगरक्षक व ड्राइवर कर्नल निजामुद्दीन के सुपुत्र मोहम्मद अकरम को भी आमंत्रित और सम्मानित किया गया है| 21 अक्टूबर 1943 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में आजाद हिंद सरकार का गठन किया गया ,उसके 75 वर्ष पूर्ण होने पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था जरा याद करो बलिदान कार्यक्रम की रूपरेखा उस समय बनी जब अपने एक उपदेश में उन्होंने कहा कि शरीर राष्ट्रीय संपदा है|   सम्मान समारोह मे क्रांतिकारी बलिदानियों के वंशजो को सम्मानित किया गया जिनके नाम निम्न प्रकार है -  

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उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजबादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादब पूर्व मंत्रि मंडल के साथ, आचार्य श्री के दर्शनार्थ खजुराहो पहुचे

आज सुबह आचार्य श्री के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजबादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादब पूर्व मंत्रि मंडल के साथ खजुराहो पहुचे    
 

पुस्तक "बस्तर में अहिंसा की महिमा" का खजुराहो में हुआ विमोचन

खजुराहो में आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज जी  को समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता शफीक खान और डा अर्चना जैन की पुस्तक "बस्तर में अहिंसा की महिमा" का विमोचन आचार्य श्री के ससंघ सानिध्य में  हुआ।पुस्तक में बस्तर के वनवासी अंचल में अहिंसा और शाकाहार का वर्णन है, पुस्तक की ई-प्रति  सादर संलग्न प्रेषित है |   खजुराहो - आचार्य श्री को बस्तर में अहिंसा की महिमा पुस्तक की प्रथम प्रति समर्पित करते हुए लेखक शफीक खान      
 

अहिंसा पद यात्रा कुण्डलपुर से खजुराहो दिनांक 1 अक्टूबर से

कुण्डलपुर से खजुराहो की अहिंसा पदयात्रा का गुरुदेव से आशीर्वाद व् मुख्यमंत्री ने दी शुभ कामनाये 1 से 7 अक्टूबर तक मिलेगा गुरुदेव का आशीर्वाद |  
 

आचार्यश्री विद्यासागर महाराज जी के ससंघ सान्निध्य में शिवराज सिंह चौहान ने खजुराहो में हथकरघा वस्त्रो का किया अवलोकन

आचार्य विद्यासागर जी महाराज ससंघ की उपस्थिति में खजुराहो श्रमदान पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय शिवराज सिंह जी चौहान हथकरघा के वस्त्रो का अवलोकन करते हुए |
 

स्वर्णोदय जिनालय (खजुराहो) के शिलान्यास समारोह में पधारे मुख्यमंत्री एवं वित्तमंत्री

सामूहिक कार्य का श्रेय समूह को ही जाता है, कोई वियक्ति विशेष को नही -आचार्य विद्यासागर जी    स्वर्णोदय जिनालय के शिलान्यास समारोह में पधारे मुख्यमंत्री एवं वित्तमंत्री | विश्व पटल पर संस्कृति धरोहरों में अपना स्थान बनाने के बाद जिसे अंतरराष्ट्रीय संस्था यूनेस्को ने विश्व संपदा के रूप में चंदेलकालीन मंदिरों को उत्कृष्ट स्थान पूरे विश्व मे दिलाया। आज उस इतिहास में एक नई ऊर्जा के साथ स्वर्णोदय तीर्थ न्यास अतिशय क्षेत्र खजुराहो में एक भव्य स्वर्णिम जिनालय का जो कि विश्व मे सबसे ऊंचा एवं शिल्पकारी में खजुराहो को विश्व पटल पर न कि एक पर्यटन नगरी के रूप में बल्कि स्वर्णिम तीर्थ स्थान के रूप में पह्चान दिलाएगा। अपने उद्बोधन में मान्यनिय मुख्यमंत्री ने अचार्य विद्यासागर जी ने जीवदया सम्मान प्राप्त करने वाले सभी पशु पक्षी प्रेमियों को हार्दिक बधाई दी। तथा उन्होंने इस कार्य को संचालित करने के लिए अलग मंत्रालय बनाने की घोषणा की। स्वर्णोदय तीर्थ न्यास समिति के विशेष निमंत्रण पर मान्यनिय मुख्य मंत्री, वित्त मंत्री जयंत मलैया एवं श्री मल्ल कुमार जैन पंडित सुधीर शर्मा, श्री रमेश जैन, विनोद जैन, योगेश जैन ने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण पखारकर आशीर्वाद लिया। समिति के महामंत्री इंजी० रमेश जैन ने सम्पूर्ण भारत वर्ष से पधारे तीर्थ यात्रियों का एवं मुख्य मंत्री वित्त मंत्री जिला प्रशासन खजुराहो डेवलपमेंट एशोसिएशन तथा समस्त खजुराहो वासियों का ह्रदय से स्वागत हार्दिक अभिनंदन किया। तथा उन्होने पंडित सुधीर शर्मा का कार्यक्रम में विशेष सहयोग देने एवं कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आभार वयक्त किया।     आचार्य महाराज के सम्मुख मुख्यमंत्री के उद्गार/भावनाओं की अभिव्यक्ति 1. देश का प्रथम "गौसंवर्धन मंत्रालय"होगा मध्यप्रदेश में -शिवराज सिंह 2. जीव दया के क्षेत्र में सबको मिलकर कार्य करना -शिवराज सिंह चौहान 3.आचार्य श्री जी की कृपा बरसती रहे -मुख्यमंत्री       इस अवसर पर पूरे देश से जैन समुदाय के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे वैसे तो यह भीड़ प्रतिदिन होती है पर  आज का दिन कुछ विशेष  भीड़ बाला वाला रहा विदित हो आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज खजुराहो में चतुर्मास कर रहे हैं जिनके चलते प्रतिदिन ही हजारों की संख्या में उनके अनुयाई यहां पहुंच रहे हैं | कार्यक्रम का सफल संचालन ब्रह्मचारी श्री सुनील भैया जी एवं दीपक भैया जी ने किया।      
 

खजुराहो में समाधि संपन्न 

समाधि संपन्न  खजुराहो, 
पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज  ससंघ  के सानिध्य एवं निर्देशन में दस प्रतिमाधारी जयसुख भाई वसानी (C.A). मुंबई निवासी की सल्लेखना अनंत चौदस 23/9/18 को सानंद संपन्न हुई | वे ७८ वर्ष के थे | विगत २० वर्षों से व्रती जीवन निर्वाह करते हुए 16 जल उपवास व 6 उपवास (अंत समय बेला)| के साथ यह मृत्यु महोत्सव को उत्साह पूर्वक पूर्ण किया |            
 

"मूकमाटी" भोज विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में जुड़ी

"मूकमाटी" भोज विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में जुड़ी   दिगम्बर जैनाचार्य श्री विद्यासागर जी के द्वारा आधुनिक हिन्दी महाकाव्य में अप्रतिम योगदान स्वरूप धर्म, दर्शन और आध्यात्मिक दृष्टि से सम्पन्न लोकविश्रुत कालजयी ‘मूकमाटी' महाकाव्य का सृजन किया गया है। मानव जीवन मूल्यों एवं साहित्य के भूलते जा रहे आस्था भाव को युवा पीढ़ी एवं छात्रों को प्रदान करने वाली इस अभिनव कृति को म. प्र. भोज( मुक्त विश्वविद्यालय, भोपाल के एम. ए. हिन्दी पूर्वार्ध-स्नातकोत्तर उपाधि पाठ्यक्रम में अब शामिल किया गया है।   हिन्दी सन्त काव्य परम्परा तथा आचार्य विद्यासागर के काव्य में लोक मंगल भावना, आचार्य विद्यासागर-जीवन और व्यक्तित्व परिचय, आचार्य विद्यासागर का जीवन दर्शन एवं रचना संसार (संक्षिप्त परिचय), ‘मूकमाटी' का महाकाव्यत्व- उद्देश्य, कथानक, पात्र योजना एवं चरित्र चित्रण, संवाद योजना, परिस्थिति चित्रण, अभिव्यंजना सौंदर्य का विश्लेषण व 'मूकमाटी' के प्रमुख पद्यों की व्याख्या रूप इस प्रश्न पत्र में पाँच इकाइयाँ समायोजित की गई हैं। चार प्रश्नपत्रों वाले इस पाठ्यक्रम की पुस्तकें विश्वविद्यालय से प्राप्त की जा सकती हैं।   इस पाठ्यक्रम में शामिल होने हेतु ऑन् लाइन फार्म भरे जा रहे हैं। लगभग पचपन सौ रुपये शुल्क वाले इस चतुर्थ प्रश्नपत्र में विशेष कवि - आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज कृत 'मूकमाटी' को पढ़ाए जाने वाले इस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के इच्छुक विद्यार्थियों को आगामी ३० सितम्बर तक ऑन लाइन ही फार्म भरना होगा। परीक्षा में तैयारी कराने हेत डॉ. शीलचन्द पालीवाल, पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष - एस. एस. एल. जैन पी. जी. कॉलेज, स्वर्णकार कॉलोनी एवं शिक्षक निर्मलकुमार जैन, गाड़ी अड्डा रोड, गल्ला मण्डी के पास, | विदिशा से सम्पर्क करके निःशुल्क मार्गदर्शन लिया जा सकता है।

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"मूकमाटी' महाकाव्य" निजी विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में भी शामिल

"मूकमाटी" महाकाव्य निजी विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में भी शामिल   दिगम्बर जैनाचार्यप्रवर सन्तशिरोमणि श्री विद्यासागर जी महाराज ने अपनी सुदीर्घ साधना से अर्जित दिव्यज्ञान को गागर में सागर के समान भरकर सन् १९८७ में हिन्दी साहित्य जगत् को अप्रतिम योगदान के रूप में ‘मूकमाटी' महाकाव्य प्रदान किया था। यह कालजयी महाकाव्य अपनी साहित्यिक आभा से जनमानस की चेतना को प्रकाशित कर रहा है व आत्मोत्थान एवं सामाजिक समरसता के दिव्य सन्देश के माध्यम से सुषुप्त चेतना को जाग्रत कर रहा है। ‘मूकमाटी' महाकाव्य की विषयवस्तु पर केन्द्रित होकर मध्यप्रदेश, नई दिल्ली, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, छत्तीसगढ़ आदि प्रदेशों के अनेक विश्वविद्यालयों में अद्यतन ४डी. लिट्., २४ पी-एच. डी. के शोध प्रबन्ध एवं ६ एम. फिल., २ एम. एड. तथा ५ एम. ए. के लघुशोध प्रबन्ध रूप में ४१ शोधकार्य हो चुके/रहे हैं।   आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित ज्येष्ठ मुनि श्री समयसागर जी महाराज के साथ मुनि श्री प्रशस्तसागर जी, मुनि श्री मल्लिसागर जी तथा मुनि श्री आनन्दसागर जी महाराज का वर्षायोग-२०१८ विन्ध्य क्षेत्र की सुप्रसिद्ध धर्मनगरी सतना में हो रहा है। संघस्थ मुनि श्री मल्लिसागर जी महाराज की सत्प्रेरणा से श्री रुचिर जैन, ( साईं कृपा, जे. आर. बिरला मार्ग, सन्तोषी माता के पास ) सतना, म. प्र. ने अथक एवं सार्थक प्रयास किया। इसी के परिणामस्वरूप निजी विश्वविद्यालय के रूप में प्रसिद्ध 'श्री कृष्णा विश्वविद्यालय' ने अपने पाठ्यक्रम में अब'मूकमाटी'महाकाव्य को भी शामिल कर लिया है।   श्री कृष्णा विश्वविद्यालय, छतरपुर, म. प्र. के कुलसचिव के पत्र क्रमांक १९/एसकेयू/२०१८, दिनांक ०७-०९-२०१८ के अनुसार “सन्त शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज द्वारा लिखित पुस्तक ‘मूकमाटी' को स्नातकोत्तर उपाधि हिन्दी विषय के पाठ्यक्रम चतुर्थ सेमेस्टर के तृतीय प्रश्नपत्र में वैकल्पिक प्रश्नपत्र 'कोई एक साहित्यकार-आचार्य विद्यासागर' के रूप में पढ़ाये जाने हेतु पाठ्यक्रम में सम्मिलित कर लिया है।''   "मूकमाटी" महाकाव्य अब तक बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी (उत्तरप्रदेश), पण्डित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर (छत्तीसगढ़ ), राष्ट्रसन्त तुकड़ोजी महाराज नागपुर विद्यापीठ, नागपुर ( महाराष्ट्र), सौराष्ट्र विश्वविद्यालय, राजकोट (गुजरात), अटलबिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय, भोपाल (म. प्र.), बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल (म. प्र.), विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन (म. प्र. ) आदि के एम. ए./एम. फिल.-हिन्दी तथा अंग्रेजी आदि के विविध पाठ्यक्रमों में भी ‘मूकमाटी' महाकाव्य सम्मिलित किया जा चुका है।   मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के लिए मध्यप्रदेश राज्य शिक्षा केन्द्र, भोपाल' द्वारा निर्मित 'कक्षा नवमी' विषयक 'नवनीत- हिन्दी विशिष्ट' नामक पाठ्यपुस्तक २०१८ के संस्करण में 'कविता का स्वरूप एवं विकास' के अन्तर्गत 'पद्य साहित्य का इतिहास' शीर्षक के दसवें पाठ 'विविधा' में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का जीवन परिचय सहित' मूकमाटी'महाकाव्य के पृष्ठ १६९-१७० पृष्ठों पर मुद्रित कविता का चयनित अंश तीसरे पाठ के रूप में स्वाभिमान' नाम से संकलित व प्रकाशित होकर अब मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों के ज्ञानार्जन में सहयोगी बनेगा।   इसके अतिरिक्त रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर, मध्यप्रदेश भोज ( मुक्त) विश्वविद्यालय, भोपाल, सेज यूनिवर्सिटी, इन्दौर (म.प्र.), बस्तर विश्वविद्यालय, जगदलपुर ( छत्तीसगढ़ ) इत्यादि के पाठ्यक्रमों में भी ‘मूकमाटी' महाकाव्य को शामिल किये जाने सम्बन्धी प्रक्रिया गतिमान है।  

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माननीय राष्टपति जी को मूकमाटी सचित्र की प्रति सादर भेंट

राष्ट्रपति को मूकमाटी सचित्र की प्रति सादर भेट   आचार्य श्री विद्यासागर जी के 50 वें दीक्षा दिवस पर संयम स्वर्ण महोत्सव के अवसर पर महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद महोदय को भारतीय ज्ञानपीठ के प्रबंधन्यासी साहू अखिलेश जैन के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल में श्री स्वर्दशभूषण जैन (न्यासी, भारतीय ज्ञानपीठ), श्री अशोक पाटनी, श्री एस. के. जैन, डॉ. सौगनी, श्री प्रभात जैन(मुम्बई) और श्री पंकज जैन आदि ने आचार्य श्री के द्वारा लिखित पुस्तक मूकमाटी सचित्र की प्रति भेट की।   यह महाकाव्य धर्म-दर्शन एवं अध्यात्म के सार को आज की भाषा एवं मुक्त - छन्द की मनोरम काव्य शैली में निबद्ध कर कविता रचना को नया आयाम देने वाली एक अनुपम कृति। आचार्य श्री विद्यासागर जी की काव्य प्रतिभा का यह चमत्कार है कि माटी जैसी निरीह, पददलित, व्यथित वस्तु को महाकाव्य का विषय बनाकर उसकी मूकवेदना और मुक्ति की आकांक्षा को वाणी दी है। कुम्भकार शिल्पी ने मिट्टी की ध्रुव और भव्य सत्ता को पहचानकर कूटछानकर, वर्णसंकर कंकर को हटाकर उसे निर्मल मूदुता का वर्णलाभ दिया है। यह महाकाव्य साहित्य जगत् और आध्यत्मिक जगत् के लिए सदैव उपादेय है।   इस महाकाव्य अनेकों शोध कार्य हो चुके है। वर्तमान में यह महाकाव्य 36 विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल है। 19 भाषाओं में इसका अनुवाद प्रकाशित हो चुका है। अभी हाल ही में भारतीय ज्ञानपीठ, नयी दिल्ली से यह महाकाव्य सचित्र रूप में प्रकाशित हुआ है।     आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज द्वारा लिखित काव्य मूक माटी को माननीय राष्ट्रपति श्रीमान रामनाथ जी कोविंद को प्रदान करते हुए समाज के सृष्टि गन अशोक जी पाटनी एवं अन्य.  
 

संयम स्वर्ण महोत्सव वर्ष के अंतर्गत देश-विदेश में हुए मुख्य कार्यक्रमों को श्री विद्यासागर कार्मिक जगत समाचार पत्र द्वारा 20 पृष्ठीय बहुरंगीय विशेषांक में प्रकाशित किया गया

संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज के 50वें संयम स्वर्ण महोत्सव वर्ष के अंतर्गत देश-विदेश में हुए मुख्य कार्यक्रमों को श्री विद्यासागर कार्मिक जगत समाचार पत्र द्वारा 20 पृष्ठीय बहुरंगीय विशेषांक में प्रकाशित किया गया है।  
 

ऐतिहासिक  मंगल कलश स्थापना से चातुर्मास शुरू सम्यकज्ञान, सम्यक चारित्र और दान आपके साथ रहेगा - आचार्य विद्यासागर

ऐतिहासिक  मंगल कलश स्थापना से चातुर्मास शुरू
सम्यकज्ञान, सम्यक चारित्र और दान आपके साथ रहेगा - आचार्य विद्यासागर
छतरपुर । आध्यात्म एवं पर्यटन नगरी खजुराहो में आचार्य विद्यासागर जी महाराज का आज से चातुर्मास प्रारंभ हुआ। कलशस्थापना समारोह में  देश-विदेश से भारी संख्या में उनके अनुयायी यों  ने पर्यटन नगरी खजुराहो पहुंचकर उनका आर्शीवाद लिया। जिला कलेक्टर रमेश भंडारी और उनकी पत्नी ने भी इस मौके पर पहुंचकर आचार्य विद्यासागर जी के चरण पखारे और आर्शीवाद प्राप्त किया। इस मौके पर कलशस्थापना भी की गयी। आज के इस कार्यक्रम में भारी संख्या में जैन समाज सहित अन्य धर्मो के लोग भी शामिल हुए। कलश स्थापना के इस कार्यक्रम का संचालन और निर्देशन बा.ब्र. सुनील भैया अनन्तपुरा वालों द्वारा किया गया। 
रविवार को दोपहर २ बजे से से तीन प्रकार के कलशों के माध्यम से समाज के श्रावकगण   चातुर्मास की कलश स्थापना हर्सोल्लास के साथ की गयी। प्रथम कलश यानि सबसे बड़े 9 कलश स्थापित किये गये ,मध्यम 27 कलश और सबसे छोटे 54 कलश स्थापित किये किये। ये सभी कलश आचार्य श्री के मुखारविंद से विधिविधान पूर्वक मंत्रो के उच्चा रण से स्थापित हुए,जिसे श्रावकगण बोली लेकर स्थापित किया गया। ये सभी कलश विश्व शांति और विश्व कल्याण के उद्देश्य और  वर्षायोग के निर्विघ्न सम्पन्न होने   की कामना से स्थापित किये जाते है। प्रथम कलश का सौभाग्य तरूण जी काला मुम्बई 2 करोड़ 7 लाख, द्वितीय कलश डॉ. सुभाषशाह जैन मुम्बई 1 करोड़ 51 लाख, तृतीय कलश का सौभाग्य हुकुमचंद्रजी काका कोटा 1करोड़ 17 लाख, चतुर्थ कलश का सौभाग्य उत्तमचंद्र जैन कटनी कोयला वाले 1 करोड़ 8 लाख, पंचम कलश का सौभाग्य प्रेमीजैन सतना वाले 1 करोड़ 31 लाख, छठवां कलश का सौभागय श्री प्रभातजी जैन मुम्बई पारस चैनल करोड़  8 लाख, सातवां कलश ऋषभ शाह सूरत 1 करोड़ 8 लाख, आठवां कलश  पं. सुभाष जैन भोपाल 54 लाख एवं पुष्पा जैन बैनाडा आगरा वाले एवं नौवां कलश का सौभाग्य अशोक पाटनी 2 करोड़ 52 लाख को प्राप्त हुआ। 
स्थानीय विधायक विक्रम सिंह नाती राजा और नगर परिषद् अध्यक्षा कविता राजे बुंदेला, इंदौर विधायक रमेश मेंदोला  ने भी कलश स्थापना समारोह में आचार्य श्री को श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया। 
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि आप सब यहां सम्यकज्ञान, सम्यक चारित्र और दान देकर अगले भव के लिए अपने साथ ले जाने वाले है। आचार्यश्री ने कहा कि लगभग 38 वर्ष पूर्व मै खजुराहो पंचकल्याणक के लिए आया था। यहां कि कमेटी बार-बार खजुराहो के लिए आग्रह करती रही। मैं भी इस बार चलते-चलते यहां पहुंच गया। आचार्यश्री ने कहा कि यहां के राजा छत्रसाल का कुण्डलपुर के बड़े बाबा से गहन संबंध रहा है। राजा छत्रसाल ने बड़े बाबा को जब छत्र चढ़ाया उसके साथ ही उन्हें विजय प्राप्त हुयी। महाराजश्री ने कहा कि व्यक्ति को धन अपने पास श्वास जैसा रखना चाहिए ताजी ग्रहण करें और पुरानी निकालते जाए, सम्पत्ति हाथ का मैल है इसे साफ करते रहें। आचार्यश्री ने कहा कि आप सबका उत्साह सराहनीय है। खजुराहो क्षेत्र के विकास के लिए  अपना योगदान देते रहें। पूर्व में खजुराहो क्षेत्र कमेटी सहित जैन समाज छतरपुर, पन्ना,सतना, टीकमगढ़ सहित एवं बाहर से पधारे अतिथियों ने आचार्यश्री को श्रीफल भेंट किया।
 

आचार्य श्री विद्यासागर जी के ससंघ चतुर्मास कलश की स्थापना आज,देश-विदेश से आएंगे श्रद्धालु

खजुराहो । प्रख्यात जैन संत शिरोमणि108 आचार्य विद्या सागर जी महाराज के ससंघ चातुर्मास( वर्षायोग) के कलश की स्थापना आज रविवार 30 जुलाई को दोपहर डेढ़ बजे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी खजुराहों में एक गरिमामयी औऱ भव्य कार्यक्रम में होगी।इस बड़े और अनूठे धार्मिक आयोजन के प्रत्यक्षदर्शी बनने न केवल समीपी क्षेत्रों से वरन देश-विदेश से आचार्यश्री के भक्तजन व श्रद्धालु खजुराहो पहुंचना शुरू हो गए है।              आचार्य विद्या सागर महाराज  ससंघ खजुराहो में 14 जुलाई से  विराजमान है। पूज्य आचार्यश्री ने बुधवार को ससंघ अपनी चातुर्मास स्थापना शांति नाथ भगवान के समक्ष विधि विधान के साथ कर ली थी।इस दिन संघ के सभी साधुओं ने उपवास भी रखा था। अब आचार्यश्री ससंघ एक निश्चित सीमा बांधकर अब 4 माह तक खजुराहो में रहकर धर्म ध्यान करेगे।           आज  रविवार 30 जुलाई को दोपहर 1:30 से तीन प्रकार के कलशों के माध्यम से समाज के श्रावकगण  चातुर्मास की कलश स्थापना हर्सोल्लास के साथ करेंगे। प्रथम कलश यानि सबसे बड़े 9कलश स्थापित किये  जाएंगे ,मध्यम 27 कलश और सबसे छोटे 54 कलश स्थापित किये जायेंगे ।ये सभी कलश आचार्य श्री के मुखारविंद से विधिविधान पूर्वक मंत्रो के उच्चा रण से स्थापित होंगे,जिसे श्रावकगण बोली लेकर स्थापित करेगे।ये सभी कलश विश्व शांति और विश्व कल्याण के उद्देश्य और  वर्षायोग के निर्विघ्न सम्पन्न होने   की कामना से स्थापित किये जाते है। इस बार के चातुर्मास की ख्याति विश्व स्तर पर होगी और  अतिशय क्षेत्र खजुराहो के जिनालयों के दर्शन करने के लिए देश विदेश के आएंगे। खजुराहो क्षेत्र में आचार्यश्री के चातुर्मास से जैन धर्म और दर्शन की प्रभावना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही है।        साधुजन इस लिए करते हैं चातुर्मास-- डॉ. सुमति प्रकाश जैन ने चातुर्मास की अवधारणा और उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए बताया कि जैन धर्म अहिंसा प्रधान धर्म है।वर्षाकाल में लाखों जीवों की उत्पत्ति होती है और वे बहुतायत से चहुंओर व्याप्त रहते हैं।ऐसे में पदबिहारी साधुजनों से किसी सूक्ष्म से सूक्ष्म जीव की हिंसा न हो,इस लिए जैन साधु वर्षाकाल के चार महीनों में अपनी पदयात्रा को रोक कर किसी एक स्थान पर रुक कर अपने आत्मकल्याण हेतु स्वाध्याय,धार्मिक-आध्यात्मिक ग्रंथो, जैन धर्म व दर्शन का अध्ययन-मनन करते हैं और श्रावकों को अपने मंगल प्रवचनों से सदमार्ग पर निरन्तर चलने की प्रेरणा देते हैं।डॉ जैन ने बताया कि जैन धर्म के साथ साथ हिन्दू धर्म मे भी साधुओं के चातुर्मास की परंपरा है।वे भी वर्षाऋतु में एक जगह रह कर अपना चातुर्मास व्यतीत करते हुए धर्मध्यान में लीन रहते है।        कलश स्थापना के इस कार्यक्रम का संचालन और निर्देशन ब्र. सुनील भैया ,अनन्तपुर करेंगे ।आयोजन को सानन्द ओर निर्विघ्न सम्पन्न करने के लिए विभिन्न समितियां बना कर उन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई ह
 
 

संयम स्वर्ण महोत्सव पर विशेष डाक लिफाफा जारी

डाक विभाग ने आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज के संयम स्वर्ण महोत्सव पर विशेष डाक लिफाफा जारी किया अशोक नगर  संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज के संयम स्वर्ण महोत्सव पर अशोक नगर डाक विभाग ने आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज के संयम स्वर्ण महोत्सव पर विशेष आवरण लिफाफा अतिशय क्षेत्र थूवोनजी कमेटी के पुण्यर्जन मैं मुनि श्री निर्णय सागर जी महाराज मुनि श्री पदमसागर जी महाराज के सान्निध्य सुभाष गंज में विशेष समारोह के दौरान  जारी किया है ।
समारोह में डाक विभाग साभागिये अधीक्षक व्ही एस तोमर सहा अधीक्षक टी एस व्हील व्ही पी राठौर आर के शिवहरे  एम के शर्मा अशोक नगर  का थूवोनजी कमेटी के अध्यक्ष सुमत अखाई महामंत्री राकेश कासंल मत्री विनोद मोदी विपिन सिघई समाज के अध्यक्ष रमेश चौधरी उपाध्याय गिरीश जैन वजरंड़कमेटी के मत्री प्रदीप जैन यज्ञनायक पदम कुमार वाझल राकेश अमरोद आदिके साथ विशेष लिफाफा जारी किया  अतिथियो का सम्मान कमेटी ने किया इसके पहले धर्म सभा को संबोधित करते हुए थूवोनजी कमेटी के प्रचार मत्री विजय धुर्रा ने कहा कि आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज के  संयम स्वर्ण महोत्सव पर डाक विभाग ने डाक टिकट के साथ लिफाफा जारी किया है जिसको हम मुनि संघ के सान्निध्य में विमोचन कर रहे हैं 
मुनि श्री निर्णय सागर जी महाराज ने कहा कि  आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज ने जंगलो में रहकर   कठिन तपस्या करते हुए नर्वदा नदि के तट पर वालिकाओ की शिक्षा के लिए प्रतिभा स्थली की नारायण श्री कृष्ण ने गायो की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को उठा लिया नारायण श्री कृष्ण जी  के गीत  की रक्षा कार्य को वर्तमान में आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज की पावन प्रेरणा से आगे बढ़ रहे हैं
 

मैं तो ठेठ बाँस था, गुरु कृपा से बाँसुरी बना : जैनाचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

खजुराहो १७ जुलाई २०१८. आज मंगलवार प्रात: संयम स्वर्ण महोत्सव समापन समारोह में धर्मनायक, संघनायक, लोकनायक और संस्कृति नायक जैनाचार्य श्री विद्यासागर जी ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में  कहा कि गुरु जी ने मुझे धर्म मार्ग पर प्रवृत्त कर दिया। भाग्यशाली हूँ कि मुझ अपढ़, अनगढ़, जिसे कुछ नहीं आता था उसे स्वीकार कर लिया। मैं तो ठेठ बाँस था, गुरु कृपा से  बाँसुरी बन गया। गुरू ने दीया दे दिया मुझे । मुझे न भाषा का और न भाव का ज्ञान था, किंतु गुरु ने सब कुछ समझा और स्नेह दिया। अाज के जीवन में प्रचार-प्रसार, विज्ञापन का बोलबाला है। बहुत कुछ ग़लत दिशा में है, जिससे भारतीयता पर आधारित शिक्षा-प्रणाली से बचा जा सकता है। गुरु जी के द्वारा अंकुरित बीज से समाधान संभव है। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज को उनके गुरु आचार्यश्री १०८ ज्ञानसागर जी महाराज ने आषाढ़ शुक्ल पंचमी तदनुसार ३० जून १९६८ को मुनि दीक्षा प्रदान की थी।     संयम वर्ष से राष्ट्रीय संयम स्वर्ण महोत्सव समिति ने सर्वोदय सम्मान नामक एक पुरस्कार आरंभ किया है जिसमें समाज के उन नायकों का सम्मान किया जाता है जो विज्ञापन की चकाचौंध से दूर रहकर भारतीय संस्कृति, सभ्यता और जीवन पद्धति के संरक्षण में लगे हुए हैं। आज के इस पावन दिवस पर ऐसे ही ९ व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया जिनमें सर्वश्री 1.आदिलाबाद आंध्र प्रदेश में स्थित कला के स्वर्गीय रविंद्र शर्मा गुरुजी - कला ,कारीगरी एवं सामाजिक व्यवस्था के जानकार; 2.श्री एच वाला सुब्रमण्यम संगम एवं तमिल साहित्य के गैर हिंदी भाषी सुप्रसिद्ध अनुवादक. आपने दक्षिण भारत में हिंदी के प्रचार एवं प्रसार में निर्णायक भूमिका निभाई है; 3. टिहरी उत्तराखंड प्रदेश से आए हुए श्रीमान विजय जड़धारी जी. विजय जी चिपको आंदोलन की उपज है, और वर्तमान में बीज बचाओ आंदोलन से जुड़े हुए है; 4. श्रीराम शर्मा जी मध्य प्रदेश से संबंध रखते हैं, आपके पास भारतीय राष्ट्रीय स्वाधीनता संग्राम आंदोलन के तमाम महत्वपूर्ण दस्तावेज यथा पत्र पत्रिकाएं ,अखबार एवं ऐतिहासिक महत्व की वस्तुओं का अद्भुत संग्रह है; 5. बाबा आया सिंह रियारकी महाविद्यालय जिला गुरदासपुर पंजाब के संचालक गण. महिला शिक्षा के बाजारीकरण के खिलाफ एक स्वदेशी प्रयोग, एक ऐसा अकादमिक संस्थान जो बालिकाओं के लिए बालिकाओं के द्वारा बालिकाओं का महाविद्यालय है; 6. महाराष्ट्र राज्य के गढ़चिरौली जिले के मेडा लेखा गांव के भूतपूर्व सरपंच श्री देवाजी तोफा भाई. आपने गांधीवादी संघर्ष कर प्राकृतिक संसाधनों पर ग्राम वासियों के अधिकारों को सुनिश्चित किया. आप का नारा है हमारे गांव में, हम ही सरकार; 7. राजस्थान उदयपुर के भाई रोहित जो विगत कई वर्षों से जैविक कृषि में संलग्न है और अपने प्रयोगों के माध्यम से इसे युवा पीढ़ी में लोकप्रिय भी कर रहे हैं; 8. छत्तीसगढ़ के शफीक खान जो जीवदया, शाकाहार, नशामुक्ति और गौरक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य कर रहे हैं; 9.गुजरात से अभिनव शिल्पी श्री विष्णु कांतिलाल त्रिवेदी। जिन्होंने ने अनेक भव्य मंदिरों का निर्माण किया है।
पुरस्कार में श्रीफल, दुशाला, प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह, श्रमदान निर्मित खादी के वस्त्र और ५१ हजार रुपये की राशि प्रदान की गई।  कार्यक्रम में प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ जबलपुर, डोंगरगढ़, रामटेक, पपौरा जी और इंदौर की ३०० से अधिक छात्राओं ने अपने मनभावन प्रस्तुतियों से उपस्थित विशाल संख्या में उपस्थित गुरू भक्तों का मन मोह लिया।   दोपहर के प्रवचनों में गुरुदेव ने महाराजा छत्रसाल द्वारा कुंडलपुर के बड़े बाबा की प्राचीन प्रतिमा के संरक्षण में उनके योगदान का उल्लेख किया, संयम के महत्व पर प्रकाश डाला और  आचार्यश्री १०८ ज्ञानसागर जी महाराज के प्रति अपनी विनयांजलि प्रकट की।   समारोह में राष्ट्रीय संयम स्वर्ण महोत्सव समिति के पदाधिकारियों में सर्वश्री अशोक पाटनी (आरके मार्बल्स), प्रभात जी मुंबई, राजा भाई सूरत, विनोद जी जैन कोयला, पंकज जैन, पारस चैनल की उल्लेखनीय उपस्थिति रही| राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य सुनील सिंघी, श्रीमती ललिता यादव, मध्यप्रदेश शासन राज्य मंत्री,  पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण और अहमदाबाद शहर के महापौर श्री गौतम भाई शाह ने आचार्यश्री को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया.   संयम स्वर्ण महोत्सव के पावन दिवस पर केंद्रीय मंत्री सुश्री उमा भारती ने आचार्य श्री  आशीर्वाद प्राप्त किया और उनसे अनुरोध किया कि आचार्य श्री आप इस वर्ष अपना चातुर्मास खजुराहो में ही करें साथ ही उन्होंने आचार्य श्री से हथकरघा, भारतीय भाषाओं, भारतीय संस्कृति और सभ्यता के बारे में विचार विमर्श किया.    
 

ह्यूस्टन अमेरिका में मनाया गया संयम स्वर्ण महोत्सव

२४ जून २०१८   On June 24, Sunday we conducted  a 90 minute very informative program at the Jain temple in Houston, Texas, USA to commemorate the 50th year of  Acharya Vidya Sagar jis Dixa. Nearly 150 people participated. There were several speakers; 2 Jain  samanis, Ajit Sangave, myself and others. It was very well organized. Dr. Sulekh C. Jain                  
 

प्रेस विज्ञप्ति- जैन समाज ने लिया तीर्थस्थलों पर वृक्षारोपण का संकल्प

मुंबई. 4 जुलाई 2018. सुप्रसिद्ध जैन संत आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की दीक्षा के 50 वें वर्ष को  देशभर का जैन समाज ‘संयम स्वर्ण महोत्सव’ के रूप में पिछले एक वर्ष से विभिन्न आयोजनों के माध्यम से मना रहा है, इसी कड़ी में पिछले वर्ष ‘राष्ट्रीय संयम स्वर्ण महोत्सव समिति’ ने जुलाई २०१७ में “संयम स्वर्ण महोत्सव वर्ष २०१७-१८” के अंतर्गत हरित जैन तीर्थ अभियान का संकल्प पारित किया था और लक्ष्य रखा था कि अगले 5 वर्षों में प्रमुख तीर्थ स्थानों पर 5 लाख पेड़ लगाए जाएँगे ।  इस अभियान के अंर्तगत अनेक तीर्थस्थानों और मंदिर परिसरों में बड़ी संख्या में वृक्षारोपण किया गया था और इस साल आगामी आषाढ़ शुक्ल पंचमी अर्थात 17 जुलाई 2018 को आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की दीक्षा के 50 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं और उनका 51 वाँ दीक्षा दिवस देशभर में मनाया जाएगा, विभिन्न राज्यों के जैन धर्मावलम्बियों ने अपने स्तर अनेक धार्मिक आयोजनों और सामाजिक हित के काम करने की योजना बना रखी है, ऐसे समय में वृक्षारोपण अभियान को नाम दिया गया है “विद्या तरु/विद्या-वाटिका” वृक्षारोपण अभियान। समिति के गौरव अध्यक्ष श्री अशोक पाटनी (आरके मार्बल्स) ने एक अपील जारी कर भारत के समस्त तीर्थ क्षेत्रों के न्यासियों एवं पदाधिकारियों अनुरोध किया है कि लोग जुलाई 2018 के इस महीने में अपने आसपास के तीर्थ क्षेत्रों, मंदिरों, धर्मशालाओं और संस्थानों के परिसरों में वृक्षारोपण का कार्यक्रम आयोजित करें । उन्होंने आगे कहा है कि देशभर में वर्षा आरंभ हो चुकी है और यही वृक्षारोपण का सही समय है।     इस अपील का व्यापक असर हुआ है और विभिन्न तीर्थक्षेत्रों पर बड़ी संख्या में वृक्षारोपण शुरू भी हो चुका है. मध्यप्रदेश के दमोह जिले में स्थित सुप्रसिद्ध दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कुण्डलपुर से गौरव जैन ने जानकारी दी है कि भारी वर्षा के पीछे कुण्डलपुर के पर्वत पर वृक्षारोपण का कार्य शुरू कर दिया गया है और अब तक 500 पौधों का रोपण कर दिया  गया, अगले एक माह  में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की 51 वें दीक्षा के उपलक्ष्य में  5100 पेड़ कुण्डलपुर पर्वत लगा दिए जाएँगे, उन्होंने बताया कि विभिन्न संस्थानों, युवक मंडलों, महिला मंडलों के सदस्य इस वृक्षारोपण में भाग ले रहे हैं.   नवोदित दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र डोंगरगढ़ से सुधीर जैन ने सूचना दी है कि क्षेत्र पर वृक्षारोपण की तैयार चल रही है और इस वर्ष क्षेत्र पर 1500 पौधे रोप जाएँगे, पिछले वर्ष भी यहाँ लगभग 2000 वृक्ष लगाये गए थे.   सागर जिले के भाग्योदय तीर्थ चिकित्सालय से ब्र. श्री मिहिर जैन ने बताया है कि उन्होंने इस अभियान के अंतर्गत 500 पौधों का रोपण चिकित्सालय परिसर में करवाया है.   कटनी के पास स्थित श्री बहोरीबंद तीर्थक्षेत्र से लोकप्रिय कवि श्री अजय अहिंसा ने अवगत कराया है कि  बहोरीबंद में पिछले साल ही विद्या वाटिका का निर्माण किया गया है जिसमें 400 पौधे रोप गए थे, इस वर्ष पौधे लगाने की उनकी योजना है.  भारत भर के जैन तीर्थ स्थानों से इस वृक्षारोपण अभियान को शुरू करने के समाचार आ रहे हैं.   “हरित तीर्थ अभियान” अब केवल जैन तीर्थों तक सीमित नहीं रह गया है, अन्य समाज के लोग भी इससे प्रेरणा लेकर इस अभियान को देश व्यापी अभियान की शक्ल देना चाहते हैं.  अब तक हम लोग हरित गाँव, हरित शहर, हरित विद्यालय जैसे अभियानों के बारे में खूब सुनते थे, पहली बार किसी ने “हरित तीर्थ” का नारा दिया है.   जैन समाज के लोग पर्यावरण के प्रति जागरुक हैं जो उन्होंने तीर्थ स्थलों के लिए “हरित तीर्थ अभियान” आरम्भ किया है, यदि देश भर के सभी सम्प्रदायों के लोग इस अभियान से जुड़ जाएँ और अपने-२ तीर्थ स्थानों की हरियाली लौटाने का बीड़ा उठा लें तो अल्प समय में ही भारत के सभी धर्मों के तीर्थ स्थल हरे भरे हो जाएँगे.  कुंडलपुर में जारी वृक्षारोपण के चित्र संलग्न हैं।    प्रवीण कुमार जैन संयुक्त सचिव,  ‘राष्ट्रीय संयम स्वर्ण महोत्सव समिति’ अणु डाक: cs.praveenjain@gmail.com   चलभाष:  98199-83708        
 

संयम स्वर्ण कीर्ति स्तम्भ लोकार्पण समारोह - अजमेर 30 जून 2018◼

परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के दीक्षा के 50 वर्ष पूर्ण होने पर उनकी दीक्षा स्थली अजमेर में परम पूज्य मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं प्रेरणा से संस्थापित 71 फुट ऊंचा भव्य कीर्ति स्तंभ का लोकार्पण हुआ |   जैन समाज के श्रेष्ठी पाटनी परिवार (आर के मार्बल्स समूह) को इस कीर्ति स्तम्भ के पुण्यार्जन का लाभ मिला ।       कीर्ति स्तम्भ के साथ अन्य  लोकार्पण:  बड़ा दड़ा संयम स्वर्ण भवन का भी लोकार्पण हुआ  डाक टिकिट हुआ जारी   आचार्य श्री के हायकू एवं विचारों पर विशेष डायरी    इस सम्पूर्ण कार्यक्रम को आप यहाँ देख सकते हैं :       समाज में आरके मार्बल जैसे परिवार की जरुरत-जैन मुनि सुधासागर। नारेली तीर्थ का मुख्य द्वारा आचार्य विद्यासागर महाराज के नाम से बनेगा। स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल होगा जीवन चरित्र 30 जून को अजमेर के महावीर सर्किल के निकट पंचायत बड़ धड़ा की नसिया के परिसर में आचार्य विद्यासागर महाराज के 71 फिट ऊंचे कीर्ति स्तंभ का लोेकार्पण जैन मुनि सुधासागर महाराज ने किया। इसी स्थान पर 50 वर्ष पूर्व आज के दिन ही बालक विद्यासागर ने आचार्य ज्ञान सागर महाराज से दीक्षा ग्रहण की थी। इस स्तंभ पर कोई 2 करोड़ रुपए की राशि खर्च हुई है। कीर्ति स्तंभ का सम्पूर्ण निर्माण कार्य आरके मार्बल और वंडर सीमेंट के मालिक अशोक पाटनी की ओर से करवाया गया है। इसलिए लोकार्पण समारोह में पाटनी परिवार के सदस्यों का अभिनंदन भी किया गया। सुधासागर महाराज ने कहा कि पैसा तो बहुत लोगों के पास होता है। लेकिन ऐसे लोग कम होते हैं जो धर्म के कार्यों पर खर्च करते है। आचार्य विद्या सागर महाराज के कीर्ति स्तंभ का निर्माण कर अशोक पाटनी ने अजमेर के धार्मिक महत्व को और बढ़ाया है। आज समाज में पाटनी परिवार जैसों की जरुरत है। अशोक पाटनी ने बिना कहे कीर्ति स्तंभ का निर्माण कर समाज के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया है। अब अजमेर आने वाले लोग इस कीर्ति स्तंभ का अवलोकन भी करेंगे। इस अवसर पर पाटनी का कहना रहा कि मैं आज जो कुछ भी हंू उसके पीछे आचार्य विद्यासागर महाराज और जैन मुनि सुधासागर महाराज का आशीर्वाद है।
  नारेली तीर्थ का द्वारः  समारोह में अजमेर प्राधिकरण के अध्यक्ष शिव शंकर हेड़ा ने घोषणा की कि नारेली तीर्थ स्थल का मुख्य द्वार आचार्य विद्या सागर महाराज के नाम पर बनाया जाएगा। द्वार के निर्माण का कार्य प्राधिकरण करेगा। वहीं स्कूली शिक्षा मंत्री देवनानी ने कहा कि अगले शिक्षा सत्र में आचार्य विद्यासागर महाराज की जीवनी को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
(एस.पी.मित्तल) (30-06-18)
   

आज अभी 3 बजे परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का मंगल विहार, टीकमगढ़ से अतिशय क्षेत्र श्री बंधा जी की ओर हुआ।

आगे की सुचना देखने के लिए यहाँ पर क्लिक करें     पूज्य आचार्य भगवन ससंघ का हुआ मंगल विहार।

आज 28 जून अभी 3 बजे परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का मंगल विहार, टीकमगढ़ से अतिशय क्षेत्र श्री बंधा जी की ओर हुआ। ◆ आज रात्रि विश्राम: रमपुरा (11 किमी)
◆ कल की आहार चर्या: दिगौड़ा सम्भावित (रमपुरा से 13 किमी) ■ आचार्यसंघ की अगवानी करेंगे मुनि संघ। पूज्य मुनिश्री अभय सागर जी महाराज ससंघ का बरुआ सागर से हुआ मंगल विहार। परसों 30 जून को प्रातःकाल पूज्य आचार्यसंघ की भव्य अगवानी करेंगे, पूज्य मुनिश्री अभय सागर जी ससंघ। वर्षो के अंतराल के उपरांत करेंगे गुरु दर्शन, मिलेंगे गुरुचरण।
      भव्य मंगल प्रवेश
नन्दीश्वर कालोनी टीकमगढ़
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श्रीमद आचार्य भगवंत श्री विद्यासागर जी महाराज का बालयति संघ सहित भव्य मंगल प्रवेश नन्दीश्वर जिनालय टीकमगढ़ में आज 28 जून गुरुवार को प्रातः वेला में हुआ । 
       गत वर्ष नन्दीश्वर कालोनी में आर्यिका माँ विज्ञानमती माता जी ससंघ वर्षायोग सम्पन्न हुआ था। आर्यिका संघ के सानिध्य में त्रिकाल चौवीसी जिनालय का भूमिपूजन किया गया था।  
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    🎊विद्या गुरु का मंगल विहार🎊 संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ससंघ का अभी अभी ६.४० मिनट पर अतिशय क्षेत्र पपौरा जी से टीकमगढ़ के लिए हुए मंगल विहार आहरचार्य 👉🏻टीकमगढ़ संभावित  
 

अतिशय क्षेत्र पपौरा जी में स्थित दयोदय गौशाला मे  हथकरघा भवन का हुआ शिलान्यास

दिनाँक  आज 27 जून 2018 को
अतिशय क्षेत्र पपौरा जी में स्थित दयोदय गौशाला मे  हथकरघा भवन का शिलान्यास आचार्य श्री के मंगल सानिध्य में हुआ
  "मेरी आस्था का नाम" भाग्योदय,प्रतिभास्थली, मातृभाषा के उन्नायक,गोधन पालक, हथकरघा को जीवंत करने वाले तपस्वी श्रेष्ठ चर्या के धारी आचार्य "श्री १०८ विद्यासागर सागर जी महाराज जी" महा मुनिराज जैसे साक्षात तीर्थंकर जैन धर्म में है
गुरुदेव नमन
रजत जैन भिलाई   हथकरघा का शुभारंभ
अतिशय क्षेत्र श्री पपौरा जी मे, परम पूज्य आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज ससंघ सानिध्य में, आज प्रातः गौशाला परिसर में हथकरघा केंद्र का शुभारंभ हुआ। यहाँ पर 162 X 45 फ़ीट का विशाल भवन बनकर तैयार हो रहा है। इसमे 108 हथकरघा स्थापित किये जायेंगे।

कैलिफ़ोर्निया (अमेरिका) में संयम स्वर्ण महोत्सव का अभूतपूर्व आयोजन, जुटे ४५० श्रावक श्राविकाएं

२३ जून २०१८, कैलिफ़ोर्निया, अमेरिका.  लगभग ४५० लोगों ने कार्यक्रम में आकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराईऔर सभी का उत्साह देखते बना  आचार्यश्री के जीवन पर आधारित वृत्तचित्र(डॉक्यूमेंटरी फिल्म) ने सबका मन मोह लिया! बच्चों का नाटक "विद्याधार से विद्यासागर" हिंदी भाषा में किया गया, उन बच्चों द्वारा जो सिर्फ अंग्रेजी ही जानते हैं  और हिंदी पढ़ भी नहीं पाते! आचार्य श्री के चित्र और विभिन्न प्रकल्प  की झांकी लगायी गई | महिलाओं का नृत्य और गरबा भी हुआ शुद्ध भोजन, चाय और शाम के भोजन की पूरी व्यवस्था स्वयंसेवकों  ने ही  की,  बाजार से कुछ भी नहीं मंगाया गया|   कार्यक्रम विवरण    पूजन और अभिषक - ८ से १० बजे तक  नाश्ता - १० से १०:३०  भोजन - १२ से १:३०  सांस्कृतिक कार्यक्रम - १:३० से ५:३०  रास गरबा - ५:३० से ६:३०  सूर्यास्त के पहले शाम का भोजन - ६:३०- से ७:३०     कार्यक्रम झलकियाँ                        
 

आचार्य श्री के जीवन चारित्र पर आधारित फिल्म 'विद्योदय' 30 जून को 50 शहरों में दिखाई जाएगी | स्थान सूची बनाने में सहयोग दें |

*विद्योदय विशेष सूचना*
क्या आपके शहर में यह फिल्म दिखाई जा रही है ? क्या आपको स्थान मालूम है, जैसे कि मुझे सूचना मिली कि जयपुर में 6 स्थानों पर दिखाई जाएगी, पर स्थानों का नाम नहीं पता हैं, क्या आप सहायता कर सकते हैं ?
आप यह सूचना इस लिंक पर ज़रूर डालें ताकि कोई भी भक्त सूचना न मिलने के कारण वंचित न रह जाये | स्थान का नाम नीचे कमेंट बॉक्स में लिखें ताकि इसकी सूची बनाकर सभी तक पहुँचाई जा सके और सभी यह फिल्म देख सकें।        स्थान सूचि  जयपुर  ग्वालियर   
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