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आचार्य श्री की ललितपुर आगवानी वर्ल्ड रिकॉर्ड में हुई दर्ज

प्रमाणीकरण जारी किया गया है कि जैन पंचायत ललितपुर एवम पशु संरक्षण केंद्र द्वारा आयोजित आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज की अगवानी में 2 लाख से अधिक जैन समाज के लोग शामिल हुए।  21 नवम्बर 2018 को  यह जुलुश 12 किमी लम्बे मार्ग ग्राम विगा महाराज से क्षेत्रपाल जी स्टेशन रोड ललितपुर तक था। यह अब तक का बड़े जुलुश का विश्व रिकॉर्ड है। जारी किये गए प्रमाण पत्र की प्रति अवलोकनार्थ प्रस्तुत है।        

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भगवान न राजी होते हैं न नाराज : आचार्य श्री विद्यासागर जी मुनिराज

आचार्यश्री ने कहा धन को गाड़ना नहीं उगारना उन्होंने कहा ललितपुर में आज बहुत बदलाब आ गया है पंचकल्याणक के पात्रों का हुआ चयन विनोद कामरा सौधर्मेन्द्र और ज्ञानचंद्र इमलिया बने कुबेर आचार्यश्री के बुंदेली भाषा में प्रवचन सुन श्रोता हुए लोटपोट नगर में बह रही है धर्म की बयार
ललितपुर- नगर के स्टेशन रोड स्थित क्षेत्रपाल मंदिर में विराजमान संत शिरोमणि राष्ट्र संत आचार्य श्री विद्यासागर जी मुनिराज के दर्शनों के लिए निरंतर तांता लगा रहता है। हजारों की संख्या में जहां नगर के श्रद्धालु क्षेत्रपाल मंदिर में मौजूद रहते हैं वहीं देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके दर्शनों के लिए पहुँच रहे हैं। गुरुवार को प्रातः विशाल धर्म सभा का आयोजन किया गया जिसमें सर्वप्रथम मंचासीन त्यागी व्रतियों ब्रह्मचारी भैयागणों ने आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के चित्र का अनावरण कर दीप प्रज्ज्वलन किया।
इसके बाद आचार्यश्री की पूजन भक्ति संगीत के साथ की गई। पूजन करने का सौभाग्य जैन पंचायत समिति और पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के सभी पदाधिकारियों को प्राप्त हुआ। आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य बड़ा जैन मंदिर के प्रबंधक वीरेंद्र जैन प्रेस परिवार और अटा जैन मंदिर के प्रबंधक भगवानदास संतोष जैन राजेश जैन कैलगुवा परिवार को प्राप्त हुआ वहीं शास्त्र भेंट करने का सुअवसर प्रदीप कुमार प्रसन्न जैन नौहरकला परिवार तथा जैन पंचायत के अध्यक्ष अनिल अंचल परिवार को प्राप्त हुआ।
आचार्यश्री ने आज के अपने मंगल प्रवचन की शुरुआत बुंदेली भाषा से जैसे ही की धर्मसभा में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं ने तालियों की आवाज गुंजायमान कर दी। आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने कहा की तनक-सो का अर्थ क्या होता है? पता है न आपको। इसका अर्थ होता है थोड़ा-सा। अपने स्वभाव की ओर देखना है वह न तनक सा है न मनक सा। उसकी जिसको भनक होती है वही देख सकता है। लोहा और स्वर्ण का उदाहरण देकर समझाते हुए उन्होंने कहा कि लोहा एक धातु है और स्वर्ण भी एक धातु है, लेकिन दोनों में अंतर बहुत है। लोहा कीचड़ में गिर गया तो गया। वैसे ही हमें जैसा हवा पानी मिल जाय तो सब अपना रूप बदलना प्रारंभ कर देते हैं। कीचड़ में गिरा वह लोहा जंग खा जाता है। उसके बाद उसकी दशा बुरी हो जाती है क्योंकि वह पर को अपनाता है। जो मोह के साथ रहता है वह न तो  स्वयं में रहता है न ही पर में  रहता है। सोना गाड़ के रख देते हो तो उसे कुछ भी नहीं होता है। क्योंकि वह दूसरों को पकड़ता नहीं है। लोहे की दशा विपरीत है इसलिए उसमें जंग लग जाती है और अंततः वह नष्ट हो जाता है। अब आप ही बताओ कि सोने के हो या और किसी धातु के। भगवान के ऊपर आप धारा पीतल के कलश से करो , चांदी से करो या तनक सी सोने की लुटिया से करो। सभी दर्शक यह सुनकर मुस्करा उठते हैं। उन्होंने दर्शकों से पूछा भगवान को खुश करना बहुत कठिन है न। हम यह समझते हैं  भगवान हम से राजी हो जाएं , वह किसी से न राजी होते हैं न नाराज ।
ललितपुर मैं 32 वर्ष पूर्व अपने प्रवास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज बहुत बदलाब आ गया है। पहचान मुश्किल है। क्षेत्रपाल मंदिर में विराजमान अभिनन्दन भगवान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनके सामने पहुँचने पर ऐसा लगता है जैसे कोई पंचकल्याणक हो रहा हो। उन्होंने कहा कि आगे के लिए कमाई हो रही है।उन्होंने चंचला लक्ष्मी (धन) की ओर इशारा करते हुए कहा कि गाड़ना नहीं उगारना। उन्होंने कहा इससे भक्त तो बन जाओगे लेकिन भगवान नहीं बन पाओगे। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से मुस्कराते हुए  पूछा कि आप लोगों को भगवान बनना है न। तो एक स्वर में आवाज आई हां। इस पर आचार्यश्री ने मंद-मंद मुस्कराते हुए बुंदेली भाषा में पूंछा-ऊसई-ऊसई की सई में। तो जनसमुदाय ने जबाब दिया सई में यानी सही में भगवान बनना है।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी योगेन्द्र बहादुर  एवं सपा जिलाध्यक्ष ज्योति कल्पनीत भी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। नगर के पत्रकार बंधुओं ने भी बड़ी संख्या में अग्रिम पंक्ति में  बैठकर धर्मलाभ लिया। इस दौरान दानवीर, भामाशाह आर. के.मार्बल समूह के मुखिया अशोक पाटनी मदनगंज-किशनगढ़ राजस्थान, अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी के नव निर्वाचित अध्यक्ष प्रभात जैन, राजा भाई सूरत, पारस चेनल के चेयरमैन पंकज जैन , दिल्ली, विनोद बड़जात्या, कवि चन्द्रसेन भोपाल, केलिफोर्निया से आये प्रदीप कुमार, प्रदीप छतरपुर, मुकेश जैन ढाना सागर और  जिनवाणी चेनल के चेयरमैन आदि बाहर से आये समाज श्रेष्ठियों ने आचार्यश्री के चरणों में श्रीफ़ल समर्पित कर आशीर्वाद लिया। संचालन प्रतिष्ठाचार्य ब्र. विनय भैया जी व  ब्र. सुनील भैया जी  ने किया। आहारचर्या के दौरान चौका लगाने वालों में  भारी उत्साह देखा गया। नगर में आज 320 चौके लगाए गए थे जो एक रिकार्ड है।आज आचार्यश्री के आहार कराने का सौभाग्य नरेंद्र जैन छोटे पहलवान परिवार को प्राप्त हुआ। अतिथियों का स्वागत स्वागत अध्यक्ष  नरेन्द्र कड़ंकी, संयोजक प्रदीप सतरवांस, क्षेत्रपाल मंदिर के प्रबंधक द्वय मोदी पंकज जैन पार्षद, राजेन्द्र जैन,  कैप्टन राजकुमार जैन आदि ने किया। 
श्रीजी का वार्षिक विमानोत्सव शुक्रवार को : जैन पंचायत के अध्यक्ष अनिल अंचल व महामंत्री डॉ. अक्षय टडैया ने बताया कि 23 नवंबर को प्रति बर्ष की भांति इस वर्ष भी श्रीजी की वार्षिक विमान यात्रा भव्य रूप में आचार्य श्री विद्यासागर जी के ससंघ सान्निध्य में प्रातः 6 बजे से निकाली जाएगी। नगर के सभी मंदिरों से श्रीजी के विमान अपने स्थान से प्रारंभ होंगे। श्रीजी की शोभा यात्रा घंटाघर, तुवन चौराहा, वर्णी चौराहा होते हुए क्षेत्रपाल जैन मंदिर पहुँचेगी। आयोजन को लेकर भव्य तैयारी की गई है।
पंचकल्याणक के पात्रों का हुआ चयन : आचार्यश्री के सान्निध्य में ब्र. विनय भैया के निर्देशन में 24 नवम्बर से दयोदय गौशाला मसौरा परिसर  में होने जा रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव के पात्रों का चयन दोपहर में किया गया । जिसमें सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य विनोद कुमार, देवेंद्र कुमार, मुकेश, राकेश, सुनील कामरा परिवार को प्राप्त हुआ। कुबेर बनने का सौभाग्य ज्ञानचंद्र, संतोष कुमार, सुनील कुमार समस्त इमलिया परिवार को मिलेगा। महायज्ञनायक सेठ शिखरचंद्र , सुभाष, सुरेन्द्र , लोकेश कुमार सराफ किसलवास परिवार व राजा श्रेयांस वीरचन्द्र , विपिन कुमार सराफ न्यू नूतन ज्वेलर्स परिवार को प्राप्त हुआ।
मूलनायक मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा पहुँची क्षेत्रपाल मंदिर : गौ शाला में नव निर्मित मंदिर में प्रतिष्ठित होकर विराजमान होने वाली मूलनायक मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा आज क्षेत्रपाल मंदिर पहुँची, जहां भगवान को निहारने, दर्शन के लिये भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। प्रतिमा की प्रतिष्ठा पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में होगी।  

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आचार्यश्री की नगर में अद्भुत अकल्पनीय ऐतिहासिक अगवानी

धन्य हो गई आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ससंघ के आगमन से लालित्य नगरी आचार्यश्री के पदविहार में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, ऐतिहासिक रूप में हुआ नगर प्रवेश पगडण्डी कहाँ चली गयी जो पहले थी : आचार्य श्री विद्यासागर जी बुंदेलखंडी 'हओ' पर श्रद्धालुओं को खूब गुदगुदाया आचार्यश्री ने कई किलोमीटर की लंबाई थी अगुवानी के जनसैलाव की   ललितपुर। जिस घड़ी का इंतजार ललितपुर वासियों को तीन दशक से अधिक समय से था वह इंतजार 21 नवम्बर को पूरा हो गया जब साधना के सुमेरु   भारतीय संस्कृति के संवाहक संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज अपने विशाल संघ के साथ ललितपुर नगर में प्रवेश किया। 
आचार्यश्री का पदविहार वांसी से ललितपुर की ओर प्रातःकाल 6 बजे शुरू हुआ।जैसे ही लोंगो ने आचार्य श्रेष्ठ के नगर आगमन की सुनी तो खुशियों का ठिकाना नहीं रहा।कोई पैदल तो कोई गाडी से पदविहार में सम्मिलित होने के लिए पहुंचा। इतनी सुबह सुबह भारी जनसैलाव उमड़ा देख रास्ते में पड़ने वाले गांवों के लोग भी उमड़ पड़े और आचार्यश्री की एक झलक पाने को लालायित देखे गए। जन सैलाव इतना था कि पुलिस प्रशासन लोगों से दूर से ही दर्शन करने की अपील कर रहे थे। बांसी से (ललितपुर से दूरी 20 किलोमीटर) ही हजारों की संख्या में बिना जूते-चप्पल  के श्रद्धालु चल रहे थे। जैसे-जैसे आचार्यश्री के पग आगे बढ़ रहे थे श्रद्धालुओं का जन सैलाव बढ़ता ही जा रहा था। हाइवे पर दूर-दूर तक अपार भीड़ ही भीड़ दिख रही थी। आलम यह था कि रोड की दूसरी ओर चलने वाले वाहनों को भी रुक-रुक चलना पड़ रहा था। इस दौरान आगे-पीछे और बीच में बड़ी संख्या में पुलिस प्रशासन व्यवस्था को सुचारू करने में लगे थे। आचार्यश्री के आगे आगे बैंड बाजे चल रहे थे इसके बाद पचरंगा झंडे लेकर कार्यकर्ता चल रहे थे इसके बाद पुलिस के पदाधिकारी चल रहे थे जो आचार्यश्री के दर्शन  लोगों से दूर से करने की अपील कर रहे थे ताकि पद विहार में बाधा उत्पन्न न हो। इसके बाद आचार्यश्री संघ सहित चल रहे थे पश्चात उनसे कुछ दूरी पर जन सैलाब चल रहा था।
 नगर में पूर्व से विराजमान मुनि श्री अविचल सागर जी ने नदनवारा पहुँचकर आचार्यश्री के चरणों में नमोस्तु पूर्वक नमन किया। रास्ते में रंग-बिरंगे गुब्बारे आकाश में छोड़े जा रहे थे। आचार्यश्री पदविहार करते हुए महर्रा ग्राम स्थित आदिनाथ कालेज प्रांगण में पहुंचे जहाँ पर मुख्य द्वार पर कालेज प्रबन्धन ने आचार्यश्री का वंदन किया। इसके पूर्व जैन पंचायत समिति और पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के पदाधिकारियों ने आचार्यश्री के चरणों में श्रीफ़ल समर्पित कर आरती की।
आदिनाथ कॉलेज में सबसे पहले आचार्यश्री की पूजन भक्ति भाव से की गई। इस अवसर पर उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि हमारी एक चीज गुम गयी है। मैं आ रहा था, आप लोग भी आ रहे थे। मैं पूछना चाहता हूं कि क्या वह चीज आप लोगों को मिल गयी? इस पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने कहा 'हओ'। इस पर चुटकी लेते हुए आचार्यश्री ने कहा कि ललितपुर में भी 'हव' चलता कि नहीं। इस पर जन समुदाय ने कहा 'हओ'। उन्होंने कहा कि जो मतलब आप लोग समझ रहे हैं वह नहीं है।
उन्होंने आगे  कहा कि मैं सोच रहा था कि भूल गए हैं आप लोग। उन्होंने कहा कि अब पगडण्डी जीवित है कि नहीं। अब शायद पगडण्डी जीवित नहीं रह पाएगी क्योंकि पगडंडियों पर चलाना तो चाहते हैं लेकिन चलना नहीं चाहते। अंत में उन्होंने कहा कि वाहनों पर लिखा रहता है 'फिरमिलेंगे'। संचालन संघस्थ ब्र. सुनील भैया जी ने किया। एसडीएम सदर घनश्याम वर्मा ने महर्रा पहुँचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को समुचित दिशा निर्देश दिए।
आचार्यश्री की आहारचर्या महर्रा स्थित आदिनाथ कॉलेज परिसर में हुई। सामायिक के बाद महर्रा से ललितपुर नगर की ओर विहार हुआ जिसमें पूरा नगर उमड़ पड़ा। आज ललितपुर के इतिहास में एक नया इतिहास जुड़ गया। लोग कह रहे थे उन्होंने आज तक किसी संत के नगर आगमन पर इतना जनसैलाव उमड़ते नहीं देखा है।  प्रवेश के दौरान पूरे  रास्ते में पड़ने वाले व्यापारिक प्रतिष्ठानों के मालिकों द्वारा अपने द्वार पर स्वयं सजावट और स्वागत  की गई थी। आचार्यश्री के नगर में प्रवेश करते ही ऐसा लग रहा था जैसे पूरा शहर थम गया हो, एकमात्र आचार्यश्री के दर्शनों को लाखों आँखे निहार रही थी। सभी समुदाय के लोग आचार्यश्री को नमन कर रहे थे और स्वागत वंदन के लिए खड़े हुए थे। नगर प्रवेश का दृश्य अपने आप में देखने योग्य था।
पुलिस अधीक्षक ओपी सिंह , अपर पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में सुरक्षा व्यवस्था में लगे हुए पुलिस अधिकारी और सिपाही बड़े ही आनंद के साथ आचार्यश्री के आगे और पीछे दौड़ते भागते चल रहे थे। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के समुचित प्रबंध किए गए थे। पंचायत समिति ने नगर की सीमा चंदेरा पर भव्य अगुवानी की। इसके बाद विशाल जनसैलाब गल्लामंडी, इलाइट चौराहा, जेल चौराहा, तुवन चौराहा होते हुए विशाल शोभायात्रा स्टेशन रोड स्थित क्षेत्रपाल मंदिरजी पहुँची। रास्ते में लोगों ने श्रद्धालुओं को जल, मिठाई, फल देकर उनका खूब स्वागत किया। रास्ते में जहॉ नवयुवक करतब दिखाते हुए चल रहे थे वहीं अनेक बग्गियां, घोड़े पर ध्वज लेकर चल रहे थे। विभिन्न स्वयंसेवी संगठन अपनी सेवाएं दे रहे थे। जिसने भी आज का यह नजारा देखा कह उठा अद्भुत, अकल्पनीय, ऐतिहासिक, भूतो न भविष्यति। नगर में जब जुलूस चल रहा था तो जिसको जहॉ जगह मिली वहॉ से इन अमूल्य पलों को देखने को आतुर थे। ऐसी कोई छत नहीं थी जिस पर बड़ी संख्या में नगरवासी न हो। कई लोग जब जगह नहीं मिली तो अन्य साधनों पर चढ़कर देख रहे थे। अनेक लोग तो वृक्षों पर चढ़कर इन पलों के साक्षी बन रहे थे। सचमुच अद्भुत नजारा। शब्द ही नहीं है आज के इस भव्यता से पूर्ण मंगल प्रवेश के वर्णन के लिए।
क्षेत्रपाल मंदिर पहुँचने पर  आचार्यश्री की भव्य अगुवानी की गई । इस दौरान तैयार विशेष मंच से जब आचार्यश्री संघ सहित चल रहे थे वह दृश्य अपने आपमें देखने योग्य, ऐतिहासिक और दर्शनीय था। चारों ओर से इस दौरान आवाज आचार्यश्री नमोस्तु की आवाज गुंजायमान हो रही थी। यह पल सभी अपने मोबाइल में भी कैद कर रहे थे। बैरिकेट लगे होने के बाद भी उसके अंदर पुलिस प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों के कार्यकर्ताओं को हाथ से हाथ पकड़कर सुरक्षा जंजीर बनानी पड़ी। मैं भी इस व्यवस्था में शामिल होकर इन अद्भुत नजरों को करीब से देखकर पुलकित हो रहा था। आज नगर वासियों की भक्ति देख सचमुच लग रहा था कि नगर में चलते-फिरते भगवान आये हैं। अनेक हमारे जैनेतर भाई कह भी रहे थे ये तो धरती के देवता हैं। इनका दर्शन आखिर कौन नहीं करना चाहेगा।
नगर में उत्सव जैसा माहौल था। पाठशाला के बच्चे आचार्यश्री के अभियान हथकरघा, इंडिया नहीं भारत बोलो आदि की तख्तियां लेकर चल रहे थे। कई किलो मीटर की लंबाई में अगुवानी जुलूस देखने योग्य था।
आचार्यश्री के नगर आगमन पर स्वागत के लिये पूरा शहर सजाया गया था। सड़क के ऊपर किनारों में झिलमिल चमकनी तो नीचे  रंगोली बनाई गई थी। अनेक स्वागत द्वार बनाये गए थे। शहर के लोग धरती के देवता को अपने बीच पाकर धन्य हो रहे थे। जयकारों से आकाश गुंजायमान हो रहा था। विभिन्न परिधानों में महिलाएं स्वागत के लिए खड़ी थी।उल्लेखनीय है कि जहां बतौर राज्य अतिथि उनका प्रथम नगर बार नगर आगमन हो रहा था तो वहीं वह 31 वर्ष बाद नगर में आ रहे थे। उधर जैन शिक्षक सामाजिक समूह के सदस्यों ने आचार्यश्री के नगर आगमन की ख़ुशी में जिला अस्पताल में फल वितरण किया। नगर सजाने में वीर क्लब का योगदान रहा। 
इस अवसर पर राज्यसभा सासंद चंद्रपाल यादव, विधायक रामरतन कुशवाहा, सपा जिलाध्यक्ष ज्योति कल्पनीत, नगर पालिका अध्यक्षा रजनी साहू आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। नगर पालिका के पार्षदगण उपस्थित रहे।
गोलाकोट, खनियाधाना से बड़ी संख्या में लोग बसों से आये हुए थे साथ ही में गुरुकुल के बच्चे गुरुवर गोलाकोट चलो की तख्तियां लेकर चल रहे थे।
इस दौरान ललितपुर के साथ ही बार, बांसी,  कैलगुवा, गदयाना, महरौनी, मड़ावरा, पाली, तालबेहट, बबीना,जखौरा, बिरधा, टीकमगढ़, सागर, शिवपुरी, झाँसी, ग्वालियर,बीना, खिमलासा,  दिल्ली, दमोह, ग्वालियर, छतरपुर, बरुआसागर आदि अनेक स्थानों के बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे। नगर के सभी पत्रकार बंधु भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
जैन पंचायत समिति , पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव समिति, नगर की सभी स्वयंसेवी संस्थाओं, उप समितियों का योगदान उल्लेखनीय रहा। 
आचार्यश्री के देश-विदेश में लाखों की संख्या में भक्तों को देखते हुए इस भव्य मंगल प्रवेश का जिनवाणी चैनल पर लाइव प्रसारण भी किया गया, जिसे देश -विदेश में देखा देखा गया। 
उल्लेखनीय है कि आचार्यश्री के सान्निध्य में मसौरा स्थित दयोदय गौशाला परिसर में श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव 24 नवम्बर से 30 नवंबर तक बड़े ही उत्साह से होने जा रहा है।
अनियत विहारी का विहार :
आचार्य विद्यासागर जी महाराज कभी किसी को बता के विहार नहीं करते इसलिए उनके आगे अनियत विहारी संत लिखा जाता है। ललितपुर नगर प्रवेश को लेकर यह देखने भी मिला है। नगरवासी 22 नवम्बर को उनके नगर प्रवेश की पूर्ण संभावना मानकर चल रहे थे। 22 नवम्बर के हिसाब से ही लोग तैयारी में जुटे थे। बाहर से आने वाले इष्ट मित्र, रिश्तेदारों को भी यही सूचना दी गयी थी। लेकिन अचानक ही 21 तारीख को आचार्यश्री का मङ्गल पदार्पण नगर में हो गया। आज जब इतना जनसैलाव उमड़ पड़ा था यदि निर्धारित तिथि 22 नबम्बर को प्रवेश होता तो न जाने कितना जनसैलाव उमड़ता।
जिलाधिकारी, एसपी पहुँचे आशीर्वाद लेने :
शाम को क्षेत्रपाल मंदिर पहुंच कर जिलाधिकारी श्री मानवेन्द्र सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री ओपी सिंह,  अपर पुलिस अधीक्षक श्री अवधेश विजेता ने आचार्य श्री विद्या सागर जी मुनिराज के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और नगर आगमन पर उनको वंदन करते हुए नगरवासियों का सौभाग्य बताया। -डॉ. सुनील जैन संचय,ललितपुर मीडिया प्रभारी

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21 को ललितपुर में होगा आचार्यश्री का मंगल प्रवेश!

21 को ललितपुर में होगा आचार्यश्री का मङ्गल प्रवेश! बार और बांसी में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ससंघ की अगुवानी के लिए उमड़ा  श्रद्धा का जन सैलाव लड़वारी के ग्रामवासियों ने बनाई घर-घर रंगोली तीन दशक बाद नगर आ रहे हैं आचार्यश्री सजाया गया पूरा नगर, बनाई गईं आकर्षक रंगोली, बनाये गए तोरण द्वार ललितपुर। जिस घड़ी का इंतजार ललितपुर वासियों को तीन दशक से था वह इंतजार अब 21 नवम्बर को पूरा होने जा रहा है। अपराजेय साधक भारतीय संस्कृति के संवाहक आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज अपने विशाल संघ के साथ  ललितपुर नगर में प्रवेश करने जा रहे हैं। प्रवेश के दौरान पूरे  रास्ते में पड़ने वाले व्यापारिक प्रतिष्ठानों के मालिकों द्वारा अपने द्वार पर स्वयं सजावट और स्वागत की तैयारी की जा रही है। आचार्यश्री के देश-विदेश में लाखों की संख्या में भक्तों को देखते हुए इस भव्य मंगल प्रवेश का जिनवाणी चैनल पर लाइव प्रसारण भी होगा, जिसे देश -विदेश में देखा जा सकेगा।
मंगलवार को प्रातः  ग्राम रमपुरा से आचार्य श्री विद्यासागर जी मुनिराज ससंघ का कस्बा बार के लिए पद विहार हुआ। इस दौरान रास्ते में पड़ने वाले ग्राम लड़वारी में आचार्यश्री के स्वागत के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा। ग्रामीणों ने अनाज, रंग आदि से अपने दरवाजों पर रंगोली बना रखी थी साथ ही तांबे के मंगल कलश भी रखे गए थे। दीवालों पर भी लिखावट की गई थी। चारों ओर महिलाएं भी खड़ी होकर आचार्य वंदना के मंगल गीत गा रही थी। सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने उनके आगमन पर नमन कर आशीर्वाद लिया। 
जैसे ही आचार्यश्री कस्बा बार पहुंचे तो वहां उपस्थित लगभग तीन हजार की जनता सड़क के दोनों ओर खड़े हो कर अगुवानी करने लगे। सभी को आशीर्वाद देते हुए आचार्य संघ  मन्दिर दर्शन के लिए पहुँचा। आचार्यश्री  के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य पंडित दयाचंद्र शास्त्री बार भेलोनी सूबा वालों को प्राप्त हुआ। विहार के दौरान उमड़ा हजारों का जनसैलाव देखने योग्य था। बार में आहारचर्या सम्पन्न हुई । सामायिक के बाद ग्राम बांसी के लिए उनका पद विहार हुआ। रास्ते में पड़ने वाले पुलवारा, बस्तगुवा, गड़िया के सैकड़ों ग्रामीण सड़क किनारे खड़े होकर नमन कर रहे थे। जैसे ही आचार्य संघ और उनके साथ हजारों की संख्या में चल रहे श्रद्धालु शाम 4 .30 बजे  बांसी  पहुँचे यहां उनका पलक -पावड़े बिछाकर स्वागत किया। पूरे गांव को सजाया गया था। लोग अपने घर दुकान के बाहर पानी और फल श्रद्धालुओं के लिए प्रदान कर प्रसन्न हो रहे थे। जगह जगह रंगोली बनाई गई थी। आशीर्वाद ग्रहण करने अपार जनसैलाव उमड़ पड़ा। यहाँ पर स्वागत द्वार, रंगोली बनाकर अपने गुरुवर का श्रद्धा के साथ  वंदन किया। बांसी वाले कह रहे थे अपने जीवन में इतना जनसैलाव किसी संत के आगमन पर पहली बार देख रहे हैं। रात्रि विश्राम आचार्यश्री का बांसी रहेगा। बुधवार को प्रातः यहाँ से विहार कर आदिनाथ कॉलेज महर्रा में आहार होंगे। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार  21 नवम्बर 2018 की शाम ललितपुर नगर में प्रवेश होगा। 
इस दौरान जैन पंचायत समिति, पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव समिति ललितपुर तथा हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाव उपस्थित रहा। सुरक्षा व्यवस्था में लगे हुए पुलिस अधिकारी और सिपाही बड़े ही आनंद के साथ आचार्यश्री के आगे और पीछे दौड़ते भागते चल रहे हैं। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के समुचित प्रबंध किए गए थे। उमड़े भारी जनसैलाब को व्यवस्थित तरीके से चालने में पुलिस प्रशासन जुटा रहा। श्री योगेंद्र बहादुर सिंह अपर जिलाधिकारी ने भी पहुँचकर  सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और आचार्यश्री से आशीर्वाद ग्रहण किया।
इस दौरान ललितपुर के साथ ही बार, बांसी, लड़वारी, कैलगुवा, गदयाना, महरौनी, मड़ावरा, पाली, तालबेहट, बबीना,जखौरा, बिरधा, टीकमगढ़ आदि समीपवर्ती स्थानों के बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे।
गल्ला मंडी से मसौरा तक बन रही है आकर्षक रंगोली :
आचार्यश्री के भव्य स्वागत के लिए गल्ला मंडी से लेकर पंचकल्याणक महोत्सव स्थल मसौरा तक भव्य, मनोरम रंगोली बनाई जा रही है। जो राहगीरों के लिए आकर्षण बन रही है।
सड़क के ऊपर किनारों में झिलमिल चमकनी तो नीचे बनी रंगोली को देखकर तो राहगीर भी आने वाले संत के दर्शनों को बेताब हो उठे हैं। गल्ला मंडी, इलाइट , राजघाट रोड, सदन शाह चौराहा, बस स्टेण्ड, घंटाघर, सावरकर चौक, तलाबपुरा, मवेशी बाजार, स्टेशन रोड, देवगढ़ रोड, नई बस्ती, गांधीनगर आदि नगर के सभी स्थानों की सजावट की गई है। साथ ही पचरंगा झंडे भी लगाए गए हैं। आयोजन स्थल गौशाला परिसर एवं बाहर हाइवे को भी दुल्हन की तरह सजाया गया है। नगर की सजावट की जिम्मेदारी वीर क्लब को सौंपी गई है। 
क्षेत्रपाल जैन मंदिर की हुई मनोरम सजावट :
स्टेशन रोड स्थित क्षेत्रपाल जैन मन्दिर में आचार्यश्री के आने को लेकर तैयारियां बहुत ही जोरों पर चल रही हैं एक ओर मन्दिर जी की साफ सफाई तो दूसरी ओर धर्म शालाओं में रंग रोगन ,डोम पांडाल में जहाँ पत्थरों को तराशने का काम चल रहा था खाली करा कर उसमें एक सुंदर सी मंच बनाने का काम भी प्रारंभ हो चुका है जो अंतिम चरण में है। रात्रि में क्षेत्रपाल मंदिर की सजावट देखते ही बनती है।  आचार्यश्री के क्षेत्रपाल में मङ्गल पदार्पण की संभावना को देखते हुए पूरे प्रांगण को भव्य रूप में सजाया गया है।  
स्वागत के लिये लगे सैकड़ों होर्डिंग :
     सारे शहर के गणमान्य नागरिकों के बैनर पोस्टर सड़क के दोनों ओर लगते ही जा रहे हैं जिसे भी जहां जगह मिलती है वह अपने बैनर को सुंदर से सुंदर बनवा कर लगाने का प्रयास करते ही जा रहे हैं, कहीं- कहीं तो देखने में ऐसा प्रतीत होता है कि बनाने वाले ने अपनी सारी भावनाओ को ही उसमें उड़ेल दिया है । लगाए गए होर्डिंग्स में आचार्यश्री के अनेक संदेशों को लिखा गया है, जो पठनीय और प्रेरित करने वाले हैं।
बने अनेक स्वागत द्वार : पूरे नगर में अनेक स्वागत द्वार बनाये गए हैं। अनेक श्रद्धालुओं ने भी अपने द्वार पर स्वागत के लिए द्वार बनाये हैं तथा घर के बाहर घर की महिलाएं रंगोली बनाने में जुटी हैं ।     -श्रीश सिंघई            डॉ. सुनील संचय 
                   ललितपुर

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बतौर राज्य अतिथि आचार्य श्री विद्यासागर महामुनिराज ससंघ का उत्तर प्रवेश की सीमा में पहली बार प्रवेश पर हुई भव्य अगवानी

ललितपुर। आगामी 24 नवम्बर से दयोदय गौशाला मसौरा ललितपुर परिसर में होने जा रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव में साधना के सुमेरु भारतीय संस्कृति के संवाहक आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज संसघ के मङ्गल सान्निध्य की उम्मीदें बढ़ गयी हैं। ललितपुर की ओर आचार्यश्री के पग तेज गति से बढ़ रहे हैं। 
उल्लेखनीय है कि सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आचार्यश्री को राज्य अतिथि की घोषणा की थी। सोमवार को आचार्यश्री की आहारचर्या मोहनगढ़ में हुई। इसके बाद  अपने विशाल संघ के साथ उत्तरप्रदेश की सीमा रमपुरा-कठवर में बतौर राज्य अतिथि के रूप में पहली बार उनका प्रवेश हुआ। इस अवसर पर दिगम्बर जैन पंचायत समिति व पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति ने उत्तर प्रदेश की  सीमा पर पहुँचकर उनकी भव्य अगवानी की। इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने ललितपुर से भारी जनसैलाव उमड़ पड़ा। इस दौरान चारों ओर आचार्यश्री नमोस्तु और जयकारा गुंजायमान हो उठा। इस दौरान शासन-प्रशासन भी मौजूद रहा। पुलिस प्रशासन मुस्तेज रहा।
इस अवसर पर थाना प्रभारी हाकिम सिंह एसएचओ कृष्णपाल सिंह सरोज ने एकबालपुरा-रमपुरा (कठवर) पर शासन की ओर से अगुवानी की। 
श्री योगेंद्र बहादुर सिंह अपर जिलाधिकारी ललितपुर ने रमपुरा पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और आचार्यश्री से आशीर्वाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर सपा जिलाध्यक्ष ज्योति कल्पनीत,  नीलू तिवारी वरिष्ठ पत्रकार, श्यामबिहारी , पूर्व पार्षद वीरेश रजक, ग्राम प्रधान अच्छे लाल यादव, गजेंद्र सिंह हल्केराजा भेलोनी प्रधान, केहर सिंह रमपुरा प्रधान  लखन सिंह, राजेन्द्र चोवे प्रधान रमपुरा
जैन पंचायत के अध्यक्ष अनिल अंचल, महामंत्री डॉ अक्षय टडैया, पंचकल्याणक महोत्सव समिति के अध्यक्ष ज्ञानचंद इमलिया, स्वागत अध्यक्ष नरेन्द्र कडंकी, संयोजक  प्रदीप सतरवास, , सुरेश बढ़ेरा, मोदी पंकज जैन पार्षद, श्रीश सिंघई, डॉ सुनील संचय, संजय रसिया, शुभेन्दू मोदी, अभिषेक अनौरा, विपिन हिरावल, मंगू पहलवान, अन्नू भैया, अमित भैया, राजीव, कमलेश पहलवान, अक्षय अलया, शीलचंद अनौरा, सनत खजुरिया, अंतू जैन पत्रकार,विनोद कामरा,  आनंद जैन बार, महेंद्र मयूर, अमित जैन,कैप्टन राजकुमार,  नीलेश सिंघई, मुकेश सराफ, संदीप सराफ, जिनेन्द्र डिस्को, लकी जैन, डॉ संजीव कंडकी, मयंक जैन, गेंदालाल सतभैया, गौलू, गिरीश साहू, नीरज गुललन, प्रफुल्ल जैन, आशीष जैन, छोटे पहलवान, भगवानदास कैलगुवा, बैभव जैन,वीरेंद्र प्रेस, वीरेंद्र विद्रोही, महेंद्र चौधरी, जिनन्द रजपुरा, पंचम जैन, कमंडल सेवा मंडल, ललितपुर के सभी जैन मंदिरों के प्रबंधक  आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। समीपवर्ती बार, बांसी, कैलगुवा, लड़वारी आदि की जैन समाज भी उपस्थित रही।
ग्राम के मोनियो ने भी अपनी भक्ति प्रदर्शित करते हुए पद विहार में अपने लोकनृत्य प्रस्तुत कर आचार्यश्री के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। आसपास के सैकड़ों ग्रामीण भी उनके दर्शन को उमड़ पड़े।
नगर के होटल देगें किराए में रियायत :
उधर ललितपुर के होटल ऐसोसिएसन की एक बैठक ललित पैलेस में आयोजित हुई जिसमें पंच कल्याणमहोत्सव एवं आचार्यश्री के आगमन पर सभी ने अपने होटल के किराए में कटौती कर यात्रियों के लिए पूर्ण सहयोग का मन बनाया जिसमें सभी होटल्स के संचालक मौजूद रहे।
डॉ सुनील संचय ने बताया कि आज रात्रि विश्राम  बार लड़वारी  के पास रमपुरा ग्राम के स्कूल में हो रहा है तथा मंगलवार को यहॉ से बार की तरफ विहार होगा।
श्रीश सिंघई ने बताया कि ललितपुर प्रवेश के दौरान आचार्यश्री के देश-विदेश में लाखों की संख्या में भक्तों को देखते हुए इस भव्य मंगल प्रवेश का जिनवाणी चैनल पर लाइव प्रसारण भी होगा, जिसे देश -विदेश में देखा जा सकेगा। 
  प्रेषक डॉ सुनील संचय, मीडिया प्रभारी

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दयोदय गौशाला में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा और गजरथ महोत्सव के लिए युद्ध स्तर पर चल रही हैं तैयारियां, सजाया जा रहा है नगर

दयोदय गौशाला में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा और गजरथ महोत्सव के लिए युद्ध स्तर पर चल रही हैं तैयारियां, सजाया जा रहा है नगर - आगामी 24 नवम्बर से अपराजेय साधक संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में दयोदय गौशाला परिसर मसौरा ललितपुर में होने जा रहे श्री 1008 मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महामहोत्सव तथा विश्वशांति महायज्ञ के लिए दयोदय गौशाला में युद्ध स्तर पर तैयारियां चल रही हैं।   समारोह स्थल को जहां खूब सजाकर आकर्षक बनाया जाएगा वहीं भारी जनसैलाव उमड़ने की संभावना को देखते हुए तमाम व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने में कार्यकर्ता रात-दिन जुटे हुए हैं। मुख्य पंडाल में वेदिका का निर्माण द्रुत गति से चल रहा है। मुख्य पंडाल में हजारों लोगों के बैठने के हिसाब से भव्य पंडाल तैयार किया जा रहा है। पांडुक शिला का निर्माण भी चल रहा है। जन सुविधाओं के लिए जहां बड़ी संख्या में पक्के शौचालयों का निर्माण कार्य प्रगति पर है वहीं अस्थायी शौचालय भी पर्याप्त मात्रा में बनाये जा रहे हैं।   स्थायी और अस्थायी आवास निर्माण किये जा रहे हैं। संत आहारचर्या के लिए भी दो मंजिला निर्माण हो रहा है। 350x84 की जनरल भोजन शाला के लिए भी सुविधायुक्त पंडाल बनाया जा रहा है। इसके अलावा त्यागी-व्रतियों, पंचकल्याणक के पात्रों के लिए शुद्ध भोजन हेतु भोजनशाला का समुचित प्रबंध किया जा रहा है। आवास एवं चौका लगाने हेतु व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था हेतु भी कार्य चल रहा है।   वाहनों की पार्किंग के लिए एक पार्किंग स्थल बनाने का कार्य परिसर के बगल में चल रहा है। इसके अलावा अस्थायी बाजार के लिए कार्य किया जा रहा है। आयोजन स्थल पर लोगों की सुविधा के लिए अनेक कार्यालय भी स्थापित रहेंगे, जैसे पूछताछ कार्यालय, आवास, परिवहन, भोजन, अमानती सामान आदि।   आकर्षण का केन्द्र रहेगा सफेद संगमरमर से निर्मित मंदिर और स्तम्भ : समारोह स्थल पर आकर्षण का केंद्र यहाँ नव निर्मित मंदिर, मानस्तम्भ, आचार्य विद्यासागर कीर्ति स्तम्भ रहेंगे जो सभी को अपनी भव्य, मनोरम बनावट के कारण सभी को अपनी ओर आकर्षित करेंगे। इनका निर्माण सफेद संगमरमर से बाहर से आये कुशल कारीगरों द्वारा किया गया है। उल्लेखनीय है कि यह भव्य मंदिर आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, तरूणाई के प्रखर वक्ता, मुनि प्रमाण सागर जी महाराज की प्रेरणा से अल्प समय में ही अथक श्रमपूर्वक बनवाया गया। मंदिर प्रांगण में नव निर्मित भव्य कीर्ति स्तम्भ, मानस्तम्भ का शिलान्यास आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की परम शिष्या वंदनीय आर्यिका रत्न पूर्णमती माता जी संसघ के सान्निध्य में हुआ था। यह दोनों बनकर तैयार हो गये हैं। गौशाला में निर्मित इसी भव्य संगमरमरी जिनालय का पंचकल्याणक महोत्सव सम्पन्न होने जा रहा है |   सागर रोड के हाईवे से गुजरने वाले सभी लोगों को रोड से ही यह भव्य मंदिर दिखाई देगा। यहां से आने-जाने वाले सभी लोगों के लिए यह दर्शनीय होगा। मंदिर, स्तम्भ का निर्माण जिस कलाकारी के साथ किया गया उससे प्रत्येक व्यक्ति अपने आप खिचा चला आएगा। मंदिर के चारों ओर का प्राकृतिक मनमोहनीय वातावरण चुंबकीय आकर्षण पैदा करेगा। आने वाले समय में सफेद संगमरमर का यह मंदिर ललितपुर की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा में नए आयाम स्थापित करेगा।   आयोजन की ऐतिहासिक सफलता के लिए दिगम्बर जैन पंचायत समिति, पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के साथ ही अनेक उप समितियों के कार्यकर्तागण अथक श्रम कर महोत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं।     एसडीएम ने किया आयोजन स्थल का निरीक्षण : कैप्टन राजकुमार जैन ने बताया कि शनिवार को एसडीएम घनश्याम वर्मा ने गौशाला पहुँचकर समारोह स्थल का निरीक्षण किया और समिति के पदाधिकारियों के साथ आवश्यक बैठक कर कार्यक्रम के संबंध में जानकारी भी ली।   ज्ञानचंद्र इमलिया अध्यक्ष पंचकल्याणक महोत्सव समिति, जैन पंचायत के अध्यक्ष इंजी. अनिल अंचल, महामंत्री डॉ. अक्षय टडैया, संयोजक प्रदीप सतरवांस, स्वागत अध्यक्ष नरेन्द्र कड्की, जनरल कैप्टन मेला कैप्टन राजकुमार जैन, संतोष इमलिया, अभिषेक मुच्छाल, पंकज मोदी पार्षद, डॉ. संजीव कडूंकी, डॉ. सुनील संचय, संजीव सीए, महेंद्र सिंघई, अनूप कैरू, नेमिचन्द्र चंद्रा,श्रीश जैन, सत्येन्द्र गदयाना, जितेंद्र राजू,धर्मेंद्र सिंघई, धन्यकुमार करमुहारा, विनोद कामरा, शैलेन्द्र जैन, मनोज बबीना, संजय जैन, मुकेश जैन, अनूप जैन आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।   ललितपुर की ओर बढ़ रहे हैं आचार्यश्री के कदम : 17 नबम्बर की प्रातः आचार्य श्री विद्यासागर मुनिराज के आहार धमना -दिगौडा में हुए जहां उनके पाद प्रक्षालन का सौभाग्य पश्चिम बंगाल से पधारे एक ऐसे परिवार को प्राप्त हुआ जिसने आज पहली बार ही आचार्य विद्यासागर जी महाराज ससंघ के दर्शन किये थे। कल प्रातः 7:30 बजे लगभग मुनि संघ का मंगल प्रवेश बंधाजी क्षेत्र पर होगा। विहार में नगर के कमंडल सेवा मंडल के साथ ही अनेकों लोग साथ चल रहे हैं। जैसे-जैसे आचार्यश्री ससंघ के पग ललितपुर के निकट आ रहे हैं लोगों की खुशी और उत्साह बढ़ता जा रहा है |  

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मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज को दिया राज्य अतिथि का दर्जा

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने आचार्य श्री विद्यासागर  महाराज को दिया राज्य अतिथि का दर्जा आचार्य श्री की आगवानी मे भी उपस्थित रहने के दिये संकेत
पत्रकार सम्भव सिंघई
पंजाब केसरी   जैन आचार्य विद्यासागर जी महामुनिराज के 32वर्ष उपरांत उत्तर प्रदेश की धरा पर आगमन की सम्भवनाओं को देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ जी ने आचार्य भगवन को दिया राज्य अतिथि का दर्जा दिया सम्मिलित होने का पूर्ण आस्वासनआचार्य श्री के ललितपुर आगमन पर मुख्यमंत्री हो सकते हैं आगवानी में शामिल
ललितपुर गौरव संत संतोष दास"सतुआ जी महाराज,सदर विधायक रामरतन कुशवाहा जी व् पंचकल्याणक महोत्सव समिति ने मुख्यमंत्री जी से मुलाकात कर पंचकल्याणक महोत्सव आगमन हेतु आमंत्रण किया भेंट।   ------------

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खजुराहो, मध्यप्रदेश पिच्छी परिवर्तन UPDATE?

*?खजुराहो, मध्यप्रदेश पिच्छी परिवर्तन UPDATE?* *?४ नवम्बर २०१८, रविवार?* *✨आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज की पिच्छी यानि संयम का उपकरण लेने का सौभाग्य* ???????? *⛳चौधरी श्री बाबूलाल जी जैन के सुपुत्र चौधरी श्री प्रदीप कुमार जी जैन, छतरपुर निवासी वालों जी को प्राप्त हुआ⛳*    
 

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डॉ कल्याण गंगवाल ने खजुराहो में लगाई बहुभाषी प्रदर्शनी

डॉ गंगवाल की खजुराहो में लगाई बहुभाषी प्रदर्शनी दे रही शाकाहार का संदेश, एक लाख को शाकाहारी बनाने पर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में नाम दर्ज आचार्यश्री ने मुक्तकंठ से सराहा    छतरपुर अतिशय क्षेत्र खजुराहो में आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज की प्रेरणा और आशीवार्द से डॉ कल्याण गंगवाल  ने शाकाहार एवं अहिंसा पर केंद्रित एक बहुभाषी साहित्य एवं सामग्री की प्रेरक,ज्ञानवर्धक, धार्मिक ग्रंथों के संदर्भ सहित एक भव्य तथा आकर्षक प्रदर्शनी लगाई है। विगत दिनों इस प्रेरक प्रदर्शनी का अवलोकन पूज्य आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज एवं संघस्थ साधुओं ने सूक्ष्मता से किया और प्रदर्शनी के उद्देश्य एवं प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना न केवल प्रदर्शनी स्थल पर की,वरन अपने विशेष प्रवचन के दौरान भी डॉ गंगवाल के इस शाकाहार मिशन को सराहते हुए उन्हें मंच से मंगल आशीर्वाद भी दिया। इस अवसर पर डॉ गंगवाल ने अपने उद्बोधन में शाकाहार अभियान की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि वे अपने चिकित्सकीय प्रोफेशन से अर्जित आय से इस कार्य को विगत पंद्रह वर्षों से करते आरहे हैं।सामाजिक कार्यों को करने हेतु उन्होंने 1987 में सर्वजीव सेवा प्रतिष्ठान की स्थापना की और  उनके क्लिनिक में आने वाले तीस  प्रतिशत गरीब मरीजों का वे निःशुल्क उपचार कर दवाएं देते हैं। शाकाहार, जीवदया, अहिंसा एवं व्यसनमुक्ति के मिशन के लिए  समर्पित डॉ कल्याण गंगवाल अपनी इस प्रेरक,प्रभावी और वैज्ञानिक तथ्यों से परिपूर्ण  प्रदर्शनी के जरिए अब तक कोई एक लाख से ज्यादा लोगों को शाकाहारी बना चुके हैं।
ये जानकारी देते हुए डॉ सुमति प्रकाश जैन ने बताया कि प्रदर्शनी में देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए हिंदी,इंग्लिश, फ़्रेंच, जर्मन, स्पैनिश,चायनीज,जापानी  आदि ऐसी अनेक भाषाओं मे डॉ गंगवाल ने शाकाहार सम्बन्धी प्रचुर साहित्य तैयार कराया है जिसे वे देशी-विदेशी पर्यटकों को निःशुल्क भेंट कर शाकाहार और अहिंसा का शंखनाथ पूरे देश एवं दुनिया मे कर रहे हैं।अपनी शाकाहार पर केंद्रित पुस्तकों एवं अन्य साहित्य में डॉ गंगवाल ने जैन दर्शन के गूढ़ ग्रंथों मूलाचार,कार्तिकेयअनुपेक्ष, ज्ञानार्णव,तत्वार्थसूत्र,प्रवचनसार एवं समीक्षाशतक का अध्ययन कर इसमें वर्णित अहिंसा, जीवदया एवं शाकाहार संबंधी प्रसंगों का संदर्भ बखूबी दिया है,जिससे इनकी उपयोगिता तथा प्रमाणिकता और भी ज्यादा हो गई है।एक वरिष्ठ चिकित्सक होने के नाते डॉ गंगवाल ने अपने साहित्य में शाकाहार के वैज्ञानिक एवं मानवीय पक्ष को सुदृढ़ता के साथ प्रस्तुत करते हुए मनुष्यों के लिए शाकाहार को ही हर दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ आहार बताया है।
  ज्ञातव्य है कि एमबीबीएस, एमडी मेडिसिन जैसी उच्चशिक्षा गोल्ड मैडल के साथ प्राप्त करने वाले डॉ गंगवाल पुणे के केईएम  हॉस्पिटल में कंसल्टेंट एवं प्रोफेसर रहते हुए अपने अतिव्यस्त समय लेकिन व्यवस्थित दिनचर्या से इस शाकाहार अभियान के लिए समय औऱ धन का सदुपयोग करते रहते हैं। डॉक्टरों द्वारा किए जाने वाले अनएथिकल ट्रीटमेंट के विरोधी एवं नब्बे के दशक में देश मे पहला गुटखा विरोधी मूवमेंट शरू कर महाराष्ट्र में गुटखा बेन कराने वाले डॉ गंगवाल के इन भागीरथी और अथक प्रयासों का सार्थक नतीजा भी निकला। शिर्डी के समीप कोपरगाँव में गुरुपूर्णिमा के  अवसर पर कोकमठाण स्थित जंगलीमहाराज आश्रम में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में डॉ गंगवाल की प्रेरणा और समझाइश से  करीब एक लाख  लोगों ने एक साथ मांसाहार एवं व्यसन त्याग कर शाकाहार अपनाने का सामूहिक संकल्प लिया था।हाल ही मैं डॉ गंगवाल की इस उपलब्धि पर  मौके पर मौजूद चालीस सदस्यीय टीम ने उनका नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में दर्ज करते हुए उन्हें सम्मान दिया गया है।
  सोशल वर्क एवं मेडिकल प्रेक्टिस के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए 132 राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजे जा चुके 73 वर्षीय डॉ गंगवाल द्वारा अतिशय क्षेत्र खजुराहो के मंदिर परिसर में लगाई गई इस उपयोगी प्रदर्शनी को आचार्यश्री के दर्शन करने देश के कोने कोने से आने वाले श्रद्धालु एवं क्षेत्रीय जैनेतर समाज के लोग भी प्रतिदिन बड़े चाव से बड़ी संख्या में देख और सराह रहे हैं।  

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खजुराहो में आचार्य श्री के सान्निध्य में सल्लेखना सानंद सम्पन्न

30 अक्टूबर 2018 - आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य व निर्देशन में दस प्रतिमाधारी श्री अनिल भाई खंधार मुंबई निवासी की सल्लेखना सानंद सम्पन्न हुई |     गुरु चरणों में चल रही समता पूर्वक, प्रसन्नता पूर्वक सल्लेखना के अनमोल पल अत्यंत हर्ष का विषय है कि आदरणीय अनिल बाबा जी मुंबई जो १० प्रतिमा धारी है उनकी सल्लेखना गुरु चरणों में समता पूर्वक, प्रसन्नता पूर्वक चल रहीं है | जय हों जय हों जय हों               sallekhana.mp4

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फ्रांस के राजदूत *अलेक्सअंद्रे ज़िएगलेर ने किये आचार्य श्री के दर्शन

?? खजुराहो की खबर??
 खजुराहो स्वर्णोदय तीर्थ क्षेत्र में विराजमान प.पु.आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज के दर्शन करने फ्रांस के राजदूत अलेक्सअंद्रे ज़िएगलेर
ने आचार्य श्री के दर्शन कर कहा मेने god के बारे में सुना था आज तो साक्षात देख लिया में धन्य हु दिल्ली से सिर्फ आपके दर्शन करने आया हु
 आचार्य श्री से शाकाहार का नियम भी लिया 
   राजदूत ने आचार्य भगवन से कहा हमारे फ्रांस में शाकाहार का प्रचलन बहुत बढ़ रहा है आपके दर्शन कर में भी शाकाहारी हो गया महीने में ओर सप्ताह में नियम रखूंगा
    जाते जाते o माई god धन्य है गुरुवर आपकी महिमा    

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जरा याद करो कुर्बानी कार्यक्रम में देश के अमर शहीदों के वंशजों का सम्मान

स्वराज सम्मान समारोह के तहत महान क्रांतिकारी नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में जैन समाज के शीर्षस्थ संत आचार्य विद्यासागर के सानिध्य में “जरा याद करो कुर्बानी इस कार्यक्रम में देश के अमर शहीदों के वंशजों का श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र समिति खजुराह्य द्वारा सम्मान किया गया। इस अवसर पर सभी अमर शहीदों के साथ ब्रिटिश हुकूमत द्वारा की गई बर्बरता, उनकी फांसी आदि को लेकर डाक्यमेटी फिल्म भी दिखाई गई। जैसे ही डाक्यूमेंट्री फिल्म में अंग्रेजों की बर्बरता और देश के वीर सपूतों को फांसी देते दिखाया गया तो उनके वंशजों की आंखों से आंसू बहने लगे। कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गई। अंतिम बादशाह बहादुर शाह जफर के वंशज शाह मुहम्मद खान ने कहा कि बादशाह बहादुर शाह की अस्थियां रंगून में रखी हैं। मेरा आचार्य श्री से आग्रह है कि वह देश की सरकार से कहें कि अस्थियां वापस भारत लाई जाएं।   राष्ट्र हित चिंतक परम पूज्य 108 आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महामुनि राज के अवचेतन में चलने वाले विचार चक्र को पकड़ने का प्रयास हमने इससे पहले सर्वोदय सम्मान 2018 के माध्यम से किया था, जिसमें देश के अलग अलग हिस्सों में नेपथ्य में काम करने वाले नायकों का सम्मान किया गया था, उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए खजुराहो में स्वराज सम्मान वर्ष 2018 का आयोजन किया गया |   सम्मान का मुख्य उद्देश है कि देश की बाल युवा पीढ़ी अपने इतिहास से वाकिफ हो, उस बलिदान के इतिहास से जिसके कारण वे आज खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं, यह बाल युवा पीढ़ी आजादी के रणबांकुरों के बलिदान से प्रत्यक्ष अवगत हो और जाने की आजादी हमें बहुत आसानी से नहीं मिली थी इसके लिए लाखों जाने अनजाने लोगों ने अपने प्राणों की आहुति लगाई थी| याद करो बलिदान कार्यक्रम में 18 शहीद परिवारों को स्वराज सम्मान से सम्मानित किया गया है| इतिहास क्रम के माध्यम से चुने गए उदाहरण के तौर पर महाराणा प्रताप से लेकर श्रीकृष्ण सरल तक शहीदों में दक्षिण भारत की जैन रानी महादेवी अबबका चोटा भी शामिल है, जिन्होंने 6 बार पुर्तगालियों और अंग्रेजों को पराजित किया और मूड बद्री में अपनी रियासत को आजाद रखा तो दूसरी तरफ नेताजी सुभाष चंद्र बोस के निजी अंगरक्षक व ड्राइवर कर्नल निजामुद्दीन के सुपुत्र मोहम्मद अकरम को भी आमंत्रित और सम्मानित किया गया है| 21 अक्टूबर 1943 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में आजाद हिंद सरकार का गठन किया गया ,उसके 75 वर्ष पूर्ण होने पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था जरा याद करो बलिदान कार्यक्रम की रूपरेखा उस समय बनी जब अपने एक उपदेश में उन्होंने कहा कि शरीर राष्ट्रीय संपदा है|   सम्मान समारोह मे क्रांतिकारी बलिदानियों के वंशजो को सम्मानित किया गया जिनके नाम निम्न प्रकार है -       इस स्वर्णिम अवसर पर आचार्य श्री के विशेष उद्बोधन सुनें -    

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सद्भावना सम्मेलन के साथ खजुराहो मे हुआ, हथकरघा का भोर

खजुराहो, संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्या सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य मे प्रथम हथकरघा सद्भावना सम्मेलन संपन्न ।प्रथम सत्र मे  प्रातः कालीन पूजन सद्भावना परिवार द्वारा किया गया है। दूसरे सत्र मे आये हुए अतिथियों के उद्धबोधन हुए। साथ ही गुरुदेव के मंगल प्रवचन हुए ।    विवेक के स्तर से जब इंसान नीचे उतरता हें, तो वासना उसे शैतान वना देती हैं! आज विश्व के कई देश विष्फोटक सामग़ी के कारण एक दूसरे को डराने में लगे हैं! लेकिन भारत ही एक ऐसा देश हैं जो किसी से डरता नहीं उन्होंने कहा कि यंहा पर सिंह और गाय एक घाट पर पानी पीते हें विश्व के अनेक देश आश्चर्य करते हैं! उन्होंने कहा कि जंहा पर दया का वास होता है, वंहा पर सभी जीव अच्छा ही सोचते हैं! उन्होंने कहा कि कभी भी कोई जीव अपने आप प्रहार नहीं करता उन्होंने कहा कि जब तक मानव दिल और दिमाग का दुरुपयोग न करे तो यह विष्फोटक सामग़ी कोई कितनी भी वना ले उससे कोई भी नुकसान नहीं हो सकता! उसी प्रकार यदि कोई अपराधी है और यदि वह प्रायश्चित कर लेता हैं तो उसको न्यायाधीश भी उस क्रूर व्यक्ती को भी डंड देते समय क्रूरता का उपयोग न करे! उन्होंने कहा कि मनुष्य एक ऐसा प्राणी हैं कि वह सभी को अपने वश में करना चाहता हैं! उन्होंने हंसते हुये कहा वस मुझे छोड़कर आप लोगों ने सभी को वशीकरण किया हैं! उन्होंने कहा कि "आमदनी कम और खर्चा ज्यादा लक्षण है मिट जानेका,  कूवत कम और गुस्सा ज्यादा लक्षण हैं पिट जाने का उन्होंने कहा कि जैलर स़ा. ने कहा कि कैदीयों के लिये हस्तकर्धा से श्री गणेश किया हैं उनकी जिंदगी को सुधारने का तो उसके जबाब में आचार्य श्री ने कहा कि आपने अपनी प्रतिभा का और वुद्दी का और शक्ती का सही सदुपयोग किया हैं। उन्होंने भारत के इतिहास की ओर ले जाते हुये कहा कि भारत के वस्त्रों में गुणवत्ता थी इंग्लैण्ड की महारानी विक्टोरिया के वस्त्राभूषण भारत से जाते थे। लेकिन सुनते हें कि भारत में ऐसे रईस थे कि वह अपने वस्त्र विदेश से वुलवाते थे । अंत मे आचार्य श्री ने कहा यह अभी एक क्रांति है। अब सब लोग प्रण लो आगे से सब हथकरघा के ही वस्त्र पेनहेंगे ।   राष्ट्रीय स्तरीय हथकरघा फेंसी ड्रेस प्रतियोगिता एवं केंद्रीय जैल सागर के कैदियों द्वारा भव्य नाटिका गुरु कृपा कछु दुर्लभ नाही का मंचन किया गया ।अंत मे प्रज्ञाचक्षु कलाकारों द्वारा भव्य भजन संध्या हुई ।  इस मंगल अवसर पर मुख्य अतिथि श्री के.सी जैन, मुम्बई,  श्री विनय कुमार जैन लखनऊ(आई. जी, जेल),डॉ नीलेश दत्तात्रेय, महा निदेशक भारतीय कपड़ा  सहायक एवं उपकरण , श्री यू. टी पवार, जेल अधीक्षक पुणे रहे। मंच संचालन डॉ रेखा जैन (पूर्व डी. एस. पी, सागर) ने किया ।यह कार्यक्रम सद्भावना परिवार, केंद्रीय जेल सागर एवं सक्रिय सम्यकदर्शन सहकार संघ के तत्वाधान मे हुआ ।      

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उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजबादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादब पूर्व मंत्रि मंडल के साथ, आचार्य श्री के दर्शनार्थ खजुराहो पहुचे

आज सुबह आचार्य श्री के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजबादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादब पूर्व मंत्रि मंडल के साथ खजुराहो पहुचे    
 

पुस्तक "बस्तर में अहिंसा की महिमा" का खजुराहो में हुआ विमोचन

खजुराहो में आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज जी  को समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता शफीक खान और डा अर्चना जैन की पुस्तक "बस्तर में अहिंसा की महिमा" का विमोचन आचार्य श्री के ससंघ सानिध्य में  हुआ।पुस्तक में बस्तर के वनवासी अंचल में अहिंसा और शाकाहार का वर्णन है, पुस्तक की ई-प्रति  सादर संलग्न प्रेषित है |   खजुराहो - आचार्य श्री को बस्तर में अहिंसा की महिमा पुस्तक की प्रथम प्रति समर्पित करते हुए लेखक शफीक खान      
 

अहिंसा पद यात्रा कुण्डलपुर से खजुराहो दिनांक 1 अक्टूबर से

कुण्डलपुर से खजुराहो की अहिंसा पदयात्रा का गुरुदेव से आशीर्वाद व् मुख्यमंत्री ने दी शुभ कामनाये 1 से 7 अक्टूबर तक मिलेगा गुरुदेव का आशीर्वाद |  
 

आचार्यश्री विद्यासागर महाराज जी के ससंघ सान्निध्य में शिवराज सिंह चौहान ने खजुराहो में हथकरघा वस्त्रो का किया अवलोकन

आचार्य विद्यासागर जी महाराज ससंघ की उपस्थिति में खजुराहो श्रमदान पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय शिवराज सिंह जी चौहान हथकरघा के वस्त्रो का अवलोकन करते हुए |
 

स्वर्णोदय जिनालय (खजुराहो) के शिलान्यास समारोह में पधारे मुख्यमंत्री एवं वित्तमंत्री

सामूहिक कार्य का श्रेय समूह को ही जाता है, कोई वियक्ति विशेष को नही -आचार्य विद्यासागर जी    स्वर्णोदय जिनालय के शिलान्यास समारोह में पधारे मुख्यमंत्री एवं वित्तमंत्री | विश्व पटल पर संस्कृति धरोहरों में अपना स्थान बनाने के बाद जिसे अंतरराष्ट्रीय संस्था यूनेस्को ने विश्व संपदा के रूप में चंदेलकालीन मंदिरों को उत्कृष्ट स्थान पूरे विश्व मे दिलाया। आज उस इतिहास में एक नई ऊर्जा के साथ स्वर्णोदय तीर्थ न्यास अतिशय क्षेत्र खजुराहो में एक भव्य स्वर्णिम जिनालय का जो कि विश्व मे सबसे ऊंचा एवं शिल्पकारी में खजुराहो को विश्व पटल पर न कि एक पर्यटन नगरी के रूप में बल्कि स्वर्णिम तीर्थ स्थान के रूप में पह्चान दिलाएगा। अपने उद्बोधन में मान्यनिय मुख्यमंत्री ने अचार्य विद्यासागर जी ने जीवदया सम्मान प्राप्त करने वाले सभी पशु पक्षी प्रेमियों को हार्दिक बधाई दी। तथा उन्होंने इस कार्य को संचालित करने के लिए अलग मंत्रालय बनाने की घोषणा की। स्वर्णोदय तीर्थ न्यास समिति के विशेष निमंत्रण पर मान्यनिय मुख्य मंत्री, वित्त मंत्री जयंत मलैया एवं श्री मल्ल कुमार जैन पंडित सुधीर शर्मा, श्री रमेश जैन, विनोद जैन, योगेश जैन ने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण पखारकर आशीर्वाद लिया। समिति के महामंत्री इंजी० रमेश जैन ने सम्पूर्ण भारत वर्ष से पधारे तीर्थ यात्रियों का एवं मुख्य मंत्री वित्त मंत्री जिला प्रशासन खजुराहो डेवलपमेंट एशोसिएशन तथा समस्त खजुराहो वासियों का ह्रदय से स्वागत हार्दिक अभिनंदन किया। तथा उन्होने पंडित सुधीर शर्मा का कार्यक्रम में विशेष सहयोग देने एवं कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आभार वयक्त किया।     आचार्य महाराज के सम्मुख मुख्यमंत्री के उद्गार/भावनाओं की अभिव्यक्ति 1. देश का प्रथम "गौसंवर्धन मंत्रालय"होगा मध्यप्रदेश में -शिवराज सिंह 2. जीव दया के क्षेत्र में सबको मिलकर कार्य करना -शिवराज सिंह चौहान 3.आचार्य श्री जी की कृपा बरसती रहे -मुख्यमंत्री       इस अवसर पर पूरे देश से जैन समुदाय के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे वैसे तो यह भीड़ प्रतिदिन होती है पर  आज का दिन कुछ विशेष  भीड़ बाला वाला रहा विदित हो आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज खजुराहो में चतुर्मास कर रहे हैं जिनके चलते प्रतिदिन ही हजारों की संख्या में उनके अनुयाई यहां पहुंच रहे हैं | कार्यक्रम का सफल संचालन ब्रह्मचारी श्री सुनील भैया जी एवं दीपक भैया जी ने किया।      
 

खजुराहो में समाधि संपन्न 

समाधि संपन्न  खजुराहो, 
पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज  ससंघ  के सानिध्य एवं निर्देशन में दस प्रतिमाधारी जयसुख भाई वसानी (C.A). मुंबई निवासी की सल्लेखना अनंत चौदस 23/9/18 को सानंद संपन्न हुई | वे ७८ वर्ष के थे | विगत २० वर्षों से व्रती जीवन निर्वाह करते हुए 16 जल उपवास व 6 उपवास (अंत समय बेला)| के साथ यह मृत्यु महोत्सव को उत्साह पूर्वक पूर्ण किया |            
 

"मूकमाटी" भोज विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में जुड़ी

"मूकमाटी" भोज विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में जुड़ी   दिगम्बर जैनाचार्य श्री विद्यासागर जी के द्वारा आधुनिक हिन्दी महाकाव्य में अप्रतिम योगदान स्वरूप धर्म, दर्शन और आध्यात्मिक दृष्टि से सम्पन्न लोकविश्रुत कालजयी ‘मूकमाटी' महाकाव्य का सृजन किया गया है। मानव जीवन मूल्यों एवं साहित्य के भूलते जा रहे आस्था भाव को युवा पीढ़ी एवं छात्रों को प्रदान करने वाली इस अभिनव कृति को म. प्र. भोज( मुक्त विश्वविद्यालय, भोपाल के एम. ए. हिन्दी पूर्वार्ध-स्नातकोत्तर उपाधि पाठ्यक्रम में अब शामिल किया गया है।   हिन्दी सन्त काव्य परम्परा तथा आचार्य विद्यासागर के काव्य में लोक मंगल भावना, आचार्य विद्यासागर-जीवन और व्यक्तित्व परिचय, आचार्य विद्यासागर का जीवन दर्शन एवं रचना संसार (संक्षिप्त परिचय), ‘मूकमाटी' का महाकाव्यत्व- उद्देश्य, कथानक, पात्र योजना एवं चरित्र चित्रण, संवाद योजना, परिस्थिति चित्रण, अभिव्यंजना सौंदर्य का विश्लेषण व 'मूकमाटी' के प्रमुख पद्यों की व्याख्या रूप इस प्रश्न पत्र में पाँच इकाइयाँ समायोजित की गई हैं। चार प्रश्नपत्रों वाले इस पाठ्यक्रम की पुस्तकें विश्वविद्यालय से प्राप्त की जा सकती हैं।   इस पाठ्यक्रम में शामिल होने हेतु ऑन् लाइन फार्म भरे जा रहे हैं। लगभग पचपन सौ रुपये शुल्क वाले इस चतुर्थ प्रश्नपत्र में विशेष कवि - आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज कृत 'मूकमाटी' को पढ़ाए जाने वाले इस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के इच्छुक विद्यार्थियों को आगामी ३० सितम्बर तक ऑन लाइन ही फार्म भरना होगा। परीक्षा में तैयारी कराने हेत डॉ. शीलचन्द पालीवाल, पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष - एस. एस. एल. जैन पी. जी. कॉलेज, स्वर्णकार कॉलोनी एवं शिक्षक निर्मलकुमार जैन, गाड़ी अड्डा रोड, गल्ला मण्डी के पास, | विदिशा से सम्पर्क करके निःशुल्क मार्गदर्शन लिया जा सकता है।

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"मूकमाटी' महाकाव्य" निजी विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में भी शामिल

"मूकमाटी" महाकाव्य निजी विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में भी शामिल   दिगम्बर जैनाचार्यप्रवर सन्तशिरोमणि श्री विद्यासागर जी महाराज ने अपनी सुदीर्घ साधना से अर्जित दिव्यज्ञान को गागर में सागर के समान भरकर सन् १९८७ में हिन्दी साहित्य जगत् को अप्रतिम योगदान के रूप में ‘मूकमाटी' महाकाव्य प्रदान किया था। यह कालजयी महाकाव्य अपनी साहित्यिक आभा से जनमानस की चेतना को प्रकाशित कर रहा है व आत्मोत्थान एवं सामाजिक समरसता के दिव्य सन्देश के माध्यम से सुषुप्त चेतना को जाग्रत कर रहा है। ‘मूकमाटी' महाकाव्य की विषयवस्तु पर केन्द्रित होकर मध्यप्रदेश, नई दिल्ली, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, छत्तीसगढ़ आदि प्रदेशों के अनेक विश्वविद्यालयों में अद्यतन ४डी. लिट्., २४ पी-एच. डी. के शोध प्रबन्ध एवं ६ एम. फिल., २ एम. एड. तथा ५ एम. ए. के लघुशोध प्रबन्ध रूप में ४१ शोधकार्य हो चुके/रहे हैं।   आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित ज्येष्ठ मुनि श्री समयसागर जी महाराज के साथ मुनि श्री प्रशस्तसागर जी, मुनि श्री मल्लिसागर जी तथा मुनि श्री आनन्दसागर जी महाराज का वर्षायोग-२०१८ विन्ध्य क्षेत्र की सुप्रसिद्ध धर्मनगरी सतना में हो रहा है। संघस्थ मुनि श्री मल्लिसागर जी महाराज की सत्प्रेरणा से श्री रुचिर जैन, ( साईं कृपा, जे. आर. बिरला मार्ग, सन्तोषी माता के पास ) सतना, म. प्र. ने अथक एवं सार्थक प्रयास किया। इसी के परिणामस्वरूप निजी विश्वविद्यालय के रूप में प्रसिद्ध 'श्री कृष्णा विश्वविद्यालय' ने अपने पाठ्यक्रम में अब'मूकमाटी'महाकाव्य को भी शामिल कर लिया है।   श्री कृष्णा विश्वविद्यालय, छतरपुर, म. प्र. के कुलसचिव के पत्र क्रमांक १९/एसकेयू/२०१८, दिनांक ०७-०९-२०१८ के अनुसार “सन्त शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज द्वारा लिखित पुस्तक ‘मूकमाटी' को स्नातकोत्तर उपाधि हिन्दी विषय के पाठ्यक्रम चतुर्थ सेमेस्टर के तृतीय प्रश्नपत्र में वैकल्पिक प्रश्नपत्र 'कोई एक साहित्यकार-आचार्य विद्यासागर' के रूप में पढ़ाये जाने हेतु पाठ्यक्रम में सम्मिलित कर लिया है।''   "मूकमाटी" महाकाव्य अब तक बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी (उत्तरप्रदेश), पण्डित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर (छत्तीसगढ़ ), राष्ट्रसन्त तुकड़ोजी महाराज नागपुर विद्यापीठ, नागपुर ( महाराष्ट्र), सौराष्ट्र विश्वविद्यालय, राजकोट (गुजरात), अटलबिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय, भोपाल (म. प्र.), बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल (म. प्र.), विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन (म. प्र. ) आदि के एम. ए./एम. फिल.-हिन्दी तथा अंग्रेजी आदि के विविध पाठ्यक्रमों में भी ‘मूकमाटी' महाकाव्य सम्मिलित किया जा चुका है।   मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के लिए मध्यप्रदेश राज्य शिक्षा केन्द्र, भोपाल' द्वारा निर्मित 'कक्षा नवमी' विषयक 'नवनीत- हिन्दी विशिष्ट' नामक पाठ्यपुस्तक २०१८ के संस्करण में 'कविता का स्वरूप एवं विकास' के अन्तर्गत 'पद्य साहित्य का इतिहास' शीर्षक के दसवें पाठ 'विविधा' में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का जीवन परिचय सहित' मूकमाटी'महाकाव्य के पृष्ठ १६९-१७० पृष्ठों पर मुद्रित कविता का चयनित अंश तीसरे पाठ के रूप में स्वाभिमान' नाम से संकलित व प्रकाशित होकर अब मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों के ज्ञानार्जन में सहयोगी बनेगा।   इसके अतिरिक्त रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर, मध्यप्रदेश भोज ( मुक्त) विश्वविद्यालय, भोपाल, सेज यूनिवर्सिटी, इन्दौर (म.प्र.), बस्तर विश्वविद्यालय, जगदलपुर ( छत्तीसगढ़ ) इत्यादि के पाठ्यक्रमों में भी ‘मूकमाटी' महाकाव्य को शामिल किये जाने सम्बन्धी प्रक्रिया गतिमान है।  

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माननीय राष्टपति जी को मूकमाटी सचित्र की प्रति सादर भेंट

राष्ट्रपति को मूकमाटी सचित्र की प्रति सादर भेट   आचार्य श्री विद्यासागर जी के 50 वें दीक्षा दिवस पर संयम स्वर्ण महोत्सव के अवसर पर महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद महोदय को भारतीय ज्ञानपीठ के प्रबंधन्यासी साहू अखिलेश जैन के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल में श्री स्वर्दशभूषण जैन (न्यासी, भारतीय ज्ञानपीठ), श्री अशोक पाटनी, श्री एस. के. जैन, डॉ. सौगनी, श्री प्रभात जैन(मुम्बई) और श्री पंकज जैन आदि ने आचार्य श्री के द्वारा लिखित पुस्तक मूकमाटी सचित्र की प्रति भेट की।   यह महाकाव्य धर्म-दर्शन एवं अध्यात्म के सार को आज की भाषा एवं मुक्त - छन्द की मनोरम काव्य शैली में निबद्ध कर कविता रचना को नया आयाम देने वाली एक अनुपम कृति। आचार्य श्री विद्यासागर जी की काव्य प्रतिभा का यह चमत्कार है कि माटी जैसी निरीह, पददलित, व्यथित वस्तु को महाकाव्य का विषय बनाकर उसकी मूकवेदना और मुक्ति की आकांक्षा को वाणी दी है। कुम्भकार शिल्पी ने मिट्टी की ध्रुव और भव्य सत्ता को पहचानकर कूटछानकर, वर्णसंकर कंकर को हटाकर उसे निर्मल मूदुता का वर्णलाभ दिया है। यह महाकाव्य साहित्य जगत् और आध्यत्मिक जगत् के लिए सदैव उपादेय है।   इस महाकाव्य अनेकों शोध कार्य हो चुके है। वर्तमान में यह महाकाव्य 36 विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल है। 19 भाषाओं में इसका अनुवाद प्रकाशित हो चुका है। अभी हाल ही में भारतीय ज्ञानपीठ, नयी दिल्ली से यह महाकाव्य सचित्र रूप में प्रकाशित हुआ है।     आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज द्वारा लिखित काव्य मूक माटी को माननीय राष्ट्रपति श्रीमान रामनाथ जी कोविंद को प्रदान करते हुए समाज के सृष्टि गन अशोक जी पाटनी एवं अन्य.  
 

संयम स्वर्ण महोत्सव वर्ष के अंतर्गत देश-विदेश में हुए मुख्य कार्यक्रमों को श्री विद्यासागर कार्मिक जगत समाचार पत्र द्वारा 20 पृष्ठीय बहुरंगीय विशेषांक में प्रकाशित किया गया

संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज के 50वें संयम स्वर्ण महोत्सव वर्ष के अंतर्गत देश-विदेश में हुए मुख्य कार्यक्रमों को श्री विद्यासागर कार्मिक जगत समाचार पत्र द्वारा 20 पृष्ठीय बहुरंगीय विशेषांक में प्रकाशित किया गया है।  
 

ऐतिहासिक  मंगल कलश स्थापना से चातुर्मास शुरू सम्यकज्ञान, सम्यक चारित्र और दान आपके साथ रहेगा - आचार्य विद्यासागर

ऐतिहासिक  मंगल कलश स्थापना से चातुर्मास शुरू
सम्यकज्ञान, सम्यक चारित्र और दान आपके साथ रहेगा - आचार्य विद्यासागर
छतरपुर । आध्यात्म एवं पर्यटन नगरी खजुराहो में आचार्य विद्यासागर जी महाराज का आज से चातुर्मास प्रारंभ हुआ। कलशस्थापना समारोह में  देश-विदेश से भारी संख्या में उनके अनुयायी यों  ने पर्यटन नगरी खजुराहो पहुंचकर उनका आर्शीवाद लिया। जिला कलेक्टर रमेश भंडारी और उनकी पत्नी ने भी इस मौके पर पहुंचकर आचार्य विद्यासागर जी के चरण पखारे और आर्शीवाद प्राप्त किया। इस मौके पर कलशस्थापना भी की गयी। आज के इस कार्यक्रम में भारी संख्या में जैन समाज सहित अन्य धर्मो के लोग भी शामिल हुए। कलश स्थापना के इस कार्यक्रम का संचालन और निर्देशन बा.ब्र. सुनील भैया अनन्तपुरा वालों द्वारा किया गया। 
रविवार को दोपहर २ बजे से से तीन प्रकार के कलशों के माध्यम से समाज के श्रावकगण   चातुर्मास की कलश स्थापना हर्सोल्लास के साथ की गयी। प्रथम कलश यानि सबसे बड़े 9 कलश स्थापित किये गये ,मध्यम 27 कलश और सबसे छोटे 54 कलश स्थापित किये किये। ये सभी कलश आचार्य श्री के मुखारविंद से विधिविधान पूर्वक मंत्रो के उच्चा रण से स्थापित हुए,जिसे श्रावकगण बोली लेकर स्थापित किया गया। ये सभी कलश विश्व शांति और विश्व कल्याण के उद्देश्य और  वर्षायोग के निर्विघ्न सम्पन्न होने   की कामना से स्थापित किये जाते है। प्रथम कलश का सौभाग्य तरूण जी काला मुम्बई 2 करोड़ 7 लाख, द्वितीय कलश डॉ. सुभाषशाह जैन मुम्बई 1 करोड़ 51 लाख, तृतीय कलश का सौभाग्य हुकुमचंद्रजी काका कोटा 1करोड़ 17 लाख, चतुर्थ कलश का सौभाग्य उत्तमचंद्र जैन कटनी कोयला वाले 1 करोड़ 8 लाख, पंचम कलश का सौभाग्य प्रेमीजैन सतना वाले 1 करोड़ 31 लाख, छठवां कलश का सौभागय श्री प्रभातजी जैन मुम्बई पारस चैनल करोड़  8 लाख, सातवां कलश ऋषभ शाह सूरत 1 करोड़ 8 लाख, आठवां कलश  पं. सुभाष जैन भोपाल 54 लाख एवं पुष्पा जैन बैनाडा आगरा वाले एवं नौवां कलश का सौभाग्य अशोक पाटनी 2 करोड़ 52 लाख को प्राप्त हुआ। 
स्थानीय विधायक विक्रम सिंह नाती राजा और नगर परिषद् अध्यक्षा कविता राजे बुंदेला, इंदौर विधायक रमेश मेंदोला  ने भी कलश स्थापना समारोह में आचार्य श्री को श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया। 
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि आप सब यहां सम्यकज्ञान, सम्यक चारित्र और दान देकर अगले भव के लिए अपने साथ ले जाने वाले है। आचार्यश्री ने कहा कि लगभग 38 वर्ष पूर्व मै खजुराहो पंचकल्याणक के लिए आया था। यहां कि कमेटी बार-बार खजुराहो के लिए आग्रह करती रही। मैं भी इस बार चलते-चलते यहां पहुंच गया। आचार्यश्री ने कहा कि यहां के राजा छत्रसाल का कुण्डलपुर के बड़े बाबा से गहन संबंध रहा है। राजा छत्रसाल ने बड़े बाबा को जब छत्र चढ़ाया उसके साथ ही उन्हें विजय प्राप्त हुयी। महाराजश्री ने कहा कि व्यक्ति को धन अपने पास श्वास जैसा रखना चाहिए ताजी ग्रहण करें और पुरानी निकालते जाए, सम्पत्ति हाथ का मैल है इसे साफ करते रहें। आचार्यश्री ने कहा कि आप सबका उत्साह सराहनीय है। खजुराहो क्षेत्र के विकास के लिए  अपना योगदान देते रहें। पूर्व में खजुराहो क्षेत्र कमेटी सहित जैन समाज छतरपुर, पन्ना,सतना, टीकमगढ़ सहित एवं बाहर से पधारे अतिथियों ने आचार्यश्री को श्रीफल भेंट किया।
 

आचार्य श्री विद्यासागर जी के ससंघ चतुर्मास कलश की स्थापना आज,देश-विदेश से आएंगे श्रद्धालु

खजुराहो । प्रख्यात जैन संत शिरोमणि108 आचार्य विद्या सागर जी महाराज के ससंघ चातुर्मास( वर्षायोग) के कलश की स्थापना आज रविवार 30 जुलाई को दोपहर डेढ़ बजे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी खजुराहों में एक गरिमामयी औऱ भव्य कार्यक्रम में होगी।इस बड़े और अनूठे धार्मिक आयोजन के प्रत्यक्षदर्शी बनने न केवल समीपी क्षेत्रों से वरन देश-विदेश से आचार्यश्री के भक्तजन व श्रद्धालु खजुराहो पहुंचना शुरू हो गए है।              आचार्य विद्या सागर महाराज  ससंघ खजुराहो में 14 जुलाई से  विराजमान है। पूज्य आचार्यश्री ने बुधवार को ससंघ अपनी चातुर्मास स्थापना शांति नाथ भगवान के समक्ष विधि विधान के साथ कर ली थी।इस दिन संघ के सभी साधुओं ने उपवास भी रखा था। अब आचार्यश्री ससंघ एक निश्चित सीमा बांधकर अब 4 माह तक खजुराहो में रहकर धर्म ध्यान करेगे।           आज  रविवार 30 जुलाई को दोपहर 1:30 से तीन प्रकार के कलशों के माध्यम से समाज के श्रावकगण  चातुर्मास की कलश स्थापना हर्सोल्लास के साथ करेंगे। प्रथम कलश यानि सबसे बड़े 9कलश स्थापित किये  जाएंगे ,मध्यम 27 कलश और सबसे छोटे 54 कलश स्थापित किये जायेंगे ।ये सभी कलश आचार्य श्री के मुखारविंद से विधिविधान पूर्वक मंत्रो के उच्चा रण से स्थापित होंगे,जिसे श्रावकगण बोली लेकर स्थापित करेगे।ये सभी कलश विश्व शांति और विश्व कल्याण के उद्देश्य और  वर्षायोग के निर्विघ्न सम्पन्न होने   की कामना से स्थापित किये जाते है। इस बार के चातुर्मास की ख्याति विश्व स्तर पर होगी और  अतिशय क्षेत्र खजुराहो के जिनालयों के दर्शन करने के लिए देश विदेश के आएंगे। खजुराहो क्षेत्र में आचार्यश्री के चातुर्मास से जैन धर्म और दर्शन की प्रभावना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही है।        साधुजन इस लिए करते हैं चातुर्मास-- डॉ. सुमति प्रकाश जैन ने चातुर्मास की अवधारणा और उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए बताया कि जैन धर्म अहिंसा प्रधान धर्म है।वर्षाकाल में लाखों जीवों की उत्पत्ति होती है और वे बहुतायत से चहुंओर व्याप्त रहते हैं।ऐसे में पदबिहारी साधुजनों से किसी सूक्ष्म से सूक्ष्म जीव की हिंसा न हो,इस लिए जैन साधु वर्षाकाल के चार महीनों में अपनी पदयात्रा को रोक कर किसी एक स्थान पर रुक कर अपने आत्मकल्याण हेतु स्वाध्याय,धार्मिक-आध्यात्मिक ग्रंथो, जैन धर्म व दर्शन का अध्ययन-मनन करते हैं और श्रावकों को अपने मंगल प्रवचनों से सदमार्ग पर निरन्तर चलने की प्रेरणा देते हैं।डॉ जैन ने बताया कि जैन धर्म के साथ साथ हिन्दू धर्म मे भी साधुओं के चातुर्मास की परंपरा है।वे भी वर्षाऋतु में एक जगह रह कर अपना चातुर्मास व्यतीत करते हुए धर्मध्यान में लीन रहते है।        कलश स्थापना के इस कार्यक्रम का संचालन और निर्देशन ब्र. सुनील भैया ,अनन्तपुर करेंगे ।आयोजन को सानन्द ओर निर्विघ्न सम्पन्न करने के लिए विभिन्न समितियां बना कर उन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई ह
 
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