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आचार्य श्री विद्यासागर जी महराज से सम्बन्धित नवीनतम समाचार.

published news updates about Acharyashri Vidyasgar Ji Maharaj, प्रेस विज्ञप्ति /Press Release related to Acharya Vidyasagar Ji maharaj 

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अपना कल्याण करना है तो मन के भीतर जाना होगा, ज्यादा पैसाें की बोली लगाने से कुछ नहीं होता: आचार्यश्री

केवल ज्यादा पैसों की बोली लगाने से कुछ नहीं होता, तनाव को कम करने के लिए दान देते हैं। जबकि तन को दूर करने के लिए दान दिया जाता है। यह उद्गार राष्ट्रीय जैन संत आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने देवरी के दिगंबर जैन मंदिर परिसर में व्यक्त किए। आचार्य श्री विद्यासागर महाराज सुबह गोपालपुरा से देवरी नगर पहुंचे जहां देवरी जैन समाज द्वारा धूमधाम से अगवानी की गई। इसके बाद आहार चर्या का सौभाग्य नन्हे भाई जैन परिवार को मिला।   प्रवचन के दौरान आचार्यश्री ने कहा कि आप लोग केवल देहरी पर रह रहे हैं इसलिए भीतर की बात समझ में नहीं आती है, देहरी घर के बाहर रहती है। जैसे बीना जी अतिशय क्षेत्र की देहरी देवरी है और अभी में देहरी पर आया हूं। उन्होंने कहा जब भीतर पहुंचो तभी भगवान से परिचय होता है। देहरी के बिना मंदिर में प्रवेश नहीं होता। आप लोग शांतिनाथ भगवान की ओर जा रहे हैं, इसलिए देहरी के बिना नहीं पहुंचा जा सकता है। आप लोगों को अपना कल्याण करना है तो भीतर जाना होगा। केवल जाने के लिए ज्यादा पैसाें की बोली लगाने से कुछ नहीं होता है। तनाव को टेंशन को कम करने के लिए लोग दान देते हैं तन को दूर करने के लिए दान दिया जाता है। राष्ट्रीय जैन संत आचार्य श्री विद्यासागर महाराज देवरी नगर से दोपहर 3 बजे ससंघ बिहार करते हुए शाम करीब 5 बजे अतिशय क्षेत्र बीना बारह पहुंचे। जहां उन्होंने गजरथ स्थल का मुआयना किया एवं बीना बारह में चल रहे मंदिरों का निर्माण कार्य और प्रतिमाओं का अवलोकन किया। शोभायात्रा में अखिलेश जैन, तेजी राजपूत, मयंक चौरसिया नपाध्यक्ष, प्रमोद जैन, ऋषभ जैन, रजनीश जैन, गौरव पांडे, विनीत, अभय, विनोद, कमल, मुकेश जैन ढाना, आकाश, अप्पू चौधरी, नीरज जैन, कल्लू बड़कुल आदि शामिल रहे। 

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16 एवं 17 फरवरी को सागर भाग्योदय तीर्थ परिसर में संपन्न हुई राष्ट्रीय हथकरघा संगोष्ठी

राष्ट्रीय हथकरघा संगोष्ठी संपन्न हुई 16 17 फरवरी को सागर भाग्योदय तीर्थ परिसर में दिगंबराचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में दो दिवसीय राष्ट्रीय जेल हथकरघा संगोष्ठी संपन्न हुई करीब 20,000 की जनता द्वारा कार्यक्रम को सराहा गया 16 फरवरी की प्रातः मध्यप्रदेश शासन की लघु एवं कुटीर उद्योग मंत्री श्री हर्ष यादव द्वारा दीप प्रज्वलन की कार्रवाई संपन्न की दिल्ली तिहाड़ जेल से आए हुए डीआईजी श्री एसएस परिहार द्वारा जेल हथकरघा में बन रही साड़ियों की खूब सराहना की और तिहाड़ जेल में यथा शीघ्र प्रारंभ करने के लिए आचार्य श्री जी से निवेदन किया अनुबंध करने की तैयारी पूर्व में कर चुके है उत्तर प्रदेश के एआईजी जेल द्वारा भी आगरा जेल मिर्जापुर जेल और बनारस जेल में हथकरघा से साड़ियां बनवाने के लिए गुरु जी से निवेदन किया गया मुंबई से आए श्री प्रशांत टैक्सटाइल इंजीनियर जेल अधीक्षक द्वारा साड़ियों के नागपुर जेल में बनवाने के लिए गुरु जी से अनुरोध किया गया इसी प्रकार हरियाणा छत्तीसगढ़ और झारखंड से जेल अधिकारी आए हुए थे   17 फरवरी को पर्यटन मंत्री श्री सुरेंद्र सिंह बघेला द्वारा दीप प्रज्वलन की कार्रवाई की अपने गुरु जी को विश्वास दिलाया मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की जहां जहां भी संपत्ति है वहां वहां हाथ करघा का  वस्त्र विक्रय किया जाएगा आचार्य श्री की प्रेरणा से चल रहे हथकरघा सेंटर की ब्र. अनुराग भैया ब्र. रुबी दीदी प्रतिभा मंडल की ब्र. नीरज दीदी एवं श्री प्रदीप पड़ा द्वारा भी हथकरघा संबंधी वक्तव्य दिया गया इस कार्यक्रम से भारतवर्ष में जागृति आई और लोगों का रुझान हाथ करघा के लिए बढ़ा केंद्रीय जेल सागर के अधीक्षक  श्री राकेश भांगरे द्वारा सागर जेल में  संचालित हाथ करघा की जानकारी दी जेलर श्री मदन कमलेश डिप्टी जेलर श्री नागेंद्र चौधरी द्वारा  कार्यक्रम को सफल बनाने में  महत्वपूर्ण योगदान दिया कार्यक्रम का संचालन डॉ रेखा जैन डीएसपी द्वारा किया गया सम्मान की कार्रवाई डॉक्टर नीलम जी ब्रह्मचारी राजा भैया द्वारा की गई
सक्रिय सम्यक दर्शन सहकार संघ संस्था की ओर से ब्रह्मचारी सुनील भैया ने विशेष धन्यवाद दिया दिल्ली से आए हुए श्री चमन लाल जी जैन श्री एस के जैन रिटायर्ड आईपीएस एवं श्री एनसी जैन मॉडल टाउन को क्योंकि आपके ही सद् प्रयासों तिहाड़ जेल  के अधिकारी आए थे इसी प्रकार उत्तर प्रदेश जेल के अधिकारी श्री विनय कुमार जी जैन को विशेष रूप से धन्यवाद ज्ञापित किया बारामती से आए श्री अतुल काका जी को एवं श्रीमती संगीता भाभी को मुंबई राज्य के अधिकारियों को जोड़ने में अहम भूमिका रही इसी प्रकार हरियाणा से आए हुए श्री अजय कुमार जैन एडवोकेट जनरल को हरियाणा जींद के अधिकारी श्री अनिल कुमार जी को लाने में सहयोग करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया श्री राजा भैया सूरत श्री प्रभात मुंबई विनोद बड़जात्या रायपुर श्री सुधीर जी छुई खदान इत्यादि अनेक गणमान्य नागरिक जिन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में तन मन धन से सहयोग किया था एवं भाग्योदय तीर्थ के ट्रस्टी गण और सकल दिगंबर जैन समाज को साधुवाद किया l डॉ रेखा जैन ने बताया कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी जेल के बंदियों द्वारा राखी और रुमाल रक्षाबंधन के लिए तैयार किए जाएंगे और पूरे भारतवर्ष में ही नहीं विदेशों में भी जेल के बंदियों की सद्भावना राखी और रूमाल एवं साड़ियां उपलब्ध रहेगी विक्रय हेतु और अति शीघ्र तिहाड़ जेल दिल्ली और उत्तर प्रदेश की जेलों में गुरुदेव की कृपा पहुंचेगी बंदी जन वहां भी काम करेंगे l

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हमारा स्वागत चिल्लर पार्टी ने किया है : आचार्यश्री विद्यासागर

आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने गौरझामर में एक धर्म सभा के दौरान कहा कि रंग देखकर भी रंग बदल जाता है। दान देने वालों को देख कर दान देने के भाव भी बन जाते हैं। छोटे-छोटे बच्चे जिन्हें हम चिल्लर पार्टी कहते हैं। उन्होंने भी हमारी अगवानी की है। खूब जयकारा लगाया है। बहुत पुण्यात्मा जीव होंगे। आचार्यश्री ने कहा छोटे-छोटे बच्चे सर्दी में भी सुबह से हमारा नाम लेकर जयकारा लगाते हैं। 

उन्होंने कहा कि मूक पशुओं की रक्षा के लिए आपके ग्राम में गौशाला बनकर तैयार हुई है। आप लोगों को अच्छे ढंग से उसकी देखभाल करना है। ऐसा मौका कम लोगों को मिलता है जो मूक पशुओं की सेवा करें। आचार्यश्री की अगवानी गौरझामर केसली सुरखी, रहली, चांदपुर, सागर, महाराजपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र सहित बीना बारह क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारियों ने की। गौरझामर में विराजमान आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने भी ससंघ आचार्य भगवन की अगवानी की और तीन परिक्रमा लगा कर आचार्य श्री को नमोस्तु किया और आशीर्वाद लिया। आर्यिका विज्ञानमति माताजी इन दिनों गौरझामर में विराजमान हैं। 

आचार्यश्री ससंघ पहुंचे गोपालपुरा, गुरूवार को देवरी में अगवानी 

गौरझामर में आचार्यश्री विद्यासागर महाराज की बुधवार की आहारचर्या के बाद आचार्य संघ का दोपहर 1.30 बजे बिहार देवरी की ओर हो गया। 8 किलोमीटर चलकर रात्रि विश्राम ग्राम गोपालपुरा में हुआ। गुरूवार सुबह 8.30 बजे देवरी में अगवानी होगी। आहारचर्या भी देवरी में ही होने की संभावना है। गौरझामर में आचार्यश्री की आहार चर्या का सौभाग्य ब्रह्मचारी मयूर भैया, अशोक बजाज, ब्रह्मचारी राहुल, भैया रविंद्र जैन को मिला। गौरझामर में आचार्य श्री के पाद प्रच्छालन करने का सौभाग्य जबलपुर निवासी कमला जैन, सविता जैन, प्रिंस गुलशन जैन, अखिलेश नवाब स्नेहा जैन, हर्ष केजल जैन को मिला। आचार्य श्री को शास्त्र भेंट जिनेंद्र जैन, नीलेश जैन ने किया। दान में प्राप्त राशि को दयोदय गौशाला गौरझामर में देने की घोषणा की गई गौशाला के अध्यक्ष कलू चौधरी ने बताया पूरी गौशाला तैयार हो गई है गौशाला की 5 एकड़ जमीन जिनेश जैन, दिलीप जैन, अमर जैन द्वारा दी गई है। कार्यक्रम का संचालन मुकेश जैन ढाना ने किया। 

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मन में छोड़ने के भाव हैं तो बिल्कुल भी विलंब नहीं करना चाहिए : आचार्यश्री

सागर के सुरखी कस्बे में मंगलवार काे आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने धर्मसभा में कहा की यदि मन में छोड़ने के भाव हैं तो बिल्कुल भी विलंब नहीं करना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्र में आपके द्वारा छोड़ने के भाव जल्दी बन जाते हैं। शहरों में यह काम देर में होता है 

आचार्य श्री ने कहा दक्षिण में छोटे-छोटे बच्चों को झबला पहनाया जाता है। उसमें बटन नहीं होते, चैन नहीं होती, लेकिन एक धागा होता है। उस धागे को खींच दो और छोड़ दो तो वह टाइट हो जाता है या थोड़ा खुल जाता है। इससे बच्चों को दिक्कत नहीं होती है। यही हाल सुरखी में देख रहा हूं थोड़ा सा खींचा और दान देने के भाव आप लोगों के बढ़ गए। जब धार्मिक अनुष्ठान होता है तो निश्चित रूप से छोड़ने के भाव होते हैं ग्रामीण जन सीधे-साधे होते हैं। व्यापारी वस्तु तो देते हैं पर मुद्रा लेते हैं। संतोषी व्यक्ति आकुलता नहीं करता,जो आकुलता रखता है वह बिन मतलब के बंध का कारण बनता है। 

चितौरा से आचार्यश्री ससंघ पहंचे सुरखी 

चितौरा से आचार्य संघ का विहार मंगलवार काे सुबह 7 बजे हुआ। 12 किमी बिहार कर आचार्य संघ सुरखी पहुंचा। जहां आचार्य श्री का पूजन भक्ति भाव से हुअा। आचार्यश्री का प्रक्षालन सुरेंद्र,अरविंद,महेश,कमल पठा परिवार और सुरेंद्र जैन, संभव जैन चिताैरा परिवार ने किया। आचार्य श्री की आहार चर्या का सौभाग्य ब्रम्हचारी मयूर भैया, मुकेश बड़कुल, राकेश बड़कुल, मनोज जैन परिवार को प्राप्त हुआ। बड़कुल परिवार ने सर्वतोभद्र जिनालय भाग्योदय तीर्थ में एक बड़ी प्रतिमा विराजमान कराने की बात कही। अाचार्य श्री ने दोपहर बाद गौरझामर की ओर विहार किया। रात्रि विश्राम बरकोटी तिराहे पर हुआ। 

मंगलवार काे 9 मुनि महाराज और 58 आर्यिका माता जी की दीक्षा दिवस विभिन्न स्थानों पर मनाया गया। सुरखी में अरविंद बड़कुल की पुत्री रुपाली जैन ने आचार्यश्री के समक्ष आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लिया। 20 फरवरी को आचार्य संघ की गौरझामर मैं अगवानी आर्यिका विज्ञानमति माता ससंघ करेंगी। गौरझामर में नई गौशाला का उद्घाटन आचार्य संघ के सानिध्य में हाेने की संभावना है। 

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भाग्याेदय तीर्थ से आचार्यश्री का ससंघ बीना-बारहा की ओर विहार

संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागर महाराज का ससंघ मंगल विहार साेमवार काे दोपहर भाग्योदय से बीना-बारहा की ओर हुआ। वह यहां 24 दिन विराजमान रहे। आचार्य श्री दाेपहर 1.30 बजे संत भवन से निकले और मंदिर पहुंचे, वहां से सीधे सुभाष नगर हाेते हुए राहतगढ़ बस स्टैंड, विजय टॉकीज, मस्जिद, तीन बत्ती से परकोटा,बसस्टैंड, गोपालगंज, लाल स्कूल होकर जिला पंचायत चौराहा से विश्वविद्यालय पहुंचे। वहां से बम्हाेरी चौराहा होते हुए चितौरा गांव पहुंचे। जहां रात्रि विश्राम किया। 

21 किमी की दूरी आचार्यश्री ने पौने चार घंटे में पूरी की : भाग्याेदय से चिताैरा तक 21 किलोमीटर की दूरी आचार्य संघ ने पौने 4 घंटे में पूरी की और बीच में कहीं भाी विश्राम नहीं किया। 19 फरवरी को आचार्य संघ की आहार चर्या चितौरा से 13 किलोमीटर दूर ग्राम सुरखी में होने की संभावना है। मुनि सेवा समिति के सदस्य मुकेश जैन ढाना ने बताया आचार्य संघ गौरझामर, देवरी होकर बीना बारह पहुंचेगा ।गौरझामर में मुनि विमल सागर महाराज के आशीर्वाद से रहली रोड पर दयोदय गौशाला का निर्माण कार्य हुआ है। उसमें भी समाज के लोग आचार्य संघ का आशीर्वाद चाहते हैं। 

शिष्य और शीशी को डांट लगाना चाहिए: आचार्यश्री 

आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने भाग्योदय तीर्थ में बिहार के पूर्व धर्मसभा में कहा डांट नहीं लगाते हैं तो शीशी लुड़क जाती है और उसके अंदर जो दवा होती है वह कोई काम की नहीं रहती, शिष्य को भी यदि हम डांट नहीं लगाएं तो वह भी बिगड़ जाता है अतः शिष्य और शीशी को हमेशा डांट लगाना चाहिए। इससे पहले सुबह आचार्य श्री ने कहा जो साधन होता है कभी-कभी वही साधन बाधक बन जाता है ऐसा हम लोगों के प्रमाद के कारण होता है थोड़ा तो डांट अवश्य लगना चाहिए और यदि नहीं लगाते हैं तो गड़बड़ हो जाती है उन्होंने कहा अभिभावकों, शिक्षकों, शिक्षिकाओं को ध्यान से बच्चों को डांट लगाना चाहिए ताकि बच्चे ठीक तरीके से रहें और पढ़ें। उन्होंने कहा प्रतिभा स्थली के बच्चे 12वीं के बाद बाहर निकलने वाले हैं। योग्य शिक्षा के बाद वह बाहर पढ़ाई करेंगे लेकिन आप लोग लक्ष्य की ओर बढ़ोगे तो स्वर्ण अवसर प्राप्त होगा। आचार्य श्री ने कहा के बच्चों को ऐसी डांट लगाओ जाे उसे महसूस हो जाए लेकिन पश्चाताप ना करना पड़े। आचार्य श्री का पूजन प्रतिभा स्थली जबलपुर के बच्चों, दीदियों, पजनारी कमेटी बंडा, जैन समाज सानाैधा, मंगलगिरी कमेटी , गौरा बाई मंदिर कमेटी सहित समाज के सभी सदस्यों ने की। इस अवसर पर बड़ी मूर्ति लेने वाले पुण्यार्जक अरविंद जैन अब्बू ,पीसी नायक, निखिल नायक, मनोज जैन ऋषभ लालो, डॉ विशाल जैन, प्रियेश जैन तथा महेंद्र जैन और ब्रह्मचारी राजेश भैया ने सर्वतो भद्र जिनालय में एक बड़ी मूर्ति विराजमान कराने की घोषणा की। वहीं सर्व ब्राहम्ण समाज संगठन ने महाराज जी को श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद लिया। इस दाैरान जिला अध्यक्ष पं देवीप्रसाद दुबे, कस्तूरी दुबे, प्रतिभा, डॉ अनिल तिवारी, अनिल दुबे, गोलू रिछारिया, एके शर्मा, कपिल पचौरी उपस्थित थे। 

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हथकड़ी से हथकरघा की ओर बढ़ रहे हाथों की चर्चा हर जगह, युवा हस्तक्षेप की जगह हस्तकला में बनें निपुण : आचार्यश्री

पिछले दिनों से हथकड़ी से हथकरघा की ओर बढ़ रहे हाथों की चर्चा है। जिसका शंखनाद केंद्रीय जेल सागर से हुआ और पूरे देश को आकर्षित कर रहा है। युवा पीढ़ी को हस्तक्षेप की बजाय हस्तकला में निपुण बनना होगा। कभी-कभी अनावश्यक हस्तक्षेप हमें हथकड़ी पहनने पर मजबूर कर देता है। हथकरघा से बने वस्त्र पहनने से हम न्याय व शांति प्रिय बन जाते हैं। यह बात आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने भाग्योदय तीर्थ में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा संगोष्ठी के समापन पर कही। उन्होंने कहा कि जब देश में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में हिंदी बोलने पर दंड दिया जाता हो तो हम नए भारत का निर्माण कैसे कर सकते हैं। इससे पहले संगोष्ठी के दूसरे दिन का शुभारंभ प्रदेश के पर्यटन मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल ने किया। 

उन्होंने कहा कि शासन की पर्यटन बेवसाइट पर आचार्यश्री के प्रकल्पों मंदिर व हस्तकला केंद्रों को प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। जहां-जहां आपके चरण पड़ते हैं, वहां हमेशा सकारात्मक परिवर्तन आ जाता है। ब्रह्मचारी संजीव भैया ने कहा कि हथकरघा के वस्त्र मंहगे हो सकते हैं लेकिन आपके स्वास्थ्य से बढ़कर नहीं हैं । आदिवासी इलाकों में चल रहे चरखा प्रशिक्षण का कार्य देख रहीं नीरज दीदी ने कहा कि आचार्यश्री की भावना से 1999 में प्रतिभामंडल का उदय हुआ, जिसमें आज 300 बहने समर्पण भाव से कार्य कर रही हैं। रविशंकर वार्ड सागर में संचालित हथकरघा के संचालक प्रदीप जैन ने कहा कि हथकरघा कुटीर उद्योग के क्षेत्र में सागर देश में अलग स्थान बनाने जा रहा है। संगोष्ठी में रूबी दीदी ने कहा कि यदि पावरलूम पांच परिवारों को रोजगार देता है तो उतने उत्पादन के लिए हथकरघा सौ परिवारों को रोजगार देता है। संचालन डॉ. रेखा जैन ने एवं आभार ब्रह्मचारी सुनील भैया ने माना। इस माैके पर न्यायाधीश अरविंद जैन, एमके जैन , शुभम मोदी, जेलर मदन कमलेश, डिप्टी जेलर नागेंद्र चौधरी, महेश बिलहरा, प्रकाश बहेरिया, आनंद स्टील, वीरेंद्र मालथौन, डॉ. नीलम जैन अादि मौजूद थे। 
भास्कर संवाददाता | सागर 

पिछले दिनों से हथकड़ी से हथकरघा की ओर बढ़ रहे हाथों की चर्चा है। जिसका शंखनाद केंद्रीय जेल सागर से हुआ और पूरे देश को आकर्षित कर रहा है। युवा पीढ़ी को हस्तक्षेप की बजाय हस्तकला में निपुण बनना होगा। कभी-कभी अनावश्यक हस्तक्षेप हमें हथकड़ी पहनने पर मजबूर कर देता है। हथकरघा से बने वस्त्र पहनने से हम न्याय व शांति प्रिय बन जाते हैं। यह बात आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने भाग्योदय तीर्थ में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा संगोष्ठी के समापन पर कही। उन्होंने कहा कि जब देश में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में हिंदी बोलने पर दंड दिया जाता हो तो हम नए भारत का निर्माण कैसे कर सकते हैं। इससे पहले संगोष्ठी के दूसरे दिन का शुभारंभ प्रदेश के पर्यटन मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल ने किया। 

उन्होंने कहा कि शासन की पर्यटन बेवसाइट पर आचार्यश्री के प्रकल्पों मंदिर व हस्तकला केंद्रों को प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। जहां-जहां आपके चरण पड़ते हैं, वहां हमेशा सकारात्मक परिवर्तन आ जाता है। ब्रह्मचारी संजीव भैया ने कहा कि हथकरघा के वस्त्र मंहगे हो सकते हैं लेकिन आपके स्वास्थ्य से बढ़कर नहीं हैं । आदिवासी इलाकों में चल रहे चरखा प्रशिक्षण का कार्य देख रहीं नीरज दीदी ने कहा कि आचार्यश्री की भावना से 1999 में प्रतिभामंडल का उदय हुआ, जिसमें आज 300 बहने समर्पण भाव से कार्य कर रही हैं। रविशंकर वार्ड सागर में संचालित हथकरघा के संचालक प्रदीप जैन ने कहा कि हथकरघा कुटीर उद्योग के क्षेत्र में सागर देश में अलग स्थान बनाने जा रहा है। संगोष्ठी में रूबी दीदी ने कहा कि यदि पावरलूम पांच परिवारों को रोजगार देता है तो उतने उत्पादन के लिए हथकरघा सौ परिवारों को रोजगार देता है। संचालन डॉ. रेखा जैन ने एवं आभार ब्रह्मचारी सुनील भैया ने माना। इस माैके पर न्यायाधीश अरविंद जैन, एमके जैन , शुभम मोदी, जेलर मदन कमलेश, डिप्टी जेलर नागेंद्र चौधरी, महेश बिलहरा, प्रकाश बहेरिया, आनंद स्टील, वीरेंद्र मालथौन, डॉ. नीलम जैन अादि मौजूद थे। 

केंद्रीय जेल में 108 हथकरघा से 1600 कैदी जुड़ेंगे राेजगार से, जेल से छूटने पर हर कैदी काे मिलेगा एक हथकरघा 

सागर | केंद्रीय जेल सागर में हथकरघा केंद्र शुरू किए जाने के उपलक्ष्य में भाग्योदय तीर्थ में अाचार्यश्री विद्यासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का रविवार को समापन हो गया। समापन सत्र में देश के विभिन्न राज्यों से आए जेल अधिकारियों ने अपने-अपने यहां के अनुभव शेयर किए। केंद्रीय जेल सागर के जेल अधीक्षक राकेश बांगरे ने बताया कि सागर जेल में वर्तमान में करीब 1600 बंदी हैं। यह जेल में लग गए 108 हथकरघा के माध्यम से रोजगार से जुड़ेंगे। इतना ही नहीं अब यह भी निर्णय लिया गया है कि जो भी कैदी अपनी सजा पूरी होने के बाद रिहा होगा उसे एक हथकरघा दिया जाएगा। जिससे वह अपना और अपने परिवार का भरण-पाेषण कर सके। साथ ही वापस अपराध की दुनिया में कदम रखने के लिए भी विवश न होना पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि हथकरघा केंद्र शुरू करने के पीछे जेल की कोई आय बढ़ाने का इरादा नही है। बल्कि कैदियों में श्रम की भावना पैदा कर आजीविका चलाने का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि आचार्यश्री की प्रेरणा और आशीर्वाद से सागर जेल का हथकरघा केंद्र प्रदेश ही नहीं देश में आर्दश का केंद्र होगा। उन्होंने कहा कि जेलों में हथकरघा और गौशाला का संचालन तो लगभग शुरुआती दौर से हो रहा है। सागर जेल के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि 1843 मेें सागर की जेल बनी थी जो कि 1999 में केंद्रीय जेल के रूप में तबदील हुई। केंद्रीय जेल में वर्तमान 1600 बंदी हैं। जो कि सागर संभाग के तीन जिलों की 10 जेलों से आये है। सागर में मेरी पदस्थापना के बाद आचार्यश्री की प्रेरणा से 27 लूम शुरू किए थे। उस समय इनमें 50 आजीवन कारावासी ही इन हथकरघा को चला रहे थाे, अब सबकाे प्रशिक्षण देने का काम किया जाएगा। खजुराहो में हुई संगोष्ठी के बाद विशाल क्षेत्र में 108 हथकरघे दानदाताओं के सहयोग से शुरू किए गए हैं। जो कैदियों के जीवन में बदलाव में मील का पत्थर साबित होंगे। इस दौरान अन्य राज्यों के जेल अधिकारियों ने भी अपने यहां इसी पैटर्न पर काम करने की बात कही। 

जेल अधीक्षक बोले- बंदियों में आ रहा है बदलाव, इधर लाेगाें ने लिया हथकरघा के वस्त्र पहनने का संकल्प 

केंद्रीय जेल सागर के जेल अधीक्षक राकेश भांगरे ने जेल में हथकरघा की स्थापना व विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आचार्य महाराज की कृपा से जो सकारात्मक बदलाव हमारे बंदी भाईयों में आया है। उसे देखकर विभिन्न जेलों के अधिकारियों ने सराहा एवं अनुसरण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सागर जेल में रात्रि भोजन का निषेध हो गया जिससे बंदियों के स्वास्थ्य पर अनुकूल प्रभाव पड़ रहा है। संगोष्ठी के प्रवक्ता वीरेंद्र मालथौन ने बताया कि जब सूती कपड़ों पर मटन येलो का घोल दिखाकर कपड़े को दिखाया तो अनेक लोगों ने हथकरघा वस्त्र पहनने का संकल्प लिया। रविवारीय सभा में आचार्य संघ की उपस्थिति में उपस्थित जन समुदाय ने पुलवामा में हुए शहीदों के सम्मान में दो मिनिट का मौन किया गया। 

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आचार्यश्री बोले : हथकरघा मात्र निर्वाह नहीं, निर्माण है मंत्री ने कहा : जेल के बाहर भी ऐसे केंद्र खोलेंगे ताकि रोजगार बढ़े

केंद्रीय जेल सागर में हथकरघा केंद्र का उद्घाटन कार्यक्रम शनिवार को भाग्योदय तीर्थ परिसर में हुआ। 

आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने कहा कि विदेशी लोगो ने भारत को जाना पहचाना है पर भारत के लोगों ने अपने स्वयं के इतिहास काे नहीं जाना है। शील मर्यादा का पालन विदेशी वस्त्रों से कभी संभव नहीं है हथकरघा के वस्त्रों के माध्यम से इसका पालन कर सकते हैं। इसी में आप स्वस्थ रहोगे और इसी में परमार्थ भी करोगे। उन्होंने कहा कि आज्ञाकारी एक लड़का अच्छा है आज्ञा देने वाले कई लड़कों से। मनोरंजन की सामग्री ने भारत को श्रम से दूर कर दिया है। संतान आपकी स्वाश्रित हो पराश्रित नहीं अन्यथा आप को ही सिर दर्द रहेगा। हथकरघा मात्र निर्वाह नहीं निर्माण है। बेटे को लाड़-प्यार में पिता कुछ नहीं सिखा सकता है कुछ सिखाना है तो एश-अाे आराम से उसे दूर रखना होगा। 

दो दिवसीय राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तकला संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए ग्रामोद्योग एवं कुटीर मंत्री हर्ष यादव ने प्रदेश सरकार द्वारा हथकरघा व हस्त कला में किए जा रहे कार्यों एवं योजना की विस्तृत चर्चा एकांत में आचार्यश्री से की। यादव ने कहा कि शिल्पकला एवं हस्तशिल्प को नए आयाम देना ही हमारा लक्ष्य है। हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि ऐसे हथकरघा केंद्र प्रदेश की अन्य जेलों में तो खुले हीं, बाहर भी खाेले जाएं ताकि लाेग राेजगार से जुड़ सकें। मंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में आचार्यश्री जैसा चाहेंगे, वैसा हम करेंगे। अाचार्यश्री की आज्ञा शिरोधार्य है। 

आचार्यश्री बोले : शिक्षा के केंद्र वर्तमान में नाैकर पैदा करने वाले गोदाम बन गए हैं : आचार्य श्री ने कहा कि जीवन उपयोगी शिक्षा ही सच्ची शिक्षा है। ईंट गारा से बनाए गए भवनों को शिक्षा का केंद्र मानना हमारी बड़ी भूल है। नेताओं से उद्घाटन करा लिया और विद्यालय चालू हो गया। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में कुछ समय पूर्व एक बड़े प्रशासनिक अधिकारी ने बताया था वर्तमान की शिक्षा की हालत ऐसी हो गई है इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त इंजीनियर बने 80% किसी काम के नहीं है और बाकी के 10 से 20% इंजीनियर विदेश में जाकर नौकरी कर अपनी अच्छी शिक्षा का उपयोग कर रहे हैं। अाचार्यश्री ने बताया कि भोपाल के आसपास बड़े-बड़े विद्यालयों एवं इंजीनियरिंग कॉलेजों के संचालकों ने जब उनसे वहां प्रतिभास्थली खोलेने काे कहा हमने जवाब दिया कि हम संस्कारधाम की बात करते हैं यह तो बड़े-बड़े गोदाम बने हैं। 

प्रतिभास्थली में हम बीजाक्षर सिखाते हैं। यहां तो बीज ही चौपट हो जाएगा। यहां मात्र नौकरी को लेकर पढ़ाया जा रहा है यानी नौकर तैयार किए जा रहे हैं। आचार्य संघ में 105 पिच्छी विराजमान हैं इनमें 48 मुनि महाराज और 57 आर्यिका माताजी हैं यह जानकारी मुनि सेवा समिति के सदस्य मुकेश जैन ढाना ने दी। 

तिहाड़ में 16 हजार कैदी, उनके राेजगार के लिए 32 फैक्ट्रियां अाैर 35 सेक्टर 

सागर| डीअाईजी एसएस परिहार ने संगोष्ठी में बताया कि दिल्ली तिहाड़ जेल में चलाई जा रही सुधारात्मक व्यवस्था में हमने दक्षिणा अाफ्रीका के राष्ट्रपति स्वर्गीय नेल्सन मंडेला रुल्स काे फालाे किया है। यह रुल्स उन्हाेंने जेल में रहते हुए कैदियाें के हाव-भाव, अादत अादि में सुधार लाने के लिए बनाए थे। मंडेला के 122 रुल्स हैं। सुधार के लिए तिहाड़ जेल में 63 एनजीअाे काम करते हैं। हमारे जेल के कैदी सप्ताह में दाे दिन अपने परिवार जनाें से विडियाे कालिंग के जरिए रुबरु हाेते हैं। लीगल काउंसिलिंग, मंथली न्यूज लेटर सहित जेल में चल रहे 65 तरह के सुधार कार्यक्रमाें का प्रजेंटेशन मंच पर प्राेजेक्टर से किया।जेल में 32 फैक्टरी अाैर 36 सेक्टर हैं। तिहाड़ में 16 हजार कैदी है। इनमें से 6000 डिप्रेशन के शिकार है। इन्हे डिप्रेशन से उबारने 35 टीचर याेगा कराते हैं। डीअाईजी परिहार ने अंत में आचार्य श्री को संघ सहित तिहाड़ जेल आने का निमंत्रण दिया। ब्रम्हचारी सुलभ भैया मुंबई ने बताया कि हथकरघा पूर्ण रूप से शाकाहारी पद्धति से बनाए जाते हैं । हस्तशिल्प कला का प्रशिक्षण दे रहे आगरा के उद्योगपति आशीष जैन ने भी संबोधित किया। भाग्याेदय में मंच पर जेल अधीक्षक राकेश बांगरे, जेलर मदन कमलेश अाैर नागेन्द्र चौधरी , आशीष जैन आगरा के साथ जेल में हथकरघा भवन का निर्माण करने वाले ऋषभ जैन मोकलपुर का सम्मान किया गया। संचालन ब्रम्हचारिणी डॉ. रेखा जैन ने किया । 

कार्यक्रम में पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया , विधायक शैलेन्द्र जैन , अाईएएस राहुल जैन, महेश बिलहरा, सहित विभिन्न शहराें से अाए समाजसेवी उपस्थित थे । संचालन ब्रम्हचारिणी डॉ. रेखा जैन ने किया । भाग्याेदय तीर्थ परिसर में सलाखों से स्वावलंबन की ओर नाटक का मंचन किया गया। 

प्रवक्ता वीरेन्द्र मालथौन के अनुसार रविवार को सुबह आठ बजे तीसरा सत्र, जबकि दोपहर दो बजे से समापन सत्र की शुरुअात होगी। इस दाैरान आचार्यश्री के विशेष रविवारीय प्रवचन भी हाेंगे। रात में आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के जीवन पर केंद्रित विद्योदय फ़िल्म प्रदर्शित की गर्इ। 

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सोया नहीं करो, जागृत रहा करो ढंग बदलो, इससे सब कुछ बदल जाता है: आचार्यश्री

सोया नहीं करो, जागृत रहा करो ढंग बदलो, इससे सब कुछ बदल जाता है: आचार्यश्री     आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने भाग्योदय तीर्थ में शुक्रवार काे धर्म सभा में कहा कि जीवन में ढंग बदल लो, ढंग बदलने से सब कुछ बदल जाता है यह चेतन का परिणाम है पर इसे आप जड़ मानते हो इसी कारण हम जड़ यानी अज्ञानी हो गए हैं । 

आचार्य श्री ने कहा एक मणि होती है जिसके प्रभाव क्या होते हैं अगर प्रकाश नहीं भी हो तो वह चारों ओर प्रकाशित करती है। चंद्रमा जब आकाश में आता है तो उसका प्रकाश फैलता है चंद्रमा की शोभा बढ़ जाती है। चंद्रमा से धरती की सफेदी प्रभावित होती है उन मणियों को देख ले,जो काबिल है जो मणिका प्रकाशित हो रही है उससे शुद्ध जल टपकने लगता है यह क्यों होता है क्योंकि वह चंद्रकांत मणि होती है जो चंद्रमा से प्रभावित होकर के जल छोड़ देती है उसमें जल नहीं है जमीन में भी नहीं है लेकिन उसका प्रभाव होने से जल आने लगता है लेकिन धरती का कोई प्रभाव उस मणि पर नहीं पड़ता है चंद्रमा की जाति की मणि थी इसलिए जल निकला। 

आचार्य श्री ने कहा सोया नहीं करो जागृत रहा करो ढंग बदलो आप के बदलने से सब कुछ बदल जाता है बिंब जड़ माना जाता है जड़ मतलब अज्ञानी होना। जागृति होने का पुरुषार्थ करना चाहिए क्योंकि जागृति का केंद्र आत्म तत्व है इससे सभी शक्तियां जागृत हो जाएंगी 

आचार्य श्री का पूजन रामपुरा जिनालय, बालक हिलव्यू, बालक कांप्लेक्स, झांसी जैन समाज के बाहर से आए श्रावक श्रेष्ठियों ने किया। आचार्यश्री के प्रच्छालन प्रकाश जैन किया, आहारचर्या योगेश चंद जैन, भाग्योदय के ट्रस्टी मुकेश जैन ढाना संगीता जैन,सुनील, नीतू जैन, राजेश मनीषा जैन, कल्पना जैन, मीनू सुशील डबडेरा परिवार को प्राप्त हुआ इस माैके पर पूर्णमति माता और संघ की अन्य माताजी, ब्रह्मचारिणी रितु दीदी थी। सहस्त्र कूट जिनालय में प्रतिमा विराजमान कराने की घोषणा करने वालों का सिलसिला आज भी जारी रहा। 

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हमें वस्तु स्थिति को स्वीकार करना चाहिए, इससे लोगों का भ्रम दूर हो जाता है. आचार्य विद्यासागर

हमें वस्तु स्थिति को स्वीकार करना चाहिए, इससे लोगों का भ्रम दूर हो जाता है. आचार्य विद्यासागर आप लोगों को कुछ बातों के ऊपर विश्वास नहीं होता है, अथवा समझ में नहीं आता है। कार्य देखकर कहने लगते हो कि देव चमत्कार है या कोई जादू टोना है या फिर शंका होने लगती है हमें वस्तुस्थिति को स्वीकार करना चाहिए उसे दृढ़ श्रद्धान करके अपना लेना चाहिए वस्तुस्थिति की जानकारी होने पर लोगों का भ्रम दूर हो जाता है। यह बात भाग्याेदय में विराजमान आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने गुरुवार काे धर्म सभा में कही। आचार्य श्री ने कहा की दो महिलाएं थी। एक कर्म सिद्धांत पर भरोसा करती थी तो दूसरी महिला थोड़ा यूं ही पर विश्वास करती थी एक दिन महिला ने देखा एक राजा पहले हाथी पर फिर घोड़े पर सवार होता है फिर पालकी पर सवार होता है और जब वह पालकी से उतरता है तो दो चार लोग उसके पांव दबाने लग जाते हैं तो दूसरी सखी पहली से कहती है यह क्या नाटक हो रहा है। पांव तो उनके दबाने चाहिए जिन्होंने पालकी उठाई है यह कब थके, यह चले ही नहीं कहां से थक गए होंगे। 

आचार्य श्री ने कहा कि कर्म सिद्धांत को जाने वाली महिला ने कहा कि यह पूर्व में मुनि महाराज थे उस समय उन्होंने कठिन तप किया था भूमि पर शयन किया था उपवास किए थे गाड़ी में नहीं बैठे कभी पैदल विहार करते रहै। आचार्य श्री ने कहा यहां से स्वर्ग में जाते हैं वहां थकना आदि कुछ नहीं होता है फिर एक एक देव के अनेक सेवक होते हैं जो दिन-रात सेवा ही करते रहते हैं किंतु सम्यक दृष्टि उन सब में कभी रुचि नहीं लेता है जैसे-जैसे अध्यात्म के निकट पहुंचते हैं वैसे वैसे भोग विलास पैर चूमने आती है।    आचार्य श्री का पूजन क्षमा सागर महिला मंडल ने किया। आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन हुअा। 
सहस्त्र कूट जिनालय के लिए प्रतिमा विराजमान करने की घोषणा कर्इ लाेगाें द्वारा की गर्इ। कार्यक्रम का संचालन मुकेश जैन ढाना और सुरेंद्र मालथोन ने किया 
 
  सहस्त्र कूट जिनालय का भूमि पूजन किया गया  भाग्योदय तीर्थ परिसर में आचार्य श्री के आशीर्वाद से बनने वाले सर्वतोभद्र जिनालय के सामने स्थित सहस्त्रकूट जिनालय का भूमि पूजन गुरुवार को दोपहर 3.30 बजे आचार्य श्री के ससंघ सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी विनय भैया ने कराया। सहस्त्रकूट जिनालय में 1008 प्रतिमाएं विराजमान होना हैं। जिनमें 12 प्रतिमाएं बड़ी अाैर शेष 996 छोटी प्रतिमाएं विराजमान होंगी। सहस्त्रकूट जिनालय के निर्माण के लिए प्रेमचंद संध्या जैन सौरभ रूही जैन गौरव अनामिका और नीरज पायल जैन के परिवार में नीव से लेकर शिखर तक का निर्माण कराने की घोषणा की है। इसी परिवार ने आज शिलान्यास की प्रथम शिला विधि विधान के साथ रखी इस अवसर पर सर्वतोभद्र जिनालय और निर्माण कमेटी के सभी सदस्य उपस्थित थे । कुल 97 मुनि महाराज और माता जी के सानिध्य में यह शिलान्यास हुआ। 

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हथकरघा पर केंद्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी 16,17 फरवरी काे भाग्योदय तीर्थ में, देश के कई राज्यों के जेल अधिकारी आएंगे

हथकरघा पर केंद्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी 16,17 फरवरी काे भाग्योदय तीर्थ में, देश के कई राज्यों के जेल अधिकारी आएंगे   आचार्य विद्यासागर महाराज की स्वर्णिम योजना हथकरघा एक सामाजिक क्रांति को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान करने अाैर जेल में रह रहे कैदियों के पुनर्वास के लिए भाग्योदय तीर्थ में आचार्य संघ के सानिध्य में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का 16 अाैर 17 फ़रवरी को आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम प्रभारी ब्रम्हचारी डॉ. रेखा जैन, प्रवक्ता वीरेन्द्र मालथौन ने बताया कि संगोष्ठी में दिल्ली, हरियाणा , उत्तर प्रदेश , झारखंड , महाराष्ट्र , छत्तीसगढ़ के साथ मध्यप्रदेश के वरिष्ठ जेल अधिकारी इस संगोष्ठी में शामिल होंगे। 

योगेश जैन ने बताया कि समारोह में पूर्व राष्ट्रपति भारत र| प्रणव मुखर्जी , केन्द्रीय मंत्री राजनाथ सिंह , मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ अन्य राज्यों के गृह व जेल मंत्रियों को आमंत्रित किया गया है। डॉ नीलम जैन अाैर डॉ राजा जैन का कहना है कि कार्यक्रम चार सत्रों में अायाेजित किया जाएगा। पहले दिन 16 फरवरी काे उद्घाटन सत्र के बाद प्रथम सत्र में हथकरघा से होने वाले लाभ व वस्त्रों का प्रदर्शन होगा । दूसरे दिन 17 फरवरी काे दूसरे सत्र में क़ैदियों को हो रहे मानसिक अाैर आर्थिक लाभ की जानकारी अाैर पुनर्वास, कौशल योजना के लाभ के बारे में चर्चा हाेगी इसी दिन समापन सत्र भाी होगा । 

संगाेष्ठी हथकरघा क्षेत्र में उद्यम स्थापित करने वाले युवा व्यवसायियों को भी आमंत्रित किया गया ।आचार्य श्री की प्रेरणा व आशीर्वाद से हर गांव काम, हर हाथ काम योजना के अंतर्गत बनाए जा रहे वस्त्रों को श्रमदान नाम दिया गया है। जेल अधीक्षक राकेश बांगरे अाैर जेलर मदन कमलेश के साथ केन्द्रीय जेल के सभी अधिकारी भी जेल की व्यवस्थाओं अाैर हथकरघा केन्द्र की व्यवस्था में लगे हुए हैं।    पूजन करते समय सावधान रहे, चावल का एक कण भी नीचे नहीं गिरना चाहिए : आचार्यश्री    सागर | आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने बुधवार काे भाग्योदय परिसर में धर्मसभा में कहा कि पूजा में जिस समय जो अर्ध्य चढ़ाना चाहिए वह चढ़ाएं, इससे कर्मों की निर्जरा होती है। पूजन करते समय हमेशा सावधानी बरतना चाहिए। चावल का एक कण भी नीचे नहीं गिरना चाहिए। आचार्य श्री ने कहा भक्ति कैसे करना है। पूजन कैसे करना है। यह आपको मन लगाकर करना चाहिए। पूजन करना आपको अच्छे तरीके से सीखना पड़ेगा। अर्ध और बिखराते हैं गली गली, ऐसा नहीं होना चाहिए। समय का अपव्यय नहीं करना चाहिए बल्कि समय का उपयोग अच्छे कामों में करना चाहिए। एक मेंढक की कहानी सुनाते हुए आचार्य श्री ने कहा कि एक कुएं में 1 मेंढक रहता था उसने ऊपर दो व्यक्तियों की आवाज सुनी कि आज यहां पर भगवान आ रहे हैं उसका भी मन हुआ दर्शन करने का और वह कुएं से बाहर आकर जिस तरफ लोग जा रहे थे वह उसी तरफ बढ़ता गया लेकिन छोटा होने से किसी वाहन ने उसके ऊपर से निकाल दिया और उस मेंढक की यात्रा समाप्त हो गई। 

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पूजन हमेशा सावधान और मन लगाकर करना चाहिए - आचार्य श्री

संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने भाग्योदय परिसर में आयोजित धर्मसभा में कहा कि पूजा कैसे की जाती है। जिस समय जो अर्घ चढ़ाना चाहिए वह चढ़ाएं, इससे कर्मों की निर्जरा होती है। पूजन करते समय हमेशा सावधानी बरतना चाहिए और चावल का एक कण भी नीचे नहीं गिरना चाहिए।   आचार्य श्री ने कहा भक्ति कैसे करना है पूजन कैसे करना है यह आपको मन लगाकर करना चाहिए। पूजन करना आपको अच्छे तरीके से सीखना पड़ेगा। अर्घ चढ़ाते हैं और बिखराते हैं गली गली, ऐसा नहीं होना चाहिए। समय का अपव्यय नहीं करना चाहिए, बल्कि समय का उपयोग अच्छे कामों में करना चाहिए।   हमेशा नीचे देखकर चलना चाहिए   एक मेंढक की कहानी सुनाते हुए आचार्य श्री ने कहा कि एक कुएं में 1 मेंढक रहता था उसने ऊपर दो व्यक्तियों की आवाज सुनी कि आज यहां पर भगवान आ रहे हैं। उसका भी मन हुआ दर्शन करने का और वह कुएं से बाहर आकर जिस तरफ लोग जा रहे थे उसी तरफ बढ़ता गया, लेकिन छोटा होने से किसी वाहन ने उसके ऊपर से निकाल दिया और उस मेंढक की यात्रा समाप्त हो गई। आप लोग भी वाहनों से आते हैं हमेशा नीचे देख कर आप लोगों को चलना चाहिए। आप भागकर नहीं भगाकर आते हैं एक मेंढक भगवान के दर्शन की अभिलाषा के साथ कुएं से निकला था और बाद में मृत्यु के बाद वह देव बना ऐसा पुराणों में शास्त्रों में लिखा है।   भाग्योदय में एमब्यूलेंस देने की घोषणा   आचार्य श्री की पूजन मोराजी जैन समाज, चौधरन बाई मंदिर कमेटी, पथरिया जैन समाज, वर्णी कॉलोनी जैन समाज के लोगों को प्राप्त हुआ। बुधवार को आचार्य श्री की आहारचर्या और पढ़गाहन करने का सौभाग्य विमला बाई जैन, आनंद, मोना जैन, अजीत नीटू नेहा जैन को सौभाग्य मिला। इस अवसर पर अंजू जैन, बबली जैन, पूर्व विधायक सुनील जैन आदि को आहार देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आनंद जैन परिवार ने आहार दान के उपलक्ष्य में भाग्योदय तीर्थ अस्पताल को एक आधुनिक एंबुलेंस देने की घोषणा की।   सहस्त्रकूट जिनालय का आज होगा शिलान्यास   भाग्योदय तीर्थ परिसर में बनने बाले सर्वतो भद्र जिनालय का शिलान्यास समारोह गुरुवार को दोपहर 1ः30 बजे से आचार्य विद्यासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य ब्र. विनय भैया विधि विधान से शिलान्यास कराएंगे। मुनि सेवा समिति के सदस्य मुकेश जैन ढाना ने बताया आचार्य श्री के आशीर्वाद से भाग्योदय तीर्थ परिसर में सहस्त्रकूट जिनालय का निर्माण होने जा रहा है। जिनालय का निर्माण कराने प्रेमचंद संध्या जैन, सौरव रूही जैन, गौरव अनामिका जैन, नीरज पायल जैन, दिव्यांश और शुभंकर उपकार परिवार द्वारा नीव से लेकर शिखर तक का कार्य कराने का आशीर्वाद आचार्यश्री की आहार चर्या (28 जनवरी को) होने के बाद लिया था। गुरुवार को दोपहर 1ः30 बजे से प्राकृतिक चिकित्सालय की बिल्डिंग के बगल में यह शिलान्यास समारोह होगा। 15 फरवरी तक भाग्योदय पहुंचेगा आर्‌यिका संघ|   आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री विमल सागर, मुनिश्री अनंत सागर, मुनिश्री धर्मसागर, मुनिश्री अचल सागर, मुनिश्री भाव सागर महाराज ससंघ श्री पार्श्‌वनाथ दिगंबर जैन मंदिर बरोदिया कला में विराजमान है। यहां आर्‌यिकाश्री पूर्णमति माताजी व 8 माता जी की आगवानी हुई। आर्‌यिका संघ ने श्री जी के दर्शन किए एवं संत निवास में विराजमान मुनि श्री विमल सागर जी ससंघ के दर्शन कर धार्मिक विषयों पर चर्चा की। आर्‌यिका संघ के बांदरी होते हुए 15 फरवरी को भाग्योदय तीर्थ सागर पहुंचने की संभावना है। उनके पैरों में छाले हैं फिर भी कदमों से पदयात्रा करते हुए प्रतिदिन 25 से 30 किलोमीटर लगभग बिहार चल रहा है।

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इंडिया नहीं भारत बाेलाे का संदेश देने निकली दुपहिया वाहन रैली, 150 मिनट में पूरी की 11 किमी की परिक्रमा

इंडिया नहीं भारत बाेलाे का संदेश देने निकली दुपहिया वाहन रैली, 150 मिनट में पूरी की 11 किमी की परिक्रमा   इंडिया नहीं भारत बाेलाे का संदेश देने मंगलवार दाेपहर डेढ़ बजे भाग्याेदय तीर्थ परिसर में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का आशीर्वाद लेकर शहर में निकली दोपहिया वाहन रैली ने 11 किलोमीटर की परिक्रमा दाे घंटे तीस मिनट में पूरी की। मंगलवार का दिन युवाओं ने देश के नाम किया और करीब एक हजार दुपहिया वाहन पर सवार 1500 से अधिक युवाअाें अाैर वरिष्ठ जनाें ने “इंडिया नहीं भारत बोलो “ का संदेश शहर के लाेगाें काे दिया। रैली शहर के सभी सामाजिक संगठनों ने एक साथ मिल कर निकाली। भाग्योदय तीर्थ से हाथों में तिरंगा लेकर निकला ये कारवां भगवानगंज चाैराहे , गुजराती बाज़ार , कटरा नमकमंडी , परकोटा होते हुए सिविल लाईन पहुंचा फिर वहां से गोपालगंज तीन बत्ती , बड़ा बाजार , मोतीनगर चाैराहे के रास्ते से भाग्योदय तीर्थ पहुंचा। जहां अाचार्य श्री ने युवाओं से कहा कि अंग्रेज़ों की देन इंडिया नाम से देश को मुक्ति मिलना ही चाहिए। तभी हमारे देश की दशा व दिशा दोनों बदलेगी । रैली में अागे चल रहे डीजे की धुन पर युवा देश भक्ति के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। वीरेन्द्र मालथौन ने बताया कि भारत बोलो अभियान के अगले चरण में बुंदेलखंड से सैकड़ों चार पहिया वाहनों का क़ाफ़िला दिल्ली जाएगा। जहां इंडिया गेट पर प्रदर्शन किया जाएगा। 

इस रैली में जैन पंचायत, विप्र समाज, रोटरी क्लब, संजोग समिति, विश्व हिंदू परिषद, वैश्य महासम्मेलन, सोशल ग्रुप, विचार संस्था, जैन मिलन, धर्म रक्षा संगठन, भारत रक्षा मंच सहित 22 संगठनों के सैकड़ों सदस्यों ने भागीदारी की। रैली में देवी प्रसाद दुबे, अनिल दुबे, प्रकाश बहेरिया, सुरेन्द्र मालथौन, रिषभ मड़ावरा, शिवशंकर मिश्रा, पप्पू तिवारी, सूरज सोनी, डॉ. आज़ाद जैन, स्वतंत्र खिमलासा, अनिल नैनधरा, निकेश गुप्ता, सचिन, कपिल मलैया, विक्रम सोनी, मोनू, राम शर्मा, अनिल तिवारी, सुरेन्द्र पटना, महेश बाबा, सुकुमाल जैन, देवेन्द्र जैना, अजित नायक, मनोज लालो, अखिलेश समैया, रिषभ गढाकोटा, सोनू जैन, शालू जैन, डॉ. राहुल जैन, प्रदीप, अजय बंडा, मनीष दलपतपुर, अजय, शिवशंकर मिश्रा, पप्यू तिवारी, एके शर्मा, राम शर्मा, आशीष गोस्वामी, अरुण दुबे, हनी दुबे, दीपक वाजपेयी, रामकृष्ण गर्ग, मृदुल पन्या सहित विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल थे। 

क्यों चाहते हैं आचार्य श्री नाम में बदलाव : राशि बदल जाती है नाम से, इसलिए आचार्य विद्यासागर चाहते हैं कि भारत का नाम केवल भारत हो। क्योंकि इतिहास भारत का गौरवशाली है इंडिया का नहीं, दूध की नदियां भारत में बहती थीं इंडिया में नहीं। 

इंडिया नहीं भारत बाेलाे का संदेश देने मंगलवार दाेपहर डेढ़ बजे भाग्याेदय तीर्थ परिसर में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का आशीर्वाद लेकर शहर में निकली दोपहिया वाहन रैली ने 11 किलोमीटर की परिक्रमा दाे घंटे तीस मिनट में पूरी की। मंगलवार का दिन युवाओं ने देश के नाम किया और करीब एक हजार दुपहिया वाहन पर सवार 1500 से अधिक युवाअाें अाैर वरिष्ठ जनाें ने “इंडिया नहीं भारत बोलो “ का संदेश शहर के लाेगाें काे दिया। रैली शहर के सभी सामाजिक संगठनों ने एक साथ मिल कर निकाली। भाग्योदय तीर्थ से हाथों में तिरंगा लेकर निकला ये कारवां भगवानगंज चाैराहे , गुजराती बाज़ार , कटरा नमकमंडी , परकोटा होते हुए सिविल लाईन पहुंचा फिर वहां से गोपालगंज तीन बत्ती , बड़ा बाजार , मोतीनगर चाैराहे के रास्ते से भाग्योदय तीर्थ पहुंचा। जहां अाचार्य श्री ने युवाओं से कहा कि अंग्रेज़ों की देन इंडिया नाम से देश को मुक्ति मिलना ही चाहिए। तभी हमारे देश की दशा व दिशा दोनों बदलेगी । रैली में अागे चल रहे डीजे की धुन पर युवा देश भक्ति के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। वीरेन्द्र मालथौन ने बताया कि भारत बोलो अभियान के अगले चरण में बुंदेलखंड से सैकड़ों चार पहिया वाहनों का क़ाफ़िला दिल्ली जाएगा। जहां इंडिया गेट पर प्रदर्शन किया जाएगा। 
इस रैली में जैन पंचायत, विप्र समाज, रोटरी क्लब, संजोग समिति, विश्व हिंदू परिषद, वैश्य महासम्मेलन, सोशल ग्रुप, विचार संस्था, जैन मिलन, धर्म रक्षा संगठन, भारत रक्षा मंच सहित 22 संगठनों के सैकड़ों सदस्यों ने भागीदारी की। रैली में देवी प्रसाद दुबे, अनिल दुबे, प्रकाश बहेरिया, सुरेन्द्र मालथौन, रिषभ मड़ावरा, शिवशंकर मिश्रा, पप्पू तिवारी, सूरज सोनी, डॉ. आज़ाद जैन, स्वतंत्र खिमलासा, अनिल नैनधरा, निकेश गुप्ता, सचिन, कपिल मलैया, विक्रम सोनी, मोनू, राम शर्मा, अनिल तिवारी, सुरेन्द्र पटना, महेश बाबा, सुकुमाल जैन, देवेन्द्र जैना, अजित नायक, मनोज लालो, अखिलेश समैया, रिषभ गढाकोटा, सोनू जैन, शालू जैन, डॉ. राहुल जैन, प्रदीप, अजय बंडा, मनीष दलपतपुर, अजय, शिवशंकर मिश्रा, पप्यू तिवारी, एके शर्मा, राम शर्मा, आशीष गोस्वामी, अरुण दुबे, हनी दुबे, दीपक वाजपेयी, रामकृष्ण गर्ग, मृदुल पन्या सहित विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल थे। 

क्यों चाहते हैं आचार्य श्री नाम में बदलाव : राशि बदल जाती है नाम से, इसलिए आचार्य विद्यासागर चाहते हैं कि भारत का नाम केवल भारत हो। क्योंकि इतिहास भारत का गौरवशाली है इंडिया का नहीं, दूध की नदियां भारत में बहती थीं इंडिया में नहीं।     भाग्योदय में विद्यासागर महाराज ने कहा मेथी में किसमिस डालोगे तो वह दवाई का काम करेगी सागर. संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने भाग्योदय तीर्थ में मंगलवार को धर्मसभा संबोधित करते हुए कहा कभी- कभी अवसर के रूप में मेथी का उपयोग खाने में करना चाहिए, मेथी खाओगे और उसमें किसमिस और डाल दोगे तो उससे उल्टी नहीं होगी। और वह दवाई का काम करेगी और इससे स्वास्थ्य भी बहुत अच्छा होगा। आचार्य श्री ने कहा भिन्न-भिन्न माध्यम से हमारा परिणाम शुद्ध होता है। आप के परिणामों को बांधने के लिए पूजन,अभिषेक, जाप, विधान आदि हो जाते हैं पर यह सब उल्टी को रोकने का काम करते हैं। उन्होंने कहा मुनि महाराज उपदेश देकर आप को सिखाते हैं। उपाय आपको ढूंढना होगा, तब कार्य की प्राप्ति होगी। आचार्य श्री का पूजन पाएगा स्थित आदिनाथ मंदिर के महिला मंडल, काकागंज जैन समाज और महिला मंडल ने की। पाद प्रक्षालन सोमचंद जैन राजकुमार जैन और विधान चौधरी मानक चौक परिवार ने किया। आचार्य श्री की आहार चर्या ब्रह्मचारी दीपक भैया,ब्रह्मचारी अलका दीदी, कुसुम जैन, नीरज जैन,अनामिका के चौके में हुई। इस अवसर पर दीपक और उनके परिवार ने सहस्त्रकूट जिनालय के लिए दो प्रतिमाएं विराजमान कराने की घोषणा की। इसके अलावा सहस्त्रकूट जिनालय के लिए एक दर्जन से अधिक लोगों ने प्रतिमाएं विराजमान कराने की घोषणा की। 

सागर. संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने भाग्योदय तीर्थ में मंगलवार को धर्मसभा संबोधित करते हुए कहा कभी- कभी अवसर के रूप में मेथी का उपयोग खाने में करना चाहिए, मेथी खाओगे और उसमें किसमिस और डाल दोगे तो उससे उल्टी नहीं होगी। और वह दवाई का काम करेगी और इससे स्वास्थ्य भी बहुत अच्छा होगा। आचार्य श्री ने कहा भिन्न-भिन्न माध्यम से हमारा परिणाम शुद्ध होता है। आप के परिणामों को बांधने के लिए पूजन,अभिषेक, जाप, विधान आदि हो जाते हैं पर यह सब उल्टी को रोकने का काम करते हैं। उन्होंने कहा मुनि महाराज उपदेश देकर आप को सिखाते हैं। उपाय आपको ढूंढना होगा, तब कार्य की प्राप्ति होगी। आचार्य श्री का पूजन पाएगा स्थित आदिनाथ मंदिर के महिला मंडल, काकागंज जैन समाज और महिला मंडल ने की। पाद प्रक्षालन सोमचंद जैन राजकुमार जैन और विधान चौधरी मानक चौक परिवार ने किया। आचार्य श्री की आहार चर्या ब्रह्मचारी दीपक भैया,ब्रह्मचारी अलका दीदी, कुसुम जैन, नीरज जैन,अनामिका के चौके में हुई। इस अवसर पर दीपक और उनके परिवार ने सहस्त्रकूट जिनालय के लिए दो प्रतिमाएं विराजमान कराने की घोषणा की। इसके अलावा सहस्त्रकूट जिनालय के लिए एक दर्जन से अधिक लोगों ने प्रतिमाएं विराजमान कराने की घोषणा की।

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जीवन में पोशाक भले ही बदल जाए पर सिद्धांत कभी नहीं बदलते: अाचार्यश्री

आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने भाग्योदय तीर्थ में साेमवार काे धर्मसभा में कहा कि जैन धर्म भाव प्रधान है मनुष्य भी पूजन करता है और त्रियंच भी पूजन करता है जिसके पास जल नहीं है तो वह समता पूर्वक शांति के साथ गुणानुवाद करता है। आचार्य श्री ने कहा महावीर भगवान और आदिनाथ भगवान के युग को नहीं बदला जा सकता है। पोशाक भले बदल जाएं पर सिद्धांत कभी नहीं बदलते आलंबन मेरे योग्य है वह करूंगा भीतरी भाव परख है तो धर्म उसी के परिणाम निकलता है 

आचार्य श्री ने कहा हमारी यात्रा अखंड चलती है एक एक पग चलती है अपनी चाल से चले परंतु अपनी कोई चाल नहीं बनाए जो पहले चल कर गए हैं उसी पगडंडी का उपयोग करें उसी पर अच्छे से चलें सड़क पर हम चलना बंद कर दें तो उस पर घास उग आती है पर जो पगडंडी चलती रहती है उस पर घास नहीं होगी। आचार्य श्री का पूजन महिला परिषद वर्णी कॉलोनी को मिला। पार्षद संध्या जैन ने एक लाख रुपए की नगद राशि भाग्योदय मंदिर के निर्माण में दी। आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन प्रकाश चंद,विकास जैन, अभिषेक जैन सिल्लन परिवार, नरेश भाई संघवी मुंबई ने किया। सहस कूट जिनालय में 30 लाेगाें ने प्रतिमा विराजमान करने की घोषणा की। 

भारत बोलो आंदोलन का शंखनाद, अाज शहर में निकलेगी वाहन रैली दोपहर एक बजे से 

सागर | “हमें अपना भारत वापिस चाहिए “ यही संदेश लेकर सागर के सामाजिक संगठनाें के लोग आचार्यश्री विद्यासागर महाराज का संदेश “इंडिया नहीं भारत बोलो “ के नारे लगाते हुए पूरे शहर में वाहन रैली निकाल कर जनजागरण करेंगे। रैली संयोजक राजकुमार मिनी ने बताया कि रैली मंगलवार को दोपहर एक बजे भाग्योदय से प्रारंभ होकर भगवानगंज, राधा तिराहा, गुजराती बाज़ार, नमकमंडी, सिविल लाईन से गोपालगंज, बस स्टैंड, परकोटा, तीनबत्ती, बड़ा बाज़ार, मोतीनगर होती हुई भाग्योदय पहुंचेगी। रैली में शामिल होने के लिए आयोजन समिति ने एक विशेष टी शर्ट बनवाई है। जिससे कि सभी संगठन एक रूपता में इस रैली में शामिल हो सकें। आयोजकों ने अपील की है कि जो भी युवा अाैर वरिष्ठ जन इसमें शामिल होना चाहते हैं। वे दोपहर साढ़े बारह बजे भाग्योदय पहुंच अपना पंजीयन करा लें। वाहन रैली में जैन समाज के साथ ही अन्य सामाजिक संगठनाें से जुड़े लाेग भी शामिल रहेंगे। प्रकाश बहेरिया, सुरेन्द्र मालथौन, अनिल नैनधरा, देवीप्रसाद दुबे, पप्पू तिवारी, निकेश गुप्ता, जगन्नाथ गुरैया, सुरेन्द्र पटना, सुकुमाल नैनधरा सहित कर्इ संस्था प्रमुखों ने रैली में शामिल होने की अपील की है। 

पूर्णमति माता का आगमन 15 को : सागर | आर्यिका पूर्णमति माता का बिहार झांसी से सागर की ओर चल रहा है। मुनि सेवा समिति के सदस्य मुकेश जैन ढाना ने बताया कि झांसी में आर्यिका माता का चातुर्मास हुआ था। 15 फरवरी तक आर्यिका संघ के सागर पहुंचने की संभावना है। 

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दिमाग चलाना ठीक है पर अपने हिसाब से दिमाग लगाना ठीक नहीं : आचार्यश्री

म अहिंसा परमाे धर्म की जय, अाचार्य कुंद कुंद सागर, अाचार्य ज्ञानसागर महाराज की जय। अाज रविवार है। जनता अाती है अाैर भूल जाती है कि जगह मिलेगी कि नहीं, जगह क्या है। जगह ताे दिल में मिलना चाहिए। जगह क्या है। यह लेने देने की नहीं, हमेशा दिल में जगह होना चाहिए। दिल में कितनी जगह है इसको हम नाप नहीं सकते, लेकिन हम जगह सबकाे दे सकते हैं। 

दिमाग चलाना ठीक है पर अपने हिसाब से दिमाग लगाना ठीक नहीं हाेता है। हमें अपने इस पागलपन पर राेष अाना चाहिए। धन एेसे ही नहीं अा जाता, पसीना आने के बाद ही पैसा आता है। श्रद्धा दिल से करना है सिर से नहीं। इसके लिए आपको दिलदार होना पड़ेगा । बिना प्रयाेजन, पूजन का काेर्इ मतलब नहीं निकलता है। स्वाध्याय के बगैर पूजन करना व्यर्थ है। 

शास्त्र गुरु की पूजन से अख्यात कर्मों की निर्जरा होती है। जितना समय शास्त्रों के सामने और जिन बिम्बों के सामने बैठकर पूजन करोगे, उससे भी कर्मों की निर्जरा होगी। केवल भगवान अनंत को जान रहे हैं और हम भी अनंत कर्म को जान रहे हैं। भक्त बनकर ही भगवान बना जा सकता है बिना भक्त बने भगवान बनना संभव नहीं है। चक्रवर्ती को भी भक्त बनना पड़ा था। यह वैभव नश्वर है माया के कारण सब परेशान हैं। णमोकार मंत्र की जाप से असंख्यात कर्मों की निर्जरा होती है। सागर में कर्इ माेड़ है चकराघाट पर चक्कर अा जाए, मैने रामपुरा, वर्णी कॉलोनी और गोपालगंज के अलावा कर्इ गलियां देखी हैं। महाराज हमारे इते अार्इयाे, हम भी कुछ कह सकते है भइया तुम्हे कुछ चाहिए ताे हमारे यहा अा जाना। शहर बड़ा होता जा रहा है। जो चलता है उसका ही विकास होता है और जो बैठा रहता है उसका विकास नहीं होता। भारत का इतिहास क्या था आपको पता है। इस देश का नाम भारत भगवान भरत के कारण पड़ा था हमें गौरव होना चाहिए यदि भीतर की आंख खुल गई तो केवल ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है। अटूट श्रद्धा से काेर्इ भी बात बन सकती है। यहां सर्वतो भद्र जिनालय यानी मंदिर बड़ा बन रहा है और इसे हमेशा खचाखच भरा रहना चाहिए। ऐसे जिनालय में आ कर आप सब दुनिया भूल जाएंगे, चारों तरफ, कहीं से भी मंदिर में प्रवेश करने पर पूरे चौबीसी भगवान के दर्शन आपको होंगे कहीं भी बैठ कर के जब आप पूछोगे आप को ध्यान करना होगा कि कहां से प्रवेश हुआ था कहां से नहीं। तीन खंड के इस ऊंचे मंदिर में 12 चौबीसी भगवान विराजमान होंगे। आप लोगों के उत्साह को देख कर लगता है कि काम अच्छा हो रहा है। इस मंदिर का स्वरूप दान के माध्यम से ही संभव है। प्रांगण में बन रहे विशाल मंदिर को देखने के लिए ऊपर से देव भी नीचे आएंगे। 

-जैसा की भाग्याेदय तीर्थ स्थित बड़े पंडाल में आचार्य श्री ने कहा    अाचार्यश्री का पाद प्रक्षालन, सर्वतो भद्र जिनालय में प्रतिमा देने की घाेषणा भी की 

रविवार को धर्मसभा के पू्र्व अाचार्यश्री विद्यासागर के पाद प्रक्षालन मनोज जैन बड़जात्या मुंबई, विजय जैन, संजय जैन, अनिल भोलू जैन और नीरज जैन बल्लू परिवार, विकास जैन भिंड व सुमत जगाती टडा ने किया। आचार्यश्री का पूजन ढाना, अंकुर कॉलोनी जैन समाज, रामपुरा पाठशाला के बच्चों ने किया। बुंदेली पूजन संगीतकार नीलेश जैन ने करवाया। पढ़गाहन और आहारचर्या निर्मल जैन,जिनेंद्र बड़कुल,दिनेश बिलहरा और आनंद दिगंबर परिवार ने किया। बिलहरा परिवार ने सर्वतो भद्र जिनालय में एक बड़ी प्रतिमा विराजमान कराने की घोषणा की। परिवार के सदस्यों लकी जैन,शुभम जैन, राहुल जैन ने भाग्योदय के ट्रस्टी बनने के लिए राशि देने की घोषणा की। सर्वतो भद्र जिनालय में बड़ी प्रतिमा डॉ राकेश जैन, मुकेश जैन और डॉ. सुधीर जैन बंडा ने विराजमान करने की घोषणा की। सहस्त्र कूट जिनालय में 25 से अधिक लाेगाें ने एक-एक प्रथमा विराजमान कराने की घोषणा की। कार्यक्रम में दमोह के जिला और सत्र न्यायाधीश, अनूपपुर के जिला और सत्र न्यायाधीश सुभाष जैन और दमोह के न्यायाधीश शुभम मोदी, डीआईजी राकेश जैन, महेश बिलहरा देवेंद्र जैन, मुकेश जैन ढाना, सुधा मलैया, राकेश पिडरुआ, सुरेंद्र मालथाैन, आनंद , प्रकाश जैन , ऋषभ जैन , सट्टू जैन , प्रदीप जैन थे। संचालन मुकेश जैन ढाना सुरेंद्र मालथाैन ने किया। 
 

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अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए दान करना आवश्यक है : आचार्य विद्यासागर

अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए दान करना आवश्यक है : आचार्य विद्यासागर   धन सब के पास दो प्रकार का होता है एक धन घूमता रहता है और दूसरा धन स्थिर रहता है अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए दान करना आवश्यक है ये बात आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने शनिवार को भाग्योदय तीर्थ में शनिवार काे एक धर्मसभा में कही। आचार्यश्री ने कहा कि शरीर में आत्मा रह रही है शरीर आत्मा नहीं है। शरीर साथ नहीं दे रहा हो तो आत्मा कहती है मेरे पास पंख हैं, तुम्हारे पैर अब किसी काम के नहीं हैं। आप शरीर के नहीं आत्मा के दास बनो। आचार्यश्री ने कहा आप दूसरों के नियंत्रण में नहीं अपने नियंत्रण में चलें अधिक तेज रक्त के चलने से चक्कर आ जाते हैं। आप बाहर से तो स्वस्थ दिखते हो पर भीतर से मंदी रहती है। आप यदि ताली बजाओगे तो गर्मी भी आ जाएगी। धर्म ध्यान करना चाहो तो ध्यान निर्धारित करो। जैसे रक्त अनुपात से जरूरी है वैसे आप भी अपने अनुपात से रहो। आचार्यश्री ने कहा कि अपनी आत्मकथा की बात करो सब के पास अपनी आत्मकथा है। हमारी कथा आपके पास नहीं है और आप की कथा हमारे पास नहीं है। यह दोनों की व्यथा है। आत्मकथा में कोई व्यथा नहीं होना चाहिए। एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए शरीर में रक्त का होना अनिवार्य है। 

आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का अवसर दिनेश जैन अमरदीप और जयदीप जैन चितौरा परिवार और विजय जैन पड़ा को प्राप्त हुआ। जिनेश जैन सुरखी और रविकांत जैन नेहानगर ने आचार्यश्री को शास्त्र भेंट किए। आचार्यश्री की पूजन नेहा नगर जैन समाज मकरोनिया, सागर में पदस्थ अधिकारी कर्मचारियों और मोराजी की पाठशाला के बच्चों ने की। आचार्यश्री की आहारचर्या हथकरघा के माध्यम से लोगों को रोजगार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही ब्रह्मचारिणी रेखा दीदी, डॉ. नीलम दीदी और डॉक्टर राजा जैन के चौके में हुई। 

डीआईजी पुलिस राकेश जैन को भी आचार्य श्री को आहार देने का अवसर मिला। इस माैके पर तीन प्रतिमाएं सहस्त्रकूट जिनालय के लिए देने की घोषणा हुई। किरण शील चंद जैन, अशोक जैन अंकुर कॉलोनी, राकेश जैन, सौरभ जैन, आदि ने इसका प्रण लिया।   आचार्यश्री के रविवारीय प्रवचन होंगे आज   भाग्योदय तीर्थ में अाचार्यश्री विद्यासागर महाराज के रविवारीय मंगल प्रवचन दोपहर 2 बजे से बड़े पंडाल में होंगे। मुनि सेवा समिति के सदस्य मुकेश जैन ढाना ने बताया कि यहां अभी आचार्य संघ में 48 मुनि महाराज और 49 आर्यिकाएं माताजी विराजमान हैं। रविवार को जैन समाज ढाना और अंकुर कॉलोनी मकरोनिया जैन समाज के द्वारा आचार्यश्री की बुंदेली पूजन सुबह 8.45 बजे से प्रारंभ होगी। आर्यिका पूर्णमति माताजी का विहार झांसी से सागर की ओर चल रहा है इस संघ में 8 माताजी हैं। 15 फरवरी को आर्यिका संघ के सागर प्रवेश की संभावना है।    6 दिवसीय निशुल्क आयुर्वेदिक शिविर आज से    भाग्योदय में कैंसर के लिए आयुर्वेदिक औषधि का निशुल्क वितरण दिव्यांग संरक्षण सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक केसरीमल जैन बागीदौरा राजस्थान द्वारा किया जा रहा है। यह शिविर रविवार से शुरू हाेकर 15 फरवरी तक चलेगा। इसी दवा से स्वयं का कैंसर ठीक हाेने का दावा करने वाले जैन इससे पहले मुंबई, हल्दीघाटी, खजुराहो, छत्तीसगढ उदयपुर आदि स्थानों पर शिविर लगा चुके हैं। भाग्योदय तीर्थ धर्मशाला के सामने सुबह 11 से शाम 4 बजे तक यह शिविर राेजाना लगेगा। 

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मानव काया को पुण्य का वैभव मिल जाना सुख का कारण नहीं होता: आचार्यश्री

मानव काया को पुण्य का वैभव मिल जाना सुख का कारण नहीं होता: आचार्यश्री   भाग्योदय तीर्थ में संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने धर्मसभा में कहा कि देवों के पास भोजन नहीं होता, वे तो सिर्फ मानसिक भोजन करते हैं। भोजन करने वाले तो मनुष्य होते हैं जो अपने हाथ आपके सामने करते हैं। देवों के पास पंच आश्चर्य तो होते हैं परंतु आहार नहीं करते। 

आचार्य श्री ने कहा भारतीय संस्कृति में मुनि बनने की संस्कृति अभी जीवित है। हम यहां भी अल्पसंख्यक हैं जो चीजें दुर्लभ होती हैं वह बढ़ नहीं सकती हैं अपितु कम होती जाती हैं। मुनि संख्या में अनंत नहीं हो सकते क्योंकि हम भगवान के निकट रहते हैं। आचार्य श्री ने कहा नवधा भक्ति के साथ पढ़गाहन करना चाहिए सौधर्म इंद्र बनने के बाद भी मुनि महाराज का पड़गाहन नहीं होना आप ने पंचकल्याणक में देखा होगा। सौधर्म इंद्र तांडव नृत्य तो कर सकता है और उसे उल्लास भी होता है इतना वैभव होने के साथ-साथ वह पड़गाहन के समय सामान्य व्यक्ति के साथ खड़ा होता है। नर काया को पुण्य का वैभव मिल जाना सुख का कारण नहीं होता। आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का अवसर संतोष जैन,सोनू जैन सीहोरा, मोना जैन इंदौर और दिनेश, आनंद बिलहरा परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं सर्वतोभद्र जिनालय में बड़ी प्रतिमा विराजमान कराने वाले पदम जैन को परिवार सहित पाद प्रक्षालन का अवसर मिला। आचार्य श्री की आहारचर्या अनिल जैन , प्रदीप जैन, राजकुमार जैन, किरण जैन, ज्योति जैन,नीलू जैन, मधुर जैन, महक जैन,मिलन, युवराज आदि के चौके में हुई। आहारचर्या कराने वाले इस परिवार ने सर्वतो भद्र जिनालय के निर्माण में एक शिखर का निर्माण कराने की घोषणा की। इसके पूर्व यह परिवार एक मूलनायक भगवान की प्रतिमा विराजमान कराने की घोषणा कर चुका है। विजय जैन ने भी एक छोटी प्रतिमा सर्वतोभद्र जिनालय में विराजमान कराने की घोषणा की। रविंद्र जैन ने सर्वतो भद्र जिनालय के एक पिलर निर्माण के लिए 5 लाख की राशि देने की घोषणा की। वैश्य महासम्मेलन के पदाधिकारियों ने आचार्य श्री को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया।   अंध मूक बधिर शाला के 51 बच्चों ने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के दर्शन किए    सागर. दिगंबर जैन महिला परिषद की चंद्रप्रभु शाखा और विचार संस्था द्वारा शासकीय अंध मूक बधिर शाला के 51 बच्चों व शिक्षकों को भाग्योदय तीर्थ ले जाया गया। जहां आचार्य श्री विद्यासागर महाराज को बच्चों नारियल चढ़ाया और आशीर्वाद लिया। इस मौके पर संध्या रांधेलिया, मंजू ,कविता सेठ, अर्चना , अध्यक्ष मुक्ति, मंजरी, शिवानी ,विचार संस्था की आकांक्षा मलैया, सुनीता उपस्थित थीं। जिनेश जैन ने आश्रम को प्रिंटर के लिए दान राशि भी दी। 

रविवार को दोपहर से प्रवचन होंगे - आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के साथ भाग्योदय में 48 मुनि महाराज और 49 आर्यिका, माताजी विराजमान है । मुनि सेवा समिति के सदस्य मुकेश जैन ढाना ने बताया कि बसंत पंचमी को सुबह 9 बजे आचार्यश्री की पूजन बुंदेली ढंग से जैन समाज ढाना, अंकुर कॉलोनी मकरोनिया और अन्य सभी श्रावक करेंगे। आचार्य श्री के रविवारीय प्रवचन दोपहर 2 बजे से बड़े पंडाल में होंगे ।

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दूसरों के दुख का अनुमान लगाने वालों सागर नहीं नदी बनो, वह बहती रहती है: विद्यासागर

सागर तो सागर है और सागर में हमेशा ऐसा लगता है जैसे वह सागर से बाहर आ गया हो। मांगलिक और धार्मिक कार्यों में महोत्सव जैसा उल्लास आ जाता है। धार्मिक अनुष्ठान ऐसा है जो हमेशा ही हमें त्यौहार भी दिखाते रहते हैं। यह बात आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने भाग्योदय तीर्थ में गुरुवार को धर्म सभा में कही। आचार्य श्री ने कहा धर्म तो धर्म है धर्म के कारण ही उल्लास होता है जब रात होती है तो 12 घंटे पता नहीं चलता, लेकिन सूर्योदय के साथ लगता है कि धर्म ही सब कुछ है। उल्लास के समय आपको इस बात का अनुभव होता है आप अभिव्यक्ति तो कर रहे हैं सम्यक दृष्टि जीव हमेशा हमेशा भावना भाता है किसी को सुख और किसी को दुख होता रहता है। 

सभी का दुख समाप्त हो जाए ऐसा सम्यक दृष्टि सोचते रहते हैं आचार्य श्री ने कहा मणियों को चमकते देखा है। मणि तो मणि होती है बस आंख खुली रहे तो उसकी चमक आती रहती है सम्यक दृष्टि जीव अपने दुख को भूल कर दूसरों का दुख दूर करने के बारे में सोचता जाता है। सम्यक दृष्टि जीव हमेशा हमेशा को मुक्त हो जाता है। आप लोग दो प्रकार की घड़ियों का अनुभव प्राप्त करते हैं दुख की घड़ी में अलग अनुभव होता है सुख की घड़ी में अलग लेकिन अपना दुख छोटा हो जाता है और दूसरों का दुख बड़ा हो जाता है दुख का अनुमान लगाने वालो सागर नहीं नदी बनो सागर तो एक ही स्थान पर ठहरा रहता है लेकिन नदी हमेशा बहती रहती है। दूर रहना चाहता था फिर भी सागर आना पड़ता है स्वयं की चिंता नहीं स्वयं का चिंतन करो। आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का अवसर मनीष जैन बुढ़ार को प्राप्त हुआ। इस दौरान डॉ वी सी जैन भोपाल, प्रकाश जैन ने शास्त्र भेंट किए। 

आचार्य श्री के पड़गाहन और आहार कराने का सौभाग्य वयोवृद्ध समाजसेवी गुलाब चंद जैन पटना परिवार को मिला उल्लेखनीय गुलाब जैन के गृहस्थ अवस्था की बेटी वर्तमान में आचार्य संघ में आर्यिका दृढ़मति माता है। पटना परिवार ने सर्वतो भद्र जिनालय के लिए एक बड़ी प्रतिमा विराजमान कराने की घोषणा की। सहस्त्रकूट जिनालय के लिए लगभग एक दर्जन से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रतिमा विराजमान कराने की घोषणा की। अमरकंटक में बन रहे सर्वोदय तीर्थ क्षेत्र में कार्य पूर्ण होने की जानकारी वहां से आए 400 से अधिक श्रद्धालुओं ने श्रीफल भेंट कर दी, पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव के लिए निवेदन किया । बीनाबारह जैन तीर्थक्षेत्र में कमेटी के पदाधिकारियों ने पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव कराने के लिए आचार्य श्री से सानिध्य देने आशीर्वाद मांगा। गौरझामर जैन पंचायत और दयोदय गौशाला समिति के सदस्यों ने आचार्य श्री को श्रीफल भेंट किया। 

मुनिश्री समय सागर महाराज की अगवानी आज 

सागर. संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक और जेष्ठ शिष्य मुनिश्री समय सागर महाराज की ससंघ अगवानी भाग्योदय तीर्थ परिसर में सुबह 8 बजे होगी। मुनि सेवा समिति के सदस्य मुकेश जैन ढाना ने बताया की मुनिसंघ पिछले कुछ दिनों से खुरई में विराजमान था। शुक्रवार को आचार मुनिसंघ की अगवानी कृषि उपज मंडी गेट के सामने से शुरू होगी। मुनि संघ में कुल 14 मुनि महराज हैं।

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शक्कर के चक्कर में मत पड़ो, गुड़ के चक्कर में पड़ो, गुड़ में बहुत गुण: आचार्य विद्यासागर

शक्कर के चक्कर में मत पड़ो, गुड़ के चक्कर में पड़ो, गुड़ में बहुत गुण: आचार्य विद्यासागर   भाग्योदय तीर्थ परिसर में विराजमान आचार्य विद्यासागर महाराज ने बुधवार को धर्म सभा में कहा कि गुड गुणकारी है और कभी हानिकारक नहीं होता है। जबकि शक्कर के उपयोग से डायबिटीज की बीमारी बढ़ रही है और वह बहुत हानिकारक है। 

आचार्यश्री ने कहा शुगर में डूबोगे तो निश्चित रूप से डायबिटीज हो जाएगी। शक्कर के चक्कर में मत पड़ो गुड़ के चक्कर में पड़ो, गुड़ में बहुत गुण हैं। आपके आलसी बने रहने से आपको शुगर की बीमारी होती जा रही है। लाखों लोग प्रतिदिन इंसुलिन लगाकर भोजन कर रहे हैं। 
    6 फरवरी 2019 आचार्य श्री विद्यासागर जी प्रवचन (सागर)
आचार्यश्री ने कहा कि शक्कर बनाने लाल से सफेद करने की प्रक्रिया रासायनिक पद्धति से होती है, जो खराब है। शक्कर से चक्कर आते हैं। किसी भी रूप में यह गुणकारी नहीं है। आज मानव बीमार हो रहा है तो उसमें सबसे बड़ी भूमिका शक्कर की है बीमारी में किसी और का हाथ नहीं आपका स्वयं का हाथ है। रसायन के माध्यम से शक्कर को सफेद किया जा रहा है और यह सफेद शक्कर जहर है। जीवन बचाने के लिए शक्कर छोड़ने की जरूरत है। 

सिद्धांत को सिद्धांत के रूप में स्वीकार करना चाहिए। भारत में जो शास्त्र लिखे गए हैं। मनगढ़ंत नहीं है। आप भावों का मिश्रण बनाइए। विष के अंश समाप्त हो जाएंगे। जितना गुड़ का उपयोग करोगे निश्चित रूप से बीमारियां भी आपसे दूर हो जाएंगे। आचार्यश्री ने कहा संसार में अद्भुत परिवर्तन आते हैं, जो हमारी समझ में नहीं आते हैं। सिद्धांत में कोई परिवर्तन संभव नहीं है लेकिन कुछ वस्तुओं के सम्मिश्रण होने पर परिवर्तन हो जाते हैं। आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का अवसर विनोद पाटनी गुवाहाटी को मिला। आचार्यश्री की पूजन गोपालगंज जैन समाज के श्रद्धालुओं ने की इस अवसर पर लगभग एक दर्जन से अधिक श्रद्धालुओं ने राजकोट जिनालय में अपने परिवार की ओर से मूर्ति विराजमान कराने की घोषणा की। आचार्यश्री की आहारचर्या बैशाखिया परिवार के चौके में हुई। आज आहारचर्या के बाद बैशाखिया परिवार ने सर्वतोभद्र जिनालय में एक बड़ी प्रतिमा विराजमान कराने की घोषणा की। कार्यक्रम का संचालन मुकेश जैन ढाना और सुरेंद्र जैन मालथौन ने किया। 

आचार्यश्री विद्यासागर महाराज इन दिनों भाग्योदय तीर्थ परिसर में विराजमान है। आचार्यश्री की शिष्या आर्यिका ऋजुमति माताजी का रहली से, आर्यिका अकम्पमति माताजी का गौरझामर से, आर्यिका उपशांतमति माताजी का सुरखी और आर्यिका गुणमति माताजी का परसोरिया से विहार कर भाग्योदय तीर्थ सागर आने के संकेत हुए है। आर्यिका विज्ञान मति माताजी भी आचार्य श्री के दर्शनों के लिए बिलहरा से विहार करते हुए सागर पहुंच रही है। जबकि झांसी में विराजमान आर्यिका पूर्णमति माताजी ससंघ विहार कर 1 सप्ताह में ललितपुर पहुंचेगी और वहां से उनके भी सागर पहुंचने की संभावना है। शुक्रवार तक 63 माताजी (कुल 6 संघ) भाग्योदय में विराजमान हो जाएंगी। 

सभा को संबोधित करते आचार्यश्री इनसेट- आचार्यश्री से मिलने कमिश्नर, आईजी और डीआईजी पहुंचे। सभी ने लिया आशीर्वाद। 

मुनिश्री समय सागर महाराज ईसुरवारा पहुंचे - सागर. मुनिश्री समय सागर महाराज खुरई से सागर की ओर बिहार कर रहे हैं। बुधवार शाम मुनिसंघ का बिहार जरुआखेड़ा से मुनि सुधासागर महाराज की जन्मस्थली प्रसिद्ध जैन तीर्थक्षेत्र ईसुरवारा के लिए हुआ। शाम 5 बजे भव्य अगवानी हुई। मुनि संघ की 8 फरवरी को सागर में भव्य अगवानी होगी। भाग्योदय में विराजमान आचार्य विद्यासागर महाराज के दर्शन करने के लिए सागर संभाग के आयुक्त मनोहर दुबे, सागर पुलिस आईजी सतीश सक्सेना और डीआईजी राकेश जैन पहुंचे। आचार्य श्री को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया और चर्चा की। 

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जो जहां था, वहीं से चल दिया आचार्य श्री का आशीर्वाद लेने

जो जहां था, वहीं से चल दिया आचार्य श्री का आशीर्वाद लेने उनके पीछे-पीछे   आचार्य विद्यासागर महाराज अचानक मंगलवार को दोपहर भाग्योदय तीर्थ परिसर से निकले तो उनके विहार की पूरे शहर में खबर उड़ गई। जिसको जहां कही यह जानकारी मिली। वह आचार्य श्री की एक झलक पाने अपनी दुकान, कार्यालय और घर से बाहर निकल पड़ा, मोबाइल पर एक-दूसरे से जानकारी ले कर आचार्यश्री के पीछे चल पड़ा। वहीं आचार्य श्री ससंघ तेजी से अपने कदम बढ़ाते हुए शहर के प्रमुख मार्गो से होते हुए केंद्रीय जेल पहुंचे। जेल के मुख्य गेट पर हजारों की संख्या में एकत्र हो चुके महिला, पुरुष और युवाओं का हुजूम ने अाचार्य श्री के जयकारे लगाए। विद्यासागर महाराज की एक झलक पा लेने के बाद भी लोग उनकी वापसी की रात तकते-तकते पूरे डेढ़ घंटे जेल के बाहर खड़े रहे। ब्रह्मचारिणी भी वहीं खड़ी रहीं। वर्णी कालोनी क्षेत्र की महिलाएं दर्शन करने घर से दौड़ते हुए पुरानी गल्ला मंडी के चौराहे पर पहुुंंची तो निराशा हाथ लगी। महिलाएं दर्शन करने ऑटो रिक्शा पर बैठ कर गोपालगंज होते हुए जेल के बाहर पहुंच गई। जहां डेढ़ घंटे बाद दर्शन करने का अवसर मिला। 

आचार्य श्री के पांव पखारे - जेल के अंदर जेल अधीक्षक, जेलर, डाक्टर और स्टाफ सहित कैदियों ने आचार्य श्री के पांव पखारे। इससे पहले विद्यासागर महाराज ने हथकरघा यूनिट, जेल का विडियो कांफेंस रूम, जमीन पर बनाया गया भारत नक्शा देखा। वहीं जेल की बैरकों में बंद कैदी खिड़कियों के सीखचें से आचार्य श्री को बड़े कोतूहल से निहार रहे थे। यूनिट के लिए 5 लाख दान करने की घाेषणा जैन समाज के एक श्रृद्धालु ने की । वहीं आउट लेट और चलित शोरुम के लिए जेल प्रशासन ने 10 लाख की डिमांड की है। 

आचार्य श्री बोले जैसे यह हथकरघा सागर में नहीं मुंबई में खुला हो - आचार्य श्री ने शीतल हथकरघा के लूमों का भी अवलोकन किया। काम कर रहे लोगों की तरफ मुस्कराते हुए देखा और बोले शहर के और लोगों को ऐसे हथकरघा खोलना चाहिए। शीतल हथकरघा को देख कर विद्यासागर महाराज ने कहा ऐसा लग रहा है जैसे यह हथकरघा सागर में नहीं मुंबई में खुला हो। इस अवसर पर किरण जैन ज्योति जैन, नीलू जैन आदि ने आचार्य श्री पाद प्रच्छालन कर आरती उतारी। 

झलक पाने डेढ़ घंटे व्हील चेयर पर बैठे बैठे की प्रतीक्षा - आचार्य श्री के दर्शन करने के लिए दमाेह से अपनी बीमार प|ी कमला देवी के साथ भाग्योदय पहुंचे एन के जैन को जैसे ही आचार्य श्री के जेल की आेर जाने की जानकारी हुई। वह प|ी को लेकर सीधे जेल गए। जहां गेट के बाहर उनकी प|ी करीब डेढ़ घंटे धूप में व्हील चेयर पर बैठी रही। शाम 4.35 बजे आचार्य श्री गेट से बाहर निकले तब जा कर उनकी एक झलक मिल सकी। इसी तरह डाक्टर, वकील, इंजीनियर तक आचार्य श्री की झलक पाने के लिए जेल पहुंच गए। 

गोपालगंज से आईजी आफिस तक का रोड दो घंटे बंंद रहा : गोपालगंज में भारत चौक से लेकर तहसीली में आई आफिस तक बड़े एवं भारी वाहनों के प्रवेश पर पुलिस ने रोक लगा दी थी। सारे वाहन आई आफिस के बाजू से निकले। जेल के सामने वाली रोड पर आचार्य श्री के दर्शन करने वालों की भीड़ लगी रही। 

मुनि समय सागर महाराज ससंघ जरूआखेड़ा पहुंचे - मुनि समय सागर महाराज 14 मुनियों के संघ के साथ खुरई से बिहार करते हुए मंगलवार को शाम जरुआखेड़ा पहुंचे। मुनि संघ के 7 फरवरी को सागर पहुंचने की संभावना है। 

मूक बधिर बच्चों से भी मिले आचार्य श्री - घरौंदा संस्था की संचालिका प्रीति यादव मंगलवार को 10 मूक बधिर बच्चों के साथ भाग्योदय पहुंची और आचार्य श्री को श्रीफल भेंट किया। आचार्य श्री बच्चों से मिले और आर्शीर्वाद दिया। बच्चों के साथ चंदू शुक्ला, सुकुमाल जैन, संतोष जैन कई लोग थे। 

आचार्य श्री की 22 आर्यिकाओं ने की अगवानी - आर्यिका अनंतमति माताजी ने आचार्य संघ की की अगवानी आचार्य श्री जब जेल से हथकरघा यूनिट देखने के बाद भाग्योदय लौट रहे थे तो बांदरी से बिहार कर सागर पहुंची आर्यिका अनंतमति माताजी और आर्यिका भावना मति माताजी सहित सभी 22 माताजी ने आचार्य संघ की अगवानी की और आचार्य श्री ने सभी माता जी को आशीर्वाद दिया। 

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पांच इंद्रियां तो सीमा में रहती हैं लेकिन मन का कोई ठिकाना नहीं : आचार्य विद्यासागर

आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने भाग्योदय तीर्थ में सोमवार को धर्म सभा में कहा कि मनुष्य पांच इंद्रीय होते हैं और सीमा में रहते हैं। स्थान छोड़कर भी नहीं जा सकते हैं। मन भी एक इंद्री है लेकिन वह घोषित नहीं है और इस मन का कोई ठिकाना नहीं है। मन को पकड़ना किसी के वश की बात नहीं है। आचार्य श्री ने कहा कि मन के विषय का कोई ठिकाना नहीं है। कहीं रूप में, कहीं गंध में तो कभी खाने और विषयों में मन कब कहां चला जाए, इसे कोई रोक नहीं सकता है। जिसने मन को मना लिया वह संयम के मार्ग पर जा सकता है। 

आचार्य श्री ने कहा कि अणुव्रत के माध्यम से आगे बढ़ना चाहिए, दान देने पर आप हल्कापन महसूस करोगे और अगले जीवन में इसका लाभ मिलेगा मोक्ष मार्ग भी प्राप्त हो सकता है |

आचार्य श्री जी ने कहा हर क्षेत्र में हमें संयम की आवश्यकता है हर काम चाहिए लेकिन धार्मिक क्षेत्र में ज्यादा संयम की आवश्यकता है। 

सोमवार को सुबह आचार्य श्री के पूजन पूर्व पादप्रक्षालन का अवसर डॉ चक्रेश जैन, दीपक जैन,शैलेंद्र जैन, कपिल बरोदा, रितेश जैन, संजय जैन को मिला। आचार्य श्री की आहारचर्या अरुण जैन ताले वाले रविकांता जैन, सर्वतोभद्र जिनालय के ट्रस्टी अनूप जैन रूपाली जैन अंसुज जैन के चौके में हुई इस अवसर पर ताले वाले परिवार ने बड़ी प्रतिमा भाग्योदय में विराजमान कराने की घोषणा की । इनके छोटे भाई जयकुमार जैन ने एक छोटी प्रतिमा जिनालय में विराजमान कराने की घोषणा की रविकांता जैन ने सोने की चेन,शालिनी जैन की दादी ने 2 तोला सोना, राहुल जैन मोकलपुर एक अंगूठी और रेखा जैन ने एक सोने का कडा मंदिर के निर्माण में दान देने समर्पित किया। सर्वतोभद्र जिनालय निर्माण में अशोक जैन ठेकेदार और उनके परिवार ने एक बड़ी प्रतिमा विराजमान कराने की घोषणा की। सहस्त्रकूट जिनालय में प्रतिमा विराजमान करने की घोषणा 25 श्रद्धालुओं ने की। एक हजार आठ प्रतिमाओं में से लगभग 900 से अधिक दानदाताओं द्वारा मूर्ति विराजमान कराने की घोषणा की गई है। संचालन मुकेश जैन ढाना ने किया। 

तीर्थ परिसर में देखा सर्वतो भद्र जिनालय का निर्माण कार्य 

सागर | भाग्योदय तीर्थ परिसर में बन रहे सर्वतोभद्र जिनालय का काम देखने सोमवार को दोपहर 2 बजे आचार्यश्री विद्यासागर महाराज निर्माण स्थल पर पहुंचे। मंदिर की नींव का काम अंतिम चरण में है। आचार्य श्री ने मंदिर के ट्रस्टियों देवेंद्र जैन , मुकेश जैन ढाना, आनंद जैन, सट्टू जैन कर्रापुर, राजेश जैन , पप्पू प्रदीप जैन , प्रकाश जैन ,अनूप जैन आदि से निर्माण कार्य की जानकारी ली। इस मौके पर निर्माण करा रहे इंजीनियर राहुल यादव,कपिल ठाकुर,अनिल नामदेव, राजेश मथुरिया, प्रभु विश्वकर्मा, दीपाली पटेल और मिस्त्री-मजदूरों व वाहन चालकों को आचार्य श्री ने आशीर्वाद दिया। भाग्योदय तीर्थ में चतुर्मुखी जिनालय का निर्माण कार्य चल रहा है। 216 फीट ऊंचे इस मंदिर में तीन गर्भ ग्रह होंगे। 12 चौबीसी में 288 प्रतिमाएं विराजमान होगी। 

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मंजिल का कोई कद नहीं होता है, लघु पथ से वह गुरु पथ की ओर जाता है: आचार्यश्री

मंजिल का कोई कद नहीं होता है, लघु पथ से वह गुरु पथ की ओर जाता है: आचार्यश्री     रविवार, आज वीरवार भी है। दूर- दूर से मेहमान आए हैं। इस बड़ी पंचायत में उन्हें पहले जगह मिलना चाहिए। आज यहां मुझे लघु रास्ते से लाया गया तो मैने पूछा यह नया- नया सा लग रहा है। जब मन में जानने की जिज्ञासा होती है तो वह उसका पूरी स्पष्टता से समाधान भी चाहती है। मैं अल्प समय में उसका अंतरंग में ध्यान रख कर बताता हूं कि आपकी जिज्ञासा जानने में नहीं जीने की इच्छा को लेकर होती है। भगवान राम रघुकुल के भी थे और गुरुकुल के भी। इसलिए उनका जीवन हर किसी व्यक्ति के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है। गुरुकुल के भाव राम के जीवन में हमेशा बने रहे। भगवान श्रीराम लघुपथ को चुन कर पगडंडियों पर चलते थे। उन्होंने अपने आपको हमेशा लघु माना। मंजिल का कोई कद नहीं हुआ करता है। लघु पथ से वह गुरु पथ की ओर जाता है। 

हम लोग खूब आकुल- व्याकुल रहते हैं और जो भगवान से संबंध रखते हैं। उनमें आकुलता नहीं रहती है। आप अपने आपको भूलोगे तो अपने बन जाओगे। क्योंकि इसमें भीतरी छवि और आत्म तत्व की बात होती है। हमें ऊपर की शक्ल देख कर संतुष्ट नहीं होना चाहिए बाहर की छवि को अच्छा देखना चाहिए लेकिन उन्हें भीतरी सोच के साथ रखना चाहिए। जैसे कि डाक्टर ऊपर की शक्ल देख कर नहीं भीतरी आकृति देख कर संतुष्ट होता है। वही चिकित्सा अंदर की करता है उसका असर ऊपर से नजर आता है। 
    जैसे सोने को कभी चमकाया नहीं जाता है वह भट्टी में जाते ही और चमकदार हो जाता है भट्टी में वह जलता नहीं है। अपने को लघु बनाना बड़ी वस्तु है हम खुद को तो आरोग्यधाम बनना चाहते हैं। जबकि इसकी रोक धाम आयुर्वेदिक इलाज में है। यह बहुत प्राचीन पद्धति है। चीन इसमें बहुत आगे बढ़ गया है परंतु उसे यह नहीं पता कि नाड़ी से क्या होता है। हमारा इतिहास बताता है कि हमारे यहां नाड़ी देखकर रोग का पता लगा लिया जाता था। जो लोगों की व्याधि को जान सकता है वह आयुर्वेदिक है। आयु क्या है, आत्मा क्या है। यह जाने बिना चिरायु को जाना नहीं जा सकता है। चिरंजीव कोई नहीं हो सकता है चिरंजीव तो सिर्फ भगवान ही होते हैं, जो अनंत काल तक जीते हैं। हम तो पूर्ण आयु की कामना कर सकते हैं। बीच में अकाल मरण ना हो आयु को पूर्ण करके मृत्यु हो। पूर्ण आयु के लिए सम्यक दर्शन सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र की आवश्यकता है शिष्य की दृष्टि हमेशा गुरु के ऊपर रहनी चाहिए, जबकि गुरु की दृष्टि सभी शिष्यों के ऊपर रहती है। 

मौसम बदलने पर सुकमाल व्यक्ति को कुछ ना कुछ रोग हो जाता है तापमान के माध्यम से आयुर्वेदिक दवाएं दी जाती हैं। यदि अच्छी नींद आ जाए और भूख मिट जाएं तो आप के रोग अपने आप दूर हो जाते हैं। 12 वर्षों के अध्ययन के बाद नाड़ी के वैद्य बनते हैं तब वह रोग पकड़ने में माहिर हो जाते हैं। भाग्योदय तीर्थ में विराजमान आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने रविवारीय धर्मसभा को दोपहर में संबोधित किया। उन्होंंने जो वचन कहे, उन्हें हम यहां जस का तस दे रहे हैं। 

रविवार, आज वीरवार भी है। दूर- दूर से मेहमान आए हैं। इस बड़ी पंचायत में उन्हें पहले जगह मिलना चाहिए। आज यहां मुझे लघु रास्ते से लाया गया तो मैने पूछा यह नया- नया सा लग रहा है। जब मन में जानने की जिज्ञासा होती है तो वह उसका पूरी स्पष्टता से समाधान भी चाहती है। मैं अल्प समय में उसका अंतरंग में ध्यान रख कर बताता हूं कि आपकी जिज्ञासा जानने में नहीं जीने की इच्छा को लेकर होती है। भगवान राम रघुकुल के भी थे और गुरुकुल के भी। इसलिए उनका जीवन हर किसी व्यक्ति के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है। गुरुकुल के भाव राम के जीवन में हमेशा बने रहे। भगवान श्रीराम लघुपथ को चुन कर पगडंडियों पर चलते थे। उन्होंने अपने आपको हमेशा लघु माना। मंजिल का कोई कद नहीं हुआ करता है। लघु पथ से वह गुरु पथ की ओर जाता है। 

हम लोग खूब आकुल- व्याकुल रहते हैं और जो भगवान से संबंध रखते हैं। उनमें आकुलता नहीं रहती है। आप अपने आपको भूलोगे तो अपने बन जाओगे। क्योंकि इसमें भीतरी छवि और आत्म तत्व की बात होती है। हमें ऊपर की शक्ल देख कर संतुष्ट नहीं होना चाहिए बाहर की छवि को अच्छा देखना चाहिए लेकिन उन्हें भीतरी सोच के साथ रखना चाहिए। जैसे कि डाक्टर ऊपर की शक्ल देख कर नहीं भीतरी आकृति देख कर संतुष्ट होता है। वही चिकित्सा अंदर की करता है उसका असर ऊपर से नजर आता है। 

जैसे सोने को कभी चमकाया नहीं जाता है वह भट्टी में जाते ही और चमकदार हो जाता है भट्टी में वह जलता नहीं है। अपने को लघु बनाना बड़ी वस्तु है हम खुद को तो आरोग्यधाम बनना चाहते हैं। जबकि इसकी रोक धाम आयुर्वेदिक इलाज में है। यह बहुत प्राचीन पद्धति है। चीन इसमें बहुत आगे बढ़ गया है परंतु उसे यह नहीं पता कि नाड़ी से क्या होता है। हमारा इतिहास बताता है कि हमारे यहां नाड़ी देखकर रोग का पता लगा लिया जाता था। जो लोगों की व्याधि को जान सकता है वह आयुर्वेदिक है। आयु क्या है, आत्मा क्या है। यह जाने बिना चिरायु को जाना नहीं जा सकता है। चिरंजीव कोई नहीं हो सकता है चिरंजीव तो सिर्फ भगवान ही होते हैं, जो अनंत काल तक जीते हैं। हम तो पूर्ण आयु की कामना कर सकते हैं। बीच में अकाल मरण ना हो आयु को पूर्ण करके मृत्यु हो। पूर्ण आयु के लिए सम्यक दर्शन सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र की आवश्यकता है शिष्य की दृष्टि हमेशा गुरु के ऊपर रहनी चाहिए, जबकि गुरु की दृष्टि सभी शिष्यों के ऊपर रहती है। 

मौसम बदलने पर सुकमाल व्यक्ति को कुछ ना कुछ रोग हो जाता है तापमान के माध्यम से आयुर्वेदिक दवाएं दी जाती हैं। यदि अच्छी नींद आ जाए और भूख मिट जाएं तो आप के रोग अपने आप दूर हो जाते हैं। 12 वर्षों के अध्ययन के बाद नाड़ी के वैद्य बनते हैं तब वह रोग पकड़ने में माहिर हो जाते हैं।

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फास्ट फूड से कैंसर होता है, इससे अपना बचाव करने घर का भोजन करो: आचार्यश्री

संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने भाग्योदय तीर्थ परिसर में शनिवार को धर्मसभा में कहा कि बच्चों में शुरू से ही संस्कार डालना चाहिए। फास्ट फूड के रूप में एक अजान फल जो पैकेट में बंद रहता है, उसके अंदर क्या है। यह मालूम नहीं तो भी उसका सेवन लगातार बढ़ता जा रहा है। ये ठीक नहीं है। इसकी जगह आप सभी को घर का भोजन करना चाहिए। 
आचार्य श्री ने कहा पैकेट में अंदर क्या है। पैकेट में ना तो हवा जाती है और कैसे वह बना है यह भी नहीं मालूम, बस थोड़ा चटपटा और जीभ को अच्छा लगता है इसके चलते लोग इसे आंख बंद करके खा रहे हैं। जबकि इससे पेट नहीं भरता फिर भी बच्चे इसके दीवाने हैं और खा रहे हैं। घर का खाना खाने से आप स्वस्थ रहेंगे । क्योंकि फास्ट फूड कैंसर का सबसे बड़ा कारण है और आने वाले समय में हर घर में इस रोग से व्यक्ति पीड़ित रहेंगे। इस रोग से बचना है तो फास्ट फूड का त्याग करना होगा । 

कई लोगों ने की सहस्त्र कूट जिनालय में प्रतिमा विराजमान कराने की घोषणा : वीरेंद्र जैन फैंसी ज्वेलर्स 11 मूर्ति,आनंद जैन बंटी राहतगढ़ ने एक बड़ी मूर्ति और कपिश जैन दिल्ली चार्टर्ड अकाउंटेंट ने आचार्य श्री के चरणों का पाद प्रक्षालन किया। आचार्य श्री की आहार चर्या राकेश जैन ,नमिता जैन, रितुल जैन और ईशु जैन के चौके में हुई।सहस्त्र कूट जिनालय में प्रतिमा विराजमान कराने की घोषणा डा. विनोद मीना जैन, अजय जैन शिखर चंद जैन, क्रांति जैन सुलोचना जैन,सरोज जैन, निशांत समैया ,प्रदीप जैन, संदीप जैन , कंछेदी लाल दाऊ, भागचंद जैन, अरविंद जैन, अखिलेश जैन, प्रियंका, आनंद जैन, राहुल जैन , हुकमचंद जय कुमार सुनील, जिनेंद्र जैन, सुनील जैन, सुशील जैन, वर्षा जैन ने एक- एक मूर्ति विराजमान कराने की घोषणा की। 

जस्टिस, कुलपति, डीआईजी, एसपी ने लिया आर्शीवाद : शनिवार को मप्र मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस एन के जैन, हरी सिंह गौर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो राघवेंद्र प्रसाद तिवारी, डीआईजी पुलिस राकेश जैन, पुलिस अधीक्षक अमित सांघी आदि मुनिश्री के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। भाग्योदय के डॉक्टरों ने आचार्य श्री को श्रीफल भेंट किया। 

आचार्य श्री के रविवारीय प्रवचन आज : भाग्योदय तीर्थ परिसर में विराजमान आचार्य विद्यासागर महाराज के रविवार को दोपहर 2 बजे से होंगे। मुनि सेवा समिति के सदस्य मुकेश जैन ढाना ने बताया कि आचार्य श्री का पूजन सुबह 9 बजे से छोटे पंडाल में होगी। इसके बाद मंगल देशना सुबह 9:30 बजे, आहारचर्या सुबह 10 बजे और दोपहर 2 बजे से बड़े पंडाल में आचार्य श्री की मंगल देशना होगी। 

ये है त्याग 

आचार्य श्री ने कहा त्याग क्या है एक बार जंगल में दो लोग जा रहे थे उन्हें बहुत तेज भूख लग रही थी अचानक एक पेड़ ऐसा दिखा जहां पर बहुत अच्छे और रस भरे फल लगे हुए दिखाई दे रहे थे लेकिन उस फल का नाम किसी को नहीं मालूम था एक व्यक्ति ने कहा कि मैंने मुनि महाराज से नियम लिया है कि जिस फल का नाम नहीं मालूम हो ऐसे अजान फल को मैं नहीं खाऊंगा लेकिन दूसरे व्यक्ति को इतनी तेज भूख लगी थी तो उसने एक फल खाया और कुछ ही मिनटों में उसके प्राण निकल गए त्याग के कारण एक व्यक्ति की जान बच गई और दूसरे के प्राण चले गए।आचार्य श्री ने कहा देने वाले को अपना मोह कम करना चाहिए त्याग के भाव बनाना अच्छी बात है 

 

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आचार्य श्री ने कहा सरकारें आपकी होती हैं, हमारी तो भगवान के सिवाय कोई नहीं

आचार्य श्री ने कहा सरकारें आपकी होती हैं, हमारी तो भगवान के सिवाय कोई नहीं, वह कभी गलती भी नहीं करती   भाग्योदय में शुक्रवार को भी 50 से ज्यादा मूर्तियां सहस्त्र कूट जिनालय में देने की घोषणा की गई 
भाग्योदय तीर्थ परिसर में शुक्रवार को आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने धर्मसभा में कहा की कन्याओं को ना सोर होती है और ना ही सूतक लगती है। आपने उसे पाला और पोसा है और फिर कन्यादान कर दिया, जो देने योग्य था वह दे दिया। आचार्य श्री ने बताया कि पिता कन्या के घर जाता है तो कुछ खाता पीता नहीं है बल्कि कन्या के घर जब वो आ जाएगा तो खाली हाथ नहीं बल्कि कुछ लेकर जाएगा और हमेशा उसकी समृद्धि के लिए भगवान से कामना करेगा। ससुर बनने के बाद कन्या दामाद की समृद्धि ससुर के लिए महत्वपूर्ण होती है क्योंकि कहने को होता है कि यह उस लड़की के पिता है या उस लड़के के ससुर हैं और उस हस्ताक्षर के माध्यम से ही पहचान बढ़ती रहती है। ससुर सिर्फ त्याग करता है और हमेशा देने का काम करता है। आचार्य श्री ने कहा हमारी सरकार तो भगवान है और कोई नहीं, आप लोगों की सरकारें होती हैं। हमारी सरकार कभी गलती नहीं करती। 

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भावना पूरी हो चाहे नहीं पर इसे भाना श्रावक का काम है : विद्यासागरजी

भावना पूरी हो चाहे नहीं पर इसे भाना श्रावक का काम है : विद्यासागरजी   भाग्योदय तीर्थ में विराजमान संत आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भक्तों की भावना पूरी हो जाए जरूरी नहीं है लेकिन भावना भाना आपका कार्य है और आपकी भावना के लिए हमें लंबा प्रवास करना होगा। आचार्य श्री ने कहा कि रिद्धियों का उपयोग किया नहीं जाता है कुछ का होता भी है यह आगम के अनुकूल है रिद्धि का प्रयोग और भावना भाना अलग-अलग वस्तु होती है। यह प्रत्येक व्यक्ति के घर में आहार हो जाएं यह आप लोगों की भावना है कहीं अंतराय और तो कहीं निरंतराय आहार हो जाते हैं। 

आचार्य श्री जी ने कहा प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान को 6 माह तक आहार नहीं हुए थे उस समय उनके पिता राजा नाभि राय माता मरू देवी और ब्रह्मी सुंदरी आदि पड़गाहन में थे लेकिन राजा सोम को आहार देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। वह भी 6 माह बाद हम तो फिर भी बड़े दयालु हैं हम तो नीचे देख कर पढ़गाहन में चलते हैं कभी-कभी आवाज से पहचान लेते हैं उन्होंने कहा की भगवान के भरोसे रहो आप तो मेरा तेरा सारा यहीं छूट जाएगा। आचार्य श्री की पूजन करने का सौभाग्य श्रावक श्रेष्ठियों को मिला इस अवसर पर निर्मल कुमार चक्रेश, राजेश,आशीष पटना परिवार ने एक बड़ी मूर्ति विराजमान कराने की घोषणा की जबकि सचिन जैन ने भी एक मूर्ति विराजमान कराने की घोषणा की। इस अवसर पर सर्वतो भद्र जिनालय की प्रमुख दृष्टि सुरेंद्र जैन मालथौन, सुजय जैन ने आचार्य श्री पास बैठकर आशीर्वाद लिया। इसके अलावा 151000 की राशि देने की लगभग 15 श्रद्धालुओं द्वारा घोषणा की गई। 
 

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मुद्रा का मूल्य विदेश में बढ़ रहा है और भारत में घट रहा है: आचार्यश्री

मुद्रा का मूल्य विदेश में बढ़ रहा है और भारत में घट रहा है: आचार्यश्री   आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने भाग्योदय तीर्थ परिसर में आयोजित एक धर्म सभा में कहा कि आज आपको अर्थ आवश्यक है। मुद्रा का मूल्य विदेश में बढ़ रहा है और भारत में घट रहा है। यह क्यों हो रहा है इसे जानना होगा। 

उन्होंने कहा जल और मिट्टी पर सबका समान अधिकार है। आज जल नीचे क्यों जा रहा है। जहां दूध नहीं बिकता था। वहां आज पानी बिक रहा है। आज बोतल-बोतल पानी बिक रहा है।उन्होंने कहा जब हम छोटे थे तो चवन्नी मिलती थी। उस चवन्नी का क्या प्रभाव था। उस समय के लोग जानते हैं। भारत में उस मुद्रा से विकास हुआ है, लेकिन आज करोड़ों रुपए होने के बाद भी क्या दिखाई देता है। दूध और घी की नदी बहने वाले देश में आज ऑक्सीजन में नहीं मिल पा रही है। आचार्य श्री ने कहा कि हम अभिमान नहीं करेंगे। स्वाभिमान से जरूर रहेंगे। 

सहस्त्र कूट जिनालय में बुधवार को सुनीता जैन, दिनेश जैन, अरुणा जैन, पदम सिंघई, राजकुमार उषा जैन, निर्मला ज्ञानचंद जैन जितेंद्र जैन, विजय नायक, बृजेश नायक, डॉ आनंद सिंघई, क्रांति जैन, प्रदीप जैन, सपना जैन, सुधीर जैन ने एक-एक प्रतिमा के लिए 1.51 लाख रुपए की राशि देने की घोषणा की। सहस्त्र कूट जिनालय के लिए अब तक लगभग 800 प्रतिमाएं विराजमान कराने के लिए लोगों ने अपनी स्वीकृति दी है। सहस्त्र कूट जिनालय नींव से शिखर तक का कार्य प्रेमचंद सौरभ जैन के परिवार ने अपनी ओर से करने घोषणा की है। इस जिनालय में 1008 प्रतिमाएं विराजित होगी। 

आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने भाग्योदय तीर्थ परिसर में आयोजित एक धर्म सभा में कहा कि आज आपको अर्थ आवश्यक है। मुद्रा का मूल्य विदेश में बढ़ रहा है और भारत में घट रहा है। यह क्यों हो रहा है इसे जानना होगा। 

उन्होंने कहा जल और मिट्टी पर सबका समान अधिकार है। आज जल नीचे क्यों जा रहा है। जहां दूध नहीं बिकता था। वहां आज पानी बिक रहा है। आज बोतल-बोतल पानी बिक रहा है।उन्होंने कहा जब हम छोटे थे तो चवन्नी मिलती थी। उस चवन्नी का क्या प्रभाव था। उस समय के लोग जानते हैं। भारत में उस मुद्रा से विकास हुआ है, लेकिन आज करोड़ों रुपए होने के बाद भी क्या दिखाई देता है। दूध और घी की नदी बहने वाले देश में आज ऑक्सीजन में नहीं मिल पा रही है। आचार्य श्री ने कहा कि हम अभिमान नहीं करेंगे। स्वाभिमान से जरूर रहेंगे। 

सहस्त्र कूट जिनालय में बुधवार को सुनीता जैन, दिनेश जैन, अरुणा जैन, पदम सिंघई, राजकुमार उषा जैन, निर्मला ज्ञानचंद जैन जितेंद्र जैन, विजय नायक, बृजेश नायक, डॉ आनंद सिंघई, क्रांति जैन, प्रदीप जैन, सपना जैन, सुधीर जैन ने एक-एक प्रतिमा के लिए 1.51 लाख रुपए की राशि देने की घोषणा की। सहस्त्र कूट जिनालय के लिए अब तक लगभग 800 प्रतिमाएं विराजमान कराने के लिए लोगों ने अपनी स्वीकृति दी है। सहस्त्र कूट जिनालय नींव से शिखर तक का कार्य प्रेमचंद सौरभ जैन के परिवार ने अपनी ओर से करने घोषणा की है। इस जिनालय में 1008 प्रतिमाएं विराजित होगी।
केन्द्रीय जेल के हथकरघा यूनिट के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री को दिया आमंत्रण आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के आशीर्वाद से केन्द्रीय जेल सागर में कैदियों को हथकरघा के वस्त्र बनाने का प्रशिक्षण जनवरी 2018 से लगातार दिया जा रहा है। सक्रिय सम्यकदर्शन सहकार संघ के द्वारा पूर्व डीएसपी डॉ. रेखा जैन के निर्देशन में केन्द्रीय जेल सागर में एक करोड़ की लागत से दस हजार वर्ग फुट के शेड में हथकरघा की 54 यूनिट जैन समाज के सहयोग से चलाई जा रही हैं। प्रशिक्षण के साथ साथ कैदियों को इसका मेहनताना भी दिया जा रहा है। इसी योजना को आगे बढ़ाते हुए 16 फरवरी शनिवार को सागर में आचार्यश्री विद्यासागर के सानिध्य में हथकरघा के विशाल प्रशिक्षण केन्द्र का शुभारंभ किया जा रहा है । कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के जेल महानिदेशक व वरिष्ठ जेल अधिकारी शामिल होने सागर आ रहे हैं। बुधवार को सागर जैन समाज के एक प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री व गृहमंत्री से मुलाकात कर योजना की पूरी जानकारी दी एवं सागर आने का निमंत्रण दिया। प्रतिनिधि मंडल में प्रमुख रूप से डॉ. रेखा जैन, डॉ. नीलम जैन, सुरेन्द्र मालथौन, राकेश पिडरूआ, प्रियेश जैन आदि शामिल थे।

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