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आचार्य श्री विद्यासागर जी महराज से सम्बन्धित नवीनतम समाचार.

published news updates about Acharyashri Vidyasgar Ji Maharaj, प्रेस विज्ञप्ति /Press Release related to Acharya Vidyasagar Ji maharaj 

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प्रतिभास्थली जबलपुर मे हुआ समयसार का संपादन, स्वर्णाक्षरों में लेखन (9 अप्रेल 2019)

प्रतिभास्थली जबलपुर मे हुआ समयसार का संपादन, स्वर्णाक्षरों में लेखन (9 अप्रेल 2019)

समयसार का संपादन, स्वर्णाक्षरों में लेखन - आत्मा का सार जिसमें छुपा है ऐसे श्री समयसार ग्रंथराज का चांदी के पृष्ठों पर स्वर्णाक्षरों में लेखन का कार्य ब्र. भैया जी ने हज़ारों वर्षों के लिए जिनवाणी को सुरक्षित करने का पुण्य कार्य किया है।    प्रतिभास्थली जबलपुर - 9 अप्रेल 2019 को आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महाराज के मंच से 11 किलो वजन वाले इस महान ग्रंथ को 11 लाख 11 हज़ार 111रू. की बोली के साथ ज्ञानदान के रूप में ब्र. विजयलक्ष्मी दीदी जी (भूतपूर्व डिप्टीकलेक्टर) ने इस युग के श्रेष्ठ

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ज्यादा आवाज करने वाला कौआ भी शांत रहता है, लेकिन हम लगातार बोलते रहते हैं

ज्यादा आवाज करने वाला कौआ भी शांत रहता है, लेकिन हम लगातार बोलते रहते हैं संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह धीमे बोले और कम से कम बोले। ऐसा करके वह ध्वनि प्रदूषण को कम करने में अपना योगदान दे सकता है। वे नर्मदा के तिलवाराघाट तट पर स्थित दयोदय तीर्थ में धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। आचार्यश्री ने बताया कि पशु-पक्षी भी रात्रि में मौन रहते हैं। सबसे ज्यादा आवाज करने वाला कौआ भी शांत रहता है, लेकिन हम लगातार बोलते रहते हैं। मनुष्य यह भी नहीं सोचत
आचार्यश्री के ससंघ 51 मुनिराज, 2 ऐलक श्री, 63 आर्यिकाओं के सानिध्य में 100 प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा, अब बीना बारहा का नया नाम होगा शांतिधाम

आचार्यश्री के ससंघ 51 मुनिराज, 2 ऐलक श्री, 63 आर्यिकाओं के सानिध्य में 100 प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा, अब बीना बारहा का नया नाम होगा शांतिधाम

आचार्यश्री के ससंघ 51 मुनिराज, 2 ऐलक श्री, 63 आर्यिकाओं के सानिध्य में 100 प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा, अब बीना बारहा का नया नाम होगा शांतिधाम अतिशय क्षेत्र बीना बारहा में 30 साल बाद दूसरी बार हुए पंचकल्याणक महाेत्सव के अंतिम दिन रविवार काे आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में गजरथ महोत्सव में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। गजरथ की सात फेरियों के साथ महोत्सव का समापन हाे गया और प्रभु का मोक्ष की ओर गमन हुआ। इस पूरे आयोजन में 100 प्रतिमाओं को प्रतिष्ठित किया गया, जिन्हें जबलपुर, हर्रई, के
 

अपना कल्याण करना है तो मन के भीतर जाना होगा, ज्यादा पैसाें की बोली लगाने से कुछ नहीं होता: आचार्यश्री

केवल ज्यादा पैसों की बोली लगाने से कुछ नहीं होता, तनाव को कम करने के लिए दान देते हैं। जबकि तन को दूर करने के लिए दान दिया जाता है। यह उद्गार राष्ट्रीय जैन संत आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने देवरी के दिगंबर जैन मंदिर परिसर में व्यक्त किए। आचार्य श्री विद्यासागर महाराज सुबह गोपालपुरा से देवरी नगर पहुंचे जहां देवरी जैन समाज द्वारा धूमधाम से अगवानी की गई। इसके बाद आहार चर्या का सौभाग्य नन्हे भाई जैन परिवार को मिला।   प्रवचन के दौरान आचार्यश्री ने कहा कि आप लोग केवल देहरी पर रह रहे हैं

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16 एवं 17 फरवरी को सागर भाग्योदय तीर्थ परिसर में संपन्न हुई राष्ट्रीय हथकरघा संगोष्ठी

राष्ट्रीय हथकरघा संगोष्ठी संपन्न हुई 16 17 फरवरी को सागर भाग्योदय तीर्थ परिसर में दिगंबराचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में दो दिवसीय राष्ट्रीय जेल हथकरघा संगोष्ठी संपन्न हुई करीब 20,000 की जनता द्वारा कार्यक्रम को सराहा गया 16 फरवरी की प्रातः मध्यप्रदेश शासन की लघु एवं कुटीर उद्योग मंत्री श्री हर्ष यादव द्वारा दीप प्रज्वलन की कार्रवाई संपन्न की दिल्ली तिहाड़ जेल से आए हुए डीआईजी श्री एसएस परिहार द्वारा जेल हथकरघा में बन रही साड़ियों की खूब सराहना की और तिहाड़ जेल में यथा शी

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हमारा स्वागत चिल्लर पार्टी ने किया है : आचार्यश्री विद्यासागर

आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने गौरझामर में एक धर्म सभा के दौरान कहा कि रंग देखकर भी रंग बदल जाता है। दान देने वालों को देख कर दान देने के भाव भी बन जाते हैं। छोटे-छोटे बच्चे जिन्हें हम चिल्लर पार्टी कहते हैं। उन्होंने भी हमारी अगवानी की है। खूब जयकारा लगाया है। बहुत पुण्यात्मा जीव होंगे। आचार्यश्री ने कहा छोटे-छोटे बच्चे सर्दी में भी सुबह से हमारा नाम लेकर जयकारा लगाते हैं।  उन्होंने कहा कि मूक पशुओं की रक्षा के लिए आपके ग्राम में गौशाला बनकर तैयार हुई है। आप लोगों को अच्छे ढंग से उसकी देखभा

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मन में छोड़ने के भाव हैं तो बिल्कुल भी विलंब नहीं करना चाहिए : आचार्यश्री

सागर के सुरखी कस्बे में मंगलवार काे आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने धर्मसभा में कहा की यदि मन में छोड़ने के भाव हैं तो बिल्कुल भी विलंब नहीं करना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्र में आपके द्वारा छोड़ने के भाव जल्दी बन जाते हैं। शहरों में यह काम देर में होता है  आचार्य श्री ने कहा दक्षिण में छोटे-छोटे बच्चों को झबला पहनाया जाता है। उसमें बटन नहीं होते, चैन नहीं होती, लेकिन एक धागा होता है। उस धागे को खींच दो और छोड़ दो तो वह टाइट हो जाता है या थोड़ा खुल जाता है। इससे बच्चों को दिक्कत नहीं होती है। यही ह

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भाग्याेदय तीर्थ से आचार्यश्री का ससंघ बीना-बारहा की ओर विहार

भाग्याेदय तीर्थ से आचार्यश्री का ससंघ बीना-बारहा की ओर विहार

संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागर महाराज का ससंघ मंगल विहार साेमवार काे दोपहर भाग्योदय से बीना-बारहा की ओर हुआ। वह यहां 24 दिन विराजमान रहे। आचार्य श्री दाेपहर 1.30 बजे संत भवन से निकले और मंदिर पहुंचे, वहां से सीधे सुभाष नगर हाेते हुए राहतगढ़ बस स्टैंड, विजय टॉकीज, मस्जिद, तीन बत्ती से परकोटा,बसस्टैंड, गोपालगंज, लाल स्कूल होकर जिला पंचायत चौराहा से विश्वविद्यालय पहुंचे। वहां से बम्हाेरी चौराहा होते हुए चितौरा गांव पहुंचे। जहां रात्रि विश्राम किया।  21 किमी की दूरी आचार्यश्री ने पौने चार घंटे

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हथकड़ी से हथकरघा की ओर बढ़ रहे हाथों की चर्चा हर जगह, युवा हस्तक्षेप की जगह हस्तकला में बनें निपुण : आचार्यश्री

हथकड़ी से हथकरघा की ओर बढ़ रहे हाथों की चर्चा हर जगह, युवा हस्तक्षेप की जगह हस्तकला में बनें निपुण : आचार्यश्री

पिछले दिनों से हथकड़ी से हथकरघा की ओर बढ़ रहे हाथों की चर्चा है। जिसका शंखनाद केंद्रीय जेल सागर से हुआ और पूरे देश को आकर्षित कर रहा है। युवा पीढ़ी को हस्तक्षेप की बजाय हस्तकला में निपुण बनना होगा। कभी-कभी अनावश्यक हस्तक्षेप हमें हथकड़ी पहनने पर मजबूर कर देता है। हथकरघा से बने वस्त्र पहनने से हम न्याय व शांति प्रिय बन जाते हैं। यह बात आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने भाग्योदय तीर्थ में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा संगोष्ठी के समापन पर कही। उन्होंने कहा कि जब देश में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में हिंद

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आचार्यश्री बोले : हथकरघा मात्र निर्वाह नहीं, निर्माण है मंत्री ने कहा : जेल के बाहर भी ऐसे केंद्र खोलेंगे ताकि रोजगार बढ़े

आचार्यश्री बोले : हथकरघा मात्र निर्वाह नहीं, निर्माण है मंत्री ने कहा : जेल के बाहर भी ऐसे केंद्र खोलेंगे ताकि रोजगार बढ़े

केंद्रीय जेल सागर में हथकरघा केंद्र का उद्घाटन कार्यक्रम शनिवार को भाग्योदय तीर्थ परिसर में हुआ।  आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने कहा कि विदेशी लोगो ने भारत को जाना पहचाना है पर भारत के लोगों ने अपने स्वयं के इतिहास काे नहीं जाना है। शील मर्यादा का पालन विदेशी वस्त्रों से कभी संभव नहीं है हथकरघा के वस्त्रों के माध्यम से इसका पालन कर सकते हैं। इसी में आप स्वस्थ रहोगे और इसी में परमार्थ भी करोगे। उन्होंने कहा कि आज्ञाकारी एक लड़का अच्छा है आज्ञा देने वाले कई लड़कों से। मनोरंजन की सामग्री ने भार

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सोया नहीं करो, जागृत रहा करो ढंग बदलो, इससे सब कुछ बदल जाता है: आचार्यश्री

सोया नहीं करो, जागृत रहा करो ढंग बदलो, इससे सब कुछ बदल जाता है: आचार्यश्री

सोया नहीं करो, जागृत रहा करो ढंग बदलो, इससे सब कुछ बदल जाता है: आचार्यश्री     आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने भाग्योदय तीर्थ में शुक्रवार काे धर्म सभा में कहा कि जीवन में ढंग बदल लो, ढंग बदलने से सब कुछ बदल जाता है यह चेतन का परिणाम है पर इसे आप जड़ मानते हो इसी कारण हम जड़ यानी अज्ञानी हो गए हैं ।  आचार्य श्री ने कहा एक मणि होती है जिसके प्रभाव क्या होते हैं अगर प्रकाश नहीं भी हो तो वह चारों ओर प्रकाशित करती है। चंद्रमा जब आकाश में आता है तो उसका प्रकाश फैलता है चंद्रमा

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हमें वस्तु स्थिति को स्वीकार करना चाहिए, इससे लोगों का भ्रम दूर हो जाता है. आचार्य विद्यासागर

हमें वस्तु स्थिति को स्वीकार करना चाहिए, इससे लोगों का भ्रम दूर हो जाता है. आचार्य विद्यासागर

हमें वस्तु स्थिति को स्वीकार करना चाहिए, इससे लोगों का भ्रम दूर हो जाता है. आचार्य विद्यासागर आप लोगों को कुछ बातों के ऊपर विश्वास नहीं होता है, अथवा समझ में नहीं आता है। कार्य देखकर कहने लगते हो कि देव चमत्कार है या कोई जादू टोना है या फिर शंका होने लगती है हमें वस्तुस्थिति को स्वीकार करना चाहिए उसे दृढ़ श्रद्धान करके अपना लेना चाहिए वस्तुस्थिति की जानकारी होने पर लोगों का भ्रम दूर हो जाता है। यह बात भाग्याेदय में विराजमान आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने गुरुवार काे धर्म सभा में कही। आचार्

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हथकरघा पर केंद्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी 16,17 फरवरी काे भाग्योदय तीर्थ में, देश के कई राज्यों के जेल अधिकारी आएंगे

हथकरघा पर केंद्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी 16,17 फरवरी काे भाग्योदय तीर्थ में, देश के कई राज्यों के जेल अधिकारी आएंगे

हथकरघा पर केंद्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी 16,17 फरवरी काे भाग्योदय तीर्थ में, देश के कई राज्यों के जेल अधिकारी आएंगे   आचार्य विद्यासागर महाराज की स्वर्णिम योजना हथकरघा एक सामाजिक क्रांति को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान करने अाैर जेल में रह रहे कैदियों के पुनर्वास के लिए भाग्योदय तीर्थ में आचार्य संघ के सानिध्य में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का 16 अाैर 17 फ़रवरी को आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम प्रभारी ब्रम्हचारी डॉ. रेखा जैन, प्रवक्ता वीरेन्द्र मालथौन ने बताया कि संगोष्ठी में दिल्ली, हरियाणा ,

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पूजन हमेशा सावधान और मन लगाकर करना चाहिए - आचार्य श्री

पूजन हमेशा सावधान और मन लगाकर करना चाहिए - आचार्य श्री

संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने भाग्योदय परिसर में आयोजित धर्मसभा में कहा कि पूजा कैसे की जाती है। जिस समय जो अर्घ चढ़ाना चाहिए वह चढ़ाएं, इससे कर्मों की निर्जरा होती है। पूजन करते समय हमेशा सावधानी बरतना चाहिए और चावल का एक कण भी नीचे नहीं गिरना चाहिए।   आचार्य श्री ने कहा भक्ति कैसे करना है पूजन कैसे करना है यह आपको मन लगाकर करना चाहिए। पूजन करना आपको अच्छे तरीके से सीखना पड़ेगा। अर्घ चढ़ाते हैं और बिखराते हैं गली गली, ऐसा नहीं होना चाहिए। समय का अपव्यय नहीं करना चाहिए, बल्क

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इंडिया नहीं भारत बाेलाे का संदेश देने निकली दुपहिया वाहन रैली, 150 मिनट में पूरी की 11 किमी की परिक्रमा

इंडिया नहीं भारत बाेलाे का संदेश देने निकली दुपहिया वाहन रैली, 150 मिनट में पूरी की 11 किमी की परिक्रमा

इंडिया नहीं भारत बाेलाे का संदेश देने निकली दुपहिया वाहन रैली, 150 मिनट में पूरी की 11 किमी की परिक्रमा   इंडिया नहीं भारत बाेलाे का संदेश देने मंगलवार दाेपहर डेढ़ बजे भाग्याेदय तीर्थ परिसर में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का आशीर्वाद लेकर शहर में निकली दोपहिया वाहन रैली ने 11 किलोमीटर की परिक्रमा दाे घंटे तीस मिनट में पूरी की। मंगलवार का दिन युवाओं ने देश के नाम किया और करीब एक हजार दुपहिया वाहन पर सवार 1500 से अधिक युवाअाें अाैर वरिष्ठ जनाें ने “इंडिया नहीं भारत बोलो “ का संदेश शहर

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जीवन में पोशाक भले ही बदल जाए पर सिद्धांत कभी नहीं बदलते: अाचार्यश्री

जीवन में पोशाक भले ही बदल जाए पर सिद्धांत कभी नहीं बदलते: अाचार्यश्री

आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने भाग्योदय तीर्थ में साेमवार काे धर्मसभा में कहा कि जैन धर्म भाव प्रधान है मनुष्य भी पूजन करता है और त्रियंच भी पूजन करता है जिसके पास जल नहीं है तो वह समता पूर्वक शांति के साथ गुणानुवाद करता है। आचार्य श्री ने कहा महावीर भगवान और आदिनाथ भगवान के युग को नहीं बदला जा सकता है। पोशाक भले बदल जाएं पर सिद्धांत कभी नहीं बदलते आलंबन मेरे योग्य है वह करूंगा भीतरी भाव परख है तो धर्म उसी के परिणाम निकलता है आचार्य श्री ने कहा हमारी यात्रा अखंड चलती है एक एक पग चलती है अपनी चा

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दिमाग चलाना ठीक है पर अपने हिसाब से दिमाग लगाना ठीक नहीं : आचार्यश्री

दिमाग चलाना ठीक है पर अपने हिसाब से दिमाग लगाना ठीक नहीं : आचार्यश्री

म अहिंसा परमाे धर्म की जय, अाचार्य कुंद कुंद सागर, अाचार्य ज्ञानसागर महाराज की जय। अाज रविवार है। जनता अाती है अाैर भूल जाती है कि जगह मिलेगी कि नहीं, जगह क्या है। जगह ताे दिल में मिलना चाहिए। जगह क्या है। यह लेने देने की नहीं, हमेशा दिल में जगह होना चाहिए। दिल में कितनी जगह है इसको हम नाप नहीं सकते, लेकिन हम जगह सबकाे दे सकते हैं।  दिमाग चलाना ठीक है पर अपने हिसाब से दिमाग लगाना ठीक नहीं हाेता है। हमें अपने इस पागलपन पर राेष अाना चाहिए। धन एेसे ही नहीं अा जाता, पसीना आने के बाद ही पैसा आता ह

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अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए दान करना आवश्यक है : आचार्य विद्यासागर

अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए दान करना आवश्यक है : आचार्य विद्यासागर

अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए दान करना आवश्यक है : आचार्य विद्यासागर   धन सब के पास दो प्रकार का होता है एक धन घूमता रहता है और दूसरा धन स्थिर रहता है अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए दान करना आवश्यक है ये बात आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने शनिवार को भाग्योदय तीर्थ में शनिवार काे एक धर्मसभा में कही। आचार्यश्री ने कहा कि शरीर में आत्मा रह रही है शरीर आत्मा नहीं है। शरीर साथ नहीं दे रहा हो तो आत्मा कहती है मेरे पास पंख हैं, तुम्हारे पैर अब किसी काम के नहीं हैं। आप शरीर के नहीं आत्मा के द

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मानव काया को पुण्य का वैभव मिल जाना सुख का कारण नहीं होता: आचार्यश्री

मानव काया को पुण्य का वैभव मिल जाना सुख का कारण नहीं होता: आचार्यश्री

मानव काया को पुण्य का वैभव मिल जाना सुख का कारण नहीं होता: आचार्यश्री   भाग्योदय तीर्थ में संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने धर्मसभा में कहा कि देवों के पास भोजन नहीं होता, वे तो सिर्फ मानसिक भोजन करते हैं। भोजन करने वाले तो मनुष्य होते हैं जो अपने हाथ आपके सामने करते हैं। देवों के पास पंच आश्चर्य तो होते हैं परंतु आहार नहीं करते।  आचार्य श्री ने कहा भारतीय संस्कृति में मुनि बनने की संस्कृति अभी जीवित है। हम यहां भी अल्पसंख्यक हैं जो चीजें दुर्लभ होती हैं वह बढ़ नहीं सकती

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दूसरों के दुख का अनुमान लगाने वालों सागर नहीं नदी बनो, वह बहती रहती है: विद्यासागर

दूसरों के दुख का अनुमान लगाने वालों सागर नहीं नदी बनो, वह बहती रहती है: विद्यासागर

सागर तो सागर है और सागर में हमेशा ऐसा लगता है जैसे वह सागर से बाहर आ गया हो। मांगलिक और धार्मिक कार्यों में महोत्सव जैसा उल्लास आ जाता है। धार्मिक अनुष्ठान ऐसा है जो हमेशा ही हमें त्यौहार भी दिखाते रहते हैं। यह बात आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने भाग्योदय तीर्थ में गुरुवार को धर्म सभा में कही। आचार्य श्री ने कहा धर्म तो धर्म है धर्म के कारण ही उल्लास होता है जब रात होती है तो 12 घंटे पता नहीं चलता, लेकिन सूर्योदय के साथ लगता है कि धर्म ही सब कुछ है। उल्लास के समय आपको इस बात का अनुभव होता है आप

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शक्कर के चक्कर में मत पड़ो, गुड़ के चक्कर में पड़ो, गुड़ में बहुत गुण: आचार्य विद्यासागर

शक्कर के चक्कर में मत पड़ो, गुड़ के चक्कर में पड़ो, गुड़ में बहुत गुण: आचार्य विद्यासागर

शक्कर के चक्कर में मत पड़ो, गुड़ के चक्कर में पड़ो, गुड़ में बहुत गुण: आचार्य विद्यासागर   भाग्योदय तीर्थ परिसर में विराजमान आचार्य विद्यासागर महाराज ने बुधवार को धर्म सभा में कहा कि गुड गुणकारी है और कभी हानिकारक नहीं होता है। जबकि शक्कर के उपयोग से डायबिटीज की बीमारी बढ़ रही है और वह बहुत हानिकारक है।  आचार्यश्री ने कहा शुगर में डूबोगे तो निश्चित रूप से डायबिटीज हो जाएगी। शक्कर के चक्कर में मत पड़ो गुड़ के चक्कर में पड़ो, गुड़ में बहुत गुण हैं। आपके आलसी बने रहने से आपको शुगर की बीम

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जो जहां था, वहीं से चल दिया आचार्य श्री का आशीर्वाद लेने

जो जहां था, वहीं से चल दिया आचार्य श्री का आशीर्वाद लेने

जो जहां था, वहीं से चल दिया आचार्य श्री का आशीर्वाद लेने उनके पीछे-पीछे   आचार्य विद्यासागर महाराज अचानक मंगलवार को दोपहर भाग्योदय तीर्थ परिसर से निकले तो उनके विहार की पूरे शहर में खबर उड़ गई। जिसको जहां कही यह जानकारी मिली। वह आचार्य श्री की एक झलक पाने अपनी दुकान, कार्यालय और घर से बाहर निकल पड़ा, मोबाइल पर एक-दूसरे से जानकारी ले कर आचार्यश्री के पीछे चल पड़ा। वहीं आचार्य श्री ससंघ तेजी से अपने कदम बढ़ाते हुए शहर के प्रमुख मार्गो से होते हुए केंद्रीय जेल पहुंचे। जेल के मुख्य गेट पर

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पांच इंद्रियां तो सीमा में रहती हैं लेकिन मन का कोई ठिकाना नहीं : आचार्य विद्यासागर

पांच इंद्रियां तो सीमा में रहती हैं लेकिन मन का कोई ठिकाना नहीं : आचार्य विद्यासागर

आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने भाग्योदय तीर्थ में सोमवार को धर्म सभा में कहा कि मनुष्य पांच इंद्रीय होते हैं और सीमा में रहते हैं। स्थान छोड़कर भी नहीं जा सकते हैं। मन भी एक इंद्री है लेकिन वह घोषित नहीं है और इस मन का कोई ठिकाना नहीं है। मन को पकड़ना किसी के वश की बात नहीं है। आचार्य श्री ने कहा कि मन के विषय का कोई ठिकाना नहीं है। कहीं रूप में, कहीं गंध में तो कभी खाने और विषयों में मन कब कहां चला जाए, इसे कोई रोक नहीं सकता है। जिसने मन को मना लिया वह संयम के मार्ग पर जा सकता है।  आचार्य

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मंजिल का कोई कद नहीं होता है, लघु पथ से वह गुरु पथ की ओर जाता है: आचार्यश्री

मंजिल का कोई कद नहीं होता है, लघु पथ से वह गुरु पथ की ओर जाता है: आचार्यश्री

मंजिल का कोई कद नहीं होता है, लघु पथ से वह गुरु पथ की ओर जाता है: आचार्यश्री     रविवार, आज वीरवार भी है। दूर- दूर से मेहमान आए हैं। इस बड़ी पंचायत में उन्हें पहले जगह मिलना चाहिए। आज यहां मुझे लघु रास्ते से लाया गया तो मैने पूछा यह नया- नया सा लग रहा है। जब मन में जानने की जिज्ञासा होती है तो वह उसका पूरी स्पष्टता से समाधान भी चाहती है। मैं अल्प समय में उसका अंतरंग में ध्यान रख कर बताता हूं कि आपकी जिज्ञासा जानने में नहीं जीने की इच्छा को लेकर होती है। भगवान राम रघुकुल

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फास्ट फूड से कैंसर होता है, इससे अपना बचाव करने घर का भोजन करो: आचार्यश्री

फास्ट फूड से कैंसर होता है, इससे अपना बचाव करने घर का भोजन करो: आचार्यश्री

संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने भाग्योदय तीर्थ परिसर में शनिवार को धर्मसभा में कहा कि बच्चों में शुरू से ही संस्कार डालना चाहिए। फास्ट फूड के रूप में एक अजान फल जो पैकेट में बंद रहता है, उसके अंदर क्या है। यह मालूम नहीं तो भी उसका सेवन लगातार बढ़ता जा रहा है। ये ठीक नहीं है। इसकी जगह आप सभी को घर का भोजन करना चाहिए।  आचार्य श्री ने कहा पैकेट में अंदर क्या है। पैकेट में ना तो हवा जाती है और कैसे वह बना है यह भी नहीं मालूम, बस थोड़ा चटपटा और जीभ को अच्छा लगता है इसके चलते लोग इसे

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