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दीक्षित मुनिराज

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 मुनि श्री 108 प्रणम्य सागर जी महाराज का जीवन परिचय

 

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  2. यहां पर जो दूसरा चित्र सिद्ध मुद्रा का दर्शाया गया है वह शायद गलत हो सकता है क्योंकि हमें प्रणम्य सागर जी महाराज ने हथेलियों को सीधा रखना मतलब सिद्ध शिला की आकृति देते हुए हथेलियों को बिल्कुल दोनों रेखाओं को मिलाकर सिद्ध शिला का आकार देना इस तरह बताया है
  3. प्रवचनसार - ज्ञेय पदार्थो मे ज्ञान प्रवर्तता - मुनि प्रणम्य सागर जी
  4. प्रवचनसार - स्वभाव में अवस्थित द्रव्य का सद्भाव - मुनि प्रणम्य सागर जी
  5. प्रवचनसार - पदार्थ की पर्याय का उत्पाद और व्यय - मुनि प्रणम्य सागर जी
  6. प्रवचनसार - धर्मात्मा का अर्थ, आत्मा के उपयोग - मुनि प्रणम्य सागर जी
  7. प्रवचनसार - अशुभोपयोग का फल, निर्वाण सुख का स्वरूप - मुनि प्रणम्य सागर जी
  8. प्रवचनसार - पदार्थ का स्वरूप, शुद्धोपयोग का फल - मुनि प्रणम्य सागर जी
  9. प्रवचनसार - शुद्धोपयोग से परिणत आत्मा का स्वरूप - मुनि प्रणम्य सागर जी
  10. प्रवचनसार - द्रव्य का उत्पाद एवं व्यय क्या है? - मुनि प्रणम्य सागर जी
  11. प्रवचनसार - छह द्रव्यो के लक्षण एवम सत् का अर्थ - मुनि प्रणम्य सागर जी
  12.  

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