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Sushil Kumar Jain

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  1. हे भव्य जीव तुम इस नशवर संसार को ग्रहण ना करो ओर ना ही ऐसे कर्म करो की बार बार यह भव फिर से मिले और जिन कर्मो के कारण् यह जीव बार बार जन्म मरण को धारण करता हे उसका तयाग करें ओर ऐसे कर्मो को करें कि मोक्ष को पाये ओर दुबारा जन्म ना हो
  2. परम तपस्वी आचार्य संत शिरोमणी श्री विद्यासागर गुरुवर के चरणों में कोटि कोटि नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु
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