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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
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सात्विक धंधा - संस्मरण क्रमांक 29


संयम स्वर्ण महोत्सव

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 ☀☀ संस्मरण क्रमांक 29☀☀
           ? सात्विक धंधा ?
सर्वोदय तीर्थ अमरकंटक में श्रावकाचार की कक्षा में श्रावक को किस प्रकार से आजीविका चलना चाहिए । गुरुदेव ने बतलाते हुए कहा की आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज जी ने बताया था की एक सेठजी थे वे अहिंसा धर्म मे बड़ी ही निष्ठा रखते थे। उन्होंने अपने पुत्र से कह दिया था कि तुम कपड़े की दुकान खोल सकते हो, लेकिन कपड़े की फैक्ट्री(मिल) नही खोल सकते क्योंकि उसमें हिंसा होती है। और सोने, चांदी, हीरे, जवाहरात की दुकान खोल सकते हो लेकिन खदान में ठेका नही ले सकते हो क्योंकि उसमें हिंसा अधिक होती है। हमे हिंसा से बचना चाहिए। मूल उद्देश्य हिंसा से बचने का होना चाहिए। अनर्थ से धन कमाना ठीक नही। परमार्थ के साथ अर्थ का उपार्जन करना चाहिए। प्रत्येक श्रावक को सात्विक धंधा अपनाना चाहिए।

? आत्मान्वेषी पुस्तक से साभार?
? मुनि श्री क्षमासागर जी महाराज
 

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