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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
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अहिंसा का आयतन - संस्मरण क्रमांक 28


संयम स्वर्ण महोत्सव

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   ☀☀ संस्मरण क्रमांक 28☀☀
           ? अहिंसा का आयतन ?
किसी सज्जन के आचार्य गुरुदेव से कहा साधुओं को गौशाला खुलवाले की प्रेरणा नही देनी चाहिए उसमें हिंसा होती है। उन्हें तो आत्म ध्यान करना चाहिए। यह सुनकर आचार्य श्री ने कहा गौशाला में हिंसा नही होती, साक्षात दया पलती है, करुणा के दर्शन होते है, गौशाला भी आयतन है, "अहिंसा का आयतन"। सम्यकदर्शन में अनुकम्पा गुण कहा है वह गौशाला में पशुओं के संरक्षण से प्रयोग में आता है। यह सक्रिय सम्यकदर्शन माना जाता है। बच्चों को पालना मोह है, किन्तु पशुओं को पालना दया अनुकम्पा है।

? आत्मान्वेषी पुस्तक से साभार?
? मुनि श्री क्षमासागर जी महाराज
 

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