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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
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अध्यात्म - संस्मरण क्रमांक 30


   ☀☀ संस्मरण क्रमांक 30☀☀
           ? अध्यात्म ?
एक बार आचार्य श्री ने बताया कि आप लोगों (मुनिराजों) की रत्नत्रय की गाड़ी है। इसमें रत्न भरे है, अध्यात्म इस गाड़ी की स्टरीग है। मोक्ष की इच्छा रखने वाले मुमुक्षु को अध्यात्म की ओर दृष्टि रखना चाहिए। अध्यात्म को भी भूलना नही चाहिए । अध्यात्म स्टेरिग की भांति है जैसे गाड़ी में स्टेरिग होती है जहाँ ,जब चाहो उसे स्टेरिग के मध्यम से मोड़ सकते हो, ऑक्सीडेन्ट (दुर्घटना) से बच सकते हो।वैसे ही मोक्ष मार्ग में बढ़ने वाले साधक को अध्यात्म स्टेरिंग की भांति है, जीवन मे किसी भी प्रकार के मोड़/समस्या, आ जावे तो अध्यात्म के माध्यम से बचा जा सकता है उपसर्ग परिषह के समय अध्यात्म ही काम आता है। इसीलिए साधक को हमेशा अध्यात्म की और दृष्टि दृष्टि बनाए रखना चाहिए , लौकिकता से बचना चाहिए।
? आत्मान्वेषी पुस्तक से साभार?
? मुनि श्री क्षमासागर जी महाराज

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