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anuyog jain

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  1. नमोस्तु आचार्य श्री...🙂 शीर्षक - अपनी पहचान
  2. नमोस्तु आचार्य श्री...🙂 शीर्षक - सहजता
  3. नमोस्तु आचार्य श्री...🙂 शीर्षक - तरण नहींं वितरण के बिना।
  4. नमोस्तु आचार्य श्री...😊 शीर्षक - 1. काल और क्षेत्र। 2. हम हम को लेकर चलें, अहं को समाप्त करें। 3. तुलना ना करें, सभी को अतुलनीय मानें। 4. अर्थ (प्रयोजन) के लिए शब्द (संकेत) होता है।
  5. नमोस्तु आचार्य श्री...🙂 शीर्षक - 1. मोह से मोक्ष तक। 2. मारक भी तारक हो सकता है। 3. मोह का ट्रीटमेंट। 4. दृव्य, क्षेत्र, काल, भाव के परिवर्तन से हानिकारक भी लाभप्रद हो सकता है।
  6. नमोस्तु आचार्य श्री...😊 शीर्षक - 1. स्वाभाविक आलोक किसी से आहत/मन्द नहीं होता। 2. अपने उपयोग को समता में रखने का प्रयास करें। 3. वर्तमान के ज्ञान को श्रद्धान के साथ रखने से वह वरदान सिद्ध होता है। 4. जो मिला है उसका सदुपयोग करें। इस प्रकार गुरु जी ने दीपक को रत्न दीप की ओर ले जाने के लिए मार्मिक उद्बोधन दिया... जो सभी के लिए कल्याणकारी सिद्ध हो, इसी भावना के साथ गुरूदेव के चरणों में बारम्बार नमोस्तु...
  7. शीर्षक - 1 प्राणी मात्र को तारने वाला अहिंसा धर्म 2. आहार दान से होता भावों में परिवर्तन 3. नवधा भक्ति की महिमा नमोस्तु आचार्य श्री...🙂
  8. शीर्षक - कर्म निर्जरा करने की विधि नमोस्तु आचार्य श्री 😊
  9. शीर्षक - 1. काल को मत पकड़ो। 2. भारतीय खगौल शास्त्र में ग्रहों का योगदान। 3. कुमार मंगल योग। 4. योग-निमित्त। नमोस्तु आचार्य श्री 😊
  10. जय जिनेन्द्र शीर्षक - आत्म तत्त्व को देह से पृथक करने की प्रक्रिया
  11. जय जिनेन्द्र शीर्षक - परिग्रह छोड़ो, परोपकार करो। भावार्थ - जो परिग्रह से मुक्त होते है, उनके ऊपर कोई ग्रह अपना प्रभाव नहीं डाल सकता। नमोस्तु आचार्य श्री ़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़😊
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