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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
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हल - संस्मरण क्रमांक 38


संयम स्वर्ण महोत्सव

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 ☀☀ संस्मरण क्रमांक 38☀☀
           ? हल ?
आचार्य श्री जी विहार करते हुए नेमावर की ओर से जा रहे थे,आचार्य श्री जी से पूछा-आप तो आचार्य श्री जी नवमी कक्षा तक पढ़े हैं और हम लोगों को m.a. पढ़ने के लिए कहते हैं यदि आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज ने आपको m.a.करने को कहा होता तो आप हम लोगों को कहां तक पढ़ने को कहते पीएचडी लॉ आदि।
 आचार्य श्री जी हसंकर बोल उठे-नहीं पहले मल्लिसागर जी (मल्लप्पा जी) कहते थे- ज्यादा क्या पढ़ना, खेती किसानी तो करना ही है। मेन सब्जेक्ट तो कृषि ही है।यह हल चलाओ जो की समस्त समस्याओं का हल है। पहले लोग नौकरी को अच्छा नहीं मानते थे खेती को ही प्रधानता देते थे उत्तम खेती, मध्यम व्यापार, जघन्य नौकरी ऐसा मानते थे, इसलिए दक्षिण में आज भी नौकरी को अच्छा नही मानते है।

 (रेहटी 1/2/2002, बुधवार)

 ? संस्मरण पुस्तक से साभार ?
✍ मुनि श्री कुंथुसागर जी महाराज
 

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