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anil jain "rajdhani"

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About anil jain "rajdhani"

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  • Birthday 01/11/1955

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    new delhi ..

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  1. हो गया जबलपुर वालों के पुण्य का कोष कम अथवा मार रहा पुण्य उनका जोर जो किसी और क्षेत्र के लोगों को मिल जाएगी गुरुवर के चरणों की रज ... कर गए विहार आज गुरुवर जबलपुर की प्रतिभास्थली से ... हम दिल्ली वालों का तो पुण्य इतना है क्षीण मात्र ज्ञाता दृष्टा बनकर ही कर लेते संतोष प्रभुवर का किस ओर का बनेगा अब संयोग बनी रहे गुरुकृपा हम दिल्ली वालों पर कभी तो हमारा भी पुण्य मारेगा जोर अतिथि की भांति जो गुरुवर के चरण बढ़ेंगे दिल्ली की ओर ... अभी तो गुरुवर के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनिश्री प्रणम्यसागर जी महाराज का आगमन होगा दरियागंज में अपने २३ तारीख के अर्हमयोग के कार्यक्रम के लिए जो विशाल रूप में हो रहा आयोजित लालकिला मैदान में ... नमोस्तु गुरुवर ! मिलती रहे छाया इस प्रकार बना रहे आशीर्वाद पूर्ववत !!! हम सभी दिल्ली वालों पर ! अनिल जैन "राजधानी" श्रुत संवर्धक १८.६.२०१९
  2. हार्दिक शुभकामनाये, भाई जी जय जिनेन्द्र ! गुरुकृपा है ये प्रसाद मुनिवर प्रसादसागर जी महाराज के निर्देशन से निश्चय ही मिला होगा लाभ ... नित्यप्रति गुरुचरणों में उनके आशीष से जो भी लिखा जाता अनायास करता हूँ रोज पोस्ट फेसबुक एवं व्हाट्सप्प पर दस हज़ार से ऊपर नित्यप्रति मिलते है जिनपर कमेंट्स कोई सुविधा स्पीकिंग ट्री टाइप की आप भी कराओ उपलब्ध यहाँ जिस से समदृष्टि जुड़ सके इकट्ठे हो सके एक जगह एक और एक ग्यारह होने में नहीं फिर कोई देर लगे ! प्रणाम ! पुन: बधाई के पात्र ! जय जिनेन्द्र ! गुरुचरणों में वंदन बारंबार !!! अनिल जैन "राजधानी" श्रुत संवर्धक नई दिल्ली -११०००२
  3. राजेश जी, सुन्दर शब्द संयोजन गुरुदेव के चरणों में सुन्दर भावांजलि बधाई ! जय जिनेन्द्र
  4. मम गुरुवर ! आचार्यश्री मिले स्वास्थ्य लाभ उन्हें जल्दी !इतनी ही प्रभु चरणों में करते विनती !!!माना कि शरीर भिन्न - आत्मा भिन्न भिन्न उसे करने के लिए शरीर से जरुरत होती शरीर की ही उसी के सहयोग से होती आत्मा की सिद्धि ... इसलिए ! देखभाल उसकी भी करना है जरुरी शरीर बना रहे स्वस्थ देता रहे साथ जब तक न हो जावे हमें कार्य की उपलब्धि उसके लिए जरुरी है देना उसको भोजन पानी यदि आ जाती उसमे कोई व्याधि जरुरी है उपचार उसका भी आहार भी सुपाच्य होता जभी जब निहार होता रहे नित्यप्रति उसके लिए विरेचक लेना ऋतू अनुसार है जरुरी दो चम्मच सौंफ और एक चम्मच अजवायन दो बड़ी इलायची इसका कूटकर बना हुआ योग आहार के अंत में गर्म दूध से लेने पर होता लाभकारी यदि लिया जाए नित्यप्रति नहीं आएगी कभी निहार की व्याधि स्व परीक्षित योग है ये सुपाच्य बना रहता आहार ... एक त्यागी की प्रकृति को जानकर खोजा था ये योग मैंने जो हुआ था प्राप्त गुरुवर आपकी ही कृपा से उपयोगी है यह सभी त्यागी व्रतियों के लिए ... जानते हम सभी राम का नाम लिखने पर नहीं डूबी थी शिला जल में राम ने जो छोड़ी शिला डूब जाती थी वो जल में गुरुवर ! तारना है अभी तो बहुत भव्यों को तो तुम्हे स्व के लिए न सही पर के उपकार की खातिर तो जरुरी है आपको स्वास्थ्य लाभ मिले जल्दी जिसके लिए नित्यप्रति विरेचक भी है जरुरी ... गुरुचरणों में त्रिकाल वंदन ! अनिल जैन "राजधानी" श्रुत संवर्धक २४.१.२०१९
  5. व्यक्ति बढ़ता जितना अध्यात्म मार्ग में लगता बहुत दूर है मंज़िल अभी उसकी जितना चला लगता शुरूवात है ये उसकी .. होता गुरु जिनके पास नहीं होने देता उसे ऐसा अहसास संबोधता बताकर उसे आगे का मार्ग कठिन डगर भी उसे सरल लगने लगती ... नमोस्तु गुरुवर त्रियोग वंदन
  6. THANK YOU VERY MUCH VIDYGURU.COM... FOR MAILING EVERY ACTIVITY TO MY EMAIL ID . THANKS, ONCE AGAIN. JAI JINENDRA ANIL JAIN "RAJDHANI"
  7. गृहस्थी की दौड़ में रहते हुए रन आउट नहीं रनिंग में रहना है सावधानी पूर्वक जो रनिंग करता वो रन आउट नहीं होता जो सिर्फ दौड़ने में रहता वो जल्दी रन आउट हो जाता ... गृहस्थी में हो आप गृहमंत्री की भी रखनी पड़ती बात जभी चलता व्रत-नियम पूजा पाठ ... इसलिए ! स्वावलंबी रहकर जितने कर सकते हो अपने भाव उतने तक मिलता लाभ व्रत-नियम आदि लेने का परावलंबी क्रियायों के कारण यदि छूटता / होता कोई नुकसान उतने अंश का ही मिलेगा उसका लाभ जितने अंश में निभाया तुमने स्वावलंबन के रहते ... गृहस्थी की गाड़ी चलाते हुए इतना तो रखना पड़ेगा तुम्हे ध्यान वर्ना तो रन आउट होकर नहीं खेल पाओगे पारी लंबी नहीं खड़ा कर पाओगे स्कोर बड़ा .... यानि बढ़ना है यदि धर्म मार्ग में कर्म निर्जरा के क्षेत्र में संयम धारण करके मोक्षमार्ग में करते रहो रनिंग सावधानी से वर्ना तो नियम लिया छूटा / टूटा हो जाता खेल ख़त्म आगे बढ़ने का ... मम गुरवर आचार्यश्री विद्यासागर जी का मिला मुझे उदघोषण मेरे जन्मदिन पर संयोग ही था ये मेरा जो चार महीने पूर्व में किया था व्रत अंगीकार बैठकर गुरुवर के चरणों में मेरे विकल्पों का उपसंहार मिला आज के दिन उनकी देशना में मिल गया विराम/समाधान उन सभी विकल्पों को जिनके कारण मन में थी दुविधा ... पूर्णतया और ढृढ़ता से पालन होगा नियम का मेरा धन्यवाद विद्यागुरु डॉट कॉम जिनके माध्यम से मिल गया गुरु का निर्देश जो संयोग से दिया मेरे जन्मदिन की तिथि पर घर बैठे मिल गया समाधान पाकर प्रवचन अपने ईमेल पर .. मेरे विकल्पों को मिल गया निर्देश भी कभी न करना निदान बंध न कभी आवे मन में ख्याल ऐसा किसी के कुछ करने से हुआ है ये हाल मेरा कर्मनिर्जरा की बनी रहेगी तुम्हारी प्रक्रिया गृहस्थ में रहते हुए भी बिमारी को जो जान जाता प्रकृति ने उसके उपचार की भी दी है साथ में व्यवस्था इसलिए रखो ध्यान इस बात का बिमारी का कारण है क्या जो बनी है ऐसी अवस्था हर वर्ष मिले गुरुवर की मुझे प्रत्यक्ष देशना बनी रहे यूँ ही मुझपर गुरुकृपा ... नमोस्तु गुरुवर ! त्रियोग वंदन !!! अनिल जैन "राजधानी" समय रहते उपचार मिल जाएगा प्रकृति से स्वत:... प्रार्थना यही करता इस उपहार को पाने के मौके पर श्रुत संवर्धक १४.१.२०१९ गुरुवर का उपकार रहेगा सदा याद मेरे आग्रह को करके स्वीकार कर दिया मेरा विश्वास प्रगाढ़ देकर दर्शन स्वप्न में मेरे बर्थडे की पूर्व रात्रि में ... हो गया मैं अनुग्रहित नहीं ओझल हो रहा वो दृश्य जहां चलकर मेरे साथ पहुंचे थे अपने कक्ष में गुरुवर के चलने में बाधा को नोट किया था मैंने दाहिने पैर के घुटने से नीचे कुछ फुंसी सी दिखी थी मुझे सो उसके उपचार हेतु एक दवा थी जो मेरे पास में लेकर जा रहा था मानो उनके कक्ष में नहीं रोका था मुझे किसी ने उन तक पहुँचने में बैठे थे वहां मेरे समधी और बड़े भाई पहले से जो चल दिए थे उठ के बिना किसी वार्तालाप किये गुरुवर से .... भांप गया था मैं नहीं दिखा था समर्पण उनका गुरुवर के प्रति गुरुवर वैसे भी नहीं करते सांसारिक बात किसी से ... दवा लगाने के लिए इतना जरूर कहाँ ब्रह्मचारी भैया ने गुरुवर नहीं कराते कोई उपचार मैंने इतना ही कहा उनसे दवा तो बाहरी उपचार है गुरुवर की आँख बचते ही मैं लगा दूंगा दवा उनके कुछ यदि कहेंगे तो मुझे ही कहेंगे मेरे संकल्प को मेरे श्रद्धान को देखकर मानो आशीर्वाद दिया हो संकेत से ... मना नहीं करके मानो मेरे आग्रह को स्वीकृति मिल गई थी मुझे बस, इतने में ही आँख खुल गई मेरी ... इसे तो प्रसाद मानता अपने लिए जो अस्वस्थ अवस्था के होते हुए भी संग चले थे मेरे , बैठाया पास में धन्य हो गया मैं , आग्रह करके वैसे तो अनायास ही आते रहते गुरुवर मेरे स्वप्न में पहली बार फलीभूत हुआ जो आग्रह पर दर्शन दिए इस प्रकार से ... प्रार्थना यही ईश्वर से यदि कोई प्रतिकूलता हो स्वास्थ्य की गुरुवर को स्वस्थ होवे जल्दी उनकी व्याधि बेशक लग जाए मुझे ... नमोस्तु गुरुवर ! अनिल जैन "राजधानी" श्रुत संवर्धक १२.११.२०१९
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