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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

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क्षेत्रविकास

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  1. What's new in this club
  2. कुंडलपुर के लिए टोल फ्री नंबर.... आप नोट कर ले प्रसिद्ध जैन तीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर में होने वाले पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव से संदर्भित एवं अन्य सभी प्रकार की जानकारियां आप इस नंबर 8523999111 पर फोन कर ले सकते हैं इस नंबर पर ही अधिकृत जानकारी आपको मिल पाएगी।
  3. बड़े बाबा और छोटे बाबा एवंउनके बड़े समवशरण की इन्द्रों द्वारा अद्भुत भक्ति.... इन दिनों बड़े बाबा के दरबार मे मुनिसंघो, आर्यिका संघो का आगमन प्रतिदिन हो रहा है जब भी आपको पुण्य उदय से अवसर मिले तो अवश्य देखियेगा, कि संघो के आगमन के समय जब समस्त मुनिराज एवम आर्यिका संघ अपने शिक्षा दीक्षा प्रदाता ऋषिराज श्रमणेश्वर आचार्यश्री की परिक्रमा करते है तब लगता है कि चारित्र, तप, त्याग, तपस्या के सुमेरु पर्वत की परिक्रमा ज्योतिषी देव सूर्य, चन्द्रमा, ग्रह, नक्षत्र तारे एक साथ कर रहे है समस्त मुनिराजों के मुखमंडल पर दमकता तेज ज्योतिष देव सूरज की किरणों की मानिंद लगता है वहीं श्वेत, धवल वस्त्र में समस्त आर्यिका माताजी ऐसी सुशोभित होती है जैसे साक्षात ज्योतिष देव चन्द्रमा अपनी चांदनी संग सुमेरु पर्वत की परिक्रमा कर रहे हों। अभी तक लाखों श्रावक परिवार ऐसी अद्भुत भक्ति धारा में अवगाहित हो चुके है तो भला स्वर्ग के इंद्र इंद्राणी कैसे दूर रह सकते है प्रतिदिन मुनिराजों आर्यिका माताजी द्वारा भक्ति और सौधर्म इंद्र एवम समस्त इंद्र परिवारों सूरज दादा, चंदा मामा की प्रति दिन गुरुभक्ति देख वरुण इंद्र और मेघकुमार इंद्र से रहा न गया उन्होंने कुबेर इंद्र को समझा बुझा कर अपने संग गठजोड़ कर लिया इन तीनों इन्द्रों ने बड़े बाबा और छोटे बाबा की भक्ति करने से पहले सांगानेर, चांदखेड़ी, बिजोलिया से भक्ति आरम्भ की, वरुण देव अपने धुंआधार गति से बढ़ रहे थे वहीं कुबेर देव बड़ी उदारता से रत्नों की वर्षा कर रहे थे यह बात अलग है कि वे रत्न धरती में पहुचने तक ओले की शक्ल में बदल जाते थे राजस्थान से लेकर मप्र और फिर बड़े बाबा के दरबार मे भक्ति में ऐसे बरसे की आहार चर्या के समय पड़गाहन में भी डटे रहे। स्वर्ग वापसी के समय तीनों इंद्रदेव ने छतीसगढ़ के चन्द्रगिरि ओर अमरकंटक में भी अपनी अद्भुत भक्ति का अनूठा प्रदर्शन किया था स्वर्ग के नारद मीडिया के अनुसार सुना गया है कि धनश्री कुबेर इंद्राणी और वरुण व मेघकुमार इंद्र की इंद्राणी ने अपने महलों के द्वार बंद कर कोप भवन में चली गईं है उन्हें शिकायत है कि जब अनेकों विशाल मुनिसंघ आर्यिका संघ बड़े बाबा के दरबार हेतु विहार कर रहे है तब तो ऐसे मौसम में वरुण कुमार मेघकुमार इन्द्रो और सबसे बड़ी बात कुबेर इंद्र को वहां क्यो जाना था? कम से कम रत्न वृष्टि से तो बचना था। और ज्यादा ही भक्ति भाव छलक रहा था तो मध्य रात्रि ही जाना था। ताकि ऐसे ऋषिराज, यतिराजो, आर्यिका माताजी पर उपसर्ग करने से तो बच जाते बेचारे तीनों इंद्र भीगती बरसात और कड़कड़ाती ठंड में बाहर खड़े है..... शब्दआंकन .राजेश जैन भिलाई . 🌈🌈🌈🏳‍🌈🏳‍🌈🌈🌈🌈
  4. यूं तो अक्सर बड़े बाबा के दर्शन के भाव बनते है और फिर जब बड़े बाबा के समवशरण में छोटे बाबा विराजित हो तो मन मचलने ही लगता है कुंडलपुर की ओर..... संयोग से सपरिवार कुंडलपुर के दर्शन का पुण्ययोग भी बन गया, ज्योहीं वाहन पटेरा से आगे बढ़ा थोड़ी ही देर में सड़क की दोनों ओर अंतहीन समतल मैदान में इंजियनिरो की टोलियां मूर्त रूप देने जुटी हुई थीं वहीं कुंडलपुर के प्रथम प्रवेश द्वार के पहले ही तीनों ओर के मुख्य मार्ग से कुंडलपुर जिनालय तक 6 लेन सड़क मार्ग निर्माण युद्धस्तर पर चल रहा था दोनों ओर की सड़कों में मुरम को पाटते, मंजीरे की ध्वनि वाले, रोडरोलर मदमस्त गजराजों की मानिंद डोल रहे थे। वही रेत, गिट्टी, शिलाओं के भार से दोहरे हुए दर्जनों विशालकाय डंपर ऊबड़खाबड़ कच्चे रास्तों पर सरपट भागे चले जा रहे थे। वहीं कृषि कार्यो एवम ग्रामीण एवम कस्बों के बहुउद्देश्यीय वाहन पचासों टेक्टर भी इस महा महोत्सव में अपना योगदान दे रहे थे। निर्माणाधीन सड़क के दोनों ओर बिजली के के खम्बों में मोटे मोटे केबलों से सम्पर्क जोड़ा जा रहा था वही दर्जनों जेसीबी, उखाड़े गए बिजली के खंबे, बड़ी बड़ी शिलाओं, सीमेंट के विशाल पाइप को अपनी आधुनिक सूंड में लपेटे तेज गति से दौड़ रहे थे। कुछ दूर आगे वर्कशॉप में सैकड़ो शिलाओं पर चलने वाले कटर अपने पाश्चात्य संगीत गुंजा रहे थे इस बार शिल्पकारों के साथ उनके घर की महिला सदस्य भी अपने शिल्प का प्रदर्शन कर घोषित कर रही थी कि बड़े बाबा के बड़े निर्माण में हमारी भी छोटी सी भूमिका है। कुंडलपुर के प्रमुख प्रवेशद्वार पर प्रवेश करते ही मान स्तम्भ के दर्शन हुए जब दाहिनी ओर नजर गई तो वर्धमान सरोवर के सामने वाले सभी भव्य जिनालयों के दर्शन हो रहे थे जिनालयों के सामने ही अलग, अलग समूहों में आर्यिका माताजी जाप्य, स्वाधाय एवम श्रावक, श्राविकाओं की जिज्ञासा का समाधान कर रहीं थी समूचा परिसर ऐसा लग रहा था कि श्रमण भास्कर आचार्यश्रेष्ठ के सामने भव्य चांदनी बिखरी हुई हो सन्त भवन में प्रवेश के पूर्व सैकड़ो दर्शनार्थी आचार्यश्री के दर्शन पाने लालायित थे, वहीं दूसरी और सैकड़ो लोग आचार्यभक्ति के लिये अपना स्थान सुरक्षित कर अंगद के पैर की तरह जम गए थे। कुछ ही देर में कुछ शोर सा हुआ बिटिया ने संकेत किया तुरन्त द्वार पर आओ.... लेकिन स्थान छोड़ने पर इस कीमती जगह पर दूसरे का कब्जा होने की आशंका थी,अबकी बार संकेत पाकर द्वार की ओर लपका, जिनालय से संध्या दर्शन कर श्रमणेश्वर आचार्यश्री मंद मंद मुस्कान लिये सन्त भवन की ओर आ रहे थे सैकड़ो कंठो ने गुरुचरणों में अनवरत नमोस्तु नमोस्तु... निवेदित किया गुरुदेव ने सभी पर वरदानी करकमलों से आशीष वर्षा की, मैंने भी नमोस्तु निवेदित किया संयोग से ऋषिराज आचार्यश्री की पलकें उठी और अधरों पर मोहक मुस्कान लिये देवदुर्लभ आशीर्वाद बरसा दिया लगा कि स्वर्गो की सारी सम्पदा एक पल में ही मिल गई। अल्प आहार के बाद बड़े बाबा की बहु प्रसिद्ध आरती हेतु बाबा के दरबार आ गए पारम्परिक ढोलक और मंजीरों की थाप से तन मन झूमता रहा कब घड़ी की सुइयां उर्ध्व गमन कर गई पता ही न चला बड़े बाबा के दरबार से बाहर आकर नींचे जाने से पहले नवनिर्मित शिखर को प्रणाम कर ही रहा था तब सैकड़ो फुट उतुंग शिखर पर विशाल क्रेनों पर दर्जनों शिल्पकार कड़कड़ाती ठंड में कार्य कर रहे थे स्मरण हो आया बहु प्रचलित वाक्य बड़े बाबा और छोटे बाबा के सभी कार्यों में स्वर्ग के देवताओं की मुख्य भूमिका रहती है और अब तो पूरा भरोसा हो गया कि बड़े बाबा के विशाल शिखर पर स्वर्ग के देव निर्माण कार्य कर रहे है। शब्द भाव संकलन राजेश जैन भिलाई अगर आप भी कुंडलपुर जाके आए हैं, तो अपनी अनुभूति इस पोस्ट कमेन्ट कर अवगत कराए (महामहोत्सव अनुभूतियाँ : आपकी अनुभूति साझा करे हमारे साथ)
  5. बारम्बार नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु बड़े बाबा और छोटे बाबा को🙏🙏🙏🙏🙏
  6. जय हो जय हो जय हो बड़े बाबा की और छोटे बाबा की। बारम्बार नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु बड़े बाबा और छोटे बाबा को🙏🙏🙏🙏🙏
  7. अद्भुत दृश्य। बड़े बाबा और छोटे बाबा के दर्शन का अनुपम दृश्य। कोटि कोटि नमोस्तु 🙏🙏🙏
  8. आचार्य श्री विद्यासागर जी महराज आदिनाथ भगवान के कुंडलपुर में दर्शन करते हुए
  9. तो याद है ना 5 दिसंबर बड़े भाग्य से छोटे बाबा के दर्शन हम ये मौका न चूकेंगे! बड़े बाबा के दर इस सदी के स्वर्णिम अवसर पावन भूमि पर उभरेंगे!! सिद्ध शिला में बैठे भगवन के जिनबिम्ब के करने दर्शन वे कुंडलपुर पहुंचेंगे ! जो भविष्य में स्वयं सिद्ध बन सिद्ध शिला में बैठेंगे !! रविवार को सूर्य मुनिंदा सूर्य की आभा को और कई गुना कर देंगे! जब सूर्य शिरोमणि विद्यासागर जी महाराज बड़े बाबा के दर पहुंचेंगे!! ✍️ पुष्पेन्द्र जैन नैनधरा सागर
  10. अनलॉक अनलॉक अनलॉक *नेमावर अनलॉक* *परम पूज्य गुरुदेव १०८ आचार्य श्री* *विद्यासागर जी महाराज जी के मंगल* आशीर्वाद एवं परम *पूज्य मुनि श्री* *१०८ अक्षय सागर जी महाराज* एवं *परम पूज्य मुनि श्री १०८ संभब सागर* जी महाराज जी के ससंघ सानिध्य मे , *नव निर्मित पंच बालयति एवं त्रिकाल चौबीसी में प्रथम अभिषेक,शांतिधारा एवं पंच बालयति में कलशारोहण एवं ध्वजारोहण का कार्यक्रम दिनांक *24 जून 2021* गुरुवार अभिषेक शांतिधारा एवम् विधान -- प्रातः 7.30 से 9.00 बजे तत्पश्चात मुनि संघ के प्रवचन । भोजन -- 11.00 से 1.00 बजे से कलशारोहन एवम् ध्वजारोहण ,, दोपहर 1.00 बजे से तत्पश्चात मुनि संघ के प्रवचन *श्री रतन लाल जी कवर लाल जी श्री अशोक जी श्रीमती सुशीला जी,,, श्री सुरेश जी श्रीमती शांता जी ,, श्री विमल जी श्रीमती तारिका जी पाटनी आर. के. मार्वल परिवार किशनगढ़ ,,। कलशारोहण ध्वजारोहण पुण्यार्जक परिवार*,,,,, श्री राजा भैया सूरत श्री संजय मैक्स *अध्यक्ष पंचकल्याणक अध्यक्ष सिद्धोदय* श्री राजीव जैन। श्री सुरेश काला *कार्याध्यक्ष। कार्याध्यक्ष**सिद्धोदय पंचकल्याणक. सिद्ध क्षेत्र नेमावार समिति नेमावर* **पारस चैनल पर लाइव प्रसारण* सभी साधर्मी बंधु समय पर पधार कर पुण्यार्जन करें । आवास एवं भोजन की व्यवस्था नेमावर ट्र्स्ट कमेटी की तरफ से निःशुल्क रखी गई है । नमनकर्ता - श्री सिध्दोदय सिद्ध क्षेत्र रेवातट ट्रस्ट नेमावर
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