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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

भगवान् सही कथाकार होते हैं !


संयम स्वर्ण महोत्सव

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चन्द्रगिरि डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में विराजमान आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने कहा की जब व्यक्ति उठता है प्रातः तो ताजगी महसूस करता है सूर्योदय के कारण और सूर्यास्त के समय बेहोशी जैसी लगती है | एक विषयों की नींद है और एक दिन अस्त होने की नींद है | महान पुरुष विपरीत परिस्तिथियों में भी अपने आपको संयत बनाये रखते हैं | तीन घंटे तक हम कोई कार्यक्रम  देखते हैं तो वह याद में बना रहता है | जब स्वाभाव का बोध होता है तो पश्चाताप होता है | हमारी दिशा, दशा भगवान् की भांति हो जायेगी जिस दिन बोध हो जाएगा | दिन और रात की तरह ही जन्म – मरण का सम्बन्ध है | हमारा मन कही न कही से कमजोर रहता है | दुखानुभूती क्षणिक होती है | कथा और गाथा के सही कथाकार भगवान् होते हैं |

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