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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

राने रेडियो


संयम स्वर्ण महोत्सव

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पुज्य आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज ने कहा कि जिस तरह पुराने रेडियो में हम एक स्टेशन लगाते थे और यदि हाथ हिल जाता था तो दूसरा स्टेशन लग जाता था तो गीत की जगह कई अन्य कार्यक्रम सुनाई देने लगता था। क्योंकि स्टेशन की रेंज बदल जाती थी और ये रेंज ऊपर लगे एरियल के माध्यम से मिलती थी ठीक उसी प्रकार हमारे विचार रुपी विभिन्न स्टेशन हैं जो हमारे मस्तिष्क रुपी एरियल के माध्यम से बदलते रहते हैं, अच्छे विचारों वाला स्टेशन यदि लगाना है तो मस्तिष्क को निर्मल बनाना होगा। स्थिरता लाने पर ही हम एक विचारों वाले स्टेशन पर टिकेे रह सकते हैं अन्यथा भटकते रहेंगे फिर हम जैंसे गुरुओं की कुब्बत भी नहीं है कि आपको भटकाव से रोक सकें।

 

उन्होंने कहा कि आजकल की धारणाएं नक़ल पर आधारित होती जा रही हैं इसलिए अक्ल को ठन्डे बस्ते में डाल दिया है। नक़ल से भौतिक परीक्षा तो पास की जा सकती है परंतु जीवन की असल परीक्षा बिना अक्ल के पास नहीं की जा सकती है। आपको यदि पंचकल्याणक के अनुष्ठान की परीक्षा में खरे उतरना है तो पहले अपने आपको इसके लिए मानसिक रूप से तैयार करके स्थिरता लानी होगी। ये पंचकल्याणक आपकी आध्यात्मिक परीक्षा का केंद्र है जिसमें आपको अपना शत प्रतिशत देकर परिणाम को बेहतर बनाना है। अपने मोह को कम करके ही हम जीवन में सार्थक परिणामों की प्राप्ति कर सकते हैं। अपनी क्षमताओं का बेहतर उपयोग ही आपको सही दिशा और दशा प्रदान कर सकते हैं इसलिए अपनी क्षमताओं को बेहतर से बेहतर बनाएं।

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