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Singhai Saurabh Jain Sajag

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  1. मोह मत करो,प्रेम करो। राग और मोह को त्याग, निस्वार्थ प्रेम और वात्सल्य का भाव रखो। इस प्रेम और वात्सल्य के भाव को स्थाई और अटूट बनाये रखो।
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