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1 भूमिका स्वर भावानजली - NandKumar
2 आचार्य श्री के चरण - NandKumar
3 दीक्षा दिवस महोत्सव - NandKumar
4 दीक्षा लिए गुरुवर को - NandKumar
5 आचार्य विद्यासागर का जग - NandKumar
6 चले आओ आचार्य श्री - NandKumar
7 चलते फिरते तीर्थ गुरुवर - NandKumar
8 चलो भव्यजन गुरु दरश - NandKumar
9 दिल कहे रुकजा रुकजा - NandKumar
10 जय जयकार हुआ सतकार हुआ - NandKumar
11 दीक्षा मिलेगी कब मुझे - NandKumar
12 अमृत से भारी वाणी तेरी - NandKumar
13 संसार सिन्धु से पर लगाने वाला - NandKumar
14 भावना की औड के चुनरियाँ - NandKumar
15 चौक पुराओ नगर सजाओ - NandKumar
16 गुरु विनायांजली - NandKumar
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2 Comments

अति सुन्दर भावाभिव्यक्ति।भाई नन्द कुमारजीकी  आवाज़ का कहना ही क्या। आचार्य भगवन का सम्पूर्ण विश्व के लिए अनंत उपकार है। आचार्यश्री के पावन चरणों में कोटि कोटि नमन्। 

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