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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
  • महानात्माओं के जीवन में कुछ ऐसी घटनायें घटती हैं जो असाधारण होती हैं। ये घटनायें विशेष पुण्योदय से ही घटती हैं, कभी-कभी जिस

    वस्तु की हम कल्पना भी नहीं कर सकते वह वस्तु तत्क्षण उपलब्ध हो जाती है। यह सब कार्य महानात्मा के सान्निध्य में ही होता है।

     

    यह प्रसंग उस समय का है जब ब्रह्मचारी विद्याधर जी की दीक्षा आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के करकमलों से सम्पन्न होने जा रही थी। उसके पूर्व विनौरी निकलनी थी, अजमेर शहर में उस समय ढूढने से एक भी हाथी नहीं मिलता था, लेकिन अचानक ही ऐसा अतिशय हुआ कि नगर में एक सर्कस आ गया जिसमें एक साथ 9 हाथी (कहीं कहीं मिलता है 25 हाथी थे) घोड़े, ऊंट आदि उपलब्ध हो गये। उस समय गुरूवर की विनौरी में यह सब हाथी आ गये। यह था गुरूवर की दीक्षा के पूर्व का अतिशय। दूसरा अतिशय भी घटित हुआ दीक्षा के पूर्व भीषण गर्मी में भी मंद-मंद शीतल हवा चली एवं रिमझिम बरसात भी हुई। प्रकृति भी इस चीज की साक्षी है कि आगे चलकर के दीक्षित होने वाले इन मुनिराज से अनेकों भव्य जीवों का कल्याण होगा एवं इनके जीवन में अतिशय घटित होंगे। जो हम सभी को आज वर्तमान में देखने को मिल रहे हैं।


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