Jump to content

Sanyog Jagati

Members
  • Content Count

    81
  • Joined

  • Last visited

My Favorite Songs

Community Reputation

1 Neutral

About Sanyog Jagati

  • Rank
    Advanced Member
  • Birthday 05/12/2001

Personal Information

  • location
    Gourjhamar Sagar m.p

Recent Profile Visitors

The recent visitors block is disabled and is not being shown to other users.

  1. *दमोह 07-06-2019* *ग्रन्थो को सुनने से भी कई गुना लाभ होता है - मुनि श्री विमल सागर जी* *(श्रुतपंचमी पर्व बड़ी धूम धाम से मनाया गया )* दमोह ( मध्यप्रदेश) में *सर्व श्रेष्ठ साधक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आज्ञा अनुवर्ती शिष्य मुनि श्री विमल सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में श्री दिगंबर जैन नन्हे मंदिर दमोह में 7 जून दिन शुक्रवार को *श्रुतपंचमी ज्ञान महामहोत्सव* संपन्न हुआ। जिसमें 2000 वर्ष प्राचीन शास्त्रों की महापूजा हुई। प्रातः देव , शास्त्र , गुरु की शोभायात्रा निकाली गई फिर श्री जी का अभिषेक हुआ श्रुतस्कन्ध का अभिषेक दमोह नगर के इतिहास में प्रथम बार हुआ। बहुत सारी महिलाएं सिर पर शास्त्र रखकर शोभायात्रा मे चल रही थी और बाद में शास्त्र अर्पण भी किया पुरुषो ने भी शास्त्र अर्पण किया षटखंडागम , जयधवला , धवला , महाबंध आदि ग्रंथो की महापूजन हुई शास्त्र लकी ड्रा योजना का ड्रा निकाला गया जिसमे प्रथम , द्वितीय , तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार का चयन हुआ पीतल की धातु में 24×36 साइज में श्रुतस्कन्ध एव आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र का विमोचन सुधीर सिंघई , मनीष मलैया , श्रेयांश सराफ , अंकुश बनवार आशीष गांगरा ,सुनील वेजीटेरियन , संजीव शाकाहारी , प्रवीण (महावीर ट्रांसपोर्ट) , रोहन कौशल आदि ने किया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री विमलसागर जी ने कहा कि यह श्रुत की परंपरा श्री आदिनाथ जी के समय से ज्ञान की धारा के रूप में निरंतर चल रही है।आचार्यो ने सोचा यदि ग्रंथों को लिपिबद्ध नहीं कराएंगे तो यह ज्ञान समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा था श्रुत देवता जयवंत हो। उन्होंने षटखंडागम ग्रंथ का अध्ययन करवाया था। जब ग्रंथों की लेखन की पूर्णता हुई तो उन मुनिराजों और श्रुत की पूजा की गई। हमें भी सौभाग्य प्राप्त हुआ कि गुरुदेव के द्वारा दीक्षा मिली और उसके बाद गुरुदेव के द्वारा षटखंडागम की सातवी पुस्तक को पढ़ने और सुनने का सौभाग्य मिला गुरुजी ने कहा था कि यह महान ग्रन्थ है इसको सुनने से भी असंख्यात गुनी कर्मो की निर्जरा में कारण है। हाथ जोड़कर विनय के साथ सुनते जाओ। कालांतर में सब कुछ आ जाता है। बच्चे से लेकर बूढ़े तक सभी णमोकार मंत्र पढ़ते हैं। यह षटखंडागम ग्रंथ में मंगलाचरण के रूप में है णमोकार मंत्र। यह मंगलाचरण अधूरा नहीं है पूर्ण है। ओंमकार ध्वनि में 11अंग 14 पूर्व द्वादशांग गर्भित होता है। धवला ग्रन्थ में आया है कि दुनिया में यदि कोई संपदा है तो वह है गाय और दूसरा अर्थ है इस दुनिया में यदि कोई अद्वितीय संपदा है तो वह है जिनवाणी। चारो अनुयोगों को मेरा नमस्कार हो। जो इनका पान करता है उसकी सम्यक बुद्धि चलती है। जिसको जन्म के समय णमोकार मंत्र सुनने मिल जाए उसका जीवन सफल हो जाता है। जिसको अंत समय णमोकार मंत्र सुनने मिल जाए उसके कई भव सफल हो जाते हैं। इस जिनवाणी की पूजा भक्ति , विनय देव और गुरु की तरह करना चाहिए। देव शास्त्र गुरु की विनय से तप होता है। जिनवाणी की सुरक्षा का दायित्व आपके और हमारे ऊपर है। घर में एक स्थान जिनवाणी के लिए होना चाहिए आप चाहे तो रजत , स्वर्ण ,ताम्रपत्र , पीतल आदि धातु पर भी जिनवाणी को उत्क्रीण करवा सकते है। यह ताम्रपत्र ग्रन्थ मंदिर में विराजमान करवाएं जिससे हजारों वर्ष तक सुरक्षित रह सकें। यह ताम्रपत्र पंचम काल के अंत तक सुरक्षित रहेंगे। प्रत्येक मंदिर में ग्रंथालय होना चाहिए। जिनको सुनाई भी नहीं देता है लेकिन शास्त्र सभा में बैठते हैं तो वह कहते हैं कानो में कुछ गुंजयमान होता है। उससे मुझे संतोष प्राप्त होता है। कार्यक्रम का संचालन पंडित डॉ. अभिषेक आशीष शास्त्री सगरा ने किया और कमेटी ने उनका सम्मान किया। यह कार्यक्रम शाकाहार उपासना परिसंघ ने आयोजित किया था।पंचायत कमेटी और सकल दिगम्बर जैन समाज का सहयोग रहा। द्रव्य अर्पण करने का सौभाग्य महिला मंडल पलंदी जैन मंदिर को प्राप्त हुआ।
  2. *दमोह 05-06-2019* *शरीर की अपेक्षा आत्मा की चिंता करे - मुनिश्री* दमोह ( मध्यप्रदेश) में *सर्व श्रेष्ठ साधक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के* शिष्य मुनि श्री विमल सागर जी महाराज श्री दिगंबर जैन नन्हे मंदिर में विराजमान है। प्रातः काल आचार्य श्री की पूजन संपन्न हुई।इष्टोपदेश ग्रन्थ पर प्रवचन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री विमलसागर जी महाराज ने कहा कि पूजन करते समय ध्यान रखें उत्साह पूर्वक करें। जो कार्य आत्मा के उपकार के लिए वह शरीर का अपकार करने वाला है। तथा जो शरीर के उपकार के लिए है वह आत्मा का अपकार करने वाला है। जिन जिन कार्यों से आत्मा का उपकार होता है वह करें। खाने-पीने और मौज करने से शरीर को आनंद आता है लेकिन साधना करने से आत्मा को आनंद आता है।चर्चा के दौरान मुनिश्री भावसागर जी ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस पर हम सभी को वृक्ष लगाना चाहिए। एक वृक्ष 100 संतान के बराबर होता है। यदि वृक्ष नहीं लगाएंगे तो आगामी समय में तापमान बढ़ता जाएगा। इससे हम सभी को हानि होगी इसलिए विशेष अवसरों पर वृक्ष अवश्य लगाएं। वृक्ष लगाने से फायदा अधिक है। *वृक्ष देते ज्यादा है , लेते कम है।* आज सीमेंट के वृक्ष गार्डनों में लगाये जा रहे है , जो शोपीस ही रहते है उनसे कुछ प्राप्त नहीं होने वाला है इसलिए पर्यावरण को यदि सुरक्षित रखना है तो वृक्ष जरूर लगाएं। शाकाहार उपासना परिसंघ ने बताया कि श्रुतपंचमी महापर्व की तैयारियां जोरों से चल रही है। 7 जून शुक्रवार को बड़े धूम धाम से यह पर्व मनाया जाएगा।
  3. *दमोह 22-05-2019* *तिलक लगाने से होते है फायदे- मुनिश्री विमलसागर जी महाराज दमोह ( मध्यप्रदेश) इष्टोपदेश ग्रन्थ पर प्रवचन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री विमलसागर जी महाराज ने कहा कि पचास वर्ष के बाद हमें सतर्क रहना चाहिए धार्मिक कार्यो में लगे रहना चाहिए।जितनी आयु है उसका दो तिहाई निकल गया तो सावधान रहना चाहिए। अभी नहीं समझे तो कब समझोगे। प्रारंभ में संताप देने वाले प्राप्त हो जाने पर तृष्णा को बढ़ाने वाले तथा अंत में बहुत कठिनाई से छूटने योग्य विषय भोगो को कौन बुद्धिमान पुरुष बड़ी रुचि से सेवन करता है भाग्य और पुरुषार्थ से सिद्धि होती है। भाग्य के भरोसे बैठने से भी सिद्धि नही होती है ।शाम को मुनिश्री भावसागर जी ने कहा कि तिलक लगाने के कई फायदे है।भौहों के मध्य में आज्ञा चक्र रहता है। मस्तिष्क की क्रियाशीलता और अंतर्मन की संवेदनशीलता में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हो जाती है। तिलक लगाने से मस्तिष्क में शांति और शीतलता का अनुभव होता है तथा बीटाएंडोरफिन और सेराटोनिन नामक रसायनों का स्राव संतुलित मात्रा में होने लगता है। विभिन्न द्रव्यों से बने तिलक की उपयोगिता का और महत्व है। चंदन का तिलक मस्तिष्क में विशेष शीतलता प्रदान करता है। ललाट को वैज्ञानिक पेनियालगलैंड्स कहते हैं। आज्ञा चक्र का मन के साथ तथा ज्ञान के साथ गहरा संबंध है। आज्ञाचक्र के उतेजित होते ही हमें अंतःदर्शन , विवेक , स्मरणशक्ति की बृद्धि और आध्यत्मिकता जागरूकता आदि सहज ही उपलब्ध हो जाते हैं।कमेटी ने बताया कि 24 मई से 7 जून के बीच कार्यक्रम की तैयारियां जोरों से चल रही है। 2जून रविवार को दमोह नगर के इतिहास में प्रथम बार श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म तप मोक्ष कल्याणक पर 170 प्रतिमाओं के ऊपर 240 व्यक्तियों के द्वारा शांतिधारा होगी और दुनिया में सबसे अलग विशेष प्रकार का लाडू अर्पण किया जायेगा।
  4. *दमोह 21-05-2019* *मंदिर के लिए अच्छी वस्तुओं का दान करे जिससे सर्वश्रेष्ठ व्यवस्था हो- मुनिश्री* दमोह ( मध्यप्रदेश) में *सर्व श्रेष्ठ साधक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के* शिष्य मुनि श्री विमल सागर जी महाराज श्री दिगंबर जैन नन्हे मंदिर में विराजमान है। प्रातः काल आचार्य श्री की पूजन संपन्न हुई।इष्टोपदेश ग्रन्थ पर प्रवचन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री विमलसागर जी महाराज ने कहा कि दान करने के लिए तथा अपने सुख प्राप्त करने के लिए जो निर्धन मनुष्य धन को संग्रहीत करता है वह मैं स्नान करूंगा इस विचार से अपने शरीर को कीचड़ से लिप्त करता है। कोड़ी कमाने के लिए यदि कोडी भर भी इज्जत नहीं रहे तो उस धन का क्या औचित्य। जो आप कमा रहे है उसमें से दान करें।अन्याय पूर्वक धन्य नहीं कमाए। तीन लोक के नाथ के लिए सर्वश्रेष्ठ व्यवस्था होनी चाहिए। जो मंदिर के लिए अच्छी वस्तुओं का दान करते हैं वे विशेष पुण्य का अर्जन करते हैं। ऐसे लोगो को धर्म की बागडोर नहीं सौपना चाहिए जो निष्क्रिय है। ऐसे लोगो को बागडोर सोपे जो मंदिर की वस्तुओं में वृद्धि करें। ।शाम को मुनिश्री भावसागर जी ने कहा कि भक्ति जीवन जीने की कला सिखाती है। भक्ति मरण से बचाती है। श्रद्धा और समर्पण लबालब भरा रहता है और वह कभी भयभीत नहीं होता है। सच्चा भक्त किसी भी परीक्षा से गुजरने पर भयभीत नहीं होता है। अंगारा , हवा , तूफान , भूकंप , आदि विपदाओं से कभी नहीं घबराता है। जो भी कार्य करना है तो जुनून से करें *जिद करो दुनिया बदलो* चाहे पढ़ाई हो या लौकिक या धार्मिक कार्य जुनून के साथ करें तो सफलता अवश्य मिलेगी। अपने घाव उसी को दिखाओ जो इलाज कर सके सभी को घाव दिखाओगे तो लोग घाव देखकर कुरेद कुरेद कर बड़े कर देते हैं इसलिए अपनी समस्याएं उसी को बताओ जो कुछ मदद कर सके।
  5. *दमोह 20-05-2019* *भक्ति से मोक्ष का ताला खुलता है - मुनिश्री* दमोह ( मध्यप्रदेश) में *सर्व श्रेष्ठ साधक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के* शिष्य मुनि श्री विमल सागर जी महाराज के सानिध्य में श्री दिगंबर जैन नन्हे मंदिर एवं उमा मिस्त्री की तलैया में 24 मई से 7 जून तक होंगे विशेष आयोजन। प्रातः काल आचार्य श्री की पूजन संपन्न हुई।इष्टोपदेश ग्रन्थ पर प्रवचन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री विमलसागर जी महाराज ने कहा कि छःखंड के अधिपति बनने के बाद भी अपने मन का नहीं होता है। लोभ के कारण भी पतन हो जाता है। समय का व्यतीत होना आयुक्षय और धन वृद्धि का कारण है धन चाहने वाले धनवान पुरुषों को अपने जीवन से भी अधिक धन-इष्ट होता है। शाम को मुनिश्री भावसागर जी ने कहा कि मोक्ष के द्वार पर मोह का ताला लगा हुआ है , भक्ति रूपी चाबी से ही यह ताला खोला जा सकता है। गुणों के प्रति अनुराग भाव होना भक्ति है । इष्ट के प्रति निस्वार्थ प्रेम उमड़ना भक्ति है।आत्मा और परमात्मा के बीच संबंध स्थापित करने वाले सेतु का नाम भक्ति है। कमेटी ने बताया कि 24 मई से 1जून 2019 तक उमा मिस्त्री की तलैया प्रांगण में आचार्य श्री विद्यासागर दयोदय गौशाला के द्वरा आयोजित सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वाधान में ब्रह्मचारी संजीव भैया कटंगी के निर्देशन में श्री सिद्ध चक्र सोलह मंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ संपन्न होगा प्रातः 7 बजे नंन्हे जैन मंदिर से घटयात्रा प्रारम्भ होकर तलैया पहुचेगी , मंडप शुद्धि , पात्र शुद्धि , अभिषेक , शांतिधारा , पूजन , मुनिश्री के प्रवचन , रात्रि में 8 बजे आरती 25 मई से 31मई तक प्रतिदिन प्रातः 6 बजे अभिषेक , शातिंधारा , पूजन , विधान , मुनिश्री के प्रवचन , रात्रि में आरती प्रतिदिन।1जून प्रतिदिन की क्रियाए , हवन एवं शोभायात्रा। 2 जून रविवार श्री शांतिनाथ भगवान का जन्म तप मोक्ष कल्याणक महामस्तकाभिषेक महा शांति धारा निर्वाण लाडू अर्पण के साथ पूजन करके मनाया जायेगा। 3 जून सोमवार को महाकवि आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का समाधि दिवस प्रातः 7 बजे श्री ज्ञान सागर जी की पूजन और मुनि श्री के प्रवचन के साथ मनाया जाएगा। 7जून दिन शुक्रवार को *श्रुतपंचमी महामहोत्सव* संपन्न होगा जिसमें प्रातः 7 बजे देव , शास्त्र , गुरु की शोभायात्रा निकलेगी फिर श्रुतस्कन्ध का अभिषेक दमोह नगर के इतिहास में प्रथम बार होगा 1008 शास्त्र महिलाएं सिर पर रखकर शोभायात्रा मे चलेगी और नंन्हे जैन मंदिर में षटखंडागम आदि ग्रंथो की महापूजन होगी मुनिश्री के प्रवचन होंगे।
  6. *दमोह 17-05-2019* *पीला रंग गुरुकृपा में सहायक होता है - मुनिश्री* दमोह ( मध्यप्रदेश) में *सर्व श्रेष्ठ साधक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के* शिष्य मुनि श्री विमल सागर जी महाराज श्री दिगंबर जैन नन्हे मंदिर दमोह में विराजमान है। प्रातः काल आचार्य श्री की पूजन संपन्न हुई।इष्टोपदेश ग्रन्थ पर प्रवचन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री विमलसागर जी महाराज ने कहा कि यह संसारी प्राणी इस संसार समुद्र में अज्ञान के कारण अनादि काल से राग-द्वेष रूपी दो लंबी डोरियों के खींचने रूप कार्य से अर्थात घुमाई जाती हुई मथानी की तरह घूम रहा है। शाम को मुनिश्री भावसागर जी ने कहा कि मनुष्य जैसे वस्त्र पहनता है वैसा ही उसका व्यक्तित्व दिखता है।रंगों का व्यक्ति के जीवन से अटूट संबंध है।व्यक्ति के स्वभाव , मनःस्थिति , शरीर और आत्मा पर इनका गहरा प्रभाव पड़ता है।काला रंग हिंसा और क्रुरता के विचार उत्पन्न करता है। पीला रंग क्रोध को कम करता है।पीला रंग गुरु का होता है इस का ध्यान करने से गुरुकृपा बनी रहती है।सफ़ेद रंग निर्मलता , क्षमा , त्याग , और विकार रहितता , उत्पन्न करता है। कमेटी ने बताया कि 19 मई रविवार को प्रातः 6:30 बजे दमोह की सभी पाठशालाओ के बच्चो को सामूहिक पूजन मुनिश्री के सानिध्य में करवाई जाएगी।महावीर जयंती के पुरुस्कारों का वितरण भी होगा। कमेटी ने बताया कि 7 जून दिन शुक्रवार को *श्रुतपंचमी महामहोत्सव* संपन्न होगा जिसमें प्रातः 7 बजे देव , शास्त्र , गुरु की शोभायात्रा निकलेगी फिर श्रुतस्कन्ध का अभिषेक दमोह नगर के इतिहास में प्रथम बार होगा 1008 शास्त्र महिलाएं सिर पर रखकर शोभायात्रा मे चलेगी और नंन्हे जैन मंदिर में षटखंडागम आदि ग्रंथो की महापूजन होगी मुनिश्री के प्रवचन होंगे।
  7. 🌿🌿 *श्रुतपंचमी महामहोत्सव 07/06/2019 शुक्रवार , दमोह*🌿🌿 *आशीर्वाद : -* *बाल बह्मचारी संघ नायक आचार्य श्री108 विद्यासागर जी महाराज सानिध्य : - मुनिश्री विमलसागर जी , मुनिश्री अनंतसागर जी , मुनिश्री धर्मसागर जी , मुनिश्री अचलसागर जी , मुनिश्री भावसागर जी* *मांगलिक कार्यक्रम* दिनांक 07 जून शुक्रवार प्रातः 7 बजे नन्हे जैन मंदिर से देव , शास्त्र , गुरु की दमोह नगर के इतिहास में प्रथम बार शोभायात्रा इसके पश्चात नन्हे जैन मंदिर में मंगलाचरण चित्रअनावरण दीप प्रज्जवलन श्रुतस्कन्ध यंत्र का महाभिषेक(प्रथम बार) षटखंडागम ग्रंथो की महापूजन , 1008 शास्त्र अर्पण सांस्कृतिक कार्यक्रम मुनिश्री के प्रवचन *शास्त्र अर्पण लकी ड्रा योजना* 1100/- की राशि में 1008 लोगो के द्वारा शास्त्र अर्पण किया जायेगा और इनमें से प्रथम द्वितीय तृतीय सांत्वना पुरूस्कार का चयन होगा। सभी पहले से अपने नाम लिखवा दे। लकी ड्रा 07 जून 2019 को 9 बजे संपन्न होगा। *🔶🔶अछार बनाओ प्रतियोगिता🔶🔶* *🔰🔰शास्त्र सवारों प्रतियोगिता भी होगी🔰🔰* 📯इस महामहोत्सव में आप सपरिवार , इष्टमित्रों सहित आमंत्रित है📯 🙏🙏 *आप आएंगे तो कुछ नया पाएंगे , नहीं तो पछतायेंगे* 🙏🙏 *कार्यक्रम स्थल 😘 श्री 1008 पारसनाथ दिगम्बर जैन नन्हे मंदिर दमोह (म.प्र.) *निवेदक* सकल दिगम्बर जैन समाज,दमोह (म.प्र.) *आयोजक* शाकाहार उपासना परिसंघ दमोह (म.प्र.) *संपर्क सूत्र* : 7415664266 , 9406558632 ,9131360671 , 8871443900 , 9644288334
  8. *दमोह 14-05-2019* *तनाव से मुक्ति के लिए ध्यान आवश्यक है - मुनिश्री विमलसागर जी* दमोह ( मध्यप्रदेश) में *सर्व श्रेष्ठ साधक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के* शिष्य मुनि श्री विमल सागर जी महाराज श्री दिगंबर जैन नन्हे मंदिर दमोह में विराजमान है। प्रातः काल आचार्य श्री की पूजन संपन्न हुई।इष्टोपदेश ग्रन्थ पर प्रवचन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री विमलसागर जी महाराज ने कहा कि धर्म की महिमा अपरंपार है। यह ग्रंथ अध्यात्म ग्रंथ है इसको पढ़ने से जीवन अच्छा बन जाता है। शाम को धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री भावसागर जी ने कहा कि योग का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण योगदान है। ज्ञार्नाणव ग्रंथ में योग , प्राणायाम के बारे में विस्तार से वर्णन है। तनाव से मुक्ति का उपाय ध्यान है , योग है। साधु एकांत में ध्यान लगाते हैं नदी , गुफा , पर्वत , तीर्थक्षेत्रों पर जहॉ शांति होती है। मन चंचल होता है इस को स्थिर करने के लिए एकांत आवश्यक है। आचार्य श्री पूज्यपाद स्वामी जी ने शांति भक्ति में कहा है कि विद्या , औषधि , मंत्र , जल , हवन , आदि के द्वारा भी चिकित्सा होती है। बीमारियां आती नहीं है हमारे द्वारा बुलाई जाती हैं इसका कारण है रात्रि में 2 - 3 बजे तक लोग सोते नहीं है और प्रातः काल जल्दी उठ नहीं पाते हैं इसलिए बीमारियां घेर लेती है। व्यक्ति समय से सो जाएं और प्रातः काल जल्दी उठ जाए तो प्रातः काल शुद्ध ऑक्सीजन मिलने से उसका शरीर स्वस्थ रहता है।
  9. *दमोह 13-05-2019* *बुरे विचारों से नेगेटिव एनर्जी आने से होती है बीमारिया - मुनिश्री* दमोह ( मध्यप्रदेश) में *सर्व श्रेष्ठ साधक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के* शिष्य मुनि श्री विमल सागर जी महाराज श्री दिगंबर जैन नन्हे मंदिर दमोह में विराजमान है। प्रातः काल आचार्य श्री की पूजन संपन्न हुई।इष्टोपदेश ग्रन्थ पर प्रवचन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री विमलसागर जी महाराज ने कहा कि देवो का वैभव प्राप्त होता है जो यहाँ अच्छे कार्य करता है। शाम को धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री भावसागर जी ने कहा कि मैडिटेशन के माध्यम से हम स्वस्थ हो सकते है।सबसे ज्यादा नेगेटिव एनर्जी हमारे बुरे विचारों से आती है।हम 24 घंटे सभी के बारे में बुरा सोचते रहते है , बोलते रहते है , बुरा करते रहते है।हम अच्छा सोचेगे तो पॉजिटिव एनर्जी आएगी।आज आत्महत्या के विचार करनेवालो की संख्या ज्यादा बड़ रही है। कोई बच्चा परीक्षा में नंबर कम लाता है तो सभी उसपर टूट पड़ते है , इससे वह आत्महत्या जैसा गलत कदम उठाकर मनुष्य जीवन का सही उपयोग नहीं कर पाता है।बच्चो को प्रोत्साहन दे , पुरुस्कार दे , उनको मार्गदर्शन दे , प्रेरणा दे। उनकी अच्छी भावना बनाए।उनके लिए पॉजिटिव वातावरण बनाए , जिससे वह अच्छे नंबर ला सके और उनकी नेगेटिव भावनाये दूर हो सके।सबसे ज्यादा टी.बी. और मोबाइल के माध्यम से नेगेटिव एनर्जी आती है।पॉजिटिव एनर्जी के लिए ध्यान , योग , प्राणायाम करे।इससे हम सुख शांति प्राप्त कर सकते है और तनाव मुक्त रह सकते है।
  10. *दमोह 12-05-2019* *गुरुकथा नाटिका की ऐतिहासिक प्रस्तुति हुई* दमोह ( मध्यप्रदेश) में *सर्व श्रेष्ठ साधक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के* शिष्य मुनि श्री विमल सागर महाराज श्री दिगंबर जैन नन्हे मंदिर दमोह में विराजमान है। प्रातः काल मुनिश्री भावसागर जी के निर्देशन में पाठशाला के बच्चो के द्वारा अभिषेक शांतिधारा पूजन एवं आचार्य श्री की पूजन संपन्न हुई।इष्टोपदेश ग्रन्थ पर प्रवचन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री विमलसागर जी महाराज ने कहा कि आज बच्चों में देखा देखी फैशन चल रही है। वस्त्र आदि देखा देखी पहनते हैं। हमें पश्चिमी सभ्यता से नहीं चलना है भारतीय संस्कृति की मर्यादा के अनुसार हमें अपना रहन-सहन रखना है। शाम को धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री भावसागर जी ने कहा कि घर में 60 वर्ष के बाद अपना जीवन व्यवस्थित कर लेना चाहिए। 11 मई को रात्रि में11 बजे तक उमा मिस्त्री की तलैया में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के जीवन पर आधारित राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त नाटिका *गुरुकथा* जिस का साउंड मुंबई में तैयार हुआ था। जिसका लेखन आर्यिका श्री पूर्ण मति माता जी ने किया है इसमें गुरुभक्त मंडल शहपुरा भिटौनी के कलाकारों की प्रस्तुति रही।इसका संचालन शुभांशु जैन शहपुरा ने किया।हजारो दर्शको ने इस नाटिका को देखा और भाव विभोर हो गए।
  11. *दमोह 11-05-2019* *पूरा देश पूर्णायु को प्राप्त करे- मुनिश्री* (मुनिदीक्षा दिवस पर हुए कार्यक्रम) *(गुरुदेव की कृपा से कैंसर भी कैंसिल हो गया कई लोगो के रोग ठीक हुए)* दमोह ( मध्यप्रदेश) में *सर्व श्रेष्ठ साधक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के* शिष्य मुनि श्री विमल सागर जी महाराज के सानिध्य में श्री दिगंबर जैन नन्हे मंदिर दमोह में प्रातः काल मुनिश्री विमलसागर जी मुनिश्री अनंतसागर जी मुनिश्री धर्मसागर जी का 21वाँ मुनिदीक्षा दिवस बड़ी धूम धाम से मनाया गया चित्र अनावरण दीप्रज्वलंन पाद प्रछालन शास्त्र अर्पण आचार्य श्री की महापूजन हुई कुंडलपुर के बड़े बाबा के नए मोमेंटो का विमोचन हुआ। शहपुरा भिटौनी के भक्तों ने छत्र अर्पण किया। मंच संचालन शुभांशु जैन शहपुरा ने किया।प्रवचन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री विमलसागर जी महाराज ने कहा कि ऐसी ताली बजाओ कि रोग मिट जाए ऐसा नमन करो कि आचार्य श्री की छवि दिख जाए आचार्य श्री कुंडलपुर आ जाए। हम लोगों को गुरुदेव ने घर से बुलाया था कुंडलपुर में बड़े बाबा छोटे बाबा के चरणों में हम लोगों की ड्रेस चेंज हुई थी। सिद्ध क्षेत्र नेमावर में पहुंचकर दीक्षा हुई थी। इस शरीर का दिन रात पोषण करते रहो फिर भी रोग उत्पन्न होते रहते हैं।इसको पुष्ट भी करते रहोगे तो भी यह साथ नहीं देगा। हमारा शरीर स्वस्थ तो नहीं रहता था लेकिन जब वास्तविकता जानी तो परिवर्तन आया। आज के दिन 23 मुनिराजो ने दीक्षा ली थी। गुरुदेव महाराज वैद्य है। गुरुदेव का आशीर्वाद आया अस्वस्थ होने पर भी आज मंच पर आ गया। महावीर जयंती और दीक्षा दिवस पर मौसम ठंडा हो गया। आज के दिन गुरुदेव के द्वारा दूसरा जन्म हुआ था। गुरुदेव सब कुछ देने वाले हैं हमारे ऊपर गुरुदेव के बहुत उपकार है। मुनिश्री ने अनेक संस्मरण सुनाए। *गुरुदेव भारतवर्ष की उन्नति में लगे हैं*। गुरुओं के वचन ही औषधि होते है। गुरुदेव तीर्थंकर जैसे महान वैद्यराज मिले। *गुरुदेव के आशीर्वाद से कई लोगों के रोग ठीक हो जाते हैं। गुरुदेव की कृपा से कैंसर भी कैंसिल हो गया। गुरुदेव की भावना है कि पूरा देश पूर्णायु को प्राप्त हो।* कुछ लोग कहते हैं कि आचार्य श्री को सिर्फ धर्म का ही उपदेश देना चाहिए। लेकिन आचार्यो ने चारों पुरुषार्थ का उपदेश देने को कहा है। अर्थपुरुषार्थ का उपदेश सही-सही नहीं दिया जाएगा तो तुम्हारा जीवन व्यर्थ हो जाएगा। *खोटे व्यापारो से बचाने के लिए अर्थ पुरुषार्थ का उपदेश देते है।* गुरुदेव भविष्य के तीर्थंकर के रूप में जरूर जन्म लेंगे। *एक व्यक्ति ने अपने सीने पर वंदे विद्यासागरंम लिखकर रोग ठीक कर लिया।* शाम को धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री भावसागर जी ने कहा कि मुनि दीक्षा दिवस हमें बड़े उत्साह से मनाना चाहिए। इस कार्यक्रम में दिगंबर जैन पंचायत कमेटी , समस्त मंदिर कमेटी , शाकाहार उपासना परिसंघ , आचार्य श्री विद्यासागर दयोदय गौशाला , समस्त महिला मंडल , समस्त बालिका मंडल , समस्त पाठशाला परिवार , समस्त युवा मंडल आदि का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।ललितपुर , शहपुरा भिटौनी , गौरझामर , देवरी , खितौला , अभाना ,आदि अनेको स्थानों से आकर सभी ने भक्ति की ।
  12. (संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की) 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 ✍🏻✍🏻शुभांशु जैन शहपुरा ज्ञानोदय छंद स्थापना आँगन मन का सूना गुरुवर,मैंने तुम्हें बुलाया है भक्ति भाव से देते निमंत्रण,श्रद्धा चौक पुराया है रागद्वेष का मर्दन करके, कषायें मैंने बुहारी है मन वेदी पर आन विराजो,इतनी अरज हमारी है ऊँ ह्रीं आचार्य श्री विद्यासागर मुनीन्द्र!अत्र अवतर अवतर संवौषट। अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः स्थापनं।अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट सन्निनिधिकरणम जन्म जरा मृत्यु से गुरुवर,हम इतने घबराये है चरणों का प्रक्षालन करने,भक्त नयन भर लाये है विद्यासागर संत,विमल है अनंत गुण के धारी है। अचल भाव शुभ धर्म दिवाकर,अतुलनीय सुखकारी हैं। ऊँ ह्रीं श्री 108 आचार्य विद्यासागर मुनीन्द्राय जन्मजरा मृत्यु विनाशनाय जलं निर्वपामीति स्वाहा पाप ताप से तपता चेतन,किंचित सुख ना पाते है दर्श मात्र कर लेने से गुरु,शीतलता पा जाते है विद्यासागर संत विमल है,अनंत गुण के धारी है। अचल भाव शुभ धर्म दिवाकर,अतुलनीय सुखकारी हैं। ऊँ ह्रीं श्री 108 आचार्य विद्यासागर मुनीन्द्राय संसार ताप विनाशनाय चन्दनम निर्वपामीति स्वाहा अक्षय निधि को पाना है पर,मैं निज से अनजान रहा देख आपकी कठिन तपस्या,अविनाशी का ध्यान लहा विद्यासागर संत,विमल है अनंत गुण के धारी है। अचल भाव शुभ धर्म दिवाकर,अतुलनीय सुखकारी हैं। ऊँ ह्रीं श्री 108 आचार्य विद्यासागर मुनीन्द्राय अक्षयपद प्राप्तये अक्षतान निर्वपामीति स्वाहा विषय वासना की ज्वाला में,जीवन वृथा गंवाया है। जान आपका शील पराक्रम,काम देव शर्माया है। विद्यासागर संत,विमल है अनंत गुण के धारी है। अचल भाव शुभ धर्म दिवाकर,अतुलनीय सुखकारी हैं। ऊँ ह्रीं श्री 108 आचार्य विद्यासागर मुनीन्द्राय कामबाण विध्वंसनाय पुष्पं निर्वपामीति स्वाहा क्षुधा तृषा बढ़ती ही जाती,तृप्त नही हो पाती है सुनकर तेरी मीठी वाणी,क्षुधा शांत हो जाती है विद्यासागर संत,विमल है अनंत गुण के धारी है। अचल भाव शुभ धर्म दिवाकर,अतुलनीय सुखकारी हैं। ऊँ ह्रीं श्री 108 आचार्य विद्यासागर मुनीन्द्राय क्षुधारोग विनाशनाय नैवेद्यं निर्वपामीति स्वाहा मोह अंध से अंधा होकर,निज को नहि पहचाना है आज आपसे जाना मैंने,केवलज्ञान ठिकाना है विद्यासागर संत,विमल है अनंत गुण के धारी है। अचल भाव शुभ धर्म दिवाकर,अतुलनीय सुखकारी हैं। ऊँ ह्रीं श्री 108 आचार्य विद्यासागर मुनीन्द्राय मोहांधकार विनाशनाय दीपं निर्वपामीति स्वाहा कर्म अग्नि की ज्वाला भभके, हमको बहुत जलाती है आप ध्यान करने से मेरी,मोह अग्नि बुझ जाती है विद्यासागर संत,विमल है अनंत गुण के धारी है। अचल भाव शुभ धर्म दिवाकर,अतुलनीय सुखकारी हैं। ऊँ ह्रीं श्री 108 आचार्य विद्यासागर मुनीन्द्राय अष्टकर्म दहनाय धूपं निर्वपामीति स्वाहा नाम मोक्षफल ज्ञात मुझे है,सिद्ध स्वरूप न जाना है चरण छाँव जो मिली आपकी,उसे शिवालय माना है विद्यासागर संत,विमल है अनंत गुण के धारी है। अचल भाव शुभ धर्म दिवाकर,अतुलनीय सुखकारी हैं। ऊँ ह्रीं श्री 108 आचार्य विद्यासागर मुनीन्द्राय मोक्षफल प्राप्तये फलं निर्वपामीति स्वाहा कैसे भेंट चढ़ाऊँ तुमको,कुछ भी मेरे पास नही सांसे अर्पित भक्त समर्पित,तुम बिन मेरा कोई नही विद्यासागर संत,विमल है अनंत गुण के धारी है। अचल भाव शुभ धर्म दिवाकर,अतुलनीय सुखकारी हैं। ऊँ ह्रीं श्री 108 आचार्य विद्यासागर मुनीन्द्राय अनर्घ्यपद प्राप्तये अर्घ निर्वपामीति स्वाहा जयमाला दोहा विद्यासागर संत है,संतो के सरताज विमल गुणों से पूर्ण है अनंत धर्म जहाज शिरोमणि जिन सूर्य है,अचल मेरु समजान अतुलनीय चर्या रही,शुद्ध भाव पर ध्यान कर्म मलो से लड़ते गुरु हैं ,सिद्धदशा पा जाने को रागद्वेष का मल धोडाला, शुद्धात्म रस पाने को पग पग पथ पर बढ़ते जाते,वसुविधि कर्म नशाने को करते लाखो प्रणाम गुरुवर,विमल सुगुण अपनाने को शब्द लयो का ज्ञान नही है कैसे तेरे गुण गाँऊं महिमा अंनत रवि के जैसी,दीपक कैसे दिखलाऊँ अनंत गुणधारी तुम भगवन,अनंत सुख अभिलाषी हो यही भावना अनंत है मेरी ,सिद्ध लोक के वासी हो धर्म शिरोमणि तुम हो गुरुवर, धर्मध्वजा फैराते हो धर्म दीप को सतत जलाकर,तामस दूर भगाते हो निज चेतन धर्मों को जाना,उस पर चलकर दिखलाया धर्म दिवाकर बनकर तुमने,सारे जग को चमकाया अचल मेरु सी चर्या है तव कर्म डिगा ना पाते है दृढ संकल्पी गुरु के आगे ,सब बौने हो जाते है ज्ञान ध्यान तप तेज को लखकर,सुर भी शीश झुकाते है अचल मेरु सम दृढतर बनने चरणन दौड़े आते है अतुलनीय चारित्र आपका नही किसी से तुलना हो सारी सृष्टि फीकी पड़ती ,नही किसी से उपमा हो भाव अधिक है ,शब्द भी बौने कैसे तुमको बतलाऊँ सच मे अतुल हो भगवन मेरे हार मान चुप हो जाऊं भाव शुद्ध है विशुद्ध चर्या ,जिन आगम पर चलते हो शांत स्वभावी सौम्य विभासी ,तीर्थंकर सम लगते हो भाव प्रभाव तुम्हारा गुरुवर सारे जग से न्यारा है तुम शुभांशुसे हे गुरु प्रभुवर चमका भाग्य हमारा है ऊँ ह्रीं श्री 108 आचार्य विद्यासागर मुनीन्द्राय अनर्घ्यपद प्राप्तये पूर्णार्घ निर्वपामीति स्वाहा दोहा विद्यासागर सूरी के शिष्य रहे शुभ भाव विमल अनंत व धर्म मुनि अचल अतुल मुनिराय ।।पुष्पांजलि क्षिपेत।।
  13. *दमोह 07-05-2019* *किये गए पाप दान के माध्यम से धुल जाते है - मुनिश्री* (अक्षय तृतीया पर दान की महिमा बताई गई) दमोह ( मध्यप्रदेश) में *सर्व श्रेष्ठ साधक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के* शिष्य मुनि श्री विमल सागर जी महाराज श्री दिगंबर जैन नन्हे मंदिर दमोह में विराजमान है प्रातः अभिषेक शांतिधारा श्री आदिनाथ जी की पूजन हुई आचार्य श्री की पूजन करवाई गई।राजा श्रेयांश बनने का सौभाग्य श्रेयांश सराफ को मिला राजा सोम गांगरा को प्राप्त हुआ अंकुश जैन ने इक्षुरस वितरण कार्य में सहयोग किया लगभग 2000 लोगो को इक्षुरस वितरण किया गया। प्रवचन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री विमलसागर जी महाराज ने कहा कि श्री आदिनाथ भगवान तो 6 माह तक साधना में लीन हो गए थे।यह वीरों की चर्या है। इस पद के साथ अच्छे कार्य ही अच्छे लगते हैं। 6 माह बाद आहार चर्या को निकलते हैं लेकिन कोई उनकी आहार चर्या करवाने में समर्थ नहीं हुआ था। दान की विधि कोई नहीं जानता था। कोई उपदेश देने वाला भी नहीं था। आदिनाथ भगवान का लाभ अंतराय कर्म का उदय था श्रावको का दान अंतराय कर्म का उदय था। जिन्होंने पूर्व भव में आहार दान दिया था ऐसे राजा श्रेयांश और राजा सोम ने स्वप्न में देखा और प्रातः काल पड़गाहन किया। जो दान आदि नहीं करता है वह अपने जीवन को व्यर्थ गंवा देता है। गृहस्थ की रक्षा श्रमण से होती है और श्रमण की रक्षा गृहस्थ से होती है। एक दूसरे के पूरक बनो। *अपने ही धन का दान दिया जाता है* और अपनी ही वस्तु का दान दिया जाता है। जो दान की विधि नहीं जानता है वह पापो को कैसे काटेगा।24 घंटे जीवो की जो विराधना होती है और किए गए पाप दान के माध्यम से धूल जाते है। दान पूजा ऐसा साबुन - जल है जिससे पाप धुल जाते हैं। कंजूस हमेशा बहाना बनाता है दान के समय। जब दूसरे दान देते हैं तो कंजूस व्यक्ति जलता रहता है। कंजूस व्यक्ति जोड़-जोड़ कर धन रख जाता है और सोचता है कि साथ लेकर जाऊं लेकिन धन की चोरी हो जाती है।पूर्व के कंजूसी के संस्कार है तो आप धन को (पुण्य के रूप में) लेकर जाएं। दान देने से धन असंख्यात गुणा वृद्धि को प्राप्त होता है। आहार दान संसार के सर्वश्रेष्ठ सुख देता है। इक्षुरस का दान दिया था। जो दान के लिए पुरुषार्थ करता है वह तप करता है। किसी अतिथि के लिए वह द्रव्य लग जाए ऐसा भाव दाता का होता है।जिस दिन पड़गाहन हो जाता है वह दिन अक्षय हो जाता है इसी कारण *अक्षय तृतीया* प्रसिद्ध हो गई।कमेटी के लोगो ने बताया कि दमोह की सम्स्त पाठशाला के बच्चो की सामूहिक पूजन एवं महावीर जयंती पुरुस्कार वितरण 12 मई रविवार को प्रातः7 बजे नंन्हे जैन मंदिर में होंगे।
  14. *दमोह 06-05-2019* *अक्षयतृतीया मनाई जाएगी* दमोह ( मध्यप्रदेश) में *सर्व श्रेष्ठ साधक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के* शिष्य मुनि श्री विमल सागर जी महाराज श्री दिगंबर जैन नन्हे मंदिर दमोह में विराजमान है आचार्य श्री की पूजन करवाई गई इष्टोपदेश ग्रंथ पर प्रवचन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री विमलसागर जी महाराज ने कहा कि ध्यान करने से विशेष उर्जा मिलती है।मन को बार- बार ले जाने के ही ध्यान की साधना होती है।शाम को मुनिश्री भावसागर जी ने कहा कि मंदिर के शिखर यदि साफ़ नहीं होते है तो बहुत सी बाधाएं आती है। इसलिए मंदिर की वेदी , शिखर , आदि स्वच्छ रखे। *मंदिर स्वच्छता अभियान* चलाना चाहिए।कमेटी के लोगो ने बताया कि 7 मई को अक्षय तृतीया पर प्रातः 7 बजे अभिषेक , महाशान्तिधारा , श्री आदिनाथ जी पूजन , मुनिश्री के प्रवचन आहार दान के पश्चात इक्षुरस का नगरवासियो को वितरण सभी कार्यक्रम नन्हे जैन मंदिर में आयोजित होंगे। *अक्षय तृतीया का महत्त्व* इस दिन जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान को छः माह बाद आहार प्राप्त हुआ था।राजा श्रेयांश और राजा सोम ने पड़गाहन करके इक्षुरस का आहार कराया था ।
  15. *दमोह 04-05-2019* *कटे फटे वस्त्र नेगेटिव एनर्जी देते है - मुनिश्री* दमोह ( मध्यप्रदेश) में *सर्व श्रेष्ठ साधक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के* शिष्य मुनि श्री विमल सागर जी महाराज ससंघ श्री दिगंबर जैन नन्हे मंदिर दमोह में विराजमान है प्रातः काल आचार्य श्री की पूजन हुई।इष्टोपदेश ग्रंथ पर प्रवचन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री विमलसागर जी महाराज ने कहा कि हमेशा इच्छाए होती रहती है गाड़ी , दुकान , मकान आदि की अपने जीवन में जब तक व्रतों को अंगीकार नहीं करोगे कल्याण होने वाला नहीं है। शाम को मुनिश्री भावसागर जी ने कहा कि आज आधुनिकता की दौड में हम भारतीय संस्कृति को भूलते जा रहे है।ग्रंथो में लिखा है कि कटे फटे वस्त्र अमंगल होते है और नेगेटिव एनर्जी देते है। मंदिर में भड़कीले वस्त्र , काले वस्त्र , आदि पहनकर नहीं आना चाहिए। पुरुषों के लिए धोती पहनकर पूजन करने का विधान है। धोती अखंड वस्त्र होता है मांगलिक कार्यो में धोती पहनते है तो शुभ होता है। कमेटी ने जानकारी दी कि 7 मई मंगलवार को अक्षयतृतीया पर इक्षु रस वितरण किया जायेगा।11 मई शनिवार को मुनिश्री विमलसागर जी मुनिश्री अनंतसागर जी मुनिश्री धर्मसागर जी महाराज का 21 वा मुनिदीक्षा दिवस मनाया जायेगा।प्रातः 8 बजे आचार्य। श्री की महापूजन ( अनूठे तरीके से ) मुनिश्री के प्रवचन सांस्कृतिक कार्यक्रम रात्रि में 8 बजे *गुरुगाथा* राष्टीय ख्याति प्राप्त नाटिका शहपुरा के विशेष कलाकारों के द्वारा प्रस्तुत की जायेगी।
×
×
  • Create New...