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Sanyog Jagati

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About Sanyog Jagati

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  • Birthday 05/12/2001

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    Gourjhamar Sagar m.p

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  1. बांदरी 11-1-2019 *धार्मिक कार्यों में सहयोग करें*- *मुनिश्री* बांदरी जिला सागर( मध्यप्रदेश) मे सर्व श्रेष्ठ साधक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य *मुनि श्री विमल सागर जी महाराज( ससंघ) एवम आर्यिका श्री अनंत मति माताजी ( ससंघ)22 आर्यिकाओं के सानिध्य मे आचार्य श्री की पूजन हुई । आर्यिका श्री संवेग मति माताजी ने अपने उद्बोधन में अपने गुरु का गुणगान किया और उन्होंने बताया कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की चर्या हमेशा उत्कृष्ट रही है मुनि श्री भावसागर जी ने कहा कि यहां पर पंचकल्याणक होने वाले हैं आप लोगों को तन मन धन से जुट जाना है । यह किसी एक व्यक्ति का कार्य नहीं है पूरी समाज को मिलकर यह कार्य करना है आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का भी आगमन होगा, हमें पूर्ण विश्वास है ।मंदिर में छत्र, चमर ,भामंडल एवं मंदिर के पूजन के पात्र अच्छी धातु के होना चाहिए। मंदिर के कार्यों में सभी को सहयोग करना चाहिए। यह पंचकल्याणक ऐतिहासिक होगा।जो धार्मिक कार्यों में विघ्न डालता है उसको बहुत सारी परेशानियां होती हैं। 10 जनवरी को खुरई में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के दर्शनार्थ पंचकल्याणक के सभी पात्र पहुंचे आचार्य श्री ने प्रसन्नता पूर्वक आशीर्वाद दिया और बांदरी बालों की सराहना की ।
  2. बांदरी 9-1-2019 *पंचकल्याणक के पात्रों का चयन हुआ* बांदरी जिला सागर( मध्यप्रदेश) मे सर्व श्रेष्ठ साधक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री विमल सागर जी महाराज (ससंघ ) एवम आर्यिका श्री अनंत मति माताजी (ससंघ) के सानिध्य मे आचार्य श्री की पूजन हुई आर्यिका श्री निर्मल मति माताजी ने अपने उद्बोधन में अपने गुरु का गुणगान किया एवं मुनि श्री अचल सागर जी महाराज ने संस्कारों के बारे में विशेष रूप से बताया और दोपहर में पात्रों का चयन श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर बांदरी में संपन्न हुआ संगीत की प्रस्तुति नीलेश जैन बांदरी ने दी भगवान के *माता पिता* बनने का सौभाग्य श्रीमती ममता जैन ऋषभ जैन बांदरी बालों को प्राप्त हुआ *सौधर्में इंद्र* :-सुदीप जैन बांदरी *कुबेर* :- अशोक जैन (अध्यक्ष पंचकल्याणक एवं जैन समाज) *महायज्ञ नायक* डॉ. सनत जैन *राजा श्रेयांस* निर्मल चंद चौधरी *राजा सोम* अनिल चौधरी *बाहुबली* अनिल जैन आकाश जैन को प्राप्त हुआ *ध्वजारोहण* अशोक जैन दीप कमल मेडिकल को प्राप्त हुआ यह कार्यक्रम पुलिस थाना ग्राउंड बांदरी में होगा मुनि श्री विमल सागर जी ने कहा कि बांदरी के पारसनाथ जी के दर्शन किए ह्रदय गदगद हो गया!अब विशाल प्रतिमा विराजमान होगी सारे पात्र महत्वपूर्ण होते हैं अवसर दवे पाव आते हैं और पंख लगा कर उड़ जाते हैं विश्व कल्याण की भावना को लेकर यह पञ्च कल्याणक होना है बांदरी से 108 गांव जुड़े हैं | 20 से 26 जनवरी 2019 तक बांदरी में ऐतिहासिक पंचकल्याणक महोत्सव होने जा रहा है यह पंच कल्याणक पुलिस थाना ग्राउंड में आयोजित होगा यह कार्यक्रम प्रतिष्ठाचार्य ब्रहमचारी विनय भैया बंडा के निर्देशन में होगा।
  3. बांदरी मध्य*अनूठा पंचकल्याणक महोत्सव* 20 से 26 जनवरी 2019 *स्थान* श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर बांदरी जिला सागर (मध्य प्रदेश) *कार्यक्रम स्थल* पुलिस थाना ग्राउंड बांदरी *संभावित सानिध्य* बाल ब्रह्मचारी संघनायक आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज ससंघ *मार्गदर्शन* मुनि श्री 108 विमल सागर जी महाराज ससंघ आर्यिका श्री 105 अनंत मति माताजी ससंघ *प्रतिष्ठाचार्य* प्रतिष्ठा सम्राट प्रतिष्ठा रत्न बाल ब्रह्मचारी विनय भैया जी बंडा *आयोजक* सकल दिगंबर जैन समाज बांदरी जिला सागर (मध्य प्रदेश) *संपर्क सूत्र* 6260835420, 7489460454,8982109769
  4. 31/12/2018 *नव वर्ष इसे कहते है - मुनि श्री* सागर (मध्यप्रदेश )में *सर्वश्रेष्ठ साधक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य* *ज्येष्ठ* *मुनि श्री योग सागर जी* महाराज (ससंघ ) एवं आर्यिका श्री अकंप मति माताजी (ससंघ )आर्यिका भावना मति माताजी (ससंघ) आदि 14 मुनिराज एवं 49 आर्यिकाओ के सानिध्य में धर्म सभा को संबोधित करते हुए *मुनि श्री पवित्र सागर जी* ने कहा कि 2018 ईसवी का अंतिम दिन है कल 2019 ईसवी का प्रथम दिन होगा इसको लोग बड़े उत्साह से मनाते हैं नया क्या है पुराना क्या है यह समझना जरूरी है ।भारतीय संस्कृति के अनुसार नया वर्ष चेत्र सुदी एकम को मनाए। आचार्य श्री कई बार बोलते हैं हमें अपनी संस्कृति इतिहास और पुरातत्व को याद रखना है। भारतीय संस्कृति में सूर्योदय को महत्व दिया गया है। गाय का घी नेगेटिव एनर्जी को दूर करता है। मुनि श्री योग सागर जी ने कहा कि प्रत्येक प्राणी काल के द्वारा परिणमन को प्राप्त हो रहा है। कुंदकुंद स्वामी जी ने ग्रंथों में लिखा है काल के बारे में ।ज्ञानी पुरुष इनसे प्रभावित नहीं होता है। आचार्य श्री जब व्याकरण पढ़ा रहे थे तो बहुत से उदाहरण देते थे। प्रति समय परिणमन हो रहा है नया भी पुराना हो जाता है। पहले हम बालक थे फिर युवा हो गए और वृद्ध हो गए लेकिन आत्मा वही है शरीर बूढ़ा हो रहा है। इसको जो समझता है उसको वैराग्य आता है। जिसको वैराग्य हो जाता है वह चल देता है। मेरे द्वारा यह कार्य हो रहा है ।यह अहंकार है । गुरुओं के मार्गदर्शन से ही घर छूटता है ।वैराग्य की प्राप्ति गुरु वचनों से होती है। आज दोपहर में मुनि संघ मोती नगर शीतल हथकरघा पहुंचे मुनि श्री पूज्य सागर जी ,मुनि श्री विमल सागर जी, मुनि श्री अचल सागर जी, मुनि श्री अतुल सागर जी मुनि श्री भाव सागर जी ने हथकरघा केन्द्र का अवलोकन किया चर्चा के दौरान मुनि श्री पूज्य सागर जी ने बताया कि भारतीय संस्कृति में अरिहंत ,संत महंत का विशेष महत्व है। हथकरघा के माध्यम से आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने मार्गदर्शन दिया तो बेरोजगारी भी दूर हो रही है और हमारी यह पुरानी संस्कृति फिर से जीवित हो रही है
  5. सागर 26/12/2018 *पाजीटिव एनर्जी हो जाती है* - *मुनि श्री* सागर (मध्यप्रदेश )में *सर्वश्रेष्ठ साधक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य* *ज्येष्ठ मुनि श्री 108 योग सागर जी महाराज (ससंघ) आदि 14 मुनिराज एवं 49 आर्यिकाओ के सानिध्य में आचार्य श्री की पूजन हुई एवं धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री संभव सागर जी ने कहा कि* साधर्मी यदि विपत्ति मे है तो हम उसका संकट दूर करे । जो प्रतिदिन अभिषेक पूजन आदि करता है और वह डिग रहा है तो उसकी मदद करें । आर्थिक या स्वास्थ संबंधी संकट भी आता है तो हम एक दूसरे की परेशानियों में सहयोग करेंगे तो वह संभल सकता है । कई लोग मिलकर बड़े से बड़े वजन को उठा लेते हैं ऐसे ही मिलकर मदद करें । द्रव्य पूजन के साथ भाव पूजा भी होना चाहिए । आजीविका के साधन नहीं है किसी के पास उसमें भी मदद करना यह भी महत्वपूर्ण है। हम सुख और दुख दोनों में साथ रहे । मंदिर के बाहर भी हम कैसे धर्म करें यह आचार्यश्री विद्यासागर जी ने बताया था । आचार्य श्री को किसानों की चिंता भी रहती है। प्राणी मात्र का कल्याण कैसे हो उनको चिंता रहती है । आचार्य श्री ने शांति धारा दुग्ध योजना के लिए प्रेरणा दी जिससे लोगों को शुद्ध दूध घी आदि मिलें किसानों को गाय दान देकर उनको आजीविका मिले और हथकरघा योजना के लिए प्रेरणा मार्ग दर्शन दिया । जिससे बेरोजगारी दूर हो और अहिंसक वस्त्र मिले हैं । सरकार आर्थिक विभागों पर ध्यान तो देती है लेकिन जेल पर ध्यान नहीं देती हैं । लेकिन आचार्य श्री विद्यासागर जी जेल पर ध्यान दे रहे हैं यह महत्वपूर्ण है हथकरघा इको फ्रेंडली है फैमिली फ्रेंडली है यूजर फ्रेंडली है हथकरघा में उपयोग अच्छा लगता है प्रार्थना करते समय कैदी इतनी एकाग्रता में लीन थे। मैंने खुद जाकर देखा हे। उनकी नेगेटिव एनर्जी पॉजिटिव में बदल जाती है । प्राचीन काल में पुरुषों की 72 कलाएं होती थी। आज जॉब में कॉलर तो साफ सुथरी रहती है लेकिन मेहनत नहीं होती है । आज जो भी हथकरघा के अलावा बाजार में वस्त्र आ रहे हैं उसमें *मटनटेलो* नाम का चर्बी युक्त पदार्थ है जो अहिंसक नहीं है । आचार्य श्री विद्यासागर जी ने बचपन मे तीसरी कक्षा में स्कूल में रूई और कतली के माध्यम से टोपी बनाई थी । एक व्यक्ति जिसका 20 लाख का पैकेज था उसने विदेशी नौकरी छोड़ दी आचार्य श्री के प्रवचन सुनकर उसने हथकरघा शुरू किया है। .....................................................................
  6. *गौरझामर* *18-11-2018* *24 श्री जी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई एवं विश्व के अद्वितीय मार्बल के मंदिर का हुआ शिलान्यास* गौरझामर जिला सागर (मध्यप्रदेश) में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य *मुनि श्री विमल सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में 25 समोसारण जिन चक्र विधान श्री पारसनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर टीन शेड परिसर गौरझामर में चल रहा था। मुनि श्री विमल सागर जी महाराज ने समोसरण में दिव्य देशना के माध्यम से धर्म का उपदेश दिया और प्रातः काल विश्व का अद्वितीय मार्बल का मंदिर का शिलान्यास हुआ सभी ने तन मन धन से सहयोग किया प्रातः काल अभिषेक,शांति धारा पूजन,विधान संपन्न हुआ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गई जिनचक्र महामंडल विधान का हवन हुआ इस कार्यक्रम में पंचायत कमेटी आचार्य श्री विद्यासागर दिव्यघोष, गौशाला कमेटी, महिला मंडल ,बालिका मंडल, पाठशाला परिवार एवं गुरु भक्त परिवार के सदस्य शामिल रहे। इस कार्यक्रम में बहु संख्या में लोग उपस्थित थे । रात्रि में भोपाल के कलाकारों द्वारा संस्कारो पर नाटिका हुई। कार्यक्रम में प्रतिष्टाचार्य ब्र. नरेश भैया जबलपुर एवं संगीतकार नीलेश जैन बुढ़ार के द्वारा विशेष प्रस्तुति दी गई। 17 नवंबर 2018 शुक्रवार को प्रतिदिन के कार्यक्रम के समापन के साथ विशाल 24श्री जी की भव्य शोभा यात्रा पूरे नगर में निकाली गई। जिसमें 25 विशेष रथ के द्वारा सौधर्म इंद्र,चक्रवर्ती कुबेर,महायज्ञ नायक,इंद्र,इंद्राणी, 3एरावत हाथी और श्री विद्यासागर दिव्य घोस और सारे लोग शामिल रहे। 17 नवंबर को 2018 शनिवार चंद्रप्रभु जैन मंदिर बजरिया नवीन जिनालय का शिलान्यास प्रात: काल हवन के पश्चात 9 बजे संपन्न हुआ यह जैन मंदिर विश्व में अद्वितीय होगा जोकि मार्बल का बनेगा इसमें चतुर्मुखी प्रतिमाएं रहेगी आचार्य श्री विद्यासागर रथ श्री आदिनाथ म्यूजिकल ग्रुप रथ चलेगा एरावत हाथी और रथ भी रहेंगे गौरझामर के इतिहास में इतिहास में प्रथम वार ऐसी शोभा यात्रा निकाली गई शोभा यात्रा श्री पारसनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर से प्रारंभ होकर गुगवारा,हाता,बस स्टैंड,नयापुरा,बजरिया से होते हुए वापस बड़ा मंदिर मैं संपन्न हुई
  7. *गौरझामर* *13-11-2018* *पिच्छिका हमारी यूनिफॉर्म है*- मुनि श्री गौरझामर जिला सागर (मध्यप्रदेश) में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री विमल सागर जी महाराज का* ?*पिच्छिका परिवर्तन*? मुनि श्री 108 विमल सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छिका लेने का सौभाग्य अमित कुमार जैन श्री मति विभा जैन एन डी परिवार को प्राप्त हुआ। मुनि श्री 108 अनंत सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छिका लेने का सौभाग्य श्री प्रभात कुमार जैन श्रीमती रोशनी जैन खामखेड़ा वाले परिवार को प्राप्त हुआ। मुनि श्री 108धर्म सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छिका लेने का सौभाग्य श्रीमान मनीष कुमार घुरा श्रीमती रेखा घुरा, घुरा परिवार को प्राप्त हुआ। मुनि श्री 108 अचल सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छिका लेने का सौभाग्य श्रीमान प्रमेश कुमार जैन श्रीमती वर्षा जैन, चौधरी परिवार को प्राप्त हुआ। मुनि श्री 108 अतुल सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छिका लेने का सौभाग्य श्रीमान चक्रेश कुमार जैन श्रीमती सुनीता जैन, मंडीबामोरा वाले परिवार को प्राप्त हुआ। मुनि श्री 108 भाव सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छिका लेने का सौभाग्य श्रीमान संदीप कुमार जैन (पिंटू) श्रीमती अनामिका जैन (नेहा) अतिवीर जनरल स्टोर परिबार को प्राप्त हुआ । आज प्रातःकाल अभिषेक, शांतिधारा, मुनि श्री के सानिंध्य में हुई। और बाद में पूजन हुई। समवशरण जिनचक्र विधान हुआ। रात्रि में भोपाल के कलाकारों द्वारा संस्कारो पर नाटिका हुई। कार्यक्रम प्रतिष्टाचार्य ब्र. नरेश भैया जबलपुर एवं संगीतकार नीलेश जैन बुढ़ार के निर्देशन में हुआ। मंगलाचरण, चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलित, शास्त्र अर्पण, पाद प्रक्षालन, बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम, मंच संचालन मुनि श्री भाव सागर जी महाराज ने किया।।
  8. * घट यात्रा के साथ समवशरण विधान प्रारंभ*- मुनि श्री दिनांक:9/11/2018 गौरझामर जिला सागर (मध्यप्रदेश) में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री विमल सागर जी महाराज ससंघ के सानिंध्य में 09 नवम्बर को प्रातः काल अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, घट यात्रा के साथ 25 समवशरण विधान प्रारंभ हुआ इस अवसर पर मुनि श्री विमल सागर जी महाराज ने कहा कि ओमकार के ध्यान से सभी कर्म नष्ट हो जाते हैं इस घट यात्रा कार्यक्रम में श्री आदिनाथ म्यूजिकल ग्रुप की प्रस्तुति सराहनीय रही और आचार्य श्री विद्यासागर दिव्य घोष के सदस्यों ने अपनी प्रस्तुति दी सभी पुरुष और महिलाएं पीले वस्त्र पहनकर इस घट यात्रा में चल रही थी कार्यक्रम प्रतिष्टाचार्य ब्र. नरेश भैया जबलपुर एवं संगीतकार नीलेश जैन बुढ़ार के निर्देशन में हुआ। घट यात्रा में हाथी पर बैठने का सौभाग्य मुन्ना चौधरी चक्रवर्ती और अरुण कुमार घुरा सौधर्म इंद्र पवन एनडी कुबेर सनमत हार्डवेयर महायज्ञ नायक ने सौभाग्य प्राप्त किया। ध्वजारोहणकर्ता प्रवेंद्र जैन बिजोरा वालो ने भी सौभाग्य प्राप्त किया
  9. *शरद पूर्णिमा पर विशेष* *आचार्य श्री विद्यासागर जी* *तपस्या में सर्वश्रेष्ठ है* भारत भूमि के प्रखर तपस्वी, चिंतक, कठोर साधक, गौरक्षक, लेखक, महाकवि, राष्ट्रहित चिंतक आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज का आज अवतरण दिवस है आपका जन्म कर्नाटक के बेलगाँम (सदलगा) जिले के ग्राम चिक्कोड़ी में आश्विन शुक्ल पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा), दिनाँक 10 अक्टूबर 1946, विक्रम संवत्‌ २००३ को हुआ था। आपका पूर्व का नाम विद्याधर था। आपको आचार्य श्रेष्ठ महाकवि ज्ञानसागरजी महाराज का शिष्यत्व पाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। विद्यासागरजी में अपने शिष्यों का संवर्धन करने का अभूतपूर्व सामर्थ्य है। उनका बाह्य व्यक्तित्व सरल, सहज, मनोरम है किंतु अंतरंग तपस्या में वे वज्र से कठोर साधक हैं। रात्रि में लकड़ी के पाटे पर विश्राम करते है और ठंड में भी रात्रि में कुछ भी नही ओढ़ते है। कन्नड़ भाषी होते हुए भी विद्यासागरजी ने हिन्दी, संस्कृत, कन्नड़, प्राकृत, बंगला और अँग्रेजी में लेखन किया है। आपने अनेक ग्रंथो का स्वयं ही पद्यानुवाद किया है। आपके द्वारा रचित संसार में सर्वाधिक चर्चित, काव्य प्रतिभा की चरम प्रस्तुति है- ‘मूकमाटी’ महाकाव्य जिसके ऊपर मूकमाटी मीमांसा (भाग 1 2 3) लगभग 283 हिंदी विद्वानों ने समीक्षाएं लिखी है जो भारतीय ज्ञान पीठ से प्रकाशित हो चुकी है इस पर 4 डी. लिट्. 50 पी. एच्. डी. 8एम . फिल. 2 एम. एड. तथा 6 एम. ए. आदि हो चुके है मूक माटी का मराठी, अंग्रेजी, बंगला, कन्नड़, गुजराती, उर्दू , संस्कृत ब्राम्ही लिपि आदि में अनुवाद हुए हैं और हो रहे हैं। राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी के द्वारा रामटेक में 22 सितंबर 2017 को मूक माटी के उर्दू अनुवाद का विमोचन हुआ था पूर्व राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल जी के द्वारा 14 जून 2012 को राष्ट्रपति भवन में 'द साइलेंट अर्थ' मूक माटी के अंग्रेजी अनुवाद का विमोचन हुआ था। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा भोपाल में मूक माटी के 14 अक्टूबर 2016 को भोपाल में गुजराती अनुवाद का विमोचन हुआ था। आचार्य श्री का साहित्य अनेक विश्वविद्यालयों महाविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल हो चुका है कई जगह प्रक्रिया चल रही है जबलपुर अजमेर ट्रेन का नाम *दयोदय एक्सप्रेस* आपके गुरु की रचित कृति के नाम पर हुआ था। *भाग्योदय तीर्थ सागर* में मानव सेवा एवं शिक्षा फार्मेसी कॉलेज नर्सिंग कॉलेज चल रहे है। बीना बारह, मंडला, भोपाल , कुंडलपुर, खजुराहो, मुम्बई, अशोकनगर, जगदलपुर, डिंडोरी में *हथकरघा* चल रहे है। जिसमें अहिंसक पद्धति से वस्त्र बनाए जा रहे हैं और युवाओं को रोजगार दिया जा रहा है और शांति धारा दुग्ध योजना चल रही है जिसमें 500 से अधिक गायों का पालन करके दूध घी आदि शुद्ध वस्तुओं का उत्पादन हो रहा है जैविक पद्धति से सभी वस्तुओं का उत्पादन होता है आचार्य श्री विद्यासागर शोध संस्थान भोपाल में विभिन्न पदों के लिए कोचिंग मिलती है भारतवर्षीय प्रशासकीय प्रशिक्षण संस्थान जबलपुर में स्थित है जिसमे हजारो युवाओ ने शिक्षण करके प्रसाशन के उच्च पदों को प्राप्त किया है । सुप्रीम कोर्ट से 7 जजों की बेंच से ऐतिहासिक गौ वध पर प्रतिबंध का फैसला हुआ था बैलों की रक्षा एवं रोजगार हेतु दयोदय जहाज का गंज बासौदा विदिशा में वितरण किया गया था मध्य प्रदेश में सरकार द्वारा *आचार्य विद्यासागर जी गौ संवर्धन योजना* भी चल रही है पूरे देश में लगभग 135 गौशालाओ में लाखों पशुओं का संरक्षण हो रहा है आपके दर्शन से पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी बाजपेई वर्तमान राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और अनेक मुख्यमंत्री और अनेकों राज्यपाल सुप्रीम कोर्ट के जज, हाई कोर्ट के जज, आयोग अध्यक्ष एवं विशिष्ट पदों वाले व्यक्तियों से चर्चा के दौरान अनेक अच्छे कार्य हुए हैं आपके दर्शनार्थ हेतु आये राजनैतिक, चिंतक, विचारक, साहित्यकार, शिक्षाविद, न्यायधीश, धर्माचार्य, डॉक्टर, संपादक, समाज सेवी, उद्योगपति, अधिवक्ता, जिलाधीश, पुलिस अधीक्षक, कुलपति आदि ने मार्गदर्शन प्राप्त किया है। आपने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड आदि में बिहार किया है आपने नमक मीठा का सन 1969 से त्याग किया है। चिटाई का त्याग सन 1985 से किया है। वनस्पति फल सब्जी का त्याग 1994 से किया है। 9 निर्जल उपवास लगातार आपने किए थे। आपके द्वारा रूपक कथा काव्य, अध्यात्म, दर्शन व युग चेतना का संगम है। संस्कृति, जन और भूमि की महत्ता को स्थापित करते हुए आचार्यश्री ने इस महाकाव्य के माध्यम से राष्ट्रीय अस्मिता को पुनर्जीवित किया है। उनकी रचनाएँ मात्र कृतियाँ ही नहीं हैं, वे तो अकृत्रिम चैत्यालय हैं। उनके उपदेश, प्रवचन, प्रेरणा और आशीर्वाद से अनेको तीर्थ, मंदिर का निर्माण औषधालय भाग्योदय तीर्थ, अनेको अस्पताल, प्रतिभास्थली, हथकरघा, त्रिकाल चौबीसी आदि की स्थापना कई स्थानों पर हुई है और अनेक जगहों पर निर्माण जारी है। कितने ही विकलांग शिविरों में कृत्रिम अंग, श्रवण यंत्र, बैसाखियाँ, तीन पहिए की साइकलें वितरित की गई हैं। शिविरों के माध्यम से आँख के ऑपरेशन, दवाइयों, चश्मों का निःशुल्क वितरण हुआ है। ‘सर्वोदय तीर्थ’ अमरकंटक में विकलांग निःशुल्क सहायता केंद्र चल रहा है। जीव व पशु दया की भावना से देश के विभिन्न राज्यों में दयोदय गौशालाएँ स्थापित हुई हैं, जहाँ कत्लखाने जा रहे हजारों पशुओं को लाकर संरक्षण दिया जा रहा है। आचार्यजी की भावना है कि पशु मांस निर्यात निरोध का जनजागरण अभियान किसी दल, मजहब या समाज तक सीमित न रहे अपितु इसमें सभी राजनीतिक दल, समाज, धर्माचार्य और व्यक्तियों की सामूहिक भागीदारी रहे। ‘जिन’ उपासना की ओर उन्मुख विद्यासागरजी महाराज तो सांसारिक आडंबरों से विरक्त हैं। जहाँ वे विराजते हैं, वहाँ तथा जहाँ उनके शिष्य होते हैं, वहाँ भी उनका जन्म दिवस उनके समर्थन से नहीं मनाया जाता। तपस्या उनकी जीवन पद्धति, अध्यात्म उनका साध्य, विश्व मंगल उनकी पुनीत कामना तथा सम्यक दृष्टि एवं संयम उनका संदेश है। अपनेंवचनामृतों से जनकल्याण में निरत रहते हुए व साधना की उच्चतर सीढ़ियों पर आरोहण करते हुए आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज समग्र देश में पद-विहार करते हैं। भारत-भूमि का कण-कण तपस्वियों की पदरज से पुनीत हो चुका है। इस युग के तपस्वियों की परंपरा में आचार्यश्री विद्यासागरजी अग्रगण्य हैं। वीतराग परमात्मा बनने के मार्ग पर चलने वाले इस पथिक का प्रत्येक क्षण जागरूक व आध्यात्मिक आनंद से भरपूर होता है। उनका जीवन विविध आयामी है। उनके विशाल व विराट व्यक्तित्व के अनेक पक्ष हैं तथा सम्पूर्ण भारतवर्ष उनकी कर्मस्थली है। पदयात्राएँ करते हुए उन्होंने अनेक मांगलिक संस्थाओं, विद्या केन्द्रों के लिए प्रेरणा व प्रोत्साहन का संचार किया है। उनके आगमन से त्याग, तपस्या व धर्म का सुगंधित समीर प्रवाहित होने लगता है। लोगों में नई प्रेरणा व नए उल्लास का संचरण हो जाता है। असाधारण व्यक्तित्व, कोमल, मधुर और ओजस्वी वाणी व प्रबल आध्यात्मिक शक्ति के कारण सभी वर्ग के लोग आपकी ओर आकर्षित हो जाते हैं। कठोर तपस्वी, दिगम्बर मुद्रा, अनन्त करुणामय हृदय, निर्मल अनाग्रही दृष्टि, तीक्ष्ण मेधा व स्पष्ट वक्ता के रूप में उनके अनुपम व्यक्तित्व के समक्ष व्यक्ति स्वयं नतशिर हो जाते हैं। अल्पवय में ही इनकी आध्यात्मिक अभिरुचि परिलक्षित होने लगी थी। खेलने की उम्र में भी वीतरागी साधुओं की संगति इन्हें प्रिय थी। मानो मुनि दीक्षा के लिए मनोभूमि तैयार हो रही थी। ज्ञानावरणीय कर्म का प्रबल क्षयोपशम था, संयम के प्रति अंत:प्रेरणा तीव्र थी। आचार्यश्री की प्रेरणा से उनके परिवार के छः सदस्यों ने भी जैन साधु के योग्य संन्यास ग्रहण किया। उनके माता-पिता के अतिरिक्त दो छोटी बहनों व दो छोटे भाइयों ने भी आर्यिका एवं मुनिदीक्षा धारण की। आचार्यश्री विद्यासागरजी का बाह्य व्यक्तित्व भी उतना ही मनोरम है, जितना अंतरंग, तपस्या में वे वज्र से कठोर हैं, पर उनके मुक्त हास्य और सौम्य मुखमुद्रा से कुसुम की कोमलता झलकती है। वे आचार्य कुन्दकुन्द और समन्तभद्र की परम्परा को आगे ले जाने वाले आचार्य हैं तथा यशोलिप्सा से अलिप्त व शोर-शराबे से कोसों दूर रहते हैं। शहरों से दूर तीर्थों में एकान्त स्थलों पर चातुर्मास करते हैं। खजुराहो में लगभग 2000 विदेशियो ने मांसाहार, शराब आदि का त्याग किया । आयोजन व आडम्बर से दूर रहने के कारण प्रस्थान की दिशा व समय की घोषणा भी नहीं करते हैं। वे अपने दीक्षार्थी शिष्यों को भी पूर्व घोषणा के बिना ही दीक्षा हेतु तैयार करते हैं। हाथी, घोड़े, पालकी व बैण्ड-बाजों की चकाचौंध से अलग सादे समारोह में दीक्षा का आयोजन करते हैं। इस युग में ऐसे संतों के दर्शन अलभ्य-लाभ है। आचार्यश्री जैसे तपोनिष्ठ व दृढ़संयमी हैं, वैसी ही उनकी शिष्यमण्डली भी है। धर्म के पथ पर उग आई दूब को उखाड़ फेंकने में यह शिष्य-मंडली अवश्य समर्थ होगी। केवल कथनी में धर्मामृत की वर्षा करने वालों की भीड़ के कारण धर्म के क्षेत्र में दुःस्थिति बनी हुई है। आचार्यश्री विद्यासागरजी जैसे संत इस दुःस्थिति में आशा की किरण जगाते हैं। वह अपने बाल भी प्रत्येक 2 माह में अपने हाथों से निकालते है एवं 24 घंटे में एक बार भोजन एवं जल ग्रहण करते है। योगी, साधक, चिन्तक, आचार्य, दार्शनिक आदि विविध रूपों में उनका एक रूप कवि भी है। उनकी जन्मजात काव्य प्रतिभा में निखार संभवतः उनके गुरुवर ज्ञानसागरजी की प्रेरणा से आया है। आपका संस्कृत पर वर्चस्व है ही, शिक्षा कन्नड़ भाषा में होते हुए भी आपका हिन्दी पर असाधारण अधिकार है। आपने हिंदी भाषा अभियान के लिए अपना समर्थन दिया है हिंदी भाषा , मातृभाषा को हम भूले नही और इंडिया नही भारत बोले इसके लिए भी आपने मार्गदर्शन प्रेरणा दी है। आपके सारे महाकाव्यों में अनेक सूक्तियाँ भरी पड़ी हैं, जिनमें आधुनिक समस्याओं की व्याख्या तथा समाधान भी है, जीवन के सन्दर्भों में मर्मस्पर्शी वक्तव्य भी है। सामाजिक, राजनीतिक व धार्मिक क्षेत्रों में व्याप्त कुरीतियों का निदर्शन भी है। आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज वीतराग, निस्पृह, करुणापूरित, परीषहजयी समदृष्टि-साधु के आदर्श मार्ग के लिए परम-आदर्श हैं। आपकी भावना जन जन के कल्याण की रहती है। ऐसे दुर्लभ संत का समागम सभी प्राप्त हो उनके द्वारा दीक्षित शिष्य भी दर्शन के लिए लालायित रहते है।
  10. *पटाखे चलाने से होती है बीमारियॉ*- *मुनि श्री* गौरझामर जिला सागर मध्य प्रदेश मुनि श्री भाव सागर जी महाराज बड़ा मंदिर पाठशाला के बच्चों को चन्द्रप्रभु जिनालय में अभिषेक, शांतिधारा, पूजन करवाई गई इस अवसर पर संबोधित करते हुए मुनि श्री भाव सागर जी ने कहा कि पटाखों से हमे आर्थिक नुकसान के साथ साथ शारीरिक हानि भी पहुँचती है। बेजुबान पशु पक्षी पीडित भयभीत होते है। प्रतिवर्ष कई अग्निकांड होते हैं। लाखों करोड़ों रुपयों का नुकसान होता है। इसके निर्माण में कई मासूम भोले बच्चे अपनी जीवन लीला समाप्त कर देते हैं और हमारे लिए पटाखे तैयार करते हैं। पटाखों का त्याग करेंगे तो स्वच्छ सुंदर वातावरण पर्यावरण मिलेगा। हमारी गली मोहल्ला नगर शहर गांव कॉलोनी स्वस्थ बनेगी। रासायनिक जहरीली गैसों व धुंए के प्रदूषण से बचाव होगा।पटाखे खरीदने, बेचने, फोड़ने का त्याग करते हैं तो असंख्यात जीवो की हिंसा के पाप से बच सकते हैं। करोड़ो सूक्ष्म जीवों नेे हमारा और आपका क्या बिगाड़ा है। हम पटाखे छोड़कर उन सूक्ष्म जीवों को क्यों मारे क्यो लाखो भवो के बैर का बंध करे और करोड़ो जीवो को अभयदान दे। हम इसके बिना भी दीपावली मना सकते हैं पटाखों की आवाज इतनी तेज होती है कि श्रवण क्षमता भी बाधित होती है खासकर बच्चों बुजुर्गों पर इन पटाखों की आवाज का कुछ ज्यादा ही असर पड़ता है जिन पटाखों को चलाकर हम इतने सारे जीवो की हिंसा करते है वह धन बचा कर हम गरीब लोगों को मिठाई, वस्त्र, औषधि और अन्य वस्तुएं अर्पण कर सकते हैं। पटाखों का धुआं बादल बनकर हमारे वायुमंडल को नुकसान पहुँचा रहा है। ऐसे कितने घर हैं जहां आर्थिक तंगी कारण घरो मैं चिराग तक नहीं जल पाते हैं और हम पटाखे चलाते है। दीपावली में हो रही हजारों दुर्घटनाओं का कारण पटाखे है। कितने बच्चे युवा अपंग हो रहे हैं प्रतिवर्ष देश भर में 6000 करोड रुपए से अधिक के पटाखे फोड़े जाते हैं। पटाखों के धुए से वायुमंडल में सल्फर डाइऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है सभी के स्वास्थ्य के लिए घातक है। बच्चे बुजुर्ग बीमार व्यक्ति इससे ज्यादा प्रभावित होते हैं। सभी बच्चों ने पटाखो का त्याग किया।
  11. गौरझामर 09/10/2018 *माँ की महिमा निराली है* गौरझामर जिला सागर मध्यप्रदेश में मुनि श्री भाव सागर जी महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज बच्चों में संस्कार समाप्त होते जा रहे हैं मां ही बच्चों को अच्छे संस्कार दे सकती है माता पिता कल्याण मित्र हैं वे एक हित चिंतक कल्याण मित्र हैं जो संतानों को दोषो से बचाते हैं व्यसनो से बचाते हैं जीवन में ऐसे जो भी अनिष्ट हैं उन से बचाते हैं बच्चोे को अपने जीवन को पवित्र बनाना हो उत्तम बनाना हो आदर्श बनाना हो सुखी बनाना हो ऊर्ध्वगामी बनाना हो तो माता पिता के द्वारा ही बन सकते हैं मां जीवन भर गरीबी में रहकर अपने बच्चों को पढ़ाती है अपने से अच्छा बनाती है मां भूखी रहकर बच्चों को भोजन देती है। मुनि श्री अचल सागर जी महाराज ने कहा कि हमारी इच्छा लालसा चाहना बढ़ रही है। आज हम तीन काल में भी अपनी इच्छाओं को पूरा नहीं कर सकते प्राप्त को भूल जाते हैं और अप्राप्त को याद करते हैं आज व्यक्ति एटीएम ऑल टाइम मनी हो गया है व्यक्ति अपने आप को कंट्रोल नहीं कर पा रहा है 24 घंटे पैसे के लिए भाग रहा है आदमी मशीन हो गया है हम क्या साथ में लेकर आए थे और क्या साथ में लेकर जाएंगे पहले व्यक्ति जीने के लिए खाता था आज खाने के लिए जीता हैं पहले पैसा जीवन जीने के लिए कमाता था आज धन इसलिए कमाता है की आगे की पीढ़ियों के लिए हो जाए। रोटी कपड़ा और मकान की पूर्ति जरूरी है लेकिन अति धन की आकांक्षा की पूर्ति नहीं हो सकती है।
  12. गौरझामर 08/10/2018 *बच्चों को अच्छी चीजें सिखाएं*:- *मुनि श्री* मुनिश्री भाव सागर जी महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों को मंदिर जरूर भेजें हम बच्चों को पूजा आदि सिखाएं यही संस्कार जो हम देंगे वहीं वापस मिलेंगे जिस प्रकार आप लोग बैंक में धन जमा करते हैं फिर वापस मिल जाता है । इसी प्रकार यदि बच्चों को अच्छे संस्कार नहीं देंगे तो वह आप को घर से निकाल देंगे आज वैसे ही बच्चे बाहर पढ़ने जा रहे हैं वहां कोई देखने वाला नहीं रहता है बच्चे क्या कर रहे हैं माता-पिता परिवार जन को भूल जाते हैं। पूजा की द्रव्य हमें सर्वश्रेष्ठ चढ़ाना चाहिए ।पूजा के पात्र भी स्वर्ण, रजत, ताम्र, पीतल आदि के बर्तन होना चाहिए ।लोहे (स्टील) को अधम धातु कहा गया है इससे दरिद्रता आती है। जिस प्रकार भोजन में उत्तम सामग्री लेते हैं ऐसे ही पूजा में उत्तम सामग्री होना चाहिए।गंधोदक भी पॉजिटिव एनर्जी प्रदान करता है गंधोदक माथे एवं सिर के ऊपर लगाना चाहिए वैज्ञानिको ने भी कहा है कि गंधोदक से हीमोग्लोबिन की व्रद्धि होती है । .....................................
  13. दिनांक 6/10/2018 *ध्यान पॉजिटिव एनर्जी प्रदान करता है :- मुनि श्री* धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि भावसागर जी ने कहा कि ध्यान से एकाग्रता आती है और हमारे शरीर में 5 करोड़ 68लाख 99वे हजार584 प्रकार के रोग हैं 72000 नाडिया है ध्यान के माध्यम से मन वचन और शरीर और आत्मा के रोगों में लाभ मिलता है चाहे रेकी हो, हीलिंग हो, इमोशनल केयर हो यह सभी महामंत्र के ही रूप हैं शांतिधारा भी विश्व कल्याण की भावना से की जाती है विश्व के सभी लोग सुखी रहे किसी को रोग नहीं हो जय भावना भायी जाती है हमें प्रतिदिन ऐसी भावना भाना चाहिए कि सभी के रोग ठीक हूं सभी को औषधि की प्राप्ति हो सभी को वस्त्र की प्राप्ति हो सभी को भोजन मिले ऐसी भावना हमें प्रतिदिन करना चाहिए। हमारे माता-पिता, मित्र ,गुरु, धरती, जलवायु, वृक्ष, विश्व, देश, राज्य, नगर,शहर, आदि सभी का मंगल हो यह भावना हमें प्रतिदिन करना चाहिए ऐसी भावना करने से हमारे पुण्य में वृद्धि होगी और सभी जीव सुखी होंगे। जब भी हम बीमार हो तो अन्य रोगी के लिए औषधि दान करें जिससे हमारा पुण्य बढ़ेगा और रोग ठीक होगा।
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