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नव आचार्य श्री समय सागर जी को करें भावंजली अर्पित ×
मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
  • अनमोल की आस

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    याचना का चोला पहना

    यातना का पहना गहना

    आँगन-आँगन

    कितने प्राँगण ?

    घूमा है यह

    सुख-सा कुछ

    मिलता आया

    और मिटता आया

    सुख की आस अमिट !

     

    आज तक !

    अंमित मिला नहीं

    अमिट मिला नहीं

    हे! अनन्त सन्त !

    अब मोल नहीं

    अनमोल मिले!


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