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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
  • काश!

       (0 reviews)

    हे आकाश !

    काश !...

    नहीं देता तू  

    इस लघुतम सत्ता को

    अपने में

    अवकाश!...

    अपने पास!!

     

    किस विध सम्भव था ?

    चिदाकाश का

    अप्रत्याशित

    सौम्य-सुगंधित

    मृदुतम विलास

    परम विकास!...

     

    रूप रसातीत

    स्फीत प्रतीत

    परम प्रकाश !

    हे महदावास!

    हे आकाश !

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