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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
  • आया दल-दल

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    पृथुल नभ-मण्डल में

    अकाल-विप्लव-धर्मी

    सघन, श्यामल

    बादल-दल

    पिघल-पिघल कर

    उज्ज्वल शीतल

    धवलिम जल में

    बदल गया है ।

     

    इसे निरख कर

    धरती दिल

    हिल गया है,

    मन में विचार ।

    भविष्य का विषय

    गहल-भाव में ढला

    भला-बुरा अज्ञात

    यह युग

    मुझे तिरस्कृत करेगा

    पद दलित करेगा

    दल-दल आ गया है

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