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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
  • सुधार का रास्ता

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    एक दिन आचार्य गुरूदेव से कहा - गुरूदेव कुछ लोग गलत कार्य करते हैं, उन्हें समझाते हैं फिर भी वे गलत कार्य करना नहीं छोड़ते ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए ? आचार्य गुरूदेव ने युक्ति पूर्वक समझाते हुए कहा - जिससे आप पाप छुड़वाना चाहते हो उससे पहले मित्रतापूर्वक व्यवहार करो । फिर कहो भैया देखो हमें आपके ये कार्य अच्छे नहीं लगते । मैं आपसे मित्र की तरह मिलता रहता हूँ, साथ में उठना-बैठना भी होता है आप ऐसे कार्य मत किया करो । सरलता से समझाकर ही यह कार्य हो सकता है, अपनापन देकर आप मनुष्य से क्या पशु पक्षी से भी पाप छुड़वा सकते हो वरना नहीं। यदि हमारा उसके प्रति सदव्यवहार न हो तो उसको ठेस लगने से उसका सम्यग्दर्शन भी छूट सकता है। इसलिए ऐसा व्यवहार करो जिससे अपनी दृष्टि मजबूत हो और दूसरे को भी सही दृष्टि प्राप्त हो, क्योंकि दुकान सरलता से, नम्रता से चलती है जोर जबरदस्ती से नहीं ।

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