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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
  • फूल नहीं कांटे

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    सर्दी का समय था एक दिन प्रातःकाल आचार्य श्री के पास कुछ महाराज लोग बैठे हुए थे, ठण्डी हवा चल रही थी और सभी को ठण्ड लग रही थी, शरीर से कँपकँपी उठ रही थी। आचार्य श्री से कहा देखो आचार्य श्री जी शरीर से कांटे उठ रहे हैं। आचार्य श्री ने कहा - "हाँ, शरीर से काँटे ही उठते हैं फूल नहीं।" शरीर दुख का घर है। इसके स्वभाव को जानो और वैराग्य भाव जाग्रत करो। शरीर को नहीं बल्कि शरीर के स्वभाव को जानने से वैराग्य भाव उत्पन्न होता है।


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