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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
  • वीतरागी संत के आगे सभी साधक गण नतमस्तक होते हैं*

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    *नेमावर से गौरझामर के बिहार के समय, बापौली धाम, फरवरी 2015*

     

    *आहार चर्या के लिए यह स्थान निश्चित किया गया था, महंत जी के विशेष आग्रह पर संघ सहित गुरु जी ने उस आश्रम के अंतरंग परिसर में प्रवेश किया एवं आहार हेतु उठने के पहले की जाने वाली भक्तियॉ वहीं पर बैठ कर सभी मुनि महाराजों ने की, इसी दौरान महंत जी सहित सभी शिष्यों ने आचार्य महाराज का पाद प्रक्षालन एवं पुष्पमाला आदि से भक्ति पूजन संपन्न किया।*

    *लाल वस्त्रों में जो स्वामी जी हैं उनका 12 वर्ष से मौन था एवं आश्रम परिसर से बाहर भी नहीं निकले थे परंतु गुरु जी से उन्होंने चर्चा की एवं छोड़ने आश्रम परिसर से बाहर भी निकले थे।*

    इस आश्रम में 50 गिर गाय हैं एवं उन कि सेवा में 12 व्यक्ति (4 व्यक्ति 8 घंटे के लिए) सेवा में रहते हैं (ताकि गोबर आदि के हो जाने पर तुरंत ही उसकी सफाई की जा सके) एवं ये स्वामी जी रात्रि 11:00 बजे से सुबह 3:00 बजे तक यहां ध्यान मुद्रा में स्वयं बैठते हैं।

    उस परिसर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है।

    *वीतरागी संत के आगे सभी साधक गण नतमस्तक होते हैं*

    यह उस क्षण का एक दुर्लभतम वीडियो है (2:55 मिनट)।


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