Jump to content
मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
  • वीतरागता

       (0 reviews)

    मैंने सुना है एक दिन आचार्य महाराज रोज की तरह स्वाध्याय में लीन थे। लोग दर्शन करने आ-जा रहे थे, सभी चावल चढ़ाते जा रहे थे। इतने में अचानक सभी को चावल चढ़ाते देखकर एक बच्चे ने अपने हाथ में रखी हुई चाकलेट चढ़ा दी। बच्चे के भोलेपन पर सभी हँसने लगे। बात आई-गई हो गई। इस घटना के स्मरण से आज भी मन उद्वेलित हो उठता है। यदि हम भी ऐसे वीतरागी गुरु को पाकर बच्चों के समान सरलता व सहजता से संसार में प्रिय मालूम पड़ने वाली वस्तुओं का त्याग करने के लिए तत्पर हो जाएँ तो मुक्ति के मार्ग पर चलना कठिन कहाँ है?


    User Feedback

    Join the conversation

    You can post now and register later. If you have an account, sign in now to post with your account.

    Guest

×
×
  • Create New...