Jump to content
मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
  • पत्र क्रमांक - 98 केसरगंज के लिए संघ विहार एवं केसरगंज ने देखी आकस्मिक समाधि

       (0 reviews)

    पत्र क्रमांक-९८

    ०६-०१-२०१८ ज्ञानोदय तीर्थ, नारेली, अजमेर

    सल्लेखना-समाधि विज्ञ स्थितप्रज्ञ दादागुरु के तपःपूत चरणों की नित्य वन्दना करता हुआ... हे गुरुवर! १ दिसम्बर १९६८ को सोनी नसियाँ से विहार हुआ उस समय के समाचार ‘‘जैन गजट' ०५-१२-१९६८ को प्रकाशित हुए। जो इस प्रकार हैं-

    संघ विहार

    "अजमेर-चातुर्मास काल में यहाँ विराजमान प.पू. वयोवृद्ध ज्ञानमूर्ति चारित्रविभूषण श्री १०८ मुनिराज ज्ञानसागर जी महाराज तथा प.पू. श्री १०८ मुनिराज विद्यासागर जी महाराज का दि. ०१-१२१९६८ को केसरगंज के लिए ससंघ विहार हो गया। विहार बेला पर आयोजित सभा में अनेक वक्ताओं ने पूज्य मुनिराज संघ से अभी यहीं विराजमान रहने का विनम्र अनुरोध करते हुए कहा कि परमपूज्य मुनिराज ज्ञानसागर जी महाराज के वृद्धावस्था तथा समयसार प्रकाशन के महत्त्वपूर्ण कार्य को यथाशीघ्र सम्पूर्ति के लिए मुनि संघ का यहाँ विराजना अत्यन्त आवश्यक तथा समाजहित में है। आशा है परमपूज्य मुनिराज समाज के अनुरोध को अवश्य स्वीकार करेंगे। वक्ताओं के अंत में मुनिराजद्वय का प्रभावशाली प्रवचन हुआ।''

     

    इस तरह हे गुरुवर! आप जहाँ भी जाते समाज आपका स्नेहपूर्वक बड़ी भक्ति के साथ सान्निध्य चाहती कारण कि आपके रहने से समाज को सही दिशायें मिलतीं थीं। समाज का हित होता था और आगम का सच्चा ज्ञान प्राप्त होता था। आप संघ सहित केसरगंज पधारे। दिगम्बर जैन समाज, केसरगंज ने भव्य आगवानी की। नित्यप्रति आपका प्रवचन होता और मुनि श्री विद्यासागर जी महाराज का रविवार को आप से पहले प्रवचन होता था। मुनि विद्यासागर जी महाराज के प्रवचन सुनने विशेष तौर पर युवा लोग एकत्रित होते थे। तब आपने कहा था- ‘एक दिन विद्यासागर धर्म का डंका बजाएगा।' अब मैं आपका ध्यानाकर्षित करना चाहता हूँ-केसरगंज के प्रवास की एक घटना की ओर जो वहाँ के कन्हैयालाल जी जैन ने सुनाई जिसे आप जानते हैं। वह मैं आपको लिख रहा हूँ-

    14.jpg

     

    15.jpg

    16.jpg

    17.jpg

    18.jpg

     

    केसरगंज ने देखी आकस्मिक समाधि

    संघ में एक ब्रह्मचारी पन्नालाल जी जो फिरोजपुर झिरका (जिला-गुड़गाँव) के रहने वाले थे। उन्होंने गुरुवर श्री ज्ञानसागर जी महाराज से सप्तम प्रतिमा के व्रत ले रखे थे। १० जनवरी १९६९ शुक्रवार को मध्याह्न ११:00 बजे उनका स्वास्थ्य बिगड़ा और उनको घबराहट होने लगी तभी हम लोगों ने गुरुदेव श्री ज्ञानसागर जी महाराज को जाकर बताया। तो उन्होंने मुनि श्री विद्यासागर जी महाराज को भेजा। बाजू वाले कमरे में ब्रह्मचारी पन्नालाल जी लेटे हुए कराह रहे थे। मुनि श्री विद्यासागर जी महाराज ने उनकी विकट स्थिति देखकर कहा-तत्काल वैद्य जी को बुलवाओ और जाकर गुरुदेव को सारी स्थिति बतलाई। वैद्य जी को लेकर हम लोग आए, तो वैद्य ने देखकर उनके पेट पर कुछ लेप-सा लगाया, फिर भी स्थिति नहीं सुधरी तब मुनि श्री विद्यासागर जी महाराज बड़ी ही तत्परता के साथ उन्हें णमोकार मन्त्र सुनाने लगे और गुरुवर श्री ज्ञानसागर जी महाराज ने उन्हें सब कुछ त्याग कराया और उनकी समाधि हो गई। इस सम्बन्ध में दीपचंद जी छाबड़ा (नांदसी) ने ‘जैन गजट' १६-०१-१९६९ की एक कटिंग दी। जिसमें मिलापचंद जी पाटनी का समाचार इस प्रकार छपा हुआ है जो आपको बता रहा हूँ-

    मुनि श्री पवित्रसागर जी महाराज का स्वर्गवास

    अजमेर-परमपूज्य चारित्र विभूषण ज्ञानमूर्ति १०८ श्री मुनिराज ज्ञानसागर जी महाराज के संघस्थ पूज्य ब्रह्मचारी श्री पन्नालाल जी फिरोजपुर (झिरका) का १०-०१-१९६९ शुक्रवार को मध्याह्न १२ बजकर ८ मिनिट पर ७६ वर्ष की आयु में समाधिमरण पूर्वक स्वर्गवास हो गया। करीब ११ बजे अचानक उनकी तबीयत खराब हुई थी। अंतिम समय जानकर पूज्य मुनिराज श्री ज्ञानसागर जी महाराज ने सभी त्यागीगणों व श्रावकों की उपस्थिति में ब्रह्मचारी जी को दिगम्बरी दीक्षा प्रदान कर दी तथा इनका दीक्षित नाम मुनि श्री पवित्रसागर जी रखा गया। जैसे ही इनके स्वर्गवास का समाचार दीक्षित होकर स्वर्गवास होने का नगर में पहुँचा, नगर के समस्त जैन समाज का व्यवसाय बंद हो गया। लगभग ४ हजार स्त्री पुरुष सहित अंतिम यात्रा का जुलूस नगर के मुख्य मार्गों से होता हुआ नगर से ३ मील दूर स्थित छत्रियाँ नामक स्थान पर ले जाया गया। वहाँ पूज्य मुनिराज का अंतिम संस्कार सम्पन्न हुआ। उस समय वहाँ उपस्थित जन समुदाय ने पूज्य मुनिराज जी को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

    20.jpg

    21.jpg

    22.jpg

    23.jpg

    24.jpg

     

    पूज्य ब्रह्मचारी पन्नालाल जी पिछले ७ वर्ष से सीकर में पूज्य मुनिराज श्री ज्ञानसागर जी से सप्तम प्रतिमा ग्रहण कर संघ में रहकर धर्मध्यान पूर्वक जीवन बिता रहे थे। आप हरदोई ग्राम में पंसारी का कार्य करते थे। आपके २ पुत्र एवं २ पुत्रियाँ हैं। दिनांक ११-०१-१९६९ मध्याह्न २ बजे स्थानीय केसरगंज स्थित श्री दिगम्बर जैन पार्श्वनाथ मंदिर (जहाँ पर संघ विराजमान है) में परमपूज्य १०८ मुनिराज श्री ज्ञानसागर महाराज व श्री १०८ विद्यासागर जी महाराज के सान्निध्य में पूज्य १०८ स्वर्गीय श्री पवित्रसागर जी मुनिराज को श्रद्धांजलि अर्पण हेतु सभा हुई जिस पर पूज्य १०५ क्षुल्लक श्री सन्मतिसागर जी महाराज ने उनका पूर्ण परिचय दिया। बाद में पण्डित विद्याकुमार जी सेठी, भीखाराम जी जैन, श्रीपति जी जैन व श्रीमंत सेठ सर भागचंद जी साहब सोनी ने स्वर्गीय पूज्य मुनिराज श्री पवित्रसागर जी के प्रति अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। अंत में पूज्य श्री १०८ श्री मुनि ज्ञानसागर जी महाराज एवं श्री विद्यासागर जी महाराज ने समाधिमरण पर प्रकाश डाला। पश्चात् श्री प्रभुदयाल जी जैन द्वारा काल की विचित्रता दर्शक पद्यगान हुआ और उपस्थित जनसमूह ने नौ बार णमोकार मंत्र का जाप किया।

     

    इस तरह अनायास ही मुनि श्री विद्यासागर जी ने आपसे समाधि-सल्लेखना के निर्देशन की कला सीख ली। आपके निर्यापकाचार्यत्व में आत्मसम्बोधन पाकर कितने ही क्षपकों ने सब कुछ त्याग कर अपनी आत्मा को कर्मों से हल्का कर अन्तिम यात्रा सानन्द सम्पन्न की है। ऐसे उपकारी गुरु-शिष्य के चरणों में कोटिशः नमन करते हुए...

    आपका शिष्यानुशिष्य

     

     

     

     

     

     


    User Feedback

    Join the conversation

    You can post now and register later. If you have an account, sign in now to post with your account.

    Guest

×
×
  • Create New...