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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
  • पत्र क्रमांक - 113 संस्कृति रक्षक गुरुवर

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    पत्र क्रमांक-११३ 

    २२-०१-२०१८ ज्ञानोदय तीर्थ, नारेली, अजमेर

     

    लौकिकता से परे लौकिकता का संज्ञान रखने वाले दादागुरु के श्रीचरणों में प्रणाम करता हुआ आज मैं आपकी वह बात सुनकर अत्यधिक प्रसन्न हुआ कि आप अपने कल्याण के साथ-साथ व्यवहारिक बात पर भी ध्यान रखते थे और समाज में प्रवेश कर रहे कुसंस्कारों को लेकर आप समाज को जागृत एवं सचेत करते रहते थे। इस सम्बन्ध में २९-०१-२०१८ को ज्ञानोदय तीर्थ पर आपके अनन्य भक्त श्रीमान् कन्हैयालाल जी ने बताया-

     

    सावधान! कहीं आप अनजाने में शराब माँस तो नहीं ले रहे हैं?....

     

    ‘१९६९ केसरगंज चातुर्मास के दौरान हमारी दुकान के बाजू में कोल्ड ड्रिंक्स की दुकान थी। एक दिन उनके नौकर ने हमको कोल्ड-ड्रिंक्स की भरी हुई शीशी में कीड़े दिखाये । रात्रि में हम वैयावृत्य के लिए गुरु महाराज के पास गए। तो हमने यह बात उन्हें बताई। तब दूसरे दिन गुरु महाराज ज्ञानसागर जी ने अपने प्रवचन में कहा कि “आप लोग कोकाकोला पीते हैं यह क्या होता है? जानते हैं आप लोग? इसमें कीड़े निकलते हैं और शराब मिलायी जाती है जिसे एल्कोहल कहते हैं। यह कई लोगों ने देखा है। इसको नहीं पीना चाहिए। पीने से माँस और शराब के सेवन का पाप लगेगा। बाजार की कोई भी चीज ग्रहण करने से पहले अपना विवेक लगाओ। क्या यह खाने योग्य है? इसी तरह बाजार में बेकरी के केक आदि जो बनते हैं उनमें अण्डा चर्बी आदि डाली जाती है। आज कुछ लोग बिना सोचे समझे, बिना जाने-खोजे ही जिह्वा इन्द्रिय के वशीभूत होकर उन चीजों का सेवन कर लेते हैं और अपना धर्म बिगाड़ लेते हैं, कर्म बिगाड़ लेते हैं। इससे फिर वे दुखी बनते हैं।'

     

    यद्यपि आप लौकिक अखबार नहीं पढ़ते थे फिर भी यदा-कदा कोई जानकार व्यक्ति उपभोक्ता और बाजारवाद की जानकारी देता तो आप बड़े ध्यान से सुनकर समाज को सदुपदेश देकर सावधान करते थे| संस्कृति रक्षक गुरुवर के श्री चरणों में नमन निवेदित करता हुआ...

    आपका शिष्यानुशिष्य

     


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