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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
  • पत्र क्रमांक - 171 - गुरु की भविष्यवाणी सच हुई

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    पत्र क्रमांक-१७१

    ०३-०४-२०१८ ज्ञानोदय तीर्थ, नारेली, अजमेर

     

    पारखी नजर से सम्पन्न गुरुवर आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के पावन चरणों में सदा की तरह नमोऽस्तु नमोऽस्तु नमोऽस्तु...

    हे गुरुवर! 'जिन खोजा तिन पाईयाँ, गहरे पानी बैठ।' जब से मैंने ज्ञान के सागर में गोता लगाया मुझे आप जैसे दादागुरु भविष्यद्रष्टा, भविष्यवक्ता के दर्शन हुए और आपके लाड़ले शिष्य विद्या के सागर में गोता लगाया तो इस युग के विश्वगुरु अपराजेय साधक का दर्शन हुआ। आपकी पैनी दृष्टि ने मेरे गुरु के अन्दर भविष्य का संत शिरोमणि देख लिया था। नसीराबाद के शान्तिलाल जी पाटनी ने इस सम्बन्ध में एक संस्मरण लिखकर भेजा वह मैं आपको बता रहा हूँ

     

    गुरु की भविष्यवाणी सच हुई

    ‘नसीराबाद चातुर्मास में एक बार मूलचंद जी, छगनलाल जी पाटनी, ताराचंद जी, मनोहरलाल जी आदि मोक्षमार्ग प्रकाशक के बारे में मुनि श्री विद्यासागर जी से चर्चा कर रहे थे। तो विद्यासागर जी निश्चयाभासियों की काट कर रहे थे और मैं आचार्य गुरुवर ज्ञानसागर जी महाराज के पास बैठा सुन रहा था। बीच-बीच में गुरुवर ज्ञानसागर जी महाराज, विद्यासागर जी महाराज के तर्क पर हँसते हुए सिर हिलाते। तब ज्ञानसागर जी महाराज मुझसे बोले-‘शान्तिलाल कोई समय विद्यासागर जी प्रतिभाशाली मुनि महाराज बनेंगे, दुनियाँ में जैन धर्म का डंका बजायेंगे।'' हे गुरुवर! ‘पूत के लक्षण पालने में यह उक्ति आज चरितार्थ हो गयी। आपकी पारखी नजरों ने जैसा पहचाना था वह आज सच हो गया है। आपके श्रीचरणों में नमोऽस्तु नमोऽस्तु नमोऽस्तु...

    आपका

    शिष्यानुशिष्य


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