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  • साधना 1- रत्नत्रय

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    साधना 1- रत्नत्रय विषय पर संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी  के विचार

    1. रत्नत्रय वह अमूल्य निधि है जिसकी तुलना संसार की समस्त सम्पदा से भी नहीं की जा सकती।
    2. रत्नत्रय की कीमत, उसकी क्षमता अदभुद है बंधुओ! अन्तर्मुहूर्त हुआ नहीं कि यह जीव केवलज्ञान प्राप्त कर निर्वाण भी पा सकता है।
    3. भव्यत्व की पहचान भले ही सम्यकदर्शन के साथ हो सकती है किन्तु उसकी अभिव्यक्ति रत्नत्रय के साथ ही होगी।
    4. रत्नत्रय ही हमारी अमूल्य निधि है, इसे बचाना है। इसको लूटने के लिये कर्म चोर सर्वत्र घूम रहे हैं। जागते रहो, सो जाओगे तो तुम्हारी निधि लूट जायेगी।
    5. रत्नत्रय में तपन के बिना चमक नहीं आती अत: उसे भी बारह तपों से तपाना आवश्यक है।


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