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Uma Jain

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  1. पुण्यशाली भव्य आत्मा का वंदन करते हुए भावना भाते हैं कि हमारी भी गुरु चरणों में ऐसी समाधि हो.धन्य हो वसानी जी क्या भाग्य संवारा है,वर्तमान के महावीर के चरण सानिध्य में समाधि आपके पुण्य की जितनी भी अनुमोदना की जाये कम है।
  2. हे परमोपकारी गुरुदेव, नमोस्तु,नमोस्तु,नमोस्तु.हमने भगवान को नहीं देखा,पर निश्चित ही आप जैसे ही होंगे। आपका सारभूत चिंतन मन को मथ देता है। राह को रोशन कर देता है,अब उस पर कौन कितना चल पाता है योग्यता पर निर्भर करता है। पुनः पुनः नमोस्तु भगवन्.
  3. बहुत ही उत्तम कार्य है। इन सूक्तियों के माध्यम से संक्षिप्त में धर्म को समझने की राह मिल गई। मैं यह सूक्तियां उन लोगों तक भेज देती हूँ जो गुरूओं तक पहुंच नहीं पाते या पहुँचना नहीं चाहते.आगे उनकी भवितव्यता.भावना भाती हूँ प्रभु उनकी बुद्धि प्रशस्त करें। उन तक भी गुरुदेव की करुणा पहुँच सके।
  4. नमोस्तु गुरुदेव नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु.ऐसे ऐसे तथ्य और कथ्य गुरु के बिना कौन बता सकता है? सचमुच गुरु की महिमा वरणी न जाए। गुरु नाम जपूँ मन वचन काय.ऐसे परम उपकारी महा मुनिराज के चरणों में कोटि कोटि नमन.
    प्रतिदिन गुरुदेव के श्री मुखमुद्रा को निहारने का सौभाग्य हमें प्रदान करने वालों के लिए हम क्या कहें? हमारे पास शब्द नहीं हैं। ७ ता:से दर्शन नहीं हुए तो मन बहुत व्याकुल था। पुनः दर्शन कर धन्य हुए.
  5. तत्वार्थसूत्र का प्रारंभ सभी स्वाध्याय प्रेमियों के लिये बहुत ही लाभदायक सिद्ध होगा। गुरुदेव के चरणों में कोटि कोटि नमन.
  6. तत्वार्थसूत्र का प्रारंभ सभी स्वाध्याय प्रेमियों के लिये बहुत ही लाभदायक सिद्ध होगा। गुरुदेव के चरणों में कोटि कोटि नमन.
  7. अद्भुत काव्यपाठ,अनुपम कृति का अनूठा वाचनाकार,ये कर्ण इंद्रिय का मिलना सफल हुआ। धन्य हो गुरुदेव.जय हो आपकी.
  8. आचार्य श्री के लिए सारे अनुमान फेल हैं। लेकिन यह तो तय है कि जिन भविकों का तीव्रतम पुण्य होगा वर्तमान के तीर्थंकर का समवशरण वहीं लगेगा।
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