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सन्मति जैन

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About सन्मति जैन

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  1. गुरुजी ने कल जो लीला दिखलाई उसे देखकर मेरा मन प्रफुल्लित हो उठा और उठी कलम✒ लिख डाली कुछ पंक्तियां।। *डॉ ० विद्या मैडम🖊 (इटारसी)* आज पुनः रामायण दुहराई, बिन मांगे नाव🛶 शरण में आई, चौदह 💰करोड़💵 का लालच छोडा , हुआ अहिंसक 🐄मन को मोड़ा, राम ने अहिल्या 🛶उपल की कीनी, तुमने 🙏नाव अहिंसक किनी।। दोहा:- देवगढ़ में चरण👣 पखारे आपके फिर बैठाया 🛶नाव, नदी 🚤नाव संयोग है आए मुंगावली गांव।। लेखिका:- डॉ ० *विद्या जैन* (रेट. प्रोफेसर) इटारसी(म. प्र) *निवेदन* :- 🙏यह कविता *मुंगावली जैन समाज* के लिए है एवम् अगर आप चाहे तो यह बात गुरुजी तक पहुंचाए।। यह कविता में संशोधन करके गुरु के प्रति मेरी भावना को ठेस न पहुचाएं।।
  2. यह कॉमिक कैसे प्राप्त हो सकती है
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