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Sakshi Jain Soni

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Sakshi Jain Soni last won the day on April 29 2018

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About Sakshi Jain Soni

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  • Birthday 01/24/1992

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    Jaipur And Rajasthan

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  1. Sakshi Jain Soni

    जयपुर राजस्थान

    आप सभी को सविनय सादर जय जिनेन्द्र संयम स्वर्ण महोत्सव के सभी सदस्यों का बहुत - बहुत आभार आप सभी ने मिलकर के एक बहुत ही अतुलनीय तथा अकथनीय कार्य किया है । जिसके लिए सकल जैन समाज एवम् अजैंन समाज आप लोगो के लिए अपना आभार व्यक्त करती है । युग युग तक गुरु जी को याद रखा जाए ताकि आगे आने वाली पीढ़ीयो को भी हम एक अपराजेय साधक के जीवन परिचय से अवगत करा सके । मेरा तो सभी लोगो से नम्र निवेदन है कि आप सभी लोग अधिक अधिक संख्या में विद्योदय फिल्म का लोकार्पण अपने अपने शहर और गावों के मन्दिरों में अवश्य करे तथा ये सूचना अधिक से अधिक लोगो तक पहुंचाए जाए । धन्यवाद
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  3. Sakshi Jain Soni

    अर्हम् योग एवं ध्यान प्रतियोगिता

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  7. Sakshi Jain Soni

    अभ्यास प्रश्नोत्तरी

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  8. Sakshi Jain Soni

    सत्साहित्य का प्रभाव

    जय जिनेन्द्र बिल्कुल सही है हमको आध्यात्मिक ग्रन्थों का स्वाध्याय करना चाहिए । तथा पूर्वाचार्यों कि जीवनी भी पढ़नी चाहिए ।
  9. इसमें एक और जोड़ सकते है :- 1) हर गुरु का शिष्य केसा हो विद्या सागर जैसा हो । 2) हर मां लाल केसा हो बालक विद्याधर जैसा हो ।
  10. इस haiku के माध्यम से आचार्य श्री जी हमको यह समझाना चाहते हैं की जिस प्रकार से सुई निश्चय है, कैंची व्यवहार है और दर्जी प्रमाण है ठीक इसी प्रकार से निश्चय सम्यक दर्शन है , व्यवहार सम्यक ज्ञान है और प्रमाण सम्यक चारित्र है । इन तीनों की एकता का नाम ही मोक्ष मार्ग है ।
  11. इस haiku के माध्यम से आचार्य श्री जी हमको यह समझाना चाहते हैं की जिस प्रकार से रोग की अर्थात बीमारी की चिकित्सा की जाती है रोगी की नहीं यदि चिकित्सक रोग को छोड़कर रोगी की चिकित्सा करेगा तो रोगी को रोग के दर्द को भोगना पड़ेगा ठीक इसी प्रकार से हमको हमारे मन अर्थात विचारों की शुद्धि करनी चाहिए ना कि पुदगल की यदि हमारे विचार शुद्ध हो जाएंगे तो हमारा शरीर स्वतः ही ठीक हो जाएगा ।
  12. इस haiku के माध्यम से आचार्य श्री जी हमको यह समझाना चाहते है की हमको कभी भी अपने आप पर अहंकार नहीं करना चाहिए तथा कभी भी किसी भी प्राणी को अपने से कमजोर नहीं समझना चाहिए । प्रत्येक प्राणी के अंदर अपार योग्यता समायी हुई है अर्थात प्रत्येक व्यक्ति अपनी कमजोरी को अपना पुरुषार्थ बना ले तो वह निश्चित ही अपने लक्ष्य तक पहुंचता ही है। तथा अहंकार ही हमारा शत्रु है हमे उसे त्यागना चाहिए ।
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