Jump to content
आचार्य श्री विद्यासागर मोबाइल एप्प डाउनलोड करें | Read more... ×

अभिषेक जैन 'अबोध'

Members
  • Content Count

    91
  • Joined

  • Last visited

My Favorite Songs

Community Reputation

10 Good

1 Follower

About अभिषेक जैन 'अबोध'

  • Rank
    Advanced Member
  • Birthday 04/06/1986

Personal Information

  • location
    Bhopal

Recent Profile Visitors

The recent visitors block is disabled and is not being shown to other users.

  1. संत शिरोमणि १०८ आचार्य श्री विद्यासागर जी महा मुनिराज नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर -अभिषेक जैन 'अबोध ' स-परिवार शाश्वत सुख सागर गुरु विद्यासागर नाम जग हितकारी संत को बारम्बार प्रणाम।। भारत देश की पावन माटी ऋषियों-मुनियों की धरती है आचार्य श्री विद्यासागर की सयंम स्वर्ण जयंती है।। मास जुलाई की शुभ वेला सयंम स्वर्ण महोत्सव है दीक्षा अवधी के 50 वर्ष पूर्ण तप, त्याग, तपस्या उत्सव है।। तप, त्याग, तपस्या मूरत जो चलतें-फिरते तीरथ है है योगीश्वर, है महासंत तव चरणों में युग नत-मस्तक है।। खजुराहों दूनियाँ में कामवेद शिल्पकला का रूपक है आचार्य श्री जी के चरण पड़े अहिंसामई विश्वधर्म उद्घोषक है।। कलयुगी ये विश्वसारा भय-चिंता से व्याप्त है सत्य, अहिंसा, प्रेमभाव ही सुख-शांति का मार्ग है।। गुरू देव की चरण रज अपने शीश लगाएं आगम पथ पर जो बढ़े जीवन सफल बनाएं।। नमन करुँ आचार्य को निश दिन तव गुणगान दुःख रूपी जग-नदियाँ में मंगलकारी तेरा नाम।। मंदिर में बाजे घंटियाँ मन भक्ति भाव उमगाये प्रभु दर्शन मुझको मिलें जीवन धन्य हो जाये।। है धन्य भाग्य हमारा जो गुरुवर का सानिध्य मिला कलयुग में भी सत्य धर्म का जिनआगम का सौपान मिला।। देव-शास्त्र और गुरु को मन-वच-काय प्रणाम मात-पिता की सेवा में बीतें आठों याम।। है गुरुवर ये मेरा जीवन तुम चरणों में अर्पित है सत्य, अहिंसा, धर्म मार्ग पर हर एक साँस समर्पित है।। है गुरुवर तेरे दरश मिलें सुखामृत रसपान हुआ तेरे चरणों की रज पाके मेरा जीवन धन्य हुआ।। नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर -अभिषेक जैन 'अबोध ' स-परिवार
  2. ???आचार्य श्री विद्यासागर जी??? -नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर -अभिषेक जैन 'अबोध' सा-परिवार सयंम स्वर्ण महोत्सव के पावन अवसर पर संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी के चरणों में एक छोटी सी विनयाजंली सादर समर्पित??? आचार्य श्री जी की चर्याये, सब जीवों के हितकारी है सानिध्य गुरु का मिला हमें हम सब अति भाग्यशाली है जन्मों-जन्मों के शुभ कर्मों से कलयुग में गुरुवर शरण मिली गुरू वाणी हृदय विराजित कर वर्षों से सोयी ज्ञान लता खिली है ज्ञानी ध्यानी शिवगामी गुरुवर तुम ज्ञान सूर्य हम मिथ्या अज्ञानी तुम त्याग, तपस्या की निश्चल मूरत हम विषय-वासना में रत पापी कामी है योगीश्वर, है आराधक, जिन नायक बड़भाग्य हमारा जो तुमसे पहचान हुई हम जग विषयों में अब तक भटके थे निज आत्म तत्व की शुभ समझ जगी मैं भटका मिथ्या जग की चर्याओं में नित सांसारिक भोगो में ही लीन रहा न जाना सच्चें सुख की परिभाषा को भौतिक वस्तु पाने में ही अल्मस्त रहा है गुरुवर जब से शरण तुम्हारी आया हूँ मन इन झूठे जग विषयों से घबराया है बस शाश्वत मोक्ष मार्ग को समझ सकूँ भक्ति भाव से शरण तिहारी आया हूं।। नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर ????????? -अभिषेक जैन सा-परिवार
  3. १०८ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी मुनि महाराज के चरणों में कोटिश: नमन नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर -अभिषेक जैन 'अबोध' स-परिवार विद्या गुरू है सूर्य सम जो नित प्रति करे प्रकाश मैं मूरख अज्ञानी रहा जो बुझा न पाया मन की प्यास।। जीवन में गुरु मिल गये मिला आश-विश्वास इससे ज्यादा क्या चाहना विद्या के सागर तेरे पास।। अर्थ काम पुरुषार्थ सब चंचल मन की आश सुख सारे पा जायेगा यदि मन हो तेरा दास।। व्यर्थ भटकता फिर रहा मनुज अर्थ की ओर सुख रूपी अमृत मिलें मन हो परमार्थ की ओर।। मोह-माया के फेर में फसा ये मन अंजान जिसको अपना मानता छूटेगा सब संसार।। दोष व्यर्थ ही हम गिनें मन दूजो की ओर अन्तर्मन में झाकले जीवन तेरा किस ओर।। मन हो बालक सम सदा नहीं किसी से वैर दो पल आसूँ आँख में दो पल में सब खेर।। मानव तन तुझको मिला मिला ज्ञान पर अधिकार व्यर्थ भटकता क्यों फिरे बनकर मन का दास।। सबकुछ तेरे पास में फिर क्यों फिरे उदास सोच बदल देखो जरा मिलें खुसियोँ की सौगात ।। प्रेम स्वयं से हो सदा हो खुद पर विश्वास लक्ष्य सदा मन में बसे सफलता तेरे पास।। जिसके मन में प्यास है नदियाँ उसके पास वह प्यासा ही रह गया छोड़ा जिसनें खुद पर विश्वास।। गुरु चरणों में मिला मुझें इस जीवन का सार भटक रहा था व्यर्थ ही ले क्षणभंगुर सपनों की आश।। जानें कौन सी डोर है जो खीचे गुरु की ओर मन पगला बौरा रहा ले चल मुझको प्रभु के छोर।। आशायों की डोर गुरूचरणों की ओर मन में नाचें मोर इक दिन होगी भोर।। नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर -अभिषेक जैन 'अबोध' स-परिवार
  4. आ। श्री। ?मानव धर्म? 108 आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण कमलों में कोटि-कोटि नमन-वन्दन-प्रणाम नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर ??? -अभिषेक जैन सा-परिवार सच्चा धर्म हमेसा करुणा, प्रेम,दया का पाठ पड़ाता है मानवता सिखलाता है प्राणी मात्र की रक्षा भाव जीवन सुखमय जीने के सरल उपाय सिखाता है व जीवन सरल बनाता है जीवन में जो मधुरता लाये वैर-वैमनस्य जो यदि मिटाएं मिलजुल कर रहना सिखलाये त्याग-वृत्ती जो मन में उपजाए तब ही तुम्हें धर्म का मर्म मिला हृदय में प्रभु का भक्तिभाव जगा अन्यथा सारा जीवन व्यर्थ गवायाँ आडंबर में फस सिर्फ पाप कमाया कुछ तो अपने अंदर झाकों अपना ईश्वर खुद पहचानों तुझमे तुमको ईश्वर मिल जायेगे अंतरभेद सभी पल में मिट जायेगें ।। नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर ??? -अभिषेक जैन सा-परिवार
  5. आ। श्री। 108 आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण कमलों में कोटि-कोटि नमन-वन्दन-प्रणाम नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर ??? -अभिषेक जैन सा-परिवार जो निकल पड़ें है चरण-कमल सौभाग्य जागने वाला है जहाँ-जहाँ गुरुवर पग रख दे धरा पर सुखामृत रूपी स्वर्ण बरसने वाला है।। नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर ??? -अभिषेक जैन सा-परिवार
  6. आ। श्री। 108 आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण कमलों में कोटि-कोटि नमन-वन्दन-प्रणाम नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर ??? -अभिषेक जैन सा-परिवार गुरु दीप है गुरु दीप्ती स्व प्रकाशित जग उजियारा अन्तर्मन निर्मल चित्त है पावन सत्य धर्म के सदा प्रवर्तक सयंम पथ शिवगामी हो त्याग तपस्या के तीर्थ तुम्हीं हो अन्तरयामी शिव पथगामी अभिरामी हो अज्ञान तम के दूर करन को आप ही मात्र सहारा हो सच्चे साधक अविरल योगी कलयुग के वीर तुम्हीं महावीर तुम्हीं नमन तुझें है मेरे गुरुवर मुझ पापी पर थोड़ी कृपा करे अज्ञान रूप जो अँधियारे ज्ञान ज्योत से दूर करें बस यही अरज है यहीं कामना भक्तिमय शुभ भावना तुम चरण शरण की अभिलाषा प्रभु आप हरो सब पीर जगत की स्वीकार करो मुझे दासा।। सविनय नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर -अभिषेक जैन सा-परिवार
  7. ?आ।श्री।? ?108 आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण कमलों में सत-सत नमन, वंदन, अभिनंदन? नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर ??? -अभिषेक जैन सा-परिवार नित पापों में डूबा गुरुवर अन्तर्मन मेरा मलिन रहा जब से गुरुवर तुझको देखा अशुचिता का अहसास हुआ हूँ पतित प्रभु, किंतु फिर भी गुरुवर शरण तिहारी आया हूँ मुझ पापी पर उपकार करो यह भाव संजोकर लाया हूँ उध्धार करों मेरा गुरुवर, कुछ अन्तर्मन की बगिया खिल जावे जो पाप तिमिर का अन्धियारा गुरु दर्शन से सब मिट जावे जब से तुमरी शरण गही, मानस मेरा कुछ शुद्ध हुआ राग-द्वेष-मद-मोह की जकड़न प्रभु आशीष से थोड़ी शिथिल हुई नित अशीष पाऊँ तेरा गुरुवर तुम चरण कमल का दास हुआ तेरे पद-पंकज की रज पा, मन भक्ति-भाव में तुमरी लीन हुआ।। सविनय नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर ????????? -अभिषेक जैन सा-परिवार
  8. आ।श्री। 108 आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण कमलों में मेरा परिवार सहित बारम्बार नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर ????????? -अभिषेक जैन सा-परिवार चहचहाती मधुरिम स्वर में धरती माँ प्यारी श्रेष्ठ पुत्र के पग रखने से महकी धरा है सारी पुष्प सुमन सब बिछने को आतुर चरण कमल जहाँ पड़ जाते आप श्रेष्ठ सुधी साधक जीव दयामय सोच-सोच अपने कदम बड़ाते जहां दृष्टि पड़ जाये प्रभु की वो सब पावन हो जाता मिट्टी भी सोना बन जाती फसलें गाती लह- लहाती सत्य आप जैसा साधक गुरुवर क्या कोई और जगत में त्याग तपस्या सयंम के तीरथ हो गुरुवर आप स्वयं में किन शब्दों में वयां करुँ गुरुवर अगम महिमा आपकी शब्दातीत लब्ज़ स्वयं व्याकुल हो उठते आपके गुण- स्तवन में प्रभु जगदीश मैं लघु बुध्दि नहीं मुझें कुछ ज्ञान निकल पड़ा हूँ किंतु भक्ति वश कहने जो अतुलनीय अकथनीय शब्दातीत भक्तिमय शुभ भावों से भरी गगरिया उड़ेलु निश- दिन प्रभु चरणों पर बस इतना दो आशीष गुरुवर करो मुझें स्वीकार लगाओं मेरा बेड़ा भव से पार बीच भवर में फसी है मेरी नैया प्रभु आप ही मेरे तारणहार आप ही इस जग-सागर में खिवैया ।। सविनय नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर ????????? -अभिषेक जैन सा-परिवार
  9. ?प्रभु महावीर? आचार्य भगवन 108 आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण कमलों में सविनय कोटि-कोटि नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु ????????? ???मेरे जीवन की शायद पहली कुछ पंक्तियाँ जो तब मेरे हृदय में अनायास उद्घाटित हुई थी, जब मैं शायद कक्षा 6 वी -7वी में अध्यनरत था। अपने नवीनतम रूप में सादर समर्पित ??? -अभिषेक जैन स-परिवार मुझें वीर से मिला दो महावीर से मिला दो चरणों में प्रभु थोड़ी- थोड़ी जगह दिला दो अज्ञान के अँधेरे प्रभु -ज्योत से मिटादो सूना मेरा है जीवन सन्मार्ग पे लगादो भवर में फसी है नैया भव-पार तुम लगादो अपनी शरण में लेकर जीवन सरल बना दो दुख-दर्द ने है घेरा सर्वत्र है अँधेरा कुछ भी समझ न आये प्रभु थोड़ी मुझें कृपा दो मानव बनें है दानव सद्भावना जागा दो सुखी प्रेम-नदियाँ नीर प्यार का बहादो लुटती धरा-धरा है रोती वसुंधरा है भारत माँ भी व्याकुल पापों का अन्त न दिख रहा है प्रभु आप ही शरण है भव-सागर तारण-तरन है बस चरणों में यही विनती मुझें दास तुम बना लो मुझें वीर से मिलादो महावीर से मिलादो चरणों में प्रभु थोड़ी थोड़ी जगह दिला दो ।। सविनय नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु ????????? -अभिषेक जैन स-परिवार ⚘⚘⚘??????
  10. आ।श्री। 108 आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण कमलों में मेरा साष्टान्ग नमन, वंदन, अभिवादन...नमोस्तुते नमोस्तुते नमोस्तुते ??? -अभिषेक जैन सा-परिवार विपत्ती जो भी जीवन में स्वत: ही दूर हो जाती गुरुवर आपकी छबी लख मुस्कुलें पार हो जाती मधुर मुस्कान मय चहरा मन के झरोखों से जब आँखो में घिरता है समझ लो जिन्दगी की खूबसूरती का अहसास होता है अभी मंजिल बहुत है दूर मुझें खुद को ही पाना है स्वयं में डूबकर मुझको प्रभू तुझ में खुदको डुबाना है ये वक़्त का दरियां यू ही चंचल रेत सा फिसले कुछ पल मुझें गुरुवर तुम सम बिताना है यही आराधना मेरी यहीं मेरी तमन्ना है यही आरजू दिल की तुझें सासों में बसाना है संसार सागर से गुरुवर उस पार जाना है बस इक शरण तेरी तेरा ही आसरा गुरुवर तेरी ही भक्ति में मुझें बस डूब जाना है।। सविनय नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर ????????? -अभिषेक जैन सा-परिवार
  11. आ।श्री। 108 आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी मुनि महाराज को मेरे सत-सत नमन-वंदन-अभिनंदन...नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर ??? -अभिषेक जैन सा-परिवार नमन करुँ गुरुदेव को शीश नवा प्रतिदिन मन वच काय से पूजित सदा आप रहे सदा निर्ग्रन्थ परिग्रह का लेश न लीन स्वयं में आप ऐसे गुरुवर को सदा समर्पित मन के निर्मल भाव।। नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर -अभिषेक जैन सा-परिवार
  12. आ।श्री। १०८ आचार्य गूरुवर श्री विद्यासागर जी के चरण कमलों में कोटि-कोटि नमन-वंदन-अभिनंदन सविनय नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु -अभिषेक जैन स-परिवार वैराग्य के शुभ भाव गूरुवर हृदय में सदा पलते रहे निज आत्मा से मिलन के शुभ दीप नित-प्रति जलते रहे प्रभु से मिलन की आश विश्वास प्रभु बस आपकों पाकर हुआ और मेरा मलिन मन कुछ जरा-सा पावन हुआ आपसे स्नेह और आशीष की बस चाह है आपकी शुभ शरण गूरुवर मोक्ष का उपाय है || सविनय नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु -अभिषेक जैन स-परिवार
  13. देह 108 आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरणों में सत-सत नमन-वंदन, नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर ??? सविनय नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर अभिषेक जैन सा-परिवार संसार के सब बंधनो के मोह-माया जाल से प्राणी सदा बेचैन रहता मान खुद को देहमय भ्रम में सदा रहता भटकता, भूल निज आत्मा अब समय है चेत जा, ध्या अनित्य भावना अशरणमय इस जगत में स्व-आत्मा ही शुभ शरण है दुखमयि सुख आभासी जगत की छणिक निधियाँ चाह प्राणी त्याग दे गुरु चरण में शीश धरकर आत्म कल्याण की शुभ राह ले, मोक्ष रूपी लक्ष्मी वर ले देह से विदेह जा प्रभु भक्ति वश आत्मा के सुरमयि स-हृदय गीत गा।। सविनय नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर अभिषेक जैन सा-परिवार
  14. देह 108 आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरणों में सत-सत नमन-वंदन, नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर ??? संसार के सब बंधनो के मोह-माया जाल से प्राणी सदा बेचैन रहता मान खुद को देहमय भ्रम में सदा रहता भटकता, भूल निज आत्मा अब समय है चेत जा, ध्या अनित्य भावना अशरणमय इस जगत में स्व-आत्मा ही शुभ शरण है दुखमयि सुख आभासी जगत की छणिक निधियाँ चाह प्राणी त्याग दे गुरु चरण में शीश धरकर आत्म कल्याण की शुभ राह ले, मोक्ष रूपी लक्ष्मी वर ले देह से विदेह जा प्रभु भक्ति वश आत्मा के सुरमयि स-हृदय गीत गा।। सविनय नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर अभिषेक जैन सा-परिवार
  15. आचार्य श्री जी ????????? सन्त शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण कमलों में कोटि-कोटि नमन-वन्दन नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर -अभिषेक जैन सा-परिवार मैनें ईश्वर को नहीं देखा न ही उन्हें जाना, पहचाना, या शायद माना फिर भी कुछ तो है, जो हम सबको जोड़े हुए है, प्रेम-स्नेह के धागे बोये हुए है तभी शायद ये जीवन चल रहा है, भले ही हर पल ये मन हमें छल रहा है फिर भी गुरुवर आपमें प्रभु की छबी साफ दिखती है शायद ईश्वर भी आप का ही सर्वोत्कृष्ट रूप हो, आप के ज्ञान आपकी त्याग-तपस्या का सर्वोतम फल हो क्योंकि यदि आप नहीं तो जग में फिर कोई नहीं अत: आपकी ही शुभ शरण का अनुसरण मेरे जीवन का लक्ष्य है, निश्चित यहीं मोक्ष का मार्ग है, आप की भक्ति ही शाश्वत सुखों का द्वार है, संसार जाल से मुक्ति का सुंदर-सरल उपाय है, इसीलिये प्रभु मैं आपके चरण कमलों का दास हूँ, आपकी सेवा कर सकूँ, कुछ आपसा बन सकूँ, नियम-सयंम पथ अपनाऊ गुरुवर आपका ही रूप ध्यायूँ यहीं मुझ सेवक की आश है, आप पर पूर्ण विश्वास है।। सविनय नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुवर ????????? अभिषेक जैन स-परिवार
×