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Saurabh Jain

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आचार्य श्री विद्यासागर दिगंबर जैन पाठशाला

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  1. Version 1.0.0

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    43 tatvarth sutra.pdf आपसे निवेदन - आप अपना अकाउंट इस वेबसाइट पर जरूर बनाये ताकि हम आपको और ग्रंथो की सुचना सीधे मेल पर दे सके
  2. संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज को मेरा शत शत नमन ! नमोस्तु गुरुवर - सौरभ जैन जयपुर आप सभी से निवेदन इस पोस्ट पे कमेंट करके अपने भाव प्रकट करें - गुरुवर को नमोस्तु के रूप में अपनी भावांजलि प्रकट करें !
  3. 1. संयम स्वर्ण महोत्सव - 50 वें मुनिदीक्षा महोत्सव के कार्यक्रम https://vidyasagar.guru/forums/topic/34-vidyasagar-guru/ 2. संयम स्वर्ण महोत्सव - 50वें मुनिदीक्षा दिवस के कार्यक्रम https://vidyasagar.guru/announcement/1-1 3. संयम स्वर्ण महोत्सव शोभायात्रा/प्रभात फेरी https://vidyasagar.guru/calendar/event/1-1 4. झाँकियाँ एवं कट आउट यहाँ से डाउनलोड करें https://vidyasagar.guru/files/file/4-1 5. नारे https://vidyasagar.guru/forums/topic/12-vidyasagar-guru/ 6. संयम कीर्ति स्तम्भ - समस्त जानकारी https://vidyasagar.guru/clubs/7-1 7. आर्किटेक्चर विवरण - कीर्ति स्तम्भ https://vidyasagar.guru/forums/topic/11-vidyasagar-guru/ 8. जुड़ें महत्वपूर्ण गतिविधियों से https://vidyasagar.guru/clubs/?f1[0]=0 9. आचार्य श्री की प्रेरणा से संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी :https://vidyasagar.guru/clubs/?f1[0]=1 10. प्रभातफेरी के लिए अनुमति का आवेदन -पत्र जुलूस के लिए प्रशासनिक अनुमति हेतु आवेदन पत्र.docx 11. आचार्यश्री की सूक्तियाँ (कोटेशन) https://vidyasagar.guru/forums/topic/33-vidyasagar-guru/ आचार्यश्री की सूक्तियाँ (कोटेशन).docx 12. आचार्यश्री जी के हाई रिजोल्यूशन में चित्र और वॉलपेपर 1.0 13. शोभायात्रा और प्रभातफेरी के लिए बैनर Download cdr files https://vidyasagar.guru/files/file/8-banner-sanyam-swarn-mahotsav घर पर लगाने के लिए बैनर की cdr फाइल 1.0.0 https://vidyasagar.guru/files/file/13-1
  4. Version 1.0.0

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    Biography / Jeewan Parichay in English of Santshiromani Acharya Vidyasagar Ji Maharaj Click the download button to download the pdf file Hindi Version available here
  5. सारे विश्व की सच्ची शान, विद्यासागर गुरू महान। विद्या गुरू को देख लो, त्याग करना सीख लो। विद्यासागर संत महान, चलते-फिरते ये भगवान। विद्यागुरू का सच्चा द्वार, हर जीवों से करते प्यार। जब तक सूरज चाँद रहेगा, विद्यासागर नाम रहेगा। अखिल विश्व में गूँजे नारा, विद्यासागर गुरू हमारा। विद्यागुरू का क्या संदेश, रहो स्वदेश, न जाओ विदेश। जगमग चमकें विद्यासागर, भरते सबकी खाली गागर। इंडियो छोड़ो, भारत बोलो, विद्यासागर की जय बोलो। विद्यासागर एक सहारे, जग में रहते जग से न्यारे। सुर नर इंद्र करे सब पूजा, विद्यासागर सम न दूजा। विद्यासागर संकट हारी, नैया सबकी पार उतारी। विद्यासागर नाम जो ध्याता, पापी भी भव से तिर जाता। ज्ञान के सागर, विद्यासागर। अध्यात्म के सागर, विद्यासागर। विद्यासागर नाम है उनका, गौ रक्षा का भाव है जिनका। नील गगन में एक सितारा, विद्यागुरू को नमन हमारा। जिनका कोई नहीं जवाब, विद्यासागर लाजवाब। विद्यासागर जिसे निहारें, नैया उसकी पार उतारें। जग जीवों के पालन हारे, विद्यासागर गुरू हमारे। विद्यासागर देकर ज्ञान, हर लेते सबके अज्ञान। विद्यागुरू का सच्चा द्वारा, सबसे अच्छा, सबसे न्यारा। एक ही नारा, एक ही नाम, विद्या गुरूवर तुम्हें प्रणाम। एक दो तीन चार, विद्या गुरू की जय जयकार। पांच छः सात आठ, विद्या गुरू के प्रभु सम ठाठ। नौ दस ग्यारह बारह, विद्यासागर जग में न्यारा । तेरह चौदह पंद्रह सोलह, बच्चा बच्चा गुरू की जय बोला। सत्तरह अठारह उन्नीस बीस, विद्यागुरू को नवओ शीश। बिना तिथि के करें विहार, विद्यासागर सदा बहार। अखिल विश्व में गूंजे नाद, विद्यासागर जिंदाबाद। विद्यासागर किसके हैं, जो भी ध्यावे उसके हैं। पाप छोड़ के पुण्य कमाओ, पूरी मैत्री तुम अपनाओ। जैन जगत के कौन सितारे, विद्यासागर गुरू हमारे । विद्यागुरू के वचन महान, जिससे रक्षित हिन्दुस्तान। विद्यागुरू से करते यदि प्यार, तो हाथ करघा को करो स्वीकार । श्रीमति माँ का प्यारा लाला, विद्यासागर नाम निराला । भव के दुख को हरने वाले, विद्यासागर गुरू निराले। भव्य जनों के हृदय खिलाते, मोक्षमार्ग गुरुवर दिखलाते। नैय्या मेरी पार लगा दो, विद्यासागर पास बुला लो। चेतन रत्नों के व्यापारी, विद्यासागर संयम धारी। विद्यासागर महिमावान, गुरू हैं कलियुग के भगवान। हर माँ का बेटा कैसा हो, विद्यासागर जैसा हो। छोड़ो हिंसा सीखो प्यार, विद्या गुरू की ही पुकार। मूकमाटी के रचनाकार, संयम का करते व्यापार। विद्यासागर मधुर अपार, बाकी सागर का जल क्षार। संयम उत्सव गुरू का आया, विद्यासागर नाम है भाया। विद्यागुरू गये बीना बारह. खुल गई दुग्ध शांतिधारा। बड़े बाबा के भक्त अनोखे, विद्यासागर जग में चोखे । विद्यागुरू रत्नों की खान, होठों पर रहती मस्कान। संघ को गुरुकुल बनाया है, गुरु का वचन निभाया है। भावनाओं के हैं आकाश, विद्यागुरू सबके विश्वास। भक्तों के दुःख हरने वाली, गुरुवर की मुस्कान निराली। त्याग तपस्या प्रेम के सागर, भक्तों के गुरु विद्यासागर। विद्यासागर गुरु हमारे, श्रमण संस्कृति के श्रमण निराले। विद्यासागर जहां थम जायें, उसी जगह तीरथ बन जाये। विद्यागुरु का कहना मानों, पूरी मैत्री तुम अपना लो। विद्यागुरु का कहना है, स्वावलंबी रहना है। एक चवन्नी चांदी की, जय हो विद्यावाणी की। विद्यासागर अनियत बिहारी, पीछे पागल जनता सारी। चाहे हो कंगाल फकीरा, विद्यासागर हरते पीडा। विद्यासागर भव सागर तीरा, हरते सबकी भव की पीडा। मल्लप्पा, श्रीमति सुत प्यारे, विद्यासागर जग से न्यारे । विद्यागुरु जग से वैरागी, ज्ञानचरण, शिवपथ अनुरागी। विद्यासागर वो कहलाया, जिसने दया धर्म सिखलाया। विद्यासागर लगते प्रभु वीरा, रत्नत्रय से चमकित हीरा। विद्यासागर किरपा करते, रत्नत्रय से झोली भरते। जिसके सिर गुरु हाथ होगा, बाल न बाका उसका होगा। ऊपर नभ में सूरज चमके, विद्यासागर जग में चमके(दमके)। धर्म ध्वजा गुरु फहराते, संत शिरोमणि कहलाते। बड़भागी शरणा पाते. विद्यागुरु सबको भाते। अंधों की लाठी बन जाते, विद्यागुरु पथ शुल हटाते । धीर, वीर, गंभीर शूर हैं, विद्यासागर कोहिनूर हैं। सूर्य गगन में आग सहित है, विद्यासागर आग रहित हैं। चाँद रात में दाग सहित है, विद्यासागर राग रहित हैं। विद्यागुरु की कोमल काया, फिर भी छोड़ी जग की माया। रथ, घोड़े न पालकी, जय मल्लप्पा लाल की। स्वर्ण जयंती गुरु की आई, घर-घर में है खुशियाँ लाई । जैन धर्म की जान है. विद्यागरु भगवान हैं।
  6. मेरी wife अर्पणा सौरभ जैन जयपुर ने बनाया डिलाइटफुल मार्वल केक Thank You Vaishali Bhabhi
  7. दिगम्बर जैन आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने (Japanese Haiku, 俳句 ) जापानी हायकू (कविता) की रचना की हैं | हाइकू जापानी छंद की कविता है इसमें पहली पंक्ति में 5 अक्षर, दूसरी पंक्ति में 7 अक्षर, तीसरी पंक्ति में 5 अक्षर है। यह संक्षेप में सार गर्भित बहु अर्थ को प्रकट करने वाली है। महाकवी आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने लगभग 700 हायकू लिखे हैं, जो अप्रकाशित हैं। कुछ हायकू इस प्रकार हैं :
  8. जय जिनेन्द्र, जब हम विद्यालय जाते थे , तो अपनी उपस्थिति दर्ज कराते थे , हमे सोचा क्यों न अपनी बचपन की यादें ताज़ा करें. अगर आप पाठशाला में पढ़ रहे हैं, तो अपनी उपस्तिथि जरूर दर्ज करार्यें Attendance Please .... 1 सबसे पहले लॉग इन करें 2 फिर पाठशाला ज्वाइन करे https://vidyasagar.guru/clubs/324-आचार्य-श्री-विद्यासागर-दिगंबर-जैन-पाठशाळा/ 3 फिर यहाँ लिखें
  9. रामटेक में विराजमान आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का ससंघ पिच्छिका परिवर्तन समारोह आज 25 अक्टूबर को दोपहर 1:30 बजे से होगा.
  10. आप सभी को संयम स्वर्ण महोत्सव समिति एवं www.Vidyasagar.guru वेबसाइट की तरफ से दिवाली एवं नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं | इस त्योहारी माहोल में आपके मन में उत्साह और उमंग देखते ही बनता हैं | आशा करते हैं, यह नव वर्ष आपके जीवन पथ के संकल्पों को शक्ति प्रदान करेगा , लक्ष्यों की पूर्ती कराएगा अथवा करने में प्रोत्साहन देगा | इस वर्ष हम सभी बना रहे हैं संयम स्वर्ण महोत्सव, हमारे गुरुवर आचर्य विद्यासागर जी का ५० व दीक्षा वर्ष, इसी उपलक्ष में आचार्य श्री के मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद से चल रहे सभी प्रकल्पो को एक सूत्र में www.vidyasagar.guru पर संजोने का प्रयास चल रहा हैं | इस वेबसाइट के प्रति आपके विश्वास के लिए आप सभी को ह्रदय से साभार (धन्यवाद) | एक निवेदन - दीपावली हमारा त्यौहार है इस त्यौहार को हैप्पी दीपावली ना बोलकर महोत्सव के नाम से मनाएं या कहें भगवान के निर्वाण कल्याण महोत्सव की सभी को बहुत-बहुत बधाई हो क्योंकि हम जैन है और इस दिन हमारे अंतिम शासन नायक श्री महावीर स्वामी को मोक्ष की प्राप्ति एवं श्री इंद्रभूति गौतम गणधर को केवल ज्ञान की प्राप्ति इस दिन हुई थी इसलिए हमें हैप्पी दिवाली ना कहकर निर्वाण महोत्सव की बधाई देनी चाहिए आप सभी से निवेदन है कि आप अपने संबंधी रिश्तेदारों से वीर निर्वाण महोत्सव की बधाई कहेंगे भगवान महावीर के निर्वाण कल्याण महोत्सव की सभी को बहुत-बहुत बधाई | जय जिनेंद्र आप सभी अपने सन्देश नेचे यही पर लिखे |
  11. बालक विद्याधर का जन्म सन 1946 में शरद पूर्णिमा के दिन माँ श्रीमती की कुक्षी से हुआ ... बचपन से ही धर्म मार्ग पर सदैव बढ़ते हुए इन्होंने आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज से दीक्षा पाई एवं आज हम सभी के समक्ष आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के रूप में विराजमान हैं.. 290 से अधिक मुनि एवं आर्यिकाओं को गुरुदेव द्वारा दीक्षा दी गई है .. दिगंबर सरोवर के राजहंस आचार्य भगवान् का वर्तमान में चातुर्मास रामटेक नागपुर सानंद चलरहा है..| आचार्य भगवंत के चरणों मे शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर शत शत नमन |
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