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दस लक्षण पर्व प्रतियोगिता ×
मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
  • अध्याय 7 : सूत्र 36

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    अतिथि-संविभाग व्रत के अतिचार कहते हैं-


    सचित्तनिक्षेपापिधानपरव्यपदेशमात्सर्यकालातिक्रमाः ॥३६॥



    अर्थ - सचित्त निक्षेप (सचित्त कमल के पत्ते वगैरह पर रखकर आहार दान देना), सचित्त अपिधान (आहार को सचित्त पत्ते वगैरह से ढक देना), परव्यपदेश (स्वयं दान न देकर दूसरे से दिलवाना अथवा दूसरे का द्रव्य उठा कर स्वयं दे देना), मात्सर्य (आदरपूर्वक दान न देना अथवा अन्य दाताओं से ईष्र्या करना), कालातिक्रम (मुनियों के अयोग्य काल में भोजन करना), ये पाँच अतिथि–संविभाग व्रत के अतिचार हैं।


    English - Placing the food on things with organisms such as green leaves, covering it with such things, offer food donated by others inform the same, offer food without respect, and offer food in an untimely manner, are the five transgressions of a vow to partake food after feeding an ascetic.

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