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नव आचार्य श्री समय सागर जी को करें भावंजली अर्पित ×
मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
  • अध्याय 5 : सूत्र 26

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    Vidyasagar.Guru

    अब स्कन्धों की उत्पत्ति कैसे होती है, यह बतलाते हैं-

     

    भेद-संघातेभ्यः उत्पद्यन्ते ॥२६॥

     

     

    अर्थ - भेद, संघात और भेद-संघात से स्कन्धों की उत्पत्ति होती है। स्कन्धों के टूटने को भेद कहते हैं। भिन्न-भिन्न परमाणुओं या स्कन्धों के मिलकर एक हो जाने को संघात कहते हैं।

     

    English - The stocks are formed by division (fission), union (fusion) and division-cum-union.

     

    जैसे दो परमाणुओं के मिलने से द्विप्रदेशी स्कन्ध बनता है। इसी तरह तीन, चार, संख्यात, असंख्यात और अनन्त परमाणुओं के मेल से उतने ही प्रदेशी स्कन्ध बनता है। तथा एक स्कन्ध में दूसरे स्कन्ध के मिलने से या अन्य परमाणुओं के मिलने से भी स्कन्ध बनता है। इन्हीं स्कन्धों के टूटने से भी दो प्रदेशी स्कन्ध तक स्कन्धों की उत्पत्ति होती है। इसी तरह एक स्कन्ध के टूटकर दूसरे स्कन्ध में मिल जाने से भी स्कन्ध की उत्पत्ति होती है।


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