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नव आचार्य श्री समय सागर जी को करें भावंजली अर्पित ×
मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
  • अध्याय 3 : सूत्र 11

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    Vidyasagar.Guru

    आगे इन सात क्षेत्रों का विभाग करने वाले छह पर्वतों का कथन करते हैं-

     

    तद्विभाजिनः पूर्वापरायता हिमवन्महाहिमवन्निषधनीलरुक्मिशिखरिणो

    वर्षधरपर्वताः ॥११॥

     

     

    अर्थ - उन क्षेत्रों का विभाग करने वाले छह पर्वत हैं, जो पूर्व से पश्चिम तक लम्बे हैं। हिमवन्, महाहिमवन्, निषध, नील, रुक्मि और शिखरी उनके नाम हैं। वर्ष अर्थात् क्षेत्रों के विभाग को बनाये रखने के कारण उन्हें ‘वर्षधर' कहते हैं।

     

    English - The mountain chains Himavan, Mahahimavan, Nishadha, Nila, Rukmi, and Shikhari, running east to west, divide these seven regions.

     

    विशेषार्थ - भरत और हैमवत क्षेत्र के बीच में हिमवन् पर्वत है, जो सौ योजन ऊँचा है। हैमवत और हरिवर्ष के बीच में महाहिमवन् है, जो दो सौ योजन ऊँचा है। हरिवर्ष और विदेह के बीच में निषध पर्वत है, जो चार सौ योजन ऊँचा है। विदेह और रम्यक क्षेत्र के बीच में नील पर्वत है, जो चार सौ योजन ऊँचा है। रम्यक और हैरण्यवत के बीच में रुक्मि है, जो दो सौ योजन ऊँचा है और हैरण्यवत तथा ऐरावत के बीच में शिखरी पर्वत है, जो सौ योजन ऊँचा है। ये सभी पर्वत पूर्व समुद्र से लेकर पश्चिम समुद्र तक लम्बे हैं।


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