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  • अध्याय 9 - तीर्थंकर महावीर

       (3 reviews)

    अनेक नामो को धारण करने वाले वर्तमान शासन नायक अन्तिम तीर्थंकर भगवान् महावीर का जीवन परिचय एवं चारित्र के विकास का वर्णन इस अध्याय में है।

     

    1. बालक महावीर का जन्म कहाँ हुआ था ?

    बालक महावीर का जन्म कुण्डग्राम (वैशाली) विहार में हुआ था। 


    2. तीर्थंकर महावीर के पाँच कल्याणक किस-किस तिथि में हुए थे?

    गर्भकल्याणक - आषाढ़ शुक्ल षष्ठी, शुक्रवार, 17 जून, ई.पू. 599 में।

    जन्मकल्याणक - चैत्र शुक्ल त्रयोदशी, सोमवार, 27 मार्च, ई.पू. 598 में।

    दीक्षाकल्याणक - मगसिर कृष्ण दशमी, सोमवार, 29 दिसम्बर, ई.पू.569 में।

    ज्ञानकल्याणक - वैशाख शुक्ल दशमी, रविवार, 23 अप्रैल, ई.पू.557 में।

    मोक्षकल्याणक - कार्तिककृष्ण अमावस्या, मङ्गलवार 15 अक्टूबर ई.पू. 527 में विक्रम सं.पूर्व 470 एवं शक पूर्व 605 में । (तीर्थ महा.और उनकी आचार्य परम्परा, भाग-1) 


    3. बालक महावीर कहाँ से आए थे?
    बालक महावीर अच्युत स्वर्ग के पुष्पोत्तर विमान से आए थे। 


    4. बालक महावीर के माता-पिता एवं दादा-दादी का क्या नाम था ?

    बालक महावीर की माता का नाम त्रिशला, पिता का नाम राजा सिद्धार्थ तथा दादा का नाम सर्वार्थ, दादी का नाम श्रीमती था।


    5. त्रिशला के माता-पिता एवं दादा-दादी का क्या नाम था ?

    त्रिशला की माता का नाम सुभद्रादेवी, पिताका नाम राजा चेटक, दादा का नाम राजा केक तथा दादी का नाम यशोमति था।


    6. राजा चेटक के कितने पुत्र एवं पुत्रियाँ थीं?
    राजा चेतक के दस पुत्र - धनदत्त, धनभद्र, उपेंद्र, सुदत्त, सिहद्त्त, सुकुम्भोज, अकम्पन, पतंगक, प्रभंजन और प्रभास तथा पुत्रियाँ- त्रिशला, मृगावती, सुप्रभा, प्रभावति, चेलना, ज्येष्ठा और चंदना। चेलना का अपर नाम वसुमति भी था।


    7. चेटक का अर्थ क्या होता है?

    अनेक शत्रुओं को चेटी या दास बना लेने के कारण वह चेटक कहलाने लगे।

     
    8. राजकुमार महावीर की दीक्षा स्थली, दीक्षा वन एवं दीक्षा वृक्ष का क्या नाम था ?

    राजकुमार महावीर की दीक्षा स्थली कुण्डलपुर, दीक्षा वन-षण्डवन एवं दीक्षा वृक्ष-शालवृक्ष था।

     
    9. राजकुमार महावीर को वैराग्य कैसे हुआ था ?

    राजकुमार महावीर को वैराग्य जातिस्मरण के कारण हुआ।


    10. मुनि महावीर की पारणा कहाँ एवं किसके यहाँ हुई थी ?

    मुनि महावीर की पारणा राजा कूल के यहाँ कूलग्राम में हुई थी।

     
    11. महावीर का वंश एवं गोत्र कौन-सा था ?
    महावीर का वंश- नाथ एवं गोत्र - काश्यप था।


    12. किस पालकी में बैठकर दीक्षा लेने गए थे?
    चन्द्रप्रभा पालकी में बैठकर दीक्षा लेने गए थे। 


    13. मुनि महावीर को केवलज्ञान कहाँ कौन से वृक्ष के नीचे हुआ था ?

    मुनि महावीर को केवलज्ञान षण्डवन/मनोहर वन (ऋजुकूला नदी) एवं शाल वृक्ष के नीचे हुआ था। 


    14. तीर्थंकर महावीर के समवसरण में मुनि, आर्यिकाएँ, श्रावक और श्राविकाएँ कितनी थीं?

    तीर्थंकर महावीर के समवसरण में 14,000 मुनि, 36,000 आर्यिकाएँ 1 लाख श्रावक और 3 लाख श्राविकाएँ थीं। 


    15. तीर्थंकर महावीर के मुख्य गणधर एवं मुख्य गणिनी एवं मुख्य श्रोता कौन थे?

    तीर्थंकर महावीर के मुख्य गणधर गौतम, गणिनी चंदना, श्रोता राजा श्रेणिक थे।

     

    16. तीर्थंकर महावीर के यक्ष-यक्षिणी का क्या नाम था ?

    तीर्थंकर महावीर के यक्ष गुहाक, यक्षिणी सिद्धायनी। 


    17. तीर्थंकर महावीर के कितने गणधर थे। नाम बताइए?

    तीर्थंकर महावीर के11 गणधर थे। इन्द्रभूत (गौतम), वायुभूति, अग्निभूति, सुधर्मास्वामी, मौर्य, मौन्द्र, पुत्र, मैत्रेय, अकम्पन, अंधवेला तथा प्रभास थे। 


    18. तीर्थंकर महावीर का प्रथम समवसरण कहाँ लगा था?

    तीर्थंकर महावीर का प्रथम समवसरण विपुलाचल पर्वत पर लगा था। 


    19. तीर्थंकर महावीर की देशना कितने दिन तक और क्यों नहीं खिरी ?

    तीर्थंकर महावीर की देशना 66 दिन तक नहीं खिरी क्योंकि गणधर का अभाव था। 


    20. तीर्थंकर महावीर की देशना कब खिरी थी?

    तीर्थंकर महावीर की देशना श्रावण कृष्ण प्रतिपदा, शनिवार 1 जुलाई, ई.पू. 557 में खिरी थी। 


    21. तीर्थंकर महावीर के समवसरण में राजा श्रेणिक ने कितने प्रश्न किए थे?

    तीर्थंकर महावीर के समवसरण में राजा श्रेणिक ने 60 हजार प्रश्न किए थे। 


    22. तीर्थंकर महावीर ने योग निरोध करने के लिए कितने दिन पहले समवसरण छोड़ा था ?

    तीर्थंकर महावीर ने योग निरोध करने के लिए दो दिन पहले समवसरण छोड़ा था। 


    23. तीर्थंकर महावीर को सम्यग्दर्शन किस पर्याय में हुआ था ?

    तीर्थंकर महावीर को सम्यग्दर्शन सिंह की पर्याय में हुआ था।   


    24. तीर्थंकर महावीर का तीर्थकाल कितने वर्षों का है?

    तीर्थंकर महावीर का तीर्थकाल 21 हजार 42 वर्षों का है। (ति.प.4/1285) 


    25. सिंह से महावीर तक के भव बताइए?

    सिंह, सौधर्मस्वर्ग में देव, कनकोज्वल राजा, लान्तव स्वर्ग में देव, हरिषेण राजा, महाशुक्र स्वर्ग में देव, प्रिय मित्र नामक राजपुत्र, बारहवें स्वर्ग में देव, नंदराजा, अच्युत स्वर्ग में इन्द्र और तीर्थंकर महावीर। 


    26. तीर्थंकर महावीर ने तीर्थंकर प्रकृति का बंध कब एवं कहाँ किया था?
    तीर्थंकर महावीर ने नंदराजा की पर्याय में जब संयम धारण किया था, तब प्रोष्ठिल गुरु के पादमूल में तीर्थंकर प्रकृति का बंध किया था। 


    27. सिंह को उपदेश देने वाले मुनियों के क्या नाम थे ?
    सिंह को उपदेश देने वाले मुनियों के नाम अमितकीर्ति एवं अमितप्रभ मुनि थे। 


    28. तीर्थंकर पार्श्वनाथ के निर्वाण पश्चात् कितने वर्षों के बाद बालक महावीर का जन्म हुआ था ?
    तीर्थंकर पार्श्वनाथ के निर्वाण के 178 वर्ष बाद बालक महावीर का जन्म हुआ था।

     

    29.तीर्थंकर महावीर के कितने नाम थे, नाम बताइए?
    1.वीर—जन्माभिषेक के समय इन्द्र को शंका हुई कि बालकइतने जलप्रवाहको कैसे सहनकोरेगा। बालक ने अवधिज्ञान से जानकर पैर के अंगूठे से मेरुपर्वत को थोड़ा-सा दबाया, तब इन्द्र को ज्ञात हुआ इनके पास बहुत बल है। इन्द्र ने क्षमा माँगी एवं कहा कि ये तो वीर जिनेन्द्र हैं।

    2.वद्धमान-राजा सिद्धार्थ ने कहा जब से बालक प्रियकारिणी के गर्भ में आया उसी दिन से घर, नगर और राज्य में धन-धान्य की समृद्धि प्रारम्भ हो गई, अतएव इस बालक का नाम वर्द्धमान रखा जाए।

    3.सन्मति - एक समय संजय और विजय नाम के दो चारण ऋद्धिधारी मुनियों को तत्व सम्बन्धी कुछ जिज्ञासा थी। वर्द्धमान पर दृष्टि पड़ते ही उनकी जिज्ञासा का समाधान हो गया तब मुनियों ने वर्द्धमान का नाम सन्मति रखा।

    4.महावीर-वर्द्धमान मित्रों के साथ एक वृक्ष पर क्रीड़ा (खेल) कर रहे थे, तब संगमदेव ने भयभीत करने के लिए एक विशाल सर्प का रूप धारण कर वृक्ष के तने से लिपट गया। सब मित्र डर गए, डाली से कूदे और भाग गए, किन्तु वर्द्धमान सर्प के ऊपर चढ़कर ही उससे क्रीड़ा करने लगे थे। ऐसा देख संगमदेव ने अपने रूप में आकर वर्द्धमान की प्रशंसा कर महावीर नाम दिया।

    5.अतिवीर-एक हाथी मदोन्मत्त हो किसी के वश में नहीं हो रहा था। उत्पात मचा रहा था। महावीर को ज्ञात हुआ तो वे जाने लगे, तब लोगों ने मना किया किन्तु वे नहीं माने और चले गए। हाथी महावीर को देख नतमस्तक हो सूंड उठाकर नमस्कार करने लगा। तब जनसमूह ने कुमार की प्रशंसा की और उनका नाम अतिवीर रख दिया।


    30. मुनि महावीर पर किसने उपसर्ग किया था ?
    मुनि महावीर पर उपसर्ग भव नामक यक्ष अथवा स्थाणु नाम रुद्र ने किया। ऐसे दो नाम पुराणों में आते हैं।
     

    Edited by admin



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    Kshama Jain

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       4 of 4 members found this review helpful 4 / 4 members

    Very informative.

     

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    subodh  patni

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       1 of 1 member found this review helpful 1 / 1 member

     जय जिनेंद्र सभी को दीपावली की एवं भगवान महावीर स्वामी के  परिनिर्वाण महोत्सव उत्सव की बहुत-बहुत बधाई महावीर स्वामी के बारे में दी गई जानकारी के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद

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    रतन लाल

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    अति सुन्दर प्रस्तुति

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