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हर पल तेरा आशीष मांगू, मेरे गुरु मेरे भगवान।

नयनामृत से अमर करो अब,हॄदय विराजो मम भगवान।

पावन कर से आशीष देदो, मै सब कुछ पा जाऊँगा।

मोहक मुस्काने अधरों की, मिलें अमर हो जाऊँगा।

पद रज मिल जाये गर तेरी, रोग शोक मिट जाएंगे।

पड़गाहन कर भक्ति कर लूँ, स्वर्ग धरा पर आएंगे।

पथ पर चलकर, सुरभि पाऊं, इंद्र प्रस्थ मेरा होगा।

रोम रोम में तुम्हें बसाऊ, जन्म सफल मेरा होगा।

मन मंदिर में सदा बिठाऊँ, हर सपना पूरा होगा।

श्रीमती ऊषा अरुण जैन

ललितपुर, भोपाल, फरीदाबाद

 

 

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आचार्य श्री के चरणो में

         त्रिकाल वंदन कोटीश नमन

 

'इस युग का सौभाग्य रहा कि इस युग में गुरुवर जन्मे,

हम सब का सौभाग्य रहा गुरुवर के युग में हम जन्मे'

     

 

          गुरु जो खुद ज्ञान की ज्योती है

       हमारे जीवन में प्रकाश फैलाते है

            सन्मार्ग की ओर ले जाते है

      उनके आशिष से मन की शांती मिलती है

 

कृपा तेरी जो हमपे, भुला पायेगें कैसे,

जंग ये जो जिवन की लढेंगे तेरे बिन कैसे

     अंधेरा जब घना छाये,तो सुरज बन के ही आये,

     मेरे जिवन में आशा की ,किरण बस तूही तो लाए

गुरु को करु है वंदन ,तो जीवन बन जाए मधुबन,

वो रहते हर दम पास, है विश्वास

     हिमाचल सा तु है उंचा, समंदर से भि तु है गेहरा,

     रुप तु तो है ईश्र्वर का,तुझसे है ये जग सारा

वो तेरे नाम की माला,करे शितल हर एक ज्वाला,

चांद तैसी शितल छाया,की जी अद्धभूत तुने पाया

     सफल हो मेरा जीवन,तु मेरे जीवन का दर्पण,

     वो रहते हर दम पास, है विश्वास

 

 

 

    

 

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बारम्बार नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरूवर! 

 गुरू कीक्रृपा ही हमेेशा बनी रहे।???

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आसरा इस जहां का मिले न मिले-2

मुझको तेरा सहारा सदा चाहिए

चाँद तारे फलक पर दिखें न दिखें-2

मुझको तेरा नजारा सदा चाहिए

आसरा..................

 

यहां खुशियाँ हैं कम और ज्यादा हैं गम-2

जहां देखो वहीं है, भरम ही भरम

मेरी महफिल में शमाँ जले न जले-2

मुझको तेरा उजाला सदा चाहिए।

आसरा.............. 

 

कभी वैराग्य है कभी अनुराग है-2

यहाँ बदले है माली वहीं बाग है।

मेरी चाहत की दुनिया बसे न बसे-2

मेरे दिल में बसेरा तेरा चाहिए।

आसरा.........................

 

मेरी धीमी है चाल और पथ है विशाल-2

हर कदम पर मुसीबत है अब तो संभाल

मेरे पैर थके हैं चलें न चलें-2

मुझको तेरा इशारा सदा चाहिए

आसरा...............

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