Jump to content
मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
  • 66. डूबते प्राण : आतंक के

       (0 reviews)

    फलस्वरूप आतंकवाद के तन की शक्ति कमजोर पड़ने के कारण वह कुम्भ सहित परिवार को ईर्ष्या भाव से देखने लगी, मन की शक्ति स्वयं पर क्रोधित हुई और वचन की शक्ति पराजित-सी चुप पड़ गई । किन्तु उसकी धोखा देने रूप वंचन शक्ति नष्ट नहीं हुई और पहले के समान ही पुनः परिवार को नष्ट करने हेतु एक बहुत बड़ा-सा मछली पकड़ने का जाल परिवार के ऊपर फेंकने को तैयार होता है आतंकवाद, कि धरती के उपासक पवन से यह देखा नहीं गया और वह प्रलयकारी चक्रवात का रूप धरता एक ही झटके में झट से दल के हाथों से जाल को सुदूर शून्य आकाश में फेंक देता है, सो ऐसा लगा रहा है मानो प्रकाशपुंज प्रभाकर, सूर्य को ही पकड़ने का प्रयास चल रहा है।

     

    झटका लगने से दल के पैर निराधार हुए और वे चक्कर खा कई गोलाटे लेते हुए सिर के बल नाव में ही गिर पड़े। उसके सामने अन्धेरा छा गया, नेत्र बन्द हो गये, हृदय का स्पन्दन/ धड़कना मन्द हो गया, रक्त-गति में अन्तर आने से मूच्छ आ गई । इतने पर भी उनकी पूँछे पूर्ववत् तनी हैं, बिना मूर्छित हुए। दल के मुख से झाग निकलने लगा, लग रहा है प्राण निकल से गए और नाव भी डाँवाडोल हो गई, अपनी ही परिक्रमा लगाती रही वह। नाव के और सभी के प्राण लगभग डूबने को हैं।

     

    घटित घटना को देख अपनी अति की समाप्ति के लिए कुम्भ ने संकेत दिया पवन को, सो श्रद्धेय स्वामी की सेवा, आदेश का पालन ही सुखमय जीवन का मूल कारण है सेवक लिए, ऐसा मान पवन संयत बना और नाव भी परिवार को तीन परिक्रमा दे पूर्व स्थिति पर आती है। दुर्घटना टलने से सम्पूर्ण माहौल ही प्रसन्न हुआ। इतना होने के बाद भी जिस प्रकार अनंगसरा की अंजुलि के जल सिंचन से लक्ष्मण की मूच्र्छा टूटी थी वैसी ही सरिता के शीतल जल कणों का स्पर्श पा आतंकवाद की मूच्र्छा दूर हुई। फिर क्या पूछो, लक्ष्मण की भाँति उबल उठा आतंक फिर से? और कहता है-


    Previous Page: Next Page:
     Share


    User Feedback

    Create an account or sign in to leave a review

    You need to be a member in order to leave a review

    Create an account

    Sign up for a new account in our community. It's easy!

    Register a new account

    Sign in

    Already have an account? Sign in here.

    Sign In Now

    There are no reviews to display.


×
×
  • Create New...