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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
  • नयन-नीर

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    प्रभु के प्रति किस में ?

    इस में...

    प्रीति का वास है

    प्रतीति पास है

    पर्याप्त है यह,

    अब इसकी

    नयन-ज्योति

    चली भी जाय

    कोई चिन्ता नहीं,

     

    किन्तु

    कहीं ऐसा न हो,

    ........कि

    प्रभु-स्तुति से पूर्व

    प्रभु-नुति से पूर्व

    इसके

    करुण-नयनों में

    नीर कम पड़ जाय |

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