Jump to content
मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
  • आस अबुझ

       (0 reviews)

    एक हाथ में दीया है

    एक हाथ की ओट दिया

    हवा से बुझ न पाये,

    अपना श्वाँस भी

    बाधक बना है आज,

    टिम टिमाता जीवित है

    जीवन - खेल

    स्वल्प बचा है

    दीया में तेल  

    तेल से बाती का सम्बन्ध भी

    लगभग टूट चुका है,

     

    जलती-जलती

    बाती के मुख पर

    जम चुका है

    कालुष कालिख मैल,

    श्वास क्षीण है

    दास दीन है

    किन्तु आस अबुझ

    नित-नवीन

    प्रभु-दर्शन की

    कब हो मेल

    कब हो मेल...?

     Share


    User Feedback

    Create an account or sign in to leave a review

    You need to be a member in order to leave a review

    Create an account

    Sign up for a new account in our community. It's easy!

    Register a new account

    Sign in

    Already have an account? Sign in here.

    Sign In Now

    There are no reviews to display.


×
×
  • Create New...