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संयम स्वर्ण महोत्सव

महाकविआचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के 46 वें समाधि दिवस पर शत शत नमन

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ब्रह्मचारी विद्याधर को जिन पावन करकमलों ने मुनि - आचार्य विद्यासागर बनाया ऐसे दादागुरु महाकवि आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज का आज  46वां  समाधि दिवस पर शत शत नमन 

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क्या महानता को शब्दो मे पिरोया जा सकता है? जी नहीं। 
तो शायद आंखो से देखने का विषय है ? ऐसा भी नही है। 
न यह आँखें देख सकती है न कान सुन कर महसूस कर सकते है ये तो अन्तरमन की अनुभुति का विषय है। 
अनुभुति किसी को भी हो सकती है? नही ऐसा नही है। 
महान जीव को पहचानने की शक्ती या तो वेरगी मे होती है , साधक में होती है या जो महान जीव के पूर्ण विरोधी होते हैं ।
विरोधी जीव अहंकार वश महानता को स्वीकार नही कर पाते हैं। 
ऐसे ही वेरागी और महान साधक आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज ने पावन और पवित्र जीव विध्याधर के भीतर की महानता को महसूस किया और उन्हे अपना शिष्य बना लिया।गुरु महान थे जो अपनी साधना के बल पर सही निर्णय कर पाये और शिष्य ने भी अपनी कठोर साधना से गुरु को सही साबित कर दिखाया नमन है ऐसे पारखी गुरु को ???और नमन है ऐसे अनुशासित शिष्य पर???इस युग के महावीर के चरणो मे शत शत नमन???

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गुरु के गुरुवर कोटि नमन है।

महागुरुवर कोटि नमन है।

भाग्य विधाता कोटि नमन है।

शांति प्रदाता कोटि नमन है

युग परिवर्तक कोटि नमन है।

हर्ष प्रदाता शत वंदन है।

आचार्य श्री को विद्या देकर,

युग संत बनाया कोटि नमन है।

अखिल विश्व में जन जन के मन,

संस्कार जगाया शत वंदन है।

 

 

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??? हमे अद्भुत ज्ञान समुद्र विध्यसागर जी जैसे आचार्य को देने वाले दादा गुरु ज्ञान सागर जी के चरण कमलो मे कोटि कोटि नमोसतु

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