Jump to content
मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

हथकरघा पर गुरुजी का भाव


सजल गोयल
 Share

Recommended Posts

समाज में कमजोर वर्ग को सहयोग देकर उसे अपने जैसे बनाना, यह आप लोगों का कर्तव्य है। अर्थ से कभी भी अपने जैसा नहीं बनाया जा सकता किन्तु अर्थोपार्जन का साधन देकर सत्कर्म सिखाया जा सकता है। इसके लिए यह अहिंसक कार्य हथकरघा सर्वोत्तम कार्य माना जा सकता है।

*-आचार्य श्री जी*

  • Like 2
Link to comment
Share on other sites

 Share

×
×
  • Create New...