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मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

हथकरघा आजीविका का श्रेष्ठ विकल्प


सजल गोयल
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?? *69वें गढ़तंत्र दिवस पर* ??

*?महाकवि पंडित भूरामल सामाजिक सहकार न्यास?* 

का

? *भारत के युवाओं को सन्देश* ?


आजसे कई वर्ष पहले हमारा भारत सोने की चिड़िया कहलाता था हम आत्म निर्भर थे, स्वतंत्र थे,सक्षम थे, सबल थे।

समय के साथ साथ हम विदेशी शक्तियों की कूटनीति के शिकार होते गये और वे हमारी कलाओं को दबाते गए और आज हम स्वतंत्र होकर भी परतंत्र है, कहीं विदेशी सभ्यता के,कहीं विदेशी तकनीक के, तो कहीं देश के राजतंत्र के।

आज के युवा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाबजूद भी बहुत अल्प वेतन में कार्य करने को मजबूर है, जहाँ उन्हें अपने आत्मसम्मान को भूलकर तनावपूर्ण जीवन जीना पड़ता है।

*देश को ऐसी दशा में देख संत शिरोमणि आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महराज के द्वारा देश के युवाओं के कल्याण के लिए एक स्वप्न देखा गया जो महाकवि पण्डित भूरामल सामाजिक सहकार न्यास हथकरघा प्रशिक्षण केंद्र के रूप में एक विशाल वृक्ष का रूप ले चुका है*

 आज देश के उच्चतम संस्थानों से शिक्षा प्राप्त युवा इस पावन कार्य से जुड़ रहे है एवं स्वयं तथा अपने क्षेत्र के युवाओं को रोजगार प्रदान कर रहे है।

हथकरघा परिवार आप सभी से निवेदन करता है कि आप भी इस अनमोल कार्य से जुड़कर देश के उत्थान में सहयोग करें।

*हथकरघा के माध्यम से कपड़ा बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए इच्छुक युवा सम्पर्क करें*

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*सजल गोयल = 9981128662*

? प्रशिक्षण निःशुल्क है।
? जैन छात्रों हेतु आवास तथा भोजन व्यवस्था भी उपलब्ध हैै।
? प्रशिक्षण के प्रथम दिन से 15 दिन तक ₹ 100 प्रति दिन तदोपरान्त जितना वस्त्र बनाएंगे उस हिसाब से वेतन भी मिलेगा।
? 6 महीने के प्रशिक्षण के बाद आप अपने घर पर हथरकघा केन्द्र प्रारम्भ कर सकतें हैं तथा अपनी महनतानुसर एक श्रेष्ठ आजीविका कर सकतें है।

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*उड़ना भूली, चिड़िया सोने की तू, उठ उड़ जा।।*
                                             *(आ० श्री जी कृत हाइकू)*

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